Thursday, March 23, 2017

कबूतर को दाना खिलाने से पुण्य प्राप्ति

कबूतर को दाना खिलाने से पुण्य प्राप्ति

सभी परिंदें बहुत ही चंचल और मासूम होते है लेकिन कबूतर चंचल कम और मासूम ज्यादा होता है. आराम करने के लिए ऐतिहासिक इमारतें और ऊँचे स्मारक उन्हें बहुत ज्यादा पसंद है. कबूतरों को दाना खिलाना लोगों को बहुत ही अच्छा लगता है, लेकिन इसकी बीट से भी लोग उतने ही परेशान रहते है. कबुअर को शांति का प्रतीक माना गया है, साथ ही कबूतर अपने जीवनसाथी के लिए बहुत ही ईमानदार होता है.

छत पर ना डाले दाना 
 कबूतर को दाना डालना एक पुण्य का काम है. लेकिन इसमें कुछ सावधानी रखनी चाहिए,आपने शायद कभी सुना भी होगा कि घर की छत पर कबूतर को दाना न डालकर,अपने आँगन में या घर के बाहर दाना डालें. लेकिन छत पर दाना बिल्कुल भी न डालें।

बुध और राहू की युति 
ज्योतिष के अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध और राहू का मेल होता है, तो वहाँ की स्थिति खराब हो जाती है और अगर जन्मकुंडली में ही बुध और राहू का मेल खराब हो तो फिर तो पूछों ही मत इन्सान का हाल पागलों की तरह हो जाता है और व्यक्ति उल्टी हरकतें करने लगता है.व्यक्ति इतना पागल हो जाता है कि वो इस अवस्था में कोई भी बड़ा अपराध कर बैठता है और जेल तक भी जा सकता है. ऐसे में व्यक्ति अपनी हरकतों से बुध और राहू को एक कर दें या फिर इनको और भी खराब कर दें,तो उसका नतीज़ा बुरा ही मिलेगा. 

कबूतर को क्यों डाले दाना
कबूतर को दाना खिलाने का क्या कारण है इस बात को पूछने पर ज्योतिष ने बताया है कि कबूतर माँ लक्ष्मी के भक्त होते है. घर में कबूतरों का वास होने से लक्ष्मी की वृद्धि होती है और सुख शांति में भी वृद्धि होती है. अगर किसी कारण से समय पर उनका दाना नहीं डाला जाता है. तो दाने के लिए उनका शोर अपने आप ही शुरू हो जाता है. 

 छत पर दाना क्यों ना डालें
 ज्योतिष के अनुसार कबूतर तो है बुध और छत है राहू अब ऐसे में लोग जब अपनी छत पर दाना डालते है, तो कबूतर छत पर दाना खाने के लिए आते है. इसके द्वारा बुध और राहू का मेल हो जाता है.लेकिन कबूतर तो दाना खाकर चलें जाते है ये कोई परेशानी की बात नहीं है.लेकिन परेशानी की बात तब शुरू होती है. जब वहाँ कबूतर आते है तो छत को गन्दी भी तो कर देते है और छत का मतलब राहू है अगर राहू खराब हो जाएगा तो उसका रिजल्ट बुरा ही मिलेगा. ये तो इसका कारण हो गया कि इसलिए छत पर दाना नहीं डालना चाहिए।

विकास नागपाल
ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार
सुकृति एस्ट्रो वास्तु रिसर्च सेंटर
करनाल ।
9215588984

Friday, December 16, 2016

ज्योतिष में मंगल

ज्योतिष में मंगल
ज्योतिष में मंगल नवग्रहों में अपनी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है मंगल को हिम्मत शक्ति पराक्रम, उत्साह, बल, प्रतिस्पर्धा की क्षमता, स्पोर्ट्स, अग्नि, रक्त मांसपेशिया आदि का कारक माना गया है और इन घटकों का नियंत्रक होने से मंगल की हमारी जन्मकुंडली में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पर स्त्रियों की जन्म-कुण्डली में "मंगल" कहीं अधिक विशेष भूमिका निभाता है नाड़ी ज्योतिष के गूढ़ नियमों में मंगल को स्त्रियों के लिए पति और पति सुख का कारक ग्रह माना गया है और स्त्रियों के लिए विशेष रूप से मंगल ही उनके वैवाहिक जीवन की स्थिति को नियंत्रित करने वाला ग्रह होता है और स्त्रियों की कुंडली में मंगल ही उनके माँगल्य और सौभाग्य का कारक होता है अतः स्त्रियों की कुण्डली में मंगल की बली या निर्बल स्थिति ही उनके पति सुख और वैवाहिक जीवन की शुभता या संघर्ष को निश्चित करती है।

स्त्री की कुण्डली में मंगल का बलवान होना जहाँ अच्छा पति सुख और वैवाहिक जीवन देता है तो वहीँ मंगल पीड़ित या कमजोर होने पर विवाह में विलब, पति सुख और वैवाहिक जीवन में बहुत सी समस्याएं और उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। स्त्री की कुंडली में मंगल यदि स्व उच्च राशि (मेष, वृश्चिक, मकर) में हो, केंद्र (1,4,7,10) त्रिकोण (1,5,9) आदि शुभ भावों में हो और पाप प्रभाव से मुक्त हो तो ऐसे में अच्छा पति सुख और वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है दीर्घ काल तक माँगल्य और सौभाग्य बना रहता है, पर स्त्री की कुण्डली में मंगल यदि नीच राशि (कर्क) में हो, दुःख भाव (6,8,12) में हो विशेषकर आठवे भाव में हो, मंगल, राहु या शनि के साथ होने से पीड़ित हो या मंगल पर राहु या शनि की दृष्टि हो तो ऐसे में पति सुख बाधित होता है और वैवाहिक जीवन में संघर्ष और समस्याओं की स्थिति उत्पन्न होती है, पति का स्वास्थ बाधित और जीवन संघर्षमय रहता है,  स्त्रियों की कुंडली में मंगल का पीड़ित होना विवाह में विलम्ब का भी कारण बनता है, यदि स्त्री की कुंडली में पीड़ित मंगल पर बलवान बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही हो वैवाहिक जीवन की समस्याओं का कोई ना कोई समाधान मिल जाता है और बाधायें बड़ा रूप नहीं लेती।

कुण्डली में मंगल पीड़ित होने पर यदि पति सुख और वैवाहिक जीवन बाधित हो रहा हो तो निम्न उपाय करना लाभदायक होगा -

1. ॐ अंग अंगारकाय नमः का नियमित जाप करें।

2. प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।

3. ताम्र पत्र का बना "मंगल यन्त्र" अपने पूजास्थल में स्थापित करके उसकी उपासना करें।

4. किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद यदि आपके लिए शुभ हो तो 'मूँगा' भी धारण कर सकती हैं।

।। श्री हनुमते नमः।।

ज्योतिष विज्ञान में गंड मूल नक्षत्

ज्योतिष विज्ञान में गंड मूल नक्षत्र

27 नक्षत्रों में 6 नक्षत्र- अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, अश्विनी, मूल तथा रेवती नक्षत्रों को गंड मूल नक्षत्र के नाम से जाना जाता है। इन नक्षत्रों में जन्म होने पर 27 दिनों के पश्चात जब वही नक्षत्र आता है। तब मूल शांति करायी जाती है। ज्योतिष विज्ञान में मूल नक्षत्र में जन्मे बालक को पिता के लिये कष्टकारी बताया गया है। यदि शांति नहीं करायी जाय तो बच्‍चा बीमार रहता है, लेकिन प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते है। बालक का जन्म नक्षत्र के किस चरण में हुआ है यह जानना अतिआवश्यक है, क्योंकि उक्त नक्षत्रों के सभी चरण अशुभ नहीं होते है वरन शुभ व फलदायी भी होते हैं। यदि बालक का जन्म शुभ चरण में हुआ है तो बालक धन, पद, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य से परिपूर्ण होता है। 

नक्षत्रों के निम्न चरणों में भेद का फलः 

अश्विनी

प्रथम चरण - पिता को कष्ट तथा भय रहेगा

द्वितीय चरण - सुख सम्पत्ति में वृद्धि होगी

तृतीय चरण - राजकीय कार्यो में विजय तथा नौकरी में प्रगति होगी

चतुर्थ चरण - धन का लाभ तथा परिवार में कोई मांगलिक कार्य होगा

अश्लेषा

प्रथम चरण - शांति कराने से शुभ फल प्राप्त होगा

द्वितीय चरण - अचानक धन की हानि हो सकती है

तृतीय चरण - माता के लिये अनिष्टकारी रहेगा

चतुर्थ चरण - पिता के धन का अपव्यय होगा एंव बच्चों की शिक्षा में व्यवधान आयेगा

मघा 

प्रथम चरण - माता के लिये कष्टकारी रहेगा

द्वितीय चरण - पिता के लिये अनिष्टकारी रहेगा

तृतीय चरण - सुख व समृद्धि आयेगी

चतुर्थ चरण - परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी तथा भौतिक संसाधनों में वृद्धि होगी

ज्येष्ठा 

प्रथम चरण - बड़े भाई के लिये अनिष्टकारी रहेगा

द्वितीय चरण - छोटे भाई के लिये अशुभ प्रतीत होगा

तृतीय चरण - माता को मानसिक व शारीरिक पीड़ा रहेगी

चतुर्थ चरण - स्वंय को शारीरिक कष्ट रहेगा

मूल 

प्रथम चरण - पिता को शारीरिक कष्ट तथा धन की हानि होगी

द्वितीय चरण - माता को शारीरिक कष्ट रहेगा

तृतीय चरण - धन का व्यय तथा आपस में विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न होगी

चतुर्थ चरण - शांति कराने से लाभ होगा

रेवती 

प्रथम चरण - राज्य से सम्मान तथा परिवार में धन का आगमन

द्वितीय चरण - परिवार में वैभव तथा प्रसन्नता रहेगी

तृतीय चरण - नौकरी व व्यवसाय में लाभ होगा। मन प्रसन्नचित्त रहेगा

चतुर्थ चरण - विविध प्रकार के कष्ट आ सकते हैं

मूल नक्षत्र 

मूल नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र के अन्तर्गत आता है। यह नक्षत्र बहुत ही अशुभ माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। इस नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में होते हैं। इस नक्षत्र के विषय में यह धारणा है कि जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेते हैं उनके परिवार के सदस्यों को इसके दोष का सामना करना पड़ता है। दोष पर विशेष चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति में कई गुण होते हैं, हमें इन गुणों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। 

ज्योतिषशास्त्र कहता है जो व्यक्ति मूल नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे ईमानदार होते हैं। इनमें ईश्वर के प्रति आस्था होती है। ये बुद्धिमान होते हैं। ये न्याय के प्रति विश्वास रखते हैं। लोगों के साथ मधुर सम्बन्ध रखते हैं और इनकी प्रकृति मिलनसार होती है। स्वास्थ्य के मामले में ये भाग्यशाली होते हैं, ये सेहतमंद होते हैं। ये मजबूत व दृढ़ विचारधारा के स्वामी होते हैं। ये सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं। ये अपने गुणों एवं कार्यो से काफी प्रसिद्धि हासिल करते हैं। 

मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के कई मित्र होते हैं क्योंकि इनमें वफादारी होती है। ये पढ़ने लिखने में अच्छे होते हैं तथा दर्शन शास्त्र में इनकी विशेष रूचि होती है। इन्हें विद्वानों की श्रेणी में गिना जाता है। ये आदर्शवादी और सिद्धान्तों पर चलने वाले व्यक्ति होते हैं अगर इनके सामने ऐसी स्थिति आ जाए जब धन और सम्मान मे से एक को चुनना हो तब ये धन की जगह सम्मान को चुनना पसंद करते हैं। 

जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेते हैं वे व्यवसाय एवं नौकरी दोनों में ही सफल होते हैं, परंतु व्यवसाय की अपेक्षा नौकरी करना इन्हें अधिक पसंद है। ये जहां भी होते हैं अपने क्षेत्र में सर्वोच्च होते हैं। ये शारीरिक श्रम की अपेक्षा बुद्धि का प्रयोग करना यानी बुद्धि से काम निकालना खूब जानते हैं। 

अध्यात्म में विशेष रूचि होने के कारण धन का लोभ इनके अंदर नहीं रहता। ये समाज में पीड़ित लोगों की सहायता के लिए कई कार्यक्रमों में सक्रिय भाग लेते हैं। समाज में इनका काफी सम्मान होता है तथा ये प्रसिद्ध होते हैं। इनका सांसारिक जीवन खुशियों से भरा होता है। ये सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जीने वाले होते हैं। समाज के उच्च वर्गों से इनकी मित्रता रहती है। 

ये ईश्वरीय सत्ता में हृदय से विश्वास रखते हैं। इस नक्षत्र के जातक को मूल शांति करा लेनी चाहिए, इससे उत्तमता में वृद्धि होती है और अशुभ प्रभाव में कमी आती है। 

Friday, September 23, 2016

वास्तु टिप्स – घर के पुराने सामानों का आप पर प्रभाव

वास्तु टिप्स – घर के पुराने सामानों का आप पर प्रभाव

आध्यात्मिक, योग, असि—मसि—कृषि, कला, ज्योतिष, वास्तु आदि ६४ विद्याओं के जनक आदिब्रह्मा (भ.ऋषभदेव) हैं। गृहशिल्प और देवशिल्प(वास्तु टिप्स) का ज्ञान आदिब्रह्मा ने अनन्तवीर्य एवं विश्वकर्मा जी को दिया । सम्पूर्ण विश्व ने भारत को आध्यात्मिक गुरु माना है।

इस शास्त्र को उजागर करने तथा जन—जन तक पहुँचाने में दूरदर्शन एवं समाचार पत्र तथा पत्रिकाओं का बहुत बड़ा योगदान है। ये विज्ञजन प्राणी मात्र को जीवन जीने की शैली का ज्ञान प्रदान कराते हैं। इस युग में विद्याओं के द्वारा आदिब्रह्मा ने विश्व कल्याण हेतु इनकी जानकारियाँ प्रदान की। गुरुजनों को कोटि—कोटि प्रणाम करते हुए मैं इस शास्त्र के एक पहलू के बारे में चर्चा करने का प्रयास कर रहा हूँ।

पुराने मकान से निकली हुई या बाजार से पुरानी सामग्री लाकर नव निर्वाण कराना निषेध है। आज आर्थिक युग में अर्थ की कमी के कारण मध्यमवर्गीय लोग मकान की लागत कम करने के लिए सस्ते एवं पुराने समानों का प्रयोग करने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य है कम कीमत में गृह का निर्माण करना। लेकिन मनुष्य पुराने सामानों के प्रयोग से मिलने वाले दूषित परिणामों की जानकारी से वंचित है।

पुराने मकान को खण्डित करके नव निर्वाण करना या भूखण्ड पर नव निर्माण करना हो तो मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों(वास्तु टिप्स) का ध्यान रखना चाहिए।

१. पुरानी र्इंट, लोहा, पत्थर नये मकान में लगाने से मकान की आयु निम्न हो जाती है।

२. एक मकान में प्रयोग की हुई लकड़ी नव निर्मित मकान में लगाने से धन—सम्पत्ति का पलायन एवं अशांति का आगमन होने की संभावना अत्यधिक हो जाती है। गृह स्वामी की आयु क्षीण होती है।

३. इस द्वार में पुरानी और नई लकड़ी लगाने से उस मकान की मालकियत में परिवर्तन होता रहता है।

४. किसी भी घर की पुरानी शैय्या खरीदकर उस पर शयन करने से पति पत्नी के रिश्ते में मधुरता का ह्रास हो जाता है।

प्रासादे च मठे नरेन्द्रभवने शैल: शुभो नो गृहे।
तस्मिन भित्तिषु बाह्यकासु शुभद: प्राग्भूमिकुम्भ्यां तथा।।(वास्तुराज, ५/ ३६)

मकानों के पुराने सामान जैसे— मोटरसाइकिल, स्कूटर , गाड़ियाँ, प्रज, टी०वी० , कूलर, ए.सी. इत्यादि जो मकानों में खराब हो जाने के बाद उनका प्रयोग नहीं किया जाता मगर उनको अपने घर से निकाला नहीं जाता । जहाँ पर ये सामान एकत्रित हो जाते हैं वहाँ नकारात्मक ऊर्जाओं की उत्पत्ति चालू हो जाती है एवं घर में धन—सम्पत्ति एवं शांति के वातावरण को दूषित कर देती है। कई मकानों से इन सामानों की (कबाड़ी वालों के यहाँ) विदाई कराकर उस घर में सुख—शांति लाने का प्रयास सफल रहा है

कई सामानों की सीएनएफ कं. के गोदाम में जाना पड़ा। उनके गौदामों में कंपनी से रिप्लेसमेंट के लिए सामान रखे हुए थे रिप्लेस्मेंट का सामान टूटा—फूटा,लीकेज वाला था मैंने उस सामान को गोदाम से हटाने के लिये कहा—सामान हटने के साथ—साथ ही उनके व्यापार में सकारात्मक परिवर्तन का आरंभ हो गया।

कई पैक्ट्रियों में भी बेकार के सामान का इकट्ठा करने या हो जाने से पैक्ट्रियों के काम में रूकावटें आना चालू हो जाती है। कहने का उद्देश्य है घर, पैक्ट्री, दुकान, गोदाम इत्यादि की सफाई पूर्ण रूप से रखनी चाहिये । जो सामान प्रयोग में न आने वाला हो या भविष्य में प्रयोग में आने की उम्मीद न हो उसे तत्काल विदा कर देना चाहिए। उसकी कीमत कम—ज्यादा मिलती हो तो भी उसका ध्यान नहीं रखते हुए हटा देना चाहिए।

नीतिकारों का वचन है— जहाँ सफाई रहती है वहाँ आदमी मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। यही सबसे अच्छी वास्तु टिप्स हें

आचार्य चाणक्य ने लिखा है— जहां पर गंदगी होती है वहाँ लक्ष्मी का निवास नहीं होता है। सुजान पुरुषों को उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुये घर में सुख—शांति, समृद्धि लाने का सफल प्रयोग करना चाहिए।

Thursday, September 22, 2016

जमीन खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

जमीन खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

घर के लिए जमीन खरीदना हो तो वास्तु आधारित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ये भले ही पढ़ने में बहुत कम शब्दों की बातें हैं, लेकिन ये आपके घर को खुशहाल बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

1. ऐसी भूमि जिस पर जल्दी आग न जले या जलकर बुझ जाए वह कभी फलदायी नहीं मानी जाती है।

2. जो भूमि पश्चिम में ऊंची एवं पूर्व की ओर से नीची हो, वह अधिक फलदायी मानी जाती है।

3. भूमि खरीदते समय ध्यान रखें मिट्टी का रंग चाहे जैसा भी हो, लेकिन वह चिकनी होनी चाहिए।

4. भूमि की मिट्टी यदि पीली या सफेद है तो वह शुभ मानी जाती है। यदि लाल है तो मध्यम और यदि काली है तो ऐसी भूमि पर घर या कार्यालय नहीं बनाना चाहिए।

5. यदि भूमि को खोदने पर मिटटी में हड्डी, फटा कपड़ा मिले तो उस भूमि पर रहना शुभ नहीं होता है।

6. जिस भूमि पर पहले श्मशान आदि रहा हो तो वह भूमि अशुभ होती है।

7. बड़े-बड़े पत्थरों वाली भूमि या फिर पर्वत की ढाल में पड़ने वाली भूमि निवास के लिए ठीक नहीं होती है। इसे खरीदने से बचना चाहिए।

 विकास नागपाल
ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार
सुकृति एस्ट्रो वास्तु रिसर्च सेंटर
करनाल। 9215588984

Tuesday, July 26, 2016

क्या वास्तु दोष के कारण होते हैं महिलाओं एवं पुरुषों के रोग..?

महिलाओं एवं पुरुषों के रोग..
क्या वास्तु दोष के कारण होते हैं महिलाओं एवं पुरुषों के रोग..????
आइये जाने की किन वास्तु दोष के कारण होते हैं महिलाओं एवं पुरुषों के रोग—
वास्तु शास्त्र के प्रसिद्ध ग्रंथ: समरांगण सूत्रधार, मानसार, विश्वकर्मा प्रकाश, नारद संहिता, बृहतसंहिता, वास्तु रत्नावली, भारतीय वास्तु शास्त्र, मुहूत्र्त मार्तंड आदि वास्तुज्ञान के भंडार हैं। अमरकोष हलायुध कोष के अनुसार वास्तुगृह निर्माण की वह कला है, जो ईशान आदि कोण से आरंभ होती है और घर को विघ्नों, प्राकृतिक उत्पातों और उपद्रवों से बचाती है।
ब्रह्मा जी ने विश्वकर्मा जी को संसार निर्माण के लिए नियुक्त किया था। इसका उद्देश्य था कि गृह स्वामी को भवन शुभफल दे, पुत्र, पौत्रादि, सुख, लक्ष्मी, धन और वैभव को बढ़ाने वाला हो।
वास्तु दोष से मुक्ति के लिए पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश चारों दिशाएं पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण तथा चारों कोण नैत्य, ईशान, वायव्य, अग्नि एवं ब्रह्म स्थान (केंद्र) को संतुलित करना आवश्यक है।
देखने में आ रहा है कि आजकल पुरूषों को पहले की तुलना में ज्यादा शारीरिक एवं मानसिक रोग हो रहे है। यह तय कि विज्ञान ने बहुत उन्नति की है। मेडिकल सांईस के कई अविष्कार मनुष्य के जटिल रोगों को दूर करने में सहायक हो रहे है। किंतु विज्ञान आधुनिक चिकित्सा की इतनी तरक्की के बाद भी मनुष्य के रोग घटने की बजाए, बढ़ते ही जा रहे है। आज नई-नई और असाध्य बीमारियां जन्म ले रही है प्रायः हर व्यक्ति किसी ना किसी रोग से पीडि़त है।
आधुनिक तकनीकों के कारण आजकल छोटे या बड़े भवनों की बनावट पहले के भवनों की तुलना में सुंदर व भव्य तो जरूर हो गई हैं, परंतु अब भवन आयताकार या चैकर न होकर अनियमित आकार के बनने लगे है। घरों की अनियमित आकार की बनावट के कारण ही उनमें वास्तुदोष उत्पन्न होते है। जो वहां रहने वालों को शारीरिक व मानसिक रोगी बनाने में अहम भूमिका निभाते है। यह एक अटल सत्य हे की वास्तु का रोगों से अभिन्न संबंध है।
किसी भी भवन में उत्तर पूर्वी भाग का संबंध जल तत्व से होता है अतः स्वास्थ्य की दृष्टि से किसी भी मानव के शरीर में जल तत्व के असंतुलित होने से अनेक व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं। अतः उत्तर पूर्व को जितना खुला एवं हल्का रखेंगे उतना ही अच्छा है इस दिशा में रसोई का निर्माण अशुभ है रसोई निर्माण करने पर उदर जनित रोगों का सामना करना पड़ता है परिवार के सदस्यों में तनाव बना रहता है इस दिशा में यदि भूमिगत जल भण्डारण की व्यवस्था हो तो घर में आने वाली जलापूर्ति की पाइप भी इसी दिशा में होना शुभ है।
भवन में ईशान कोण कटा हुआ नहीं होना चाहिए। कोण कटा होने से भवन में निवास करने वाले व्यक्ति रक्त विकार से ग्रस्त हो सकते है यौन रोगों में वृद्धि होती है प्रजनन क्षमता दुष्प्रभावित होती है। ईशान कोण में यदि उत्तर का स्थान अधिक ऊंचा है तो उस स्थान पर रहने वाली स्त्रियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ईशान के पूर्व का स्थान ऊंचा होने पर पुरुष दुष्प्रभावित होते हैं परिवार का कोई सदस्य बीमार हो तो उसे ईशान कोण में मुंह करके दवा का सेवन कराने से जल्दी स्वास्थ्य लाभ मिलता है। भवन के दक्षिण-पूर्व दिशा का संबंध अग्नि तत्व से होता है जिसे अग्नि कोण माना गया है। इस दिशा में रसोई का निर्माण करने से निवास करने वाले लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहता है अगर इस दिशा मंे जल भण्डारण या जल स्त्रोत की व्यवस्था की जाती है तो उदर रोग, आंत संबंधी रोग एवं पित्त विकार आदि बीमारियों की संभावना रहती है।
दक्षिण-पूर्वी दिशा में दक्षिण का स्थान अधिक बढ़ा हो तो परिवार की स्त्रियों को शारीरिक और मानसिक कष्ट होते हैं। पूर्वी दिशा में दक्षिण का स्थान अधिक बढ़ा हो तो परिवार की स्त्रियों को शारीरिक और मानसिक कष्ट होते हैं। पूर्व का स्थान बढ़ा हुआ होने से पुरुषों को शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
दक्षिण-पश्चिम भाग का संबंध पृथ्वी तत्व से होता है अतः इसे ज्यादा खुला नहीं रखना चाहिए इस स्थान को हल्का व खुला रखने से अनेक प्रकार की शारीरिक बीमारियों एवं मानसिक व्याधियों का शिकार होना पड़ता है। निवास करने वाले सदस्यों में निराशा तनाव एवं क्रोध उत्पन्न रहता है अतः इस स्थान को सबसे भारी रखना श्रेष्ठकर है यह भाग भवन के अन्य भागों से कटा हुआ नहीं होना चाहिए वरना मधुमेय की बीमारी, ज्यादा सोचना अतिचेष्टा तथा अति जागरुकता जैसी व्याधियां उत्पन्न होती हैं।
दक्षिण-पश्चिम में दक्षिण का भाग अधिक बढ़ा हुआ अथवा नीचा हो तो उसमें निवास करने वाली स्त्रियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है पश्चिमी भाग अगर अधिक बढ़ा हुआ और अधिक नीचा हो तो पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अतः दक्षिण-पश्चिम के कोण को न तो बढ़ायें और न छोटा करें। इस स्थान को भवन में सबसे ज्यादा भारी रखना शुभ है।
भवन के उत्तर-पश्चिम भाग वायव्य कोण का संबंध वायु तत्व से होता है मानव के प्राणों का वायु से सीधा संबंध है अतः इस स्थान को खुला रखना शुभ है इस स्थान में भारी सामान नहीं रखना चाहिए एवं भारी निर्माण भी नहीं करवाना चाहिए। भारी निर्माण करवाने से वायु विकार तथा मानसिक रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इसके धरातल का उत्तर -पूर्व के अपेक्षा थोड़ा ऊंचा किंतु दक्षिण-पूर्व एवं दक्षिण-पश्चिम से कुछ नीचा होना शुभ है। भवन के इस भाग में ऊपर का स्थान अधिक बड़ा होने से परिवार की स्त्रियों को त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा, एलर्जी आदि बीमारियों की संभावना रहती है।
यदि उत्तर की अपेक्षा यदि पश्चिम का स्थान अधिक बढ़ा हुआ हो तो पुरुषों को शारीरिक व्याधियां होने की संभावना रहती है। वास्तु शास्त्र में भवन के मध्य या केंद्र ब्रह्म स्थान को अति महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु में इसका वही महत्व है जो मानव शरीर में नाभि का होता है।
आकाश तत्व से संबंधित होने के कारण इस स्थान को खुला छोड़ना श्रेयस्कर होता है। इस स्थान पर किसी भी प्रकार की गंदगी होने से निवास करने वाले प्राणियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं इस स्थान पर विशेषकर शौचालय सीढ़ियां अथवा गटर, सैप्टिक टैंक आदि का निर्माण नहीं कराना चाहिए अन्यथा श्रवण दोष पैदा होते हैं एवं विकास कार्य प्रभावित होते हैं ब्रह्म स्थान खुला रखने से अनेक परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
इन मुख्य वास्तु दोषी के कारन होते हैं पुरुषों एवं महिलाओं में रोग (बीमारियां)—-
आइये जानते हे (देखते है) कि वह कौन से ऐसे महत्वपूर्ण वास्तुदोष है जिसके कारण पुरूषों में विभिन्न प्रकार के रोग पैदा होते है जो कभी-कभी उनका जीवन भी लील लेते है।
——- यदि घर का नैऋत्य कोण (SW), विशेषतौर पर पश्चिम नैऋत्य (West of the South West) किसी प्रकार से नीचा हो या वहां किसी भी प्रकार का भूमिगत पानी का टैंक, कुआ, बोरवेल, सैप्टिक टैंक इत्यादि हो तो वहां रहने वाले पुरूष सदस्य अक्सर रोगों से पीडि़त रहेगें और उन्हें मृत्यु-भय बना रहेगा।
—— अगर नैऋत्य कोण पर ऊँचाई पर हो, और दक्षिण और नैऋत्य के बीच में या नैऋत्य और पश्चिम के बीच में कुएं, गड्ढे या चैम्बर खोदे जायें या मोरी बनायी जाय तो उस घर का मालिक ऐसी बीमारी से पीडि़त हो जाएगा जिसका इलाज नहीं हो।
——–पूर्व दिशा में खाली जगह न हो और पश्चिम दिशा की ओर बरामदे को ढलाऊ बनाकर घर बना हो तो वहां रहने वालो को आंखों की बीमारी, लकवा आदि बीमारियां होती है।
——- दक्षिण दिशा की ओर घर का द्वार हो और पूर्व-उत्तर की हद तक निर्माण किया गया हो तथा पश्चिम में खाली जगह हो और प्लाट में पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर ढलान हो, पश्चिम में भूमिगत पानी का स्रोत हो तो ऐसे घर का मालिक अल्पायु में ही भयंकर रोगों का शिकार होगा।
——– नैऋत्य (SW) या पश्चिम-नैऋत्य (West of the South West) में कम्पाऊण्ड वाल या घर का द्वार हो तो घर के लोग बदनामी, जेल, एक्सीडेंट या खुदकुशी के शिकार होंगे। हार्ट अटैक, आपरेशन, एक्सिडेन्ट, हत्या, लकवा अर्थात किसी भी प्रकार की असामयिक मृत्यु का शिकार होगें।
——– पूर्व, आग्नेय कोण, दक्षिण, पश्चिम, नैऋत्य कोण और वायव्य कोण, उत्तर और ईशान कोण से किसी भी प्रकार से नीचे हो तो घर के स्वामी की पत्नी का निधन हो जाएगा। उसे आर्थिक समस्याएं आएगी और अंत में उसकी जीवन यात्रा भी समाप्त हो जाएगी। वह लाईलाज बीमारी से पीडि़त होगा।
——- घर के पश्चिम नैऋत्य (West of the South West) मार्ग प्रहार हो तो घर के पुरूष उन्माद जैसे रोगों की शिकार होंगे। कहीं कहीं वे खुदकुशी भी कर सकते है।
——- जिस घर का पश्चिम नैऋत्य कोण बढ़ा हुआ हो उस घर के पुरूषों को लम्बी बीमारियों या उनकी दर्दनाक मौत की संभावना बनती है।
—– बड़े आकार के वह बंगले जिसके पश्चिम भाग में कम्पाऊण्ड वाल के अंदर झोपडि़यां, कमरे, चबूतरे इत्यादि के फर्श गृहगर्भ के स्तर से नीचे हो तो बीमारी, बदनामी और धनहानि होती है।
——- पूर्व, आग्नेय और दक्षिण नीचे हो नैऋत्य, पश्चिम और वायव्य कोण उत्तर और ईशान से ऊँचे हों तो घर के मालिक की मृत्यु होगी, पुत्रों का नाश होगा।
——- दक्षिण के साथ मिलकर अगर नैऋत्य में बढ़ाव होता तो मालिक रोगों, प्राण-भय और अकाल मृत्यु के भय से परेशान रहेगा।
——किसी घर के आंगन से पानी नैऋत्य की ओर से बाहर बहकर जाता है तो उस घर में अनहोनी की संभावना रहती है।
——— ऊपर बताए गए वास्तु दोषों के साथ सभी या कुछ दोषों के होने के बाद भी कुछ खुशहाल परिवार देखने में आते है।
इसका कारण यह है कि जब घर का ईशान कोण कट जाता है या पूर्व व उत्तर की सड़कों के कारण उस स्थल का ईशान कोण कट गया हो, तो ऐसे में नैऋत्य में रहने वाले की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है। परंतु ऐसे घरों में रहने वाले केवल पैसे को महत्व देते हुए अभिमान के कारण दूसरो की इज्जत करना, प्रेमपूर्वक व्यवहार रखना भूल जाते है। निश्चित ही हत्या करने वाले, हत्या और आत्महत्या के शिकार हुए लोग, दुर्घटनाओं में मरने वालों दीर्घव्याधिग्रस्तों के घरों की बनावट में यह दोष अवश्य होता है।
उपरोक्त वास्तुदोषों को दूर कर पुरूषों को होने वाले रोगों से बचा जा सकता है। ध्यान रहे वास्तुशास्त्र एक विज्ञान है। वास्तुदोष होने पर उनका निराकरण केवल वैज्ञानिक तरीके से ही करना चाहिए और उसका एकमात्र तरीका घर की बनावट में वास्तुनुकुल परिवर्तन कर वास्तुदोषों को दूर किया जाए।
इन वास्तुदोषों का प्रभाव होता हैं महिलाओं के स्वास्थ्य पर —-
आजकल की महिलाओं का स्वास्थ्य चार-पांच दशक पहले की महिलाओं की तुलना में ज्यादा खराब रहने लगा है। रहन-सहन, खान-पान इत्यादि हर प्रकार की सावधानियां बरतने के बाद भी महिलाओं में रोग बढ़ते ही जा रहे है।
वास्तु का रोगों से अभिन्न संबंध है। आजकल बनने वाले घरों की बनावट में बहुत ज्यादा वास्तुदोष होते है। पिछले कुछ दशकों से आर्किटेक्ट मकानों को सुंदरता प्रदान करने के लिए अनियमित आकार के मकानों को महत्त्व देने लगे है। जिस कारण मकान बनाते समय जाने-अनजाने वास्तु सिद्धांतों की अवहेलना होती रहती है।
चाहे महिला हो या पुरूष उनकी हर प्रकार की बीमारी में वास्तुदोष की भी अपनी एक महत्त्व भूमिका अवश्य रहती है। वास्तुदोष के कारण घर में सकारात्क और नकारात्क ऊर्जा के बीच असंतुलन पैदा हो जाता है। जो महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके जीवन पर भी प्रभाव डालता है। देखते है ऐसे कौन से वास्तु दोष है जो घर में ऊर्जा के असंतुलन का कारण बनते है।
———जिस घर का आगे का भाग टूटा हुआ, प्लास्टर उखड़ा हुआ या सामने की दीवार में दरार, टूटी फूटी या किसी प्रकार से भी खराब हो रही हो उस घर की मालकिन का स्वास्थ्य खराब रहता है उसे मानसिक अशान्ति रहती है और हमेशा अप्रसन्न उदास रहती हैं।
——— किसी घर का नैऋत्य कोण (SW), विशेषतौर पर दक्षिण नैऋत्य (South of the South West) किसी भी प्रकार से नीचा हो या वहां किसी भी प्रकार का भूमिगत पानी का टैंक, कुआ, बोरवेल, सैप्टिक टैंक इत्यादि हो तो वहां रहने वाली महिलाएं सदस्य अक्सर रोगों से पीडि़त रहेगी और उन्हें मृत्यु-भय बना रहेगा।
———उत्तर (North) और ईशान (North east) ऊँचा हो और बाकी सभी दिशाए व कोण पूर्व (East), आग्नेय (South east), दक्षिण (South), पश्चिम (West), नैऋत्य (South west) और वायव्य (North west) नीचे हो तो घर की स्त्री को लाईलाज बीमारी होती है और असामयिक मृत्यु की संभावना प्रबल हो जाती है।
——-अगर उत्तर, ईशान और पूर्व से नैऋत्य और पश्चिम निचले हो तथा आग्नेय, दक्षिण और वायव्य ऊँचे हो तो जबरदस्त आर्थिक हानि होगी उस घर का मालिक कर्ज से परेशान होगा। उसकी पुत्री व पत्नी लम्बी बीमारियों से पीडि़त होगी।
——–उत्तर, ईशान और पूर्व से नैऋत्य, पश्चिम और वायव्य निचले, आग्नेय और दक्षिण ऊँचे होने पर उस घर के मालिक की पत्नी की या तो असामयिक मृत्यु हो जाएगी या वह लम्बी बीमारी से परेशान रहेगी। ऐसे बने घर में हमेशा बीमारी, कलह, शत्रुता बनी रहती है।
——-घर का आग्नेय नीचा हो, और आग्नेय और पूर्व के बीच में या आग्नेय और दक्षिण के बीच में कुओं, पानी का टैंक, सैप्टिक टैंक, बोरवेल या मोरियां बनायी जाएं तो घर के सदस्यों को दीर्घकालिन व्याधियां होंगी विशेषतौर पर घर के मालिक की पत्नी दीर्घ व्याधि से पीडि़त होगी।
—— ईशान कोण स्थित घर की उत्तर ईशान दिशा की लम्बाई घटे और उत्तरी हद तक निर्माण किया गया हो तो घर की मालकिन रोग से ग्रस्त होकर मृत्यु को प्राप्त हो जाएगी अथवा आर्थिक कठिनाईयों से परेशान होकर कठिन जीवन व्यतीत करेगी।
——-घर के दक्षिण नैऋत्य (South of the South West) मार्ग प्रहार हो तो स्त्रियां उन्माद जैसे रोगों की शिकार होंगी। कहीं कहीं वे खुदकुशी भी कर सकती है।
——- दक्षिण नैऋत्य मार्गप्रहार से उस घर की नारियां भयंकर रोगों से पीडि़त होंगी। इसके साथ नैऋत्य में कुआं, बोरवेल, भूमिगत पानी की टंकी अर्थात् किसी भी प्रकार से नीचा हो तो वे आत्महत्या कर सकती है या लम्बी बीमारी से उनकी मृत्यु हो सकती है।
——– जिस घर का दक्षिण नैऋत्य कोण बढ़ा हुआ हो उस घर की स्त्रियों को लम्बी बीमारियों या उनकी दर्दनाक मौत की संभावना बनती है।
—उत्तर वायव्य में मार्ग प्रहार हो तो उस घर की स्त्रियां बीमार रहेगी। उत्तर वायव्य मार्ग प्रहार हो तो स्त्रियां न केवल बीमार होंगी, बल्कि घर वाले अनेक प्रकार के व्यसनों के शिकार होंगे।
–पूर्व दिशा में मुखद्वार हो और उत्तर दिशा की हद तक निर्माण किया हो, दक्षिण में खाली स्थल हो तथा नैऋत्य अगे्रत हो, तो उस घर की स्त्रियां दुर्घटनाग्रस्त होंगी।
—-दक्षिण में घर का मुख्यद्वार हो और ईशान कोण तक भवन निर्माण किया गया हो दक्षिण दिशा खुली हो और वहां ढलाऊ बरामदा बनाया जाये तो ऐसे घर की मालकिन लाइलाज बीमारी से परेशान रहेगी। उस घर के बच्चे भी गलत रास्तों पर चलेंगे।
——घर के दक्षिण दिशा में अहाते का होना या खुला होना या सभी कमरों व बरामदों में दक्षिण का भाग नीचा हो तो उस घर की स्त्रियां सदैव रोगी रहती है, ऐसे घरों में अकाल मृत्यु की संभावना रहती है। परिवार में आर्थिक कष्ट रहता है।
——किसी घर के आंगन से पानी दक्षिण दिशा या नैऋत्य कोण की ओर से बाहर बह जाता तो उस घर की स्त्रियों के स्वास्थ्य के लिए शुभ नहीं होता है।
उपरोक्त वास्तुदोषों को दूर कर महिलाओं को होने वाले रोगों से बचा जा सकता है। ध्यान रहे वास्तुशास्त्र एक विज्ञान है। वास्तुदोष होने पर उनका निराकरण केवल वैज्ञानिक तरीके से ही करना चाहिए और उसका एकमात्र तरीका घर की बनावट में वास्तुनुकुल परिवर्तन कर वास्तुदोषों को दूर किया जाए।
विकास नागपाल
सुकृति एस्ट्रो वास्तु रिसर्च सेंटर
करनाल।
9215588984
01844033984

जोड़ों के दर्द व वायू दोष दूर करने हेतु

जोड़ों के दर्द व वायू दोष दूर करने हेतु

शनिवार को 1-1/4 किलो आलू व बैंगन की सब्जी सरसों के तेल में बनाएं। इतनी ही पूरियां सरसों के तेल में बनाएं। रविवार को अंधे लगंड़े व गरीब लोगों को यह भोजन खिलाएं

स्वप्न फल ....स्वप्नों का अर्थ

स्वप्नों के संबंध में प्राचीन शास्त्रीय उल्लेख, शकुन शास्त्र की प्राचीनता तथा वर्तमान में प्रासंगिकता, स्वप्नों के वैज्ञानिक तथा मनोवैज्ञानिक कारण तथा भूत, भविष्य एवं वर्तमान से उनका संबंध, शकुनों एवं अपशकुनों की व्याख्या और उनके दुष्प्रभावों के निवारण के लिए शास्त्रीय उपाय.
1अ-2 आ-3 इ-4 उ-5 ऊ-6 औ-7 ऐ-8 क-9 ख-10 ग-11 घ-12 च-13 स-14 छ-15 ज-16 झ-17 ट-18 ठ-19 ड-20 त-21 थ-22 ध-23 न-24 प-25 फ-26 ब-27 भ-28 म-29 य-30 र-31 ल-32 व-33 श-34 श्र-35  ह-36 द-

मानव मन का स्वप्नों के साथ गहरा संबंध है निद्रा की अवस्था में भी मस्तिष्क सक्रिय रहता है। अवचेतन मन की इच्छाएँ, दिन प्रतिदिन के तनाव एवं चिन्ताएं स्वप्न के रूप में दिखाई देती हैं। मनोवैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि कभी-कभी स्वप्न भविष्य में होने वाली घटनाओं का भी संकेत देते हैं। स्वप्नों से भविष्य संकेत की पुष्टि कई प्राचीन ग्रंथों द्वारा होती है।
मानव मस्तिष्क अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के प्रयत्नों में आदि काल से ही सक्रिय है। परंतु जब किसी कारण इसकी कुछ अधूरी इच्छाएं पूर्ण नहीं हो पाती जो कि मस्तिष्क के किसी कोने में जाग्रत अवस्था में रहती है तो वह स्वप्न का रूप ले लती हैं। आधुनिक विज्ञान में इस विषय में कहा है कि स्वप्न'' मानव की दबी हुई इच्छाओं का प्रकाशन करते हैं जिनको हमने अपनी जाग्रत अवस्था में कभी-कभी विचारा होता है। अर्थात स्वप्न हमारी वो इच्छाएं हैं जो किसी भी प्रकार के भय से जाग्रत् अवस्था में पूर्ण नहीं हो पाती हैं व स्वप्नों में साकार होकर हमें मानसिक संतुष्टि व तृप्ति देती है सपने या स्वप्न आते क्यों है? इस प्रश्न का कोई ठोस प्रामाणिक उत्तर आज तक खोजा नहीं जा सका है।
विज्ञान मानता है कि नींद का हमारे मस्तिष्क में होने वाले उन परिवर्तनों से संबंध होता है, जो सीखने और याददाश्त बढ़ाने के साथ-साथ मांस पेशियों को भी आराम पहुंचाने में सहायक होते हैं। इस नींद की ही अवस्था में न्यूरॉन (मस्तिष्क की कोशिकाएं) पुनः सक्रिय हो जाती हैं।
वैज्ञानिकों ने नींद को दो भागों में बांटा है पहला भाग आर ई एम अर्थात् रैपिड आई मुवमेंट है। (जिसमें अधिकतर सपने आते हैं) इसमें शरीर शिथिल परंतु आंखें तेजी से घूमती रहती हैं और मस्तिष्क जाग्रत अवस्था से भी ज्यादा गतिशील होता है। इस आर ई एम की अवधि १० से २० मिनट की होती है तथा प्रत्येक व्यक्ति एक रात में चार से छह बार आर ई एम नींद लेता है। यह स्थिति नींद आने के लगभग १.३० घंटे अर्थात ९० मिनट बाद आती है। इस आधार पर गणना करें तो रात्रि का अंतिम प्रहर आर ई एम का ही समय होता है (यदि व्यक्ति समान्यतः १० बजे रात सोता है तो ) जिससे सपनों के आने की संभावना बढ़ जाती है।
सपने बनते कैसे हैं : दिन भर विभिन्न स्रोतों से हमारे मस्तिष्क को स्फुरण (सिगनल) मिलते रहते हैं। प्राथमिकता के आधार पर हमारा मस्तिष्क हमसे पहले उधर ध्यान दिलवाता है जिसे करना अति जरूरी होता है, और जिन स्फुरण संदेशों की आवश्यकता तुरंत नहीं होती उन्हें वह अपने में दर्ज कर लेता है। इसके अलावा प्रतिदिन बहुत सी भावनाओं का भी हम पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। जो भावनाएं हम किसी कारण वश दबा लेते हैं गुस्सा आदि वह भी हमारे अवचेतन मस्तिष्क में दर्ज हो जाती हैं। रात को जब शरीर आराम कर रहा होता है मस्तिष्क अपना काम कर रहा होता है। इस दौरान हमें चेतनावस्था में कोई स्कुरण संकेत भावनाएं आदि नहीं मिल रही होती उस समय मस्तिष्क दिन भर मिले संकेतों को लेकर सक्रिय होता है जिनसे स्वप्न प्रदर्शित होते हैं।
यह वह स्वप्न होते हैं जो मस्तिष्क को दिनभर मिले स्फुरण, भावनाओं को दर्शाते हैं जिन्हें दिन में हमने किसी कारण वश रोक लिया था। जब तक यह प्रदर्शित नहीं हो पाता तब तक बार-बार नजर आता रहता है तथा इन पर नियंत्रण चाहकर भी नहीं किया जा सकता
भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार भूत, वर्तमान और भविष्य का सूक्ष्म आकार हर समय वायुमंडल में विद्यमान रहता है। जब व्यक्ति निद्रावस्था में होता है तो सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है। यही संपर्क स्वप्न का कारण और स्वप्न का माध्यम बनता है। 
व्यक्ति सक्रिय है, वह स्वप्न अवश्य देखता है। सभी प्राणियों में मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जो स्वप्न देख सकता है। अर्थात् जो मनुष्य स्वप्न नहीं देखता, वह जीवित नहीं रह सकता। इसका अभिप्राय यह है कि जो जीवित और सक्रिय है, वह स्वप्न अवश्य देखता है। केवल जन्म से अंधे व्यक्ति स्वप्न नहीं देख सकते लेकिन वे भी स्वप्न में ध्वनियां तो सुनते ही हैं। अर्थात स्वप्न तो उनको भी आते हैं। स्वप्न सोते हुए ही नहीं, जागते हुए भी देखे जा सकते हैं। इस प्रकार स्वप्न को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।
जागृत अवस्था के स्वप्न
निद्रावस्था के स्वप्न
जागृत अवस्था के स्वप्न कवियों, दार्शनिकों, प्रेमी-प्रेमिकाओं, अविवाहित किशोर, युवक-युवतियों को अधिक आते हैं। ये स्वप्न कलात्मक होते हैं। भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार भूत, वर्तमान और भविष्य का सूक्ष्म आकार हर समय वायुमंडल में विद्यमान रहता है। जब व्यक्ति निद्रावस्था में होता है तो सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है। यही संपर्क स्वप्न का कारण और स्वप्न का माध्यम बनता है। जिस व्यक्ति विशेष की साधना इतनी प्रबल होती है कि वह जागृतावस्था में या ध्यानावस्था में इन भूत-भविष्य के सूक्ष्म आकारों से संपर्क कर लेता है, वही योगी और भविष्यदृष्टा कहलाता है।अवचेतन मन की पहुंच हमारे शरीर तक ही सीमित नहीं, वरन् वह विश्व के किसी भी भाग में जब चाहे पहुंच सकता है। अतः भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों का ज्ञान अवचेतन मन से ही संभव है। नीचे कुछ मुख्य-मुख्य स्वप्नों के भावों फलों का संक्षिप्त वर्णन किया जा रहा है। स्वप्न फलों के संबंध में निम्न बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है। रात्रि में तीन बजे से सूर्योदय के पूर्व के स्वप्न सात दिन में, मध्य रात्रि के स्वप्न 1 माह में, मध्य रात्रि से पहले के स्वप्न 1 वर्ष में अपना फल प्रदान करते हैं। दिन के स्वप्न महत्वहीन होते हैं। एक रात में एक से अधिक स्वप्न आएं तो अंतिम ही फलदायक होगा
शुभ स्वप्न
जो व्यक्ति स्वप्नावस्था में घोड़ा, हाथी, सफेद बैल, जूते, रथ में स्वयं को सवार देखता है-उसे ग्राम, नगर, राज्य अथवा देश से अवश्य ही सम्मान की प्राप्ति होती है।
जो व्यक्ति स्वप्न में देवी लक्ष्मी की मूर्ति देखने से धन की प्राप्ति होती है।
जो व्यक्ति गोरैया, नीलकंठ, कबूतर, सारस, तोता व तीतर दिखाई देने से गृहस्थ जीवन खुशहाल होता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को किसी महल के ऊँचे बुर्ज पर खड़े देखना भावी जीवन में उन्नति का संकेत है।
जो व्यक्ति किसी बड़े जलाशय, सरोवर, नदी अथवा सागर में स्वयं को तैरता देखने वाला मनुष्य सभी प्रकार के संकटों से मुक्त हो जाता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में उल्लू देखने से भगवती लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति होती है।
जो व्यक्ति स्वप्नावस्था में तिल, चावल गेहूं, सरसों, जौ, अन्न का ढेर, पुष्प, छाता, ध्वज, दही, पान, कमल, कलश, शंख और सोने के गहने देखता है उसे सभी प्रकार का सुख मिलता है।
जो व्यक्ति यदि कोई रोगी स्वप्न में दवाई की बोतल टूटी हुई देखता है तो वह शीघ्र ही रोग मुक्त हो जाता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में फल देखना बहुत शुभ होता है।
जो व्यक्ति यदि आप स्वयं को किसी ऊंचाई पर चढ़ता देखें तो यह भविष्य में उन्नति का संकेत है।
जो व्यक्ति यदि आप स्वप्न में नए वस्त्र पहने दिखते हैं तो आपको कोई मांगलिक कार्य का संदेश मिलने वाला है।
जो व्यक्ति यदि आप किसी वृद्ध व्यक्ति अथवा साधु को देखते हैं तो आपको बड़ा लाभ अथवा सम्मान मिलने वाला है।
अशुभ स्वप्न
जो व्यक्ति यदि स्वप्न में किसी बच्चे का जन्म होता दिखाई दे तो सावधान होना चाहिए क्योंकि यह आगामी दुर्घटना का संकेत है
जो व्यक्ति यदि स्वप्न में किसी रोते बच्चे को देखें तो कोई संकट आने वाला है।
जो व्यक्ति स्वप्न में जिस व्यक्ति को दक्षिण दिशा में खड़े पितर बुलाते हैं उसको अपना अंतिम समय आया हुआ जान लेना चाहिए।
जो व्यक्ति स्वप्न में कोई खंडहर, सुनसान जगह देखना, भटक जाना और निकलने का कोई मार्ग न मिलना हानि कारक होता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि कोई किसी के पांवों को कटा हुआ देखेगा तो उसके जीवन में अनेक प्रकार की आर्थिक और व्यवसायिक बाधाएं आने वाली हैं।
जो व्यक्ति स्वप्न में किसी बारात में शामिल होना अशुभ है।
जो व्यक्ति स्वप्न में किसी की हत्या होते देखने का अर्थ है कि कोई आपके खिलाफ बगावत कर रहा है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि कोई सोना चांदी आदि धातुओं की चोरी करता है तो यह अशुभ है। इस का प्रभाव व्यवसाय पर पड़ सकता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि कोई पानी में डूबता जा रहा है तो यह आने वाले संकटों का सूचक है।
जो व्यक्ति यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को डोरी से बंधा हुआ देखता है तो उसे शीघ्र ही किसी अपराध में बंदी बनाया जा सकता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि ऐसा प्रतीत हो कि कोई व्यक्ति स्वप्न देखने वाले की पत्नी का अपहरण करके ले जा रहा है तो शीघ्र ही उसके धन की हानि होती है।
अनिष्ट फल नाशक उपाय
यदि मन यह स्वीकार करे कि देखे गए स्वप्न का परिणाम अनिष्टकारी हो सकता है तो उसके निवारण का उपाय अवश्य किया जाना चाहिए। चित्रकूट वास के समय श्री राम ने भी एक स्वप्न देखा था जिसके अनिष्ट फल के निवारण हेतु उन्होंने भगवान शंकर की पूजा की थी। उचित उपाय करने से बुरे स्वप्न से होने वाला दुष्प्रभाव अत्यन्त क्षीण अथवा समाप्त हो जाता है। यदि स्वप्न अधिक भयानक और रात्रि १२ से २ बजे देखा जए तो तुरंत श्री शिव का नाम स्मरण करें। ÷ऊँ नमः शिवाय' का जप करते हुए सो जाएं। तत्पश्चात् ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि करके शिवमंदिर में जाकर जल चढ़ाएं पूजा करें व पुजारी को कुछ दान करें। इससे संकट नष्ट हो जाता है।
यदि स्वप्न ४ बजे के बाद देखा गया है और स्वप्न बुरा है, तो प्रातः उठकर बिना किसी से कुछ बोले तुलसी के पौधे से पूरा स्वप्न कह डालें। कोई दुष्परिणाम नहीं होगा। स्नान के बाद ÷ऊँ नमः शिवाय' का १०८ बार जप करें।
हनुमान जी सब प्रकार का अनिष्ट दूर करने वाले हैं। बुरे स्वप्न का अनिष्ट दूर करने के लिए सुंदरकांड, बजरंग बाण, संकटमोचन स्तोत्र अथवा हनुमान चालीसा का पाठ भी सांयकाल के समय किया जा सकता है। यदि स्वप्न बहुत बुरा है और आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो सुबह उठकर सफेद कागज पर स्वप्न को लिखें फिर उसे जला दें। राख नाली में पानी डाल कर बहा दें। फिर स्नान करके एक माला शिव के मंत्र ऊँ नमः शिवाय' का जप करें। दुष्प्रभाव नष्ट हो जाएगा।
रोगी स्वप्न फल
1.यदि रोगी सिर मुंडाएं ,लाल या काले वस्त्र धारण किए किसी  को सपने में देखता है या अंग भंग व्यक्ति को देखता है तो रोगी की दशा अच्छी नही है ।
2. यदि रोगी सपने मे किसी ऊँचे स्थान से गिरे या पानी में डूबे या गिर जाए तो समझे कि रोगी का रोग अभी और बड़ सकता है।
3. यदि सपने में ऊठ,शेर या किसी जंगली जानवर की सवारी करे या उस से भयभीत हो तो समझे कि रोगी अभी किसी और रोग से भी ग्र्स्त हो सकता है।
4. यदि रोगी सपने मे किसी ब्राह्मण,देवता राजा गाय,याचक या मित्र को देखे तो समझे कि रोगी जल्दी ही ठीक हो जाएगा ।
5.यदि कोई सपने मे उड़ता है तो इस का अभिप्राय यह लगाया जाता है कि रोगी या सपना देखने वाला चिन्ताओं से मुक्त हो गया है ।
6.यदि सपने मे कोई मास या अपनी प्राकृति के विरूध भोजन करता है तो ऐसा निरोगी व्यक्ति भी रोगी हो सकता है ।
7,यदि सपने में साँप देखता है तो ऐसा व्यक्ति आने वाले समय मे परेशानी में पड़ सकता है ।या फिर मनौती आदि के पूरा ना करने पर ऐसे सपनें आ सकते हैं।

1 स्वप्नों का अर्थ   अ-                                                                                                   
अप्सरा देखना – धन और मान सम्मान की प्राप्ति
अर्थी देखना – धन लाभ हो
अमरुद खाना – धन मिले
अनानास खाना – पहले परेशानी फिर राहत मिले
अदरक खाना – मान सम्मान बढे
अनार के पत्ते खाना – शादी शीघ्र हो
अखरोट देखना – भरपुर भोजन मिले तथा धन वृद्धि हो
अनाज देखना -चिंता मिले
अनार खाना (मीठा ) – धन मिले
अजनबी मिलना – अनिष्ट की पूर्व सूचना
अजवैन खाना – स्वस्थ्य लाभ
अध्यापक देखना – सफलता मिले
अँधेरा देखना – विपत्ति आये
अँधा देखना – कार्य में रूकावट आये
अमलतास के फूल – पीलिया या कोढ़ का रोग होना
अरहर देखना – शुभ
अरहर खाना – पेट में दर्द
अरबी देखना – सर दर्द या पेट दर्द
अलमारी बंद देखना – धन प्राप्ति हो
अलमारी खुली देखना – धन हानि हो
अंगूर खाना – स्वस्थ्य लाभ
अंग रक्षक देखना – चोट लगने का खतरा
अपने को आकाश में उड़ते देखना – सफलता प्राप्त हो
अपने पर दूसरौ का हमला देखना – लम्बी उम्र
अंग कटे देखना – स्वास्थ्य लाभ
अंग दान करना – उज्जवल भविष्य , पुरस्कार
अंगुली काटना – परिवार में कलेश
अंगूठा चूसना – पारवारिक सम्पति में विवाद
अन्तेस्ति देखना – परिवार में मांगलिक कार्य
अस्थि देखना – संकट टलना
अंजन देखना – नेत्र रोग
अंक देखना विषम – शुभ
अस्त्र से स्वयं को कटा देखना – शीघ्र कष्ट मिले
अपने दांत गिरते देखना – बंधू बांधव को कष्ट हो
आंसू देखना – परिवार में मंगल कार्य हो
आवाज सुनना – अछा समय आने वाला है
आंधी देखना – संकट से छुटकारा
आंधी में गिरना – सफलता मिलेगी
अपने आप को अकेला देखना – लम्बी यात्रा
अख़बार पढ़ना, खरीदना – वाद विवाद
अचार खाना , बनाना – सिर दर्द, पेट दर्द
अट्हास करना – दुखद समाचार मिले
अध्यक्ष बनना – मान हानि
अध्यन करना -असफलता मिले
अपहरण देखना – लम्बी उम्र
अभिमान करना – अपमानित होना
अध्र्चन्द्र देखना – औरत से सहयोग मिले
अमावस्या होना – दुःख संकट से छुटकारा
अगरबत्ती देखना – धार्मिक अनुष्ठान हो
अगरबत्ती जलती देखना – दुर्घटना हो
अगरबत्ती अर्पित करना – शुभ
अपठनीय अक्षर पढना – दुखद समाचार मिले
अंगीठी जलती देखना – अशुभ
अंगीठी बुझी देखना – शुभ
अजीब वस्तु देखना – प्रियजन के आने की सूचना
अजगर देखना – शुभ
अस्त्र देखना – संकट से रक्षा
अंगारों पर चलना – शारीरिक कष्ट
अंक देखना सम – अशुभ
2 स्वप्नों का अर्थ   आ-
आइना देखना – इच्छा पूरण हो , अछा दोस्त मिले
आइना में अपना मुहं देखना – नौकरी में परेशानी , पत्नी में परेशानी
आसमान देखना – ऊचा पद प्राप्त हो
आसमान में स्वयं को देखना – अच्छी यात्रा का संकेत
आसमान में स्वयं को गिरते देखना – व्यापार में हानि
आग देखना – गलत तरीके से धन की प्राप्ति हो
आग जला कर भोजन बनाना – धन लाभ , नौकरी में तरक्की
आग से कपडा जलना – अनेक दुख मिले , आँखों का रोग
आजाद होते देखना – अनेक चिन्ताओ से मुक्ति
आलू देखना – भरपूर भोजन मिले
आंवला देखना – मनोकामना पूर्ण न होना
आंवला खाते देखना – मनोकामना पूर्ण होना
आरू देखना – प्रसनता की प्राप्ति
आक देखना – शारारिक कष्ट
आम खाते देखना – धन और संतान का सुख
आलिंगन देखना पुरुष का औरत से – काम सुख की प्राप्ति
आलिंगन देखना औरत का पुरुष से – पति से बेवफाई की सूचना
आलिंगन देखना पुरुष का पुरुष से- शत्रुता बढ़ना
आलिंगन देखना औरत का औरत से – धन प्राप्ति का संकेत
आत्महत्या करना या देखना – लम्बी आयु
आवारागर्दी करना – धन लाभ हो नौकरी मिले
आँचल देखना – प्रतियोगिता में विजय
आँचल से आंसू पोछना – अछा समय आने वाला है
आँचल में मुँह छिपाना – मान समान की प्राप्ति
आरा चलता हुआ देखना – संकट शीघ्र समाप्त होगे
आरा रूका हुआ देखना- नए संकट आने का संकेत
आवेदन करना या लिखना – लम्बी यात्रा हो
आश्रम देखना – व्यापार में घाटा
आट्टा देखना – कार्य पूरा हो
आइसक्रीम खाना – सुख शांति मिले
3 स्वप्नों का अर्थ   इ
इमली खाते देखना – औरत के लिए शुभ ,पुरुष के लिए अशुभ
इडली साम्भर खाते देखना – सभी से सहयोग मिले
इष्ट देव की मूर्ति चोरी होना – मृत्युतुल्य कष्ट आये
इश्तहार पढना – धोखा मिले, चोरी हो
इत्र लगाना – अछे फल की प्राप्ति, मान सम्मान बढेगा
इमारत देखना – मान सम्मान बढे, धन लाभ हो
ईंट देखना – कष्ट मिलेगा
इंजन चलता देखना – यात्रा हो , शत्रु से सावधान
इन्द्रधनुष देखना – संकट बढे , धन हानि हो
इक्का देखना हुकम का – दुःख व् निराशा मिले
इक्का देखना ईंट का -कष्टकारक स्तिथि
इक्का देखना पान का -पारवारिक क्लेश
इक्का देखना चिड़ी का – गृह क्लेश ,अतिथि आने की सूचना
4 स्वप्नों का अर्थ   उ-
उजाड़ देखना – दूर स्थान की यात्रा हो
उस्तरा प्रयोग करना – यात्रा में धन लाभ हो
उपवन देखना – बीमारी की पूर्व सूचना
उदघाटन देखना – अशुभ संकेत
उदास देखना – शुभ समाचार मिले
उधार लेना या देना – धन लाभ का संकेत
स्वयं को उड़ते देखना – गंभीर दुर्घटना की पूर्व सूचना
उछलते देखना -दुखद समाचार मिलने का संकेत
उल्लू देखना -दुखों का संकेत
उबासी लेना – दुःख मिले
उल्टे कपडे पहनना – अपमान हो
उजाला देखना – भविष्य में सफलता का संकेत
उजले कपडे देखना -इज्जत बढे , विवाह हो
उठना और गिरना – संघर्ष बढेगा
उलझे बाल या धागे देखना – परेशानिया बढेगी
उस्तरा देखना – धन हानि , चोरी का भय
5 स्वप्नों का अर्थ   ऊ
ऊंघना – धन हानि , चोरी का भय
ऊंचाई पर अपने को देखना – अपमानित होना
ऊन देखना – धन लाभ हो
ऊंचे पहाड़ देखना – काफी मेहनत के बाद कार्य सिद्ध होना
ऊंचे वृक्ष देखना – मनोकामना पूरी होने में समय लगना
6 स्वप्नों का अर्थ   औ-
औषधी देखना – गलत संगति देखना
7 स्वप्नों का अर्थ   ऐ-
ऐनक लगते देखना – विद्या मिले, ख़ुशी इज्जत मिले
8 स्वप्नों का अर्थ   क
कब्र खोदना – धन पाए , मकान बनाये
कत्ल करना स्वयं का – अच्छा सपना है , बुरे काम से बचे
कद अपना छोटा देखना – अपमान सहना , परेशानी उठाना
कद अपना बड़ा देखना – भारी संकट आना
कसम खाते देखना – संतान का दुःख भोगना
कलम देखना – विद्या धन की प्राप्ति
कर्जा देना – खुशहाली आये
कर्जा लेना – व्यापार में हानि
कला कृतिया देखना – मान समान बढे
कपूर देखना – व्यापार में लाभ
कबाडी देखना – अच्छे दिनों की शुरूआत
कबूतर देखना – प्रेमिका से मिलना
कबूतरों का झुंड – शुभ समाचार मिले
कमल का फूल – ज्ञान की प्राप्ति
कपास देखना – सुख समृधि हो
कंगन देखना – अपमान हो
कदू देखना – पेट दर्द
कन्या देखना – धन वृद्धि हो
कफन देखना – लम्बी उम्र
कली देखना – स्वास्थ्य खराब हो
कछुआ देखना – शुभ समाचार मिले
कलश देखना – सफलता
कम्बल देखना – बीमारी आये
कपडा धोना – पहले रूकावट , फिर लाभ
कटा सिर देखना – शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी
कब्रिस्तान देखना – निराशा हो
कंघी देखना – चोट लगना , दांत या कान में दर्द
कसरत – बीमारी आने की सूचना
काली आँखे देखना – व्यापार में लाभ
काला रंग देखना – शुभ फल
काजू खाना – नया व्यापार शुरू हो
कान देखना – शुभ समाचार
कान साफ करना – अच्छी बातो का ज्ञान
काउंटर देखना – लेने देने में लाभ हो
कारखाना देखना – दुर्घटना में फसने की सूचना
काली बिल्ली देखना – लाभ हो
कुंडल पहने देखना – संकट हो
कुबडा देखना – कार्य में विघ्न
कुमकुम देखना – कार्य में सफलता
कुल्हाडी देखना – परिश्रम अधिक, लाभ कम
कुत्ता भोंकना – लोगो द्वारा मजाक उड़ना
कुत्ता झपटे – शत्रु की हार
कुर्सी खाली देखना – नौकरी मिले
कूड़े का ढेर देखना – कठिनाई के बाद धन मिले
किला देखना – ख़ुशी प्राप्त हो
कील देखना / ठोकना – परिवार में बटवारा हो
केश संवारना – तीर्थ यात्रा
केला खाना / देखना – ख़ुशी हो
केक देखना – अच्छी वस्तु मिले
कैमरा देखना – अपने भेद छिपा कर रखे
कोढ़ी देखना – धन का लाभ
कोहरा – संकट समाप्त हो
कोठी देखना – दुःख मिले
कोयल देखना / सुनना – शुभ समाचार
कोया देखना – शुभ संकेत
किसी ऊंचे स्थान से कूदना – असफलता
कद लम्बा देखना – मृत्युतुल्य कष्ट हो
कद घटना – अपमान हो
कटोरा देखना – बनते काम बिगढ़ना
कनस्तर खाली देखना – शुभ
कनस्तर भरा देखना – अशुभ
कमंडल देखना – परिवार के किसी सदस्य से वियोग
करवा चौथ – औरत देखे तो आजीवन सधवा, पुरुष देखे तो धन धान्य संपूरण
कागज कोरा – शुभ
कागज लिखा देखना – अशुभ
कुर्सी पर स्वयं को बैठे देखना – नया पद, पदोनती
कुर्सी पर अन्य को बैठे देखना – अपमान
कब्र खोदना – मकान का निर्माण करना
कपूर देखना – व्यापार नौकरी में लाभ
कबूतर देखना – प्रेमिका से मिलन
कपडा बेचते देखना – व्यापार में लाभ
कपडे पर खून के दाग – व्यर्थ बदनामी
कछुआ देखना – धन आशा से अधिक मिलना
कमल ककडी देखना – सात्विक भोजन में आनंद, ख़ुशी मिले
कपास देखना – सुख, समृधि घर आये
करी खाना – विधवा से विवाह, विधुर से विवाह
कृपाण – धरम कार्य पूर्ण होने की सूचना
कान देखना – शुभ समाचार
कान कट जाना – अपनों से वियोग
काला कुत्ता देखना – कार्य मे सफलता
काउंटर देखना – लेन देन में लाभ
काली बिल्ली देखना – शुभ समाचार
पीली बिल्ली देखना – अशुभ समाचार
काना व्यक्ति देखना – अनकूल समय नहीं
कीडा देखना – शक्ति का प्रतीक
कुम्हार देखना – शुभ समाचार
केतली देखना – दांपत्य जीवन में शांति हो
केला देखना या खाना – शुभ समाचार
कैंची – अकारण किसी से वाद- विवाद होना
कोठी देखना – दुःख मिले
कोयला देखना – प्रेम के जाल में फँस कर दुःख पाए
कुरान- सुख शांति की भावना बढे
9 स्वप्नों का अर्थ   ख
खरोंच लगना -शरीर स्वस्थ हो
खटमल देखना – जीवन में संघर्ष
खटमल मारना – कठिनाई से छुटकारा
खरबूजा देखना -सफलता मिले
ख़त पढ़ना – शुभ समाचार
खरगोश देखना – औरत से बेवफाई
खलिहान देखना – सम्मान बडे
खटाई खाना – धन हानि हो
खाली खाट देखना -बीमार पड़ने की सूचना
खाली बर्तन देखना – काम में हानि
खिलखिलाना – दुखद समाचार मिलने का संकेत
खिल्ली उडाना -लोगो से निराशा मिले
खिलौना देखना – आँखों को सुख मिले
खुजली होना – रोग से छुटकारा पाने का संकेत
ख़ुशी देखना – परेशानी बढे
खुशबू लगाना – सम्मान बढे
खून खराबा -सौभाग्य वृद्धि
खून देखना – धन मिले
खून की वर्षा देखना – देश में अकाल पड़े
खून में लोटना – धन-सम्पति प्राप्त होने का संकेत
खेल कूद में भाग लेना – भाग्यौनात्ति होना
खेत देखना -यात्रा हो , विद्या व् धन की वृद्धि
खेत काटते देखना – पत्नी से मन मुटाव होना
खोपडी देखना – बौधिक कार्यो में सफलता
10 स्वप्नों का अर्थ   ग
गधा देखना -प्यार मिले
गधा लदा हुआ देखना – व्यापार में लाभ हो
गधे की चीख सुनना – दुख हो
गधे की सवारी करना – शुभ समाचार मिले
गाय देखना – धन लाभ हो
गाय या बैल पीले रंग की देखना – महामारी आने के लक्षण
गरम पानी देखना – बुखार या अन्य बीमारी आये
गंजा सिर देखना – परीक्षा में पास हो, सम्मान बड़े
गली देखना – सुनसान गली देखने से लाभ , भीड़ वाली गली देखने से मृत्यु का समाचार
गवाही देना -अपराध में फंसना
गमला देखना – खाली देखने पर झंझट , फूल खिले देखने पर शुभ
गलीचा देखना या उस पर बैठना – शोक में शामिल होना
ग्वाला /ग्वालिन देखना – शुभ फल
गाजर देखना – फसल अच्छी हो
गाड़ी देखना – यात्रा सार्थक हो
गलिया देते देखना – बदनामी हो
गायत्री पाठ करना – दुर्लभ स्वप्न मान सम्मान बड़े
गिलास देखना – घरेलू खर्चो में कमी होगी
गिनती करना – काम में हानि
गिरगिट देखना – झगडे में फसने का संकेत
गिलहरी देखना – बहुत शुभ
गीदढ़ देखना – शत्रु से भय मिले
गीली वस्तु देखना – लम्बी बीमारी आने के संकेत
गीता देखना – दुर्लभ समय
गुलाब देखना – सम्मान में वृद्धि
गुढ खाना – सफलता मिले
गुडिया देखना – जल्दी विवाह का संकेत
गुठली खाना या फेंकना – काफी धन आने की सूचना
गेंहू देखना – काफी मेहनत कर के कमाई होना
गेंद देखना – परेशानी होना
गेंदे का फूल देखना – मानसिक अशांति
गेरुआ वस्त्र देखना – समय शुभ है
गीता – कष्ट दूर हो
ग्रन्थ साहिब – धार्मिक कार्यो में रूचि हो
11 स्वप्नों का अर्थ   घ
घडी देखना – यात्रा पर जानाधमाका सुनना – कष्ट बढे
घडी गुम हो जाना – यात्रा का कार्यकर्म स्थगित होना
घर देखना (सजा हुआ ) – संपत्ति में हानि
घर देखना (खंडहर ) – संपत्ति में लाभ
घर में किसी और का प्रवेश देखना – शत्रु पर विजय
घर में आग देखना – सरकार से लाभ हो
घर सोने का देखना – घर में आग लगने का संकेत
घर लोहे का देखना – मान सम्मान बढेगा
घडा भरा देखना – धन लाभ हो
घंटे की आवाज़ सुनना – चोरी होने का संकेत
घंटाघर देखना – अशुभ समाचार
घाट देखना – तीर्थ यात्रा पर जाने का संकेत
घायल देखना – संकट से छुटकारा
घास देखना – लाभ होगा
घी देखना – धन दौलत बढे
घुटने टेकना – वाद विवाद में सफलता मिले
घुंघरू की आवाज सुनना – मान सम्मान बढेगा
घूंघट देखना – नया व्यापार शुरू हो
घोड़ा सजा हुआ देखना – कार्य में हानि
घोड़ा काला देखना -मान सम्मान बढेगा
घोड़ा या हाथी पर चड़ना – उन्नत्ति हो

12 स्वप्नों का अर्थ   च
चलता पहिया देखना – कारोबार में उन्नत्ति हो
चप्पल पहनना – यात्रा पर जाना
चक्की देखना – मान सम्मान बढेगा
चमडा देखना – दुःख हो
चबूतरा देखना -मान सम्मान बढेगा
चट्टान देखना (काली ) – शुभ
चट्टान देखना (सफेद ) – अशुभ
चपत मारना – धन हानि हो
चपत खाना – शुभ फल की प्राप्ति
चरबी देखना – आग लगने का संकेत
चलना जमीन पर -नया रोजगार मिले
चलना पानी पर – कारोबार में हानि
चलना आसमान पर – बीमारी आने का संकेत
चन्द्र ग्रहण देखना – सभी कार्य बिगडे
चमगादर उड़ता देखना – लम्बी यात्रा हो
चमगादर लटका देखना – अशुभ संकेत
चम्मच देखना – नजदीकी व्यक्ति धोखा दे
चप्पल देखना – यात्रा पर जाना
चटनी खाना – दुखो में वृद्धि
चरखा चलाना – मशीनरी खराब हो
चश्मा खोना – चोरी के संकेत
चांदी के बर्तन में दूध पीना – संम्पत्ति में वृद्धि हो
चारपाई देखना – हानि हो
चादर शरीर पर लपेटना -गृह क्लेश बढे
चादर मैली देखना – धन लाभ हो
चादर समेट कर रखना – चोरी होने का संकेत
चंचल आँखे देखना – बीमारी आने की सूचना
चांदी का सामान देखना – गृह क्लेश बढे
चोकलेट खाना -अच्छा समय आने वाला है
चाय देखना – धन वृद्धि हो
चावल देखना – कठिनाई से धन मिले
चाकू देखना – अंत में विजय
चित्र देखना – पुराने मित्र से मिलन हो
चिडिया देखना – मेहमान आने का संकेत
चींटी देखना – धन लाभ हो
चींटिया बहुत अधिक देखना – परेशानी आये
चील देखना – बदनामी हो
चींटी मारना – तुंरत सफलता मिले
चुम्बन लेना – आर्थिक समृधि हो
चुम्बन देना – मित्रता बढे
चुटकी काटना – परिवार में कलेश
चुंगी देना – चलते काम में रूकावट
चुंगी लेना – आर्थिक लाभ
 चूल्हा देखना – उत्तम भोजन प्राप्त हो
चूरन खाना – बीमारी में लाभ
चेचक निकलना – धन की प्राप्ति
चोर पकड़ना – धन आने की सूचना
चोटी पर स्वयं को देखना – हानि हो
चोराहा देखना – यात्रा में सफलता
चौकीदार देखना – अचानक धन आये
चौथ का चाँद देखना – बहुत अशुभ
चुडैल देखना -धन हानि हो
चूहा देखना -औरत से धोखा
चूहा फंसा देखना – शरीर को कष्ट
चूहा चूहे दानी से निकलते देखना – कष्ट से मुक्ति
चूहा मरा देखना – धन लाभ
चूहा मारना – धन हानि
चूडिया तोड़ना – पति दीर्घायु हो (औरत के लिए
13 स्वप्नों का अर्थ   स
स्याही देखना – सरकार से सम्मान मिले
स्टोव जलाना – भोजन अच्छा मिले
संडास देखना – धन वृद्धि हो
संगीत देखना या सुनना – कष्ट बढे
संदूक देखना – पत्नी सेवा करे , अचानक धन मिले
सगाई देखना या उसमे शामिल होना -
सजा पाना – संकटों से छुटकारा मिलाना
सट्टा खेलना – धोखा होने का संकेत
सलाद खाते देखना – धन वृद्धि हो
सर्कस देखना – बहुत मेहनत करनी पड़े
सलाई देखना – मान सम्मान बढे
सरसों का साग खाना – बीमारी दूर हो
सरसों देखना – व्यापार में लाभ हो
ससुर देखना – शुभ समाचार मिले
सर कटा देखना – विदेश यात्रा हो
सर फटा देखना – कारोबार में हानि हो
सर मुंडाना – गृह कलेश में वृद्धि हो
सर के बाल झड़ते देखना – क़र्ज़ से मुक्ति मिले
ससुराल जाना – गृह कलेश में वृद्धि हो
समुद्र पार करना – उनत्ति मिले
साइकिल देखना -सफलता मिले
साइकिल चलाना – काम में तरक्की मिले
साइन बोर्ड देखना – व्यापार में लाभ हो
सावन देखना – जीवन में ख़ुशी मिले
साडी देखना – विवाह हो , दाम्पत्य जीवन में सुख मिले
सारस देखना – धन वृद्धि हो
साला या साली देखना – दाम्पत्य जीवन में सुख हो , मेहमान आये , धनवृद्धि हो
सागर सूखता देखना -बीमारी आये , अकाल पड़े
सारंगी बजाना – अपयश मिले , धन हानि हो
साग देखना – अचानक विवाद हो , सावधान रहे
साबुन देखना – स्वस्थ्य लाभ हो , बीमारी दूर हो
सांप मारना या पकड़ना – दुश्मन पर विजय हो , अचानक धन मिले
सांप से डर जाना -नजदीकी मित्र से विश्वासघात मिले
सांप से बातें करना -शत्रु से लाभ मिले
सांप नेवले की लडाई देखना – कोर्ट कचेहरी जाना पड़े
सांप के दांत देखना -नजदीकी रिश्तेदार हानि पहुंचाएंगे
सांप छत्त से गिरना – घर में बीमारी आये तथा कोर्ट कचहरी में हानि हो
सांप का मांस देखना या खाना – अपार धन आये परन्तु घर में धन रुके नहीं
सिपाही देखना – कानून के विपरीत काम कारनेका संकेत
सिनेमा देखना – समय व्यर्थ में नष्ट हो
सिगरेट पीते देखना -व्यर्थ में धन बर्बाद हो
सिलाई मशीन देखना – पति पत्नी में झगडा हो
सिलाई करना – बिगडा काम बन जाये
सियार देखना -धन हानि हो , बीमारी आये
सिन्दूर देखना – दुर्घटना की सम्भावना
सिन्दूर देवता पर चडाना – मनोकामना पूर्ण हो
सीताफल देखना -कुछ समय के बाद गरीबी दूर होगी
सीता जी को देखना -मान सम्मान बढे
सीमा पार करना -विदेश व्यापार में लाभ हो
सिप्पी देखना – उसे देखने पर हानि , उठाने पर लाभ
सीना चौडा होना – लोकप्रियता में वृद्धि हो
सीड़ी पर चढ़ना – काम में असफलता मिले
सुनहार देखना – साथी से धोखा मिले
सुटली कमर में बंधना -गरीबी आये , संघर्ष करना पढ़े
सुम्भा देखना (लोहे का)- कार्य में सफलता मिले , विवाह हो
सुदर्शन चक्र देखना – बईमानी का दंड शीघ्र मिले
सुपारी देखना -विवाह शीघ्र हो , मित्रों की संख्या में वृद्धि हो
सुनहरी रंग देखना – रुका हुआ धन मिले
सुरंग देखना या सुरंग में प्रवेश करना – नया कार्य आरंभ हो
सूई देखना – एक देखने पर सुख तथा अनेक देखने पर कष्ट में वृद्धि हो
सुलगती आग देखना – शोक समाचार मिले
सुन्दर स्त्री देखना – मान सम्मान में हानि हो
सुनहरी धूप देखना – सरकार से धन लाभ हो , मान सम्मान बढे
सुराही देखना – गृहस्थी में तनाव हो , पति या पत्नी का चरित्र ख़राब हो , रोग दूर हो
सुगंध महसूस करना – चमड़ी की बीमारी आये
सुनसान जगह देखना – बलवृद्धि हो
सूद लेते देखना – मुफ्त का धन मिले
सूद देते देखना -धन नाश हो , गरीबी आये
सूली पर चढ़ना – चिन्ताओ से मुक्ति हो , शुभ समाचार मिले
सूर्य देखना – धन संपत्ति तथा मान सम्मान बढे
सूर्य की तरह अपना चेहरा चमकता देखना – पुरस्कार मिले , मान सम्मान बढे
सूअर देखना – बुरे कामों में फँसना पड़े , बुरे लोगों से दोस्ती हो तथा मानहानि हो
सूअर का दूध पीना – चरित्र खराब हो , जेल जाना पढ़े
सूरजमुखी का फूल देखना – संकट आने की सूचना
सूर्य चन्द्र आदि का विनाश देखना – मृत्यु तुल्य कष्ट मिले
सेम की फली देखना – धन हानि हो परन्तु अच्छा भोजन मिले
सेब का फल देखना – दुःख व् सुख में बराबर वृद्धि हो
सेंध लगाना – प्रिये वस्तु गुम होना
सेवा करना – मेहनत का फल मिलेगा
सेवा करवाना – स्वस्थ्य खराब होने के लक्षण है
सेहरा बंधना – दाम्पत्य जीवन में कलेश की संभावना
सैनिक देखना – साहस में वृद्धि हो
सोंठ खाना – धन हानि हो , स्वस्थ्य में सुधार हो
सोना देखना – परिवार में बीमारी बढे , धन हानि हो
सोना मिलना – धन वृद्धि हो
सोना दुसरे को देना – अपनी मुर्खता से दूसरों को लाभ पहुंचाना
सोना लुटाना – परेशानिया बढे , अपमान सहना पढ़े
सोना गिरवी रखना – बईमानी करे और अपमान हो
सोते हुए शेर को देखना – निडरता से कार्य करे , सफलता मिलेगी
सोलह श्रृंगार देखना -स्वस्थ्य खराब होने का संकेत
स्वप्न में मानिक रत्न देखना – शक्ति तथा अधिकारों में वृद्धि
स्वप्न में मोती रत्न देखना – मानसिक शांति मिले
स्वप्न में मूंगा रत्न देखना – शत्रु पर विजय मिले
स्वप्न में पन्ना रत्न देखना – व्यवसाय में वृद्धि हो
स्वप्न में पुखराज रत्न देखना -वैर विरोध की भावना बढे
स्वप्न में हीरा रत्न देखना – आर्थिक प्रगति हो
स्वप्न में नीलम रत्न देखना – उन्नत्ति हो
स्वप्न में गोमेद रत्न देखना – समस्या अचानक आये
स्वप्न में लहसुनिया रत्न देखना – मान सम्मान बढे
स्वप्न में फेरोज़ा रत्न देखना – व्यवसाय में वृद्धि

सफेद चूडिया देखना – धन लाभ हो
14 स्वप्नों का अर्थ   छ
छत देखना -मकान बने
छड़ी देखना – संतान से लाभ हो
छतरी लगाकर चलना – मुसीबतों से छुटकारा मिलना
छत्र देखना – राज दरबार में सम्मान मिले
छलनी देखना – व्यापार में हानि
छल्ला पहनना – शिक्षा में वृद्धि
छलांग लगाना – असफलता हाथ लगे
छम छम की आवाज़ आये – मेहमान आये
छाज देखना – सम्मान बढे
छाछ पीना -धन लाभ हो
छापाखाना देखना – धन लाभ
छात्रो का समूह देखना – शिक्षा में लाभ
छिपकली देखना – दुश्मन से कष्ट
छींक आना – अशुभ लक्षण
छुआरा खाना – धन लाभ हो
छुरा देखना – दुश्मन से भय हो
छोटे बच्चे देखना – इच्छा पूरण हो
15 स्वप्नों का अर्थ   ज
जमघट देखना – कार्य की प्रशंषा मिलेगी
जयकार सुनना- संकट में पड़ना
जलना – मान सम्मान की प्राप्ति
ज्योतिष देखना – संतान को कष्ट
जटाधारी साधु देखना – शुभ लक्षण
जहाज देखना – दुर्घटना में फंसने का सूचक
खाली जंजीर देखना – इल्जाम लगेगा
स्वयं को जंजीर में जकडे देखना – समस्याओ से छुटकारा
जल देखना – संकट आएगा
जड़े देखना -शुभ स्वप्न
ज्वालामुखी देखना – स्थान परिवर्तन की पूर्व सूचना
जमीन खोदना – कठिनाई से लाभ हो
जंगल देखना – कष्ट दूर हो
जलेबी खाना – सुख सुविधाय बढे
जलता घर देखना -बीमारी परेशानी बढे
जलता मुर्दा देखना – शुभ समाचार
जादू देखना या करना -धन हानि
जाल देखना (मकडी का ) – शुभ लक्षण
जाल देखना ( मचली का ) -संकट का संकेत
जामुन खाना या देखना – यात्रा पर जाना पड़े
जलूस देखना -नौकरी में उनत्ति हो
जूए देखना या मारना – मानसिक चिंता
जूते से पीटना – मान सम्मान बढे
जूते से स्वयं पीटना – मान सम्मान मिलेगा
जेब खाली देखना -अशुभ है
जेब भरी देखना -खर्च अधिक होने का सूचक
जेल देखना – जग हँसी हो
जेल से छूटना – कार्य में सफलता
जोकर देखना – समय बर्बाद हो
16 स्वप्नों का अर्थ   झ
झगडा देखना -शुभ समाचार
झरना देखना (ठंडे पानी का ) – शुभ है
झरना देखना (गर्म पानी का ) – बीमारी आये
झंडा देखना सफेद या मंदिर का -शुभ समाचार
झंडा देखना हरा – यात्रा में कष्ट
झंडा देखना पीला – बीमारी आये
झाडू लगाना – घर में चोरी हो
झुनझुना देखना – परिवार में ख़ुशी हो
17 स्वप्नों का अर्थ   ट
टंकी खाली देखना – शुभ लक्षण
टंकी भरी देखना – अशुभ घटना का संकेत
टाई सफेद देखना – अशुभ
टाई रंगीन देखना – शुभ
टेलेफोन करना – मित्रो की संख्या में वृद्धि
टोकरी खाली देखना – शुभ लक्षण
टोकरी भरी देखना – अशुभ घटना का संकेत
टोपी उतारना – मान सम्मान बढे
टोपी सिर पर रखना – अपमान हो
18 स्वप्नों का अर्थ   ठ
ठण्ड में ठिठुरना – सुख मिले
19 स्वप्नों का अर्थ   ड
डंडा देखना – दुश्मन से सावधान रहे
डफली बजाना – घर में उत्सव की सूचना
डाक खाना देखना – बुरा समाचार मिले
डाकिया देखना – शुभ सूचना मिले
डॉक्टर देखना – निराशा मिले
डाकू देखना – धन वृद्धि हो
20 स्वप्नों का अर्थ   त
तरबूज देखना – धन लाभ
तराजू देखना – कार्य निष्पक्ष पूर्ण हो
तबला बजाना – जीवन सुखपूर्वक गुजरे
तकिया देखना – मान सम्मान बढे
तलवार देखना – शत्रु पर विजय
तपस्वी देखना -मन शांत हो
तला पकवान खाना – शुभ समाचार मिले
तलाक देना – धन वृद्धि हो
तमाचा मारना -शत्रु पर विजय
तराजू में तुलना – भयंकर बीमारी हो
तवा खाली देखना – अशुभ लक्षण
तवे पर रोटी सेकना – संपत्ति बढे
तहखाना देखना या उसमे प्रवेश करना – तीर्थ यात्रा पर जाने का संकेत
ताम्बा देखना – सरकार से लाभ मिले
तालाब में तैरना – स्वस्थ्य लाभ
ताला देखना -चलते काम में रूकावट
ताली देखना – बिगडे काम बनेगे
तांगा देखना – सुख मिले, सवारी का लाभ हो
ताबीज बांधना – काम में हानि हो
ताबीज़ देखना – शुभ समय का आगमन
ताश देखना – मित्र अथवा पडोसी से लडाई हो
तारा देखना – अशुभ
तितली देखना – विवाह हो या प्रेमिका मिले
तितली उड़ कर दूर जाना – दांपत्य जीवन में क्लेश हो
तिल देखना – कारोबार में लाभ
तिराहा देखना – लडाई झगडा हो
त्रिशूल देखना – अच्छा मार्ग दर्शन मिले
त्रिमूर्ति देखना – सरकारी नौकरी मिले
तितली पकड़ना – नई संतान हो
तिजोरी बंद करना – धन वृद्धि हो
तिजोरी टूटती देखना – कारोबार में बढोतरी
तिलक करना – व्यापार बढे
तूफान देखना या उसमे फँसना – संकट से छुटकारा मिले
तेल या तेली देखना – समस्या बढे
तोलना – महंगाई बढे
तोप देखना -शत्रु पर विजय
तोता देखना – ख़ुशी मिले
तोंद बढ़ी देखना – पेट में परेशानी हो
तोलिया देखना – स्वस्थ्य लाभ हो
21 स्वप्नों का अर्थ   थ
थप्पर खाना – कार्य में सफलता
थप्पर मारना – झगडे में फँसना
थक जाना – कार्य में सफलता मिले
थर थर कंपना -मान सम्मान बढे
थाली भरी देखना – अशुभ
थाली खाली देखना – सफलता मिले
थूकना – मान सम्मान बढे
थैली भरी देखना – जमीन जायदाद में वृद्धि
थैली खाली देखना – जमीन जायदाद में झगडा हो
22 स्वप्नों का अर्थ ध 
धनिया हरा देखना – यात्रा पर जाना पढ़े
धतूरा खाना – संकट से बचना
धनुष देखना – सभी कर्मो में सफलता मिले
धब्बे देखना – शुभ संकेत
धरोहर लाना या देखना – व्यापार में हानि हों
धार्मिक आयोजना देखना – शुभ संकेत
धागा देखना – कार्य में वृद्धि हों
धुरी देखना – मान सम्मान में वृद्धि हों
धमाका होना – संकटों में वृद्धि हो
धार्मिक स्थल देखना -मंदिर – शुभ कार्य में धन लगे
धार्मिक स्थल देखना -गुरुद्वारा – ज्ञान की प्राप्ति हो
धार्मिक स्थल देखना -मस्जिद – समस्या का समाधान मिले
धार्मिक स्थल देखना -चर्च – मानसिक शांति बढे
धर्म ग्रन्थ देखने का फल – रामायण – संघर्ष के बाद सफलता मिले
धुआ देखना – कष्ट बढे , परेशानी में फंसना पढ़े
धुंध देखना – शुभ समाचार मिले
धुन सुनना – परेशानी बढे
धूमधाम देखना – परेशानी बढे
धूल देखना – यात्रा हों
धोबी देखना – काम में सफलता मिले
धोती देखना – यात्रा पर जाना पड़े

23 स्वप्नों का अर्थ   न
नल खुला देखना – काम शीघ्र होगा
नल बंद देखना – काम कठिनाई से होगा
नरक देखना- कठिनाइयाँ बढे
नगीना देखना – सरकार से लाभ हों , शुभ समाचार मिले
नगाडा देखना – धन लाभ , प्रसिधी मिले
नमाज़ पढ़ते देखना – कष्ट दूर हों , शान्ति मिलेगी
नमक खाना – झगडे में फँसना
नमक देखना – बीमारी दूर हों , व्यापार में लाभ हों
नमकदानी देखना – गृहस्थी का सुख मिले
नशे में स्वयं को देखना – धन वृद्धि हों परन्तु परिशानिया बढे
नरगिस का फूल देखना – पारिवारिक सुख मिले
नदी नाले में गिरते देखना – अनेक संकट आने का संकेत
नक्कता मनुष्य देखना – धन तथा मान सम्मान बढे
नक़ल करना – काम में असफलता मिले
नक़ल करते देखना – यात्रा में रुकावट , काम बिगडे
नक्शा बनाना – नई योजनाये शुरू हों
नकसीर बहना – दिमागी परेशानिया आये
नकाब लगाना – गंभीर बीमारी आये
नट देखना – पारिवारिक सुख शाति मिले
नसवार सूंघना – मानसिक परिशानिया बढे
नदी देखना – भविष्य सुखद हों
नदी में स्नान करना – काम में सफलता मिले
नदी में गिरना – संकट के बाद सुख मिले
नहर खोदना – कार्य सम्बन्धी योजनाये मिले
नंगा होना – विलासिता बढे
नदी , वृक्ष, या पर्वत देखना – दुःख दूर हो , धन मिले
नाटक देखना – भविष्य अनिश्चित हो
नाखून टूटना – सफलता देरी से मिले
नाक बहुत बड़ी देखना – मान सम्मान बढे , प्रमोशन हो
नाखून देखना – काम में परेशानी हो
नाक से खून बहना – धन में वृद्धि हो
नाटक देखना – गृहस्थी का सुख मिले
नाटक में भाग लेना – धोखा मिले
नारियल देखना – धन लाभ हो , अच्छा भोजन मिले
नाक पर चोट लगना -मान सम्मान में हानि हो
नासूर देखना – बीमारी से छुटकारा मिले
नापतोल करना – व्यापार में हानि हो
नाग के बिल में जाते देखना – धन संग्रह हो
नाग के बिल से बाहर निकलते देखना – धन हानि हो
नाग का डंग मारना – मान सम्मान बढे
नाग का घर में देखना – देखे गए स्थान की पवित्रता का संकेत
नाग उठाये देखना – - संपत्ति प्राप्त का संकेत
नाना नानी देखना – पारिवारिक सुख बढे
नाडा बंधना या टूटना – पारिवारिक कलेश बढे
नाला देखना – गहरा संकट आये
नाव देख्ना – गृहस्थी का सुख मिले
नाव में बैठना – अनेक संकट आये
नाई से हजामत बनवाना – धोखा मिले
नारियल देख्ना – शुभ संकेत , धार्मिक आयोजना हो
नाला देख्ना – कार्य में सफलता मिले
नारद देख्ना – धन लाभ परन्तु लड़ाई झगडा हो
नाभि देख्ना – प्रगति तथा धन लाभ हो
निरादर देख्ना – मान सम्मान बढे
निशाना लगाना – पुरानी इच्छा पूर्ण हो
नितम्ब देख्ना – गृहस्थी का सुख मिले
नीम का व्रक्ष देख्ना -बिमारी दूर होना
नीलम देख्ना -शुभ समाचार मिले , दुश्मन परस्त हो
नींद में सोना या नींद से उठाना – धन लाभ हो
नीलकंठ देख्ना – मान सम्मान बढे , विवाह हो
नींबू काटना या निचोड़ना – धार्मिक कार्य हो
नुकीली चीज़ से चोट लगना – वाद विवाद में फसना
नुकीला जूता देखना – मान सम्मान बढे
नेवला देखना – संकट समाप्त हो , स्वर्णाभूषण मिले
24 स्वप्नों का अर्थ   प
परी देखना – सफलता मिले , स्वस्थ्य लाभ हो , मान सम्मान में वृद्धि हो , धन बढे
पहाड़ देख्ना – शत्रु पर विजय हो
पम्प से पानी निकालना – व्यवसाय में रुकावट आये
प्रसाद बाँटना – रोग कम हो , समृध्धि बढे
पहाड़ पर चढ़ना – मान सम्मान तथा धन बढे
पहाड़ से उतरना -व्यापार में मंदा हो
परदेशी देखना – मनोकामना पूरण हो
पटका बांधना – मान सम्मान तथा धन बढे
पटाखा देखना – ख़ुशी मिले
पलंग देखना – अपमानित होना पड़े
पनघट सूना देखना – कही से निमंत्रण आये
पनघट पर भीड़ देखना – परिवार में उत्सव हो
परिवार देखना – शुभ फल मिले
पनीर खाना – धन वृद्धि हो
पपीता खाना – पेट खराब हो
पहरेदार देखना – चोरी की सम्भावना
पंजीरी खाना – बीमारी आने की सूचना
परछाई देखना अशुभ समाचार
पगड़ी देखना – धन हानि हो
पर्दा सफेद देखना – मान – सम्मान में हानि
पर्दा काला देखना – धन वृद्धि हो
पर्स देखना – गुप्त कार्य पूरा हो
पहिया देखना – प्रगति तेज हो
पंडाल देखना – किसी बड़े उत्सव में शामिल होना
पत्तल देखना या उसमें खाना -शुभ लक्षण
पत्थर देखना या मारना – सरकार से लाभ हो
पत्र लिखना – परेशानी हो
प्याज खाना या खिलाना – दुर्भाग्य पूर्ण घटना घटे
प्रशंसा सुनना – अशुभ संकेत
प्रसाद बाँटना – शुभ फल मिले
प्याऊ बनवाना – धन वृद्धि हो
परीक्षा में बैठना – कार्य में असफलता
पतंग उडाना – लम्बी यात्रा हो
पढ़ना या पढाना – काम में सफलता
पकवान खाना या बनाना – दुखो में वृद्धि हो
पहिया देखना – यात्रा सफल हो
पानी देखना – सुख समृधि बढे
पानी पीते देखना – धन वृद्धि हो
पोलिश करना -नौकरी में तरक्की हो
पान का वृक्ष देखना – संतान की समृधि हो
पागल देखना – शुभ कार्य में वृद्धि हो
पानदान देखना – मित्रता में वृद्धि हो
पाउडर लगाना – मान सम्मान बढे
पार्वती माता देखना – सुख समृधि बढे
पायल बजते देखना – स्त्री से वियोग हो
पारितोषिक मिलना – अपमानित होना पढ़े
पालकी पर बैठना – स्वस्थ्य खराब हो
पालना देखना – पारिवारिक सुख मिले
पालना झुलाना – संतान के लिए कष्ट बढे
पार्सल लेना – अचानक लाभ मिले
पाताल देखना – मान सम्मान बढे , प्रशंसा मिले
पाद मरना या अनुभव करना – व्यापार में लाभ हो व्यवसायिक यात्रा
पार करना (तैरकर) – मान सम्मान बढे
पिटारा देखना – धन लाभ हो
पिजरा देखना – स्वस्थ्य खराब हो
पिजरा खाली देखना – धन वृद्धि हो
पिजरे में पक्षी देखना – गृह कलेश हो
पीपल देखना – शुभ सन्देश मिले
पीला रंग देखना स्वास्थ्य खराब हो
पीठ देखना – मित्र से लाभ हो
पीतल के बर्तन देखना – धन लाभ हो , व्यापार बढे
पीली सरसों देखना – सब प्रकार से शुभ हो
पुस्तकालय देखना – समृधि बढे
पुस्तक खोना – मानहानि हो
पुस्तक मिलना – मान सम्मान में वृद्धि हो
पुजारी बनना – जीवन में उन्नति हो
पुडिया बंधना – शारीरिक कष्ट बढे
पुरस्कार मिलना – हानि हो
पुल पार करना – धन लाभ हो
पुल टूटते देखना – संकट से छुटकारा हो
पूजा पाठ करना – सुख शान्ति तथा समृद्धि की सूचना
पूर्वज देखना – शुभ स्वप्ना , समृद्धि बढे
पूजा या प्रार्थना करना – मानसिक शान्ति मिले
प्रेम प्रस्ताव रखना – विवाह में विलंभ हो
पेड़ पौधे देखना – कार्य में लाभ हो
पेटी खोलना – चोरी की संभावना
पेशाब करना – संकट दूर हो , धनप्राप्ति हो
पेढा खाना – मुह में रोग हो
पैर कटे देखना – शत्रु पर विजय हो
पैर खुजलाना – यात्रा शीघ्र हो
पैबंद लगाना – कष्ट के पूर्व सूचना
पैसा मिलना – मुफ्त का धन मिले
पेन पेंसिल देखना – परीक्षा में उत्तीरण हो
पोचा लगाना – स्थान परिवर्तन हो
पोशाक पहनना – बीमारी आने का संकेत
25 स्वप्नों का अर्थ   फ
फलाहार करना – सुख समृद्धि बढे
फटे कपडे देखना – धनहानि हो , चिंताए बढे
फ़कीर देखना – काम में सफलता मिले
फ़रिश्ता देखना – मनोकामना पूर्ण हो
फंदा लगाना या देखना – मुसीबतों से छुटकारा मिले
फफोला टूटना – मुसीबतें समाप्त हो
फवारा देखना – सभी मुसीबते दूर हो ,प्रसन्नता बढे
फाखता देखना – पत्नी की ओर से कष्ट मिले , मानसिक ग्लानी हो
फाटक देखना – मुकदमा समाप्त हो
फाटक पार करना -सफलता मिले
फिटकरी देखना – धन लाभ हो
फांसी लगाना – जीवन में दिशा परिवर्तन हो
फिरोजा रत्न देखना – शत्रुओं पर विजय हो
फूलवारी देखना – मनपसंद विवाह होना , ख़ुशी मिले
फुल्का खाते देखना – आर्थिक समृद्धि हो , परन्तु शोक समाचार मिले
फुलझडी छूटते देखना – विवाह में सम्मिलित हो
फुहार पढ़ते देखना – धन संमृद्धि बढे
फूलदान देखना – मान सम्मान बढे
फूटी आँख देखना – शारीरिक व् आर्थिक कष्ट बढे
फूंक मारना – सामाजिक कार्यो में मान सम्मान बढे
फूल खिलते देखना – प्रसन्नता बढे , संतान हो
फूल जलते देखना – प्रिय व्यक्ति की मृत्यु देखना
26 स्वप्नों का अर्थ   ब
बतक पानी में देखना – शुभ समाचार मिले
बतख ज़मीन पर देखना -धन हानि हो
बन्दर देखना – धन वृद्धि हो , अच्छा भोजन मिले
बटन लगाना – संकट आने की सूचना
बटन देखना – धन बढे
बरसात देखना शहर पर – खुशहाली बढे
बरसात देखना अपने घर पर – संकट आये
बरसात में छत्री लगाकर चलना – संकट दूर हो
बकरी चुराना या खोना – लडाई हो
बर्फ खाना – चिंताए दूर हो
बर्फ गिरते देखना – आर्थिक समृद्धि हो
बनिए को दरवाज़े पर देखना – क़र्ज़ बढे
बटुआ देखना – धन लाभ हो , रोग दूर हो
बनयान पेहेनना – धन बढे , सुख शान्ति मिले
बगुला देखना – सफ़ेद देखने पर लाभ , काला देखने पर हानि हो
बधाई का सन्देश मिलना – दुखद सूचना मिले
बछिया देखना – शुभ समाचार मिले
बाल गिरते देखना – आर्थिक कष्ट बढे
बाजू काटना – अपमानित होना पढ़े
बाजू पर चोट लगाना – माता पिता के लिए अनिष्टकारक
बाजू कटी देखना – शत्रु पर विजय मिले
बांस देखना – लगातार उन्नति हो
बाज़ देखना – दुर्घटना में फँसना पढ़े
बाज़ द्वारा झपट्टा मारना – पहाड़ से गिरने के लक्षण
बरात में जाना – अशुभ समाचार मिले
बाघ देखना – शत्रु पर विजय हो
बारहसिंघा देखना – दूर स्थान की यात्रा हो
बाढ़ देखना – संकटों से छुटकारा हो
बाढ़ में घिरना – वातावरण सुखद हो
बाढ़ में फंसे आदमियों को बचाना – गृह कलेश बढ़ना
बाढ़ के पानी में तैरना -व्यापार में सफलता मिले
बाढ़ में लोगों को डूबते देखना – लम्बी यात्रा हो
बादल बरसते देखना -पारिवारिक सुख शान्ति या समृद्धि
बादल से बिजली गिरते देखना -अशुभ समाचार मिले
बादल को छूना – धन वृद्धि हो
बाज़ार में स्वयं घूमना – अच्छे समाचार मिले
बाज़ार देखना – धन हानि हो , व्यापार में घाटा हो
बाजीगरी देखना – षडयंत्र में फसना पढ़े
बादाम खाना – स्वस्थ्य खराब हो , अस्पताल में भर्ती होना पढ़े
बादाम देखना – धन वृद्धि हो
बादशाह देखना – धन वृद्धि हो , मान सम्मान बढे
बाल कटे देखना सर के – क़र्ज़ से छुटकारा मिले
बाल काले देखना(अपने सर के) – अधिक धन मिले
बाल सफ़ेद देखना (अपने) – समाज में उच्च स्थान मिले
बाल कटे देखना – गृह कलेश बढे
बाल देखना (हथेली या तलुओं में) – क़र्ज़ में फसना पढ़े
बाल देखना (बगल के या नाभि के नीचे के) – अपमानित होना पढ़े
बातें बहुत करना – काम में वृद्धि हो , मान सम्मान बढे
बालू देखना – धन लाभ हो
बालू छानते देखना – आर्थिक परेशानी बढे
बिछु , सांप या भयानक जीव देखना – धन मिले
बौना देखना – शुभ समय नज़दीक है
बाइबल – ज्ञान में वृद्धि हो
27 स्वप्नों का अर्थ   भ
भण्डार देखना – काफी धन लाभ हो
भटठा देखना – भूमि तथा भवन में वृद्धि हो
भभूत लगाना – शीघ्र विवाह हो तथा गृहस्थी का सुख मिले
भाई देखना – भाई की आयु वृद्धि हो तथा ,रोग दूर हो
भाभी देखना – स्वयं को कष्ट मिले , भतीजा जन्मे
भागते देखना – कष्ट मिटे , अच्छा समय आने वाला है
भंग का नशा करना – अपमानित होना पढ़े
भांड देखना -लडाई झगडा अथवा वाद विवाद में फँसना पड़े
भाला लेकर चलना – शत्रु पर विजय हो
भाला मारना – अपमानित होना पढ़े
भाले के खेल का प्रदर्शन करना – संकट या दुर्घटना आये
भीड़ का छठा देखना – काफी लाभ मिले
भीड़ का काटना – दुःख आये
भिन्डी देखना – सुखो में वृद्धि हो , आलस्य बढे
भिखारी देखना – कार्य के अच्छे परिणाम मिले
भीगते देखना – सुख समृद्धि में वृद्धि हो
भीख मांगना या देना – पारिवारिक सुख – संपत्ति तथा समृद्धि बढे
भीड़ देखना या उसमे चलना – कार्य अधूरा हो
भीड़ को उग्र रूप में देखना – कार्य में सफलता मिले
भूचाल देखना – तबाही आये , जनता पर संकट पढ़े
भूसा देखना – पशुओं से लाभ मिले
भूमिगत स्वयं को देखना – भयंकर बीमारी आये या विपत्ति बढे
भेडिया देखना – विश्वाश घात हो खतरे की सूचना
भेड़ अकेली देखना – अशुभ हो
भेड़ो को समूह देखना – लाभ हो
भैंसा देखना – संघर्ष करने से सफलता मिलेगी
भैस देखना – अच्छा भोजन मिले
28 स्वप्नों का अर्थ   म
मछर देखना – अपमानित होना पड़े
मछली देखना – गृहस्थी का सुख मिले
मखी देखना – धन हानि हो
मकडी देखना – बहुत अधिक मेहनत करनी पड़े
मकान बनते देखना – मान सम्मान में वृद्धि हो
मलाई खाना – धन वृद्धि हो
मंदिर या मस्जिद देखना – खुशहाली बढे
मंदिर में पुजारी देखना – गृह कलेश बढे
मर जाना – धन वृद्धि हो
मखमल पर बैठना – लम्बी बीमारी आये
मगरमच देखना – शुभ समाचार मिले
मंत्री देखना – मान सम्मान में वृद्धि हो
माला ( पूजा वाली ) शुभ समय आने का संकेत
माला फूलों की पहनाना- मान सम्मान में वृद्धि हो
मातम करना – खुशहाली बढे
माली देखना – घर में समृधि बढे
मिर्च खाना – काम में सफलता मिले
मिर्गी से पीड़ित होना या देखना – बुद्दि तेज हो
मिठाई खाना या बाँटना – बिगडे काम बने
मीट खाना – मनोकामना पूरण हो
मुर्दा उठा कर ले जाते देखना – बिना कमाया माल मिले
मुर्दे को जिन्दा देखना – चिंता दूर हो
मुर्दा शारीर से आवाज़ आना – बना काम बिगड़ जाना
मुर्दों का समूह देखना – गलत सोसाइटी में काम करना पड़े
मुर्दे को नहलाना – धन वृद्धि हो
मुर्दे को कुछ देना – शुभ समाचार
मुर्दे के साथ खाना -अच्छा समय आये
मुर्गा देखना -विदेश व्यापार बढे
मुर्गी देखना -गृहस्थी का सुख मिले
मोहर लगाना – धन वृद्धि हो
मुरझाये फूल देखना – संतान को कष्ट हो
मुंडन कराना या होते देखना -गृहस्थी का तनाव दूर हो
मुहर्रम देखना – कारोबार में उन्नत्ति हो
मूंगा पहनना या देखना – कारोबार में उन्नत्ति हो
मूंग मसूर या मोठ देखना – अनेक परेशानी हो
मोची देखना -यात्रा लाभदायक हो
मोम देखना – झगडे या विवाद में समझोता हो
मोर नाचते देखना – शुभ समाचार मिले
मोर मोरनी देखना – दांपत्य सुख में वृद्धि हो
मोजा पहनना – पति पत्नी में प्रेम बड़े
मोमबत्ती देखना – विवाह हो
29 स्वप्नों का अर्थ   य
यन्त्र बनाना या देखना – अशुभ फल हो
यग करना या देखना – धन वृद्धि हो
यमराज देखना – बीमारी दूर हो
योजना बनाना -अशुभ फल
योगासन करना – शुभ फल
30 स्वप्नों का अर्थ   र
रजाई ओड़ना – धन मिले
रजाई नई बनवाना – स्थान परिवर्तन हो
रजाई फटी पुरानी देखना – शुभ कार्य के लिए निमंत्रण हो
रस्सी लपेटना – सफलता मिले
रथ देखना -यात्रा करनी पड़े
रसभरी खाना – विवाह हो
रसगुल्ला खाना – धन वृद्धि हो
रद्दी देखना – रुका हुआ धन मिले
रंग करना – सम्बंधित वास्तु की हानि हो
रक्षा करना – मान सम्मान में वृद्धि हो
रफू करना – नई वस्त्रो या आभूषनो की प्राप्ति हो
रक्षा बंधन देखना – धन वृद्धि हो
रसोई घर गन्दा देखना – अच्छा भोजन मिले
रसोई घर स्वछ देखना -धन का संकट आये
रास्ता देखना (साफ) -तरक्की मिले
रास्ता देखना (टेड़ा मेडा ) परेशानी हो
राख देखना – धन नाश हो
रॉकेट देखना – धन संपत्ति में वृद्धि हो
रात देखना -परेशानी आये
राइ देखना – काम में रूकावट आये
राक्षश देखना – संकट आये
रामलीला देखना – सुख सौभाग्य में वृद्धि
रिश्वत लेना – सावधान रहे
रिवाल्वर चलाना – शत्रुता समाप्त हो
रिक्शा देखना या उसमे बैठना – प्रसन्त्ता बढे
रेलवे स्टेशन देखना -लाभदायक यात्रा हो
रेल देखना – कष्ट दायक यात्रा हो
रेडियो बजता देखना – प्रगति में रूकावट हो
रेफ्रिजिरटर देखना – आर्थिक लाभ हो
रेगिस्तान देखना – धन सम्पदा में वृद्धि
रोजा रखना – आर्थिक संकट आने का संकेत
रोना – मान सम्मान में वृद्धि हो
रोशनदान से देखना – विदेश से धन की प्राप्ति हो
रोटी खाना या पकाना – बीमारी आने का संकेत
रोटी बाँटना – धन लाभ हो
रोटी फैंकना या गिरी हुई देखना – देश में मन न लगे , विदेश की यात्रा शीघ्र हो
31 स्वप्नों का अर्थ   ल
लंगर खाना या देखना -धन वृद्धि हो ,व्यवसाय में तेजी आये
लंगूर देखना -शुभ समाचार मिले
लंगोटी देखना -आर्थिक कठिनाईया बढे
लकीर खींचना -गृह कलेश बढे , अनावश्यक झगडे हो
लटकना या लटकते हुए देखना -सोचा हुआ काम शीघ्र बने , आर्थिक समृद्धि बढे
लड़का गोद में देखना (अपना) – धन वृद्धि हो , व्यवसाय में तेजी आये
लड़का गोद में देखना (अनजान) – परेशानी बढे ,घर में कलेश हो
लड़ना – विद्रोहियों के साथ – देश तथा समाज में अशांति फैले
लगाम देखना -मान सम्मान बढे , धन वृद्धि हो
लक्ष्मी का चित्र देखना -धन तथा सुख सौभाग्य की वृद्धि हो
लहसुन देखना – धन वृद्धि हो परन्तु अन्न व् सब्जी के व्यापार में हानि हो
लक्कड़ बाघ देखना – नयी मुसीबतें आने का संकेत
लपटें देखना (आग की ) – परिवार में शान्ति बढे , झगडा ख़तम हो
लाल आँखे देखना – शुभ फल की प्राप्ति
लालटेन जलना – चलते हुए काम में रोड़ा अटके
लालटेन बुझाना – अनेक समस्या स्वयं निपट जाये
लाट या मीनार देखना -आयु वृद्धि हो , सुख शान्ति बढे
लाठी देखना -सुख शांति में वृद्धि हो ,अच्छे सहयोगी मिले
लाल टीका देखना -सत्संग से लाभ हो, कामो में सफलता मिले
लाल वस्त्र दिखाई देना – धन नाश हो ,खतरा बढे
लाल आकाश में देखना -लडाई झगडा व् आतंक में वृद्धि ,धन तथा देश की हानि हो
लिबास (अपने कपडे)सफ़ेद देखना – सुख , शान्ति तथा समृद्धि में वृद्धि हो
लिबास हरा देखना – धन दौलत बढे , स्वस्थ्य अच्चा हो
लिबास पीला देखना -स्वस्थ्य में खराबी आये ,चोरी हो
लिबास मैला देखना -धन हानि हो ,खराब समय आने वाला है
लिफाफा खोलना -समाज में मानहानि हो , गुप्त बात सामने आये
लोहा देखना – काफी मेहनत करने के बाद सफलता मिले
लोहार देखना – मान सम्मान बढे , शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो
लोबिया खाना – धन तथा व्यवसाय में वृद्धि हो
लौकी देखना या खाना -शुभ समाचार मिले , धन वृद्धि हो ,नौकरी में पदोंनिती हो
32 स्वप्नों का अर्थ   व
वकील देखना – कठिनाई बढे , झगडा हो
वजीफा पाना -काम में असफलता मिले , धनहानि हो
वरमाला देखना या डालना -घर में कलेश हो मित्र से लडाई हो
वसीयत करना -भूमि सम्बन्धी विवाद हो , घर में तनाव बढे
वायदा करना – झूठ बोलने की आदत पढ़े
वाह वाह करके हसना -मान सम्मान का ध्यान रखे , शत्रु बदनाम करेंगे
वार्निश करना (घर की वस्तुओं पर)- परिवार पर संकट आये, स्वस्थ्य खराब हो
वाष्प उड़ते देखना – धनहानि हो , दुर्घटना तथा शारीरिक कष्ट हो
विदाई समारोह में भाग लेना – व्यापार में तेजी आये , धन वृद्धि हो
विमान देखना – धन हानि हो
विस्फोट देखना या सुनना – नया कारोबार शुरू हो , बड़े व्यक्तियों से मुलाकात हो
वीणा बजाना (स्वयं द्वारा) – धन धान्य तथा समृद्धि प्राप्त हो
वीणा बजाना – शोक समारोह में शामिल होना पड़े , (दूसरो द्वारा)मानसिक कष्ट हो
वृद्धा देखना – अशुभ समाचार मिले
33 स्वप्नों का अर्थ   श
शंख बजाना, देखना, सुनना – शुभ समाचार
शंकरजी को देखना – सुखो में वृद्धि
शरबत देखना – बीमारी दूर हो
शतरंज देखना – समय व्यर्थ में बर्बाद हो
शराब देखना – बिना कमाया धन मिले
शराब पीना – धन वृद्धि हो
शमा (दीपक )देखना – मान सम्मान में वृद्धि हो
शमा दान देखना – बीमारी दूर हो
शहद की मक्खी देखना – धन वृद्धि हो
शहद देखना – शुभ कार्यो में रूचि बढे
शरीफा खाना या देखना – स्वस्थ्य में लाभ हो
शहतूत देखना – अच्छा भोजन मिले
शहनाई बजाना या देखना – दुखद समाचार मिले
शमशान पर जाना – आयु वृद्धि हो
शहर को जाना – धन वृद्धि हो
शहर का विनाश देखना – अपना निवास स्थान खाली करना पड़े
शव के साथ चलना – भाग्य वृद्धि
शरीर की मालिश करना – रोग बढे
शमियाना देखना – धन वृद्धि हो
श्राद्ध करना – अच्छा समय आने की सूचना
शाल ओड़ना -अपयश मिले
शार्क मछली देखना – विदेश यात्रा हो
शिकार करना – परिवार पर संकट आये
शीशा देखना – लम्बी बीमारी आये
शीशा तोड़ना – परेशानी आये
शेर देखना – शत्रु पर विजय हो
शोक मगन होना – घर में उत्सव का आयोजन हो
34 स्वप्नों का अर्थ   श्र
श्रंगार करना – प्रेम प्रसंगों में वृद्धि हो
श्रंगार दान टूटना – दांपत्य जीवन में सुख व् सफलता मिले
35 स्वप्नों का अर्थ   ह
हड्डी देखना – शुभ समाचार मिले , स्वस्थ्य में लाभ
हरियाली देखना – मन प्रसन्न रहेगा
हल्दी की गाँठ देखना – आर्थिक प्रगति हो
हल्दी पीसी देखना – परेशानी आये हकीम देखना – बीमारी आये परन्तु ज्ञान भी बढे
हत्या होते देखना – दीर्घायु हो , दुश्मनों से सावधान रहे
हत्या करना – लडाई झगडा शान्ति हो
हरा रंग देखना – सुख शान्ति में वृद्धि हो
हथौडा देखना – सम्मान मिले परन्तु परिश्रम अधिक हो
हशीश पीते देखना – कष्टों में वृद्धि हो
हजामत बनते देखना – ठगे जाने की संभावना
हज करना – मनोकामना पूर्ण हो
हमला होना – दुर्घटना की पूर्व
हवा में उड़ते देखना – यात्रा में कष्ट आये
हवा तेजी से चलते देखना – दुखो में वृद्धि हो
हवा माध्यम चलते देखना -शत्रु हानि पहुंचाए
हथकडी देखना – परेशानियां बढे
हथेली देखना (पुरुष का) – शत्रुता बढे
हथेली देखना (स्त्री का ) – प्यार बढे
हवेली देखना – किसी नजदीकी व्य समाचार
हलवाई की दूकान देखना – इच्छाए बहुत बढे परन्तु अपूर्ण रहे
हवाई जहाज़ देखना – व्यापार में अधिक झूठ बोलना पढ़े , लाभ हो
हँसना – अकारण परेशानी बढे
हसती स्त्री देखना – गृह कलेश बढे
हसाना (दूसरों के द्वारा ) – मनोकामना पूर्ण हो
हसुली देखना – जीवन में आनंद बढे
हाथ देखना – अच्चे मित्रों से मुलाकात हो
हाथ कटा हुआ देखना – लडाई में हानि हो
हाथ पर चित्रकारी देखना – आजीविका के लिए संघर्ष करना पढ़े
हाथ धोना – काम अपूर्ण रहे , नाकामयाबी मिले
हाथ से आसमान छूना – मनोकामना पूर्ण हो , काम में तरक्की मिले
हाथ बंधे देखना – बुरे काम का बुरा नतीजा भुगतना पढ़े
हाथी देखना – संतान हो , नया कार्य शुरू हो
हाथी की सवारी करना – मान सम्मान बढे , सरकार से लाभ हो
हाथी मस्त देखना – धनवृद्धि हो
हिसाब किताब लगाना – अपव्यय हो , काम में सावधानी बरते
हिरन देखना – सफलता मिले , शीघ्र विवाह हो , धन लाभ हो
हिमपात देखना – बिगडे काम बने , काफी धन की प्राप्ति हो
हिमखंड देखना – किसी नजदीकी मित्र से धोखा मिलने की संभावना है
हीरा देखना – धन वृद्धि हो परन्तु संघर्ष अधिक हो
हुंकार सुनना – शत्रु से पराजय होना पड़े
हुक्का पीना या पिलाना – मित्रता बढे
हुक्का पीते देखना – व्यर्थ में समय खराब हो
हुकुम का इक्का देखना – चलते हुए काम में रुकावट आएगी , निराशा बढे
होटल देखना – काम में तंगी आये , धन की कमी हो





36 स्वप्नों का अर्थ   द
दरवाजा बंद देखना – चिंता बढे
दही देखना -धन लाभ हो
दलिया खाना या देखना – स्वस्थ्य कुछ समय के लिए ख़राब हो
दरार देखना – घर में फूट
दलदल देखना – काम में आलस्य हो
दरवाजा खोलना – नया कार्य शुरू हो
दरवाजा गिरना – अशुभ संकेत
दक्षिणा लेना या देना – व्यापार में घाटा
दमकल चलाना – धन वृद्धि हो
दर्पण देखना – मानसिक अशांति
दस्ताना पहनना – शुभ समाचार
दहेज़ लेना या देना – चोरी की सम्भावना
दरजी को काम करते देखना – कोर्ट से छुटकारा
दवा खाना या खिलाना – अच्छा मित्र मिले
दवा गिरना – बीमारी दूर हो
दांत टूटना – शुभ
दांत में दर्द देखना -नया कार्य शुरू हो
दाडी देखना – मानसिक परेशानी हो
दादा या दादी देखना जो मृत हो – मान सम्मान बढे
दान लेना – धन वृद्धि हो
दान देना – धन हानि हो
दाह क्रिया देखना – सोचा हुआ कार्य बनने के संकेत
दातुन करना -कष्ट मिटे
दाना डालना पक्षियो को – व्यापार में लाभ हो
दाग देखना – चोरी हो
दामाद देखना -पुत्री को कष्ट हो
दाल कपड़ो पर गिरना -शुभ लक्षण
दाल पीना – कार्य में रूकावट
दाढ़ी सफेद देखना – काम में रूकावट
दाढ़ी काली देखना – धन वृद्धि हो
दियासिलाई जलाना – दुश्मनी बढे
दीपक बुझा देना – नया कार्य शुरू हो
दीपक जलाना – अशुभ समाचार मिले
दीवाली देखना – व्यापार में घाटा हो
दीपक देखना – मान सम्मान बढे
दुल्हन देखना – सुख मिले
दुकान करना – मान सम्मान बढे
दुकान बेचना – मानहानि हो
दुकान खरीदना – धन का लाभ होना
दुकान बंद होना – कष्टों में वृद्धि हो
दुपट्टा देखना – स्वस्थ्य में सुधार हों
दूल्हा /दुल्हन बनना – मानहानि हों
दूल्हा /दुल्हन बारात सहित देखना -बीमारी आये
दूरबीन देखना – मान सम्मान में हानि हों
दूध देखना – आर्थिक लाभ मिले
दुकान पर बैठना – प्रतिष्ट बढे,धन लाभ हों
देवता से मंत्र प्राप्त होना – नए कार्य में सफलता
देवी देवता देखना – सुख संपत्ति की वृद्धि होना
दोना देखना – धन संपत्ति प्राप्त होना
दोमुहा सांप देखना – दुर्घटना हों, मित्र द्वारा विश्वासघात मिले
दौड़ना – कार्य में असफलता हों
देवी देवता देखना – कृष्ण – प्रेम संबंधो में वृद्धि
देवी देवता देखना – राम – सफलता मिले
देवी देवता देखना – शिव – मानसिक शांति बढे
देवी देवता देखना – विष्णु – सफलता मिले
देवी देवता देखना – ब्रह्मा – अच्छा समय आने वाला है
देवी देवता देखना – हनुमान -शत्रु का नाश हो
देवी देवता देखना – दुर्गा – रोग दूर हो
देवी देवता देखना – सीता – पहले कष्ट मिले फिर समृधि हो
देवी देवता देखना – राधा – शारीरिक सुख मिले
देवी देवता देखना – लक्ष्मी – धन धन्य की प्राप्ति हो
देवी देवता देखना – सरस्वती -भविष्य सुखद हो
देवी देवता देखना – पार्वती – सफलता मिले
देवी देवता देखना – नारद -दूर से शुभ समाचार मिले