Saturday, September 27, 2014

नियमों का करेंगे पालन तभी सिद्ध होंगे उपाय

नियमों का करेंगे पालन तभी सिद्ध होंगे उपाय
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कुछ परिस्थितियों में अगर आप बार बार मेहनत करने पर भी कार्य में सफल
नहीं हो पा रहे और आपका आत्मविश्वास बार बार धोखा दे रहा हे
तो ज्योतिष के माध्यम से आप अपने प्रतिकुल ग्रहों को अनुकुल करने
का प्रयास करते हैं। आप उपाय करने की ठान तो लेते हैं आप उपाय
भी करते हो कुछ लोगो को फायदा होता है कुछ लोगो को नहीं -- में
आपसे कहना चाहूंगी की उपाय करने के भी कुछ नियम होते हैंयदि आप उन
नियमो के आधार पर उपाय करे तो अबश्य सिद्ध होंगे उपाय जैसे--
1 अपनी किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए उपाय करें
तो उसके प्रति मन में श्रद्धा रखें।
2 सच्ची भावना से किए गए उपाय अवश्य सिद्ध होते हैं एवं
मनचाही मुरादों की पूर्ति होती है। केवल कार्य की सिद्धि के लिए
अनमने मन से किए गए उपाय अपना प्रभाव नहीं दिखाते।
3 किसी भी उपाय को होंद में लाने के लिए ब्रह्म मूहर्त के बाद एवं सूर्य
अस्त होने से पहले करें, रात को किए गए उपाय विपरीत प्रभाव दे सकते
हैं। जब चन्द्र ग्रहण होता है उस समय जो उपाय होंद में लाए जाते हैं वह
रात के समय ही किए जाते हैं।
5 अगर आप उपाय करने में असमर्थ हैं तो आपका जिन से खून
का रिश्ता हो वह आपके स्थान पर उपाय कर सकते हैं।
ऐसा करना उतना ही फलदाई होगा जितना आपके स्वयं आपने हाथों से
उपाय करना।
6 एक दिन में एक ही उपाय को होंद में लाएं। दो उपाय एक साथ करने से
वह प्रभावहीन हो जाते हैं।
7 उपाय करते समय पंडित जी जो नियम र्निधारित करें उन पर अवश्य अमल
करें अन्यथा उपाय का कोई लाभ नहीं होगा।
8 जितने दिन अथवा जितनी अवधी के लिए उपाय करने को कहा जाए
वैसा ही करें। उस में अपनी सुविधा अनुरूप कोई बदलाव मत लाएं।
10 घर में सूतक अथवा पातक चल रहा हो तो 40 दिन तक उपाय मत करें

Monday, September 22, 2014

22 Reasons To Believe Hinduism Is Based On Science

22 Reasons To Believe Hinduism Is Based On Science

1. वृक्ष
People are advised to worship Neem and Banyan tree in
the morning. Inhaling the air near these trees, is good for
health.
2. योग
If you are trying to look ways for stress management,
there can’t be anything other than Hindu Yoga aasan
Pranayama (inhaling and exhaling air slowly using one of
the nostrils).
3. प्रतिष्ठान
Hindu temples are built scientifically. The place where an
idol is placed in the temple is called ‘Moolasthanam’. This
‘Moolasthanam’ is where earth’s magnetic waves are
found to be maximum, thus benefitting the worshipper.
4.तुलसी
Every Hindu household has a Tulsi plant. Tulsi or Basil
leaves when consumed, keeps our immune system strong
to help prevent the H1N1 disease.
5. मन्त्र
The rhythm of Vedic mantras, an ancient Hindu practice,
when pronounced and heard are believed to cure so many
disorders of the body like blood pressure.
6. तिलक
Hindus keep the holy ash in their forehead after taking a
bath, this removes excess water from your head.
7. कुंकुम
Women keep kumkum bindi on their forehead that protects
from being hypnotised.
8. हस्त ग्रास
Eating with hands might be looked down upon in the west
but it connects the body, mind and soul, when it comes to
food.
9. पत्तल
Hindu customs requires one to eat on a leaf plate. This is
the most eco-friendly way as it does not require any
chemical soap to clean it and it can be discarded without
harming the environment.banana; palash leaves
10. कर्णछेदन
Piercing of baby’s ears is actually part of acupuncture
treatment. The point where the ear is pierced helps in
curing Asthma.
11. हल्दी
Sprinkling turmeric mixed water around the house before
prayers and after. Its known that turmeric has antioxidant,
antibacterial and anti-inflammatory qualities.
12. गोबर
The old practice of pasting cow dung on walls and outside
their house prevents various diseases/viruses as this cow
dung is anti-biotic and rich in minerals.
13. गोमूत्र
Hindus consider drinking cow urine to cure various
illnesses. Apparently, it does balance bile, mucous and
airs and a remover of heart diseases and effect of poison.
14.शिक्षा
The age-old punishment of doing sit-ups while holding the
ears actually makes the mind sharper and is helpful for
those with Autism, Asperger’s Syndrome, learning
difficulties and behavioural problems.
15. दिया
Lighting ‘diyas’ or oil or ghee lamps in temples and house
fills the surroundings with positivity and recharges your
senses.
16.जनोई ‘
Janoyi’, or the string on a Brahmin’s body, is also a part
of Acupressure ‘Janoyi’ and keeps the wearer safe from
several diseases.
17. तोरण
Decorating the main door with ‘Toran’- a string of
mangoes leaves;neem leaves;ashoka leaves actually
purifies the atmosphere.
18.चरणस्पर्श
Touching your elder’s feet keeps your backbone in good
shape.
19. चिताग्नि
Cremation or burning the dead, is one of the cleanest form
of disposing off the dead body.
20. ॐ
Chanting the mantra ‘Om’ leads to significant reduction in
heart rate which leads to a deep form of relaxation with
increased alertness.
21. हनुमान चालीसा
Hanuman Chalisa, according to NASA, has the exact
calculation of the distance between Sun and the Earth.
22.शंख
The ‘Shankh Dhwani’ creates the sound waves by which
many harmful germs, insects are destroyed.The mosquito
breeding is also affected by Shankh blowing and
decreases the spread of malaria.

Sunday, September 21, 2014

लग्न के अनुसार मंत्र का जाप

लग्न के अनुसार मंत्र का जाप
इष्ट को मनाएँ उनके ही मंत्र से ....
इष्ट का बड़ा महत्व होता है। यदि इष्ट का साथ मिल जाए
तो जीवन की मुश्किलें आसान
होता चली जाती हैं। कुंडली में कितने
भी कष्टकर योग हो, इष्ट की कृपा से
जीवन आसान हो जाता है। अतः हर व्यक्ति को अपने इष्ट और
उसके मन्त्र की जानकारी होना जरूरी है।
लग्न कुंडली का नवम भाव इष्ट का भाव होता है और नवम से
नवम होने से पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है। इस भाव में
जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे
इष्ट कहलाते है। उनका मंत्र ही इष्ट मन्त्र कहलाता है।
यहाँ लग्न के अनुसार आपके इष्टदेव और उनके मंत्र
की जानकारी दी जा रही है।
1. मेष लग्न के इष्ट देव हैं विष्णु जी - मंत्र- ऊँ नमो भगवते
वासुदेवाय
2. वृषभ लग्न के इष्ट हैं गणपति जी - मंत्र- ऊँ गं गणपतये
नमः
3. मिथुन लग्न की इष्टदेवी हैं माँ दुर्गा - मंत्र- ऊँ
दुं दुर्गाय नमः
4. कर्क लग्न के इष्ट हैं हनुमान जी - मंत्र- ऊँ हं
हनुमंताय नमः
5. सिंह लग्न के इष्ट है विष्णु जी - मंत्र- ऊँ नमो भगवते
वासुदेवाय
6. कन्या लग्न के इष्ट हैं शिव जी - मंत्र-ऊँ नमः शिवाय
7. तुला लग्न के इष्ट हैं रूद्र जी - मंत्र- ऊँ रुद्राय नमः
8. वृश्चिक लग्न के इष्ट होंगे विष्णु जी - मंत्र- ऊँ गुं गुरुवे
नमः , ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय
9. धनु लग्न के इष्ट है हनुमान जी - मंत्र- ऊँ हं हनुमंताय
नमः
10. मकर लग्न की इष्ट है
देवी भगवती - मंत्र- ऊँ दुं दुर्गाय नमः
11. कुम्भ लग्न के इष्ट है गणपति जी - मंत्र- ऊँ गं गणपतये
नमः
12. मीन लग्न के इष्ट हैं शिव जी - मंत्र- ऊँ
नमः शिवाय
विशेष : इष्ट मंत्र का जाप नियमित रूप से और रोज एक निश्चित समय पर
ही करना चाहिये और कम से कम 108 बार.....

Sunday, May 4, 2014

लाल किताब के अचूक उपाय धन संपत्ति दिलाएं

लाल किताब के अचूक उपाय धन संपत्ति दिलाएं
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Photo: लाल किताब के अचूक उपाय धन संपत्ति दिलाएं
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1 लोहे के पात्र में जल, चीनी, घी तथा दूध का मिश्रण बना कर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।

2 कच्ची धानी के तेल से दीपक जलाएं, उसमें लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। समस्त विध्नों का नाश होगा और धन प्राप्ती के साधन बनने लगेंगे।

3 धनहानि हो रही हो तो बृहस्पतिवार के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल से सुंदर रंगोली बनाएं अथवा गुलाल का छिड़काव करके देसी घी का दो मुख वाला दीपक जलाएं। जब दीपक बढ़ जाए तो उसे चलते हुए पानी में परवाह कर दें।

4 मुट्ठी भर काले तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर से सात बार फेर कर घर की उत्तर दिशा में फेंक दें। धनहानि समाप्त हो जाएगी।

5 घर से धन का अभाव दूर करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें, प्रतिदिन कुत्ते को दूध पिलाएं। घर के सभी कमरों में मोर पंख रखें।

6 आर्थिक तंगी से परेशान हों तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) का रोपण करें।

7 मां लक्ष्मी के श्री स्वरूप के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाने से धन लाभ होने लगता है।

8 कारोबार में दिन दुगुनी रात चौगुणी तरक्की करने के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाएं।

9 घर में सुख समृद्धि का समावेश करवाने के लिए उत्तर पश्चिमी कोण में मिट्टी के बर्तन में थोड़े से सोने-चांदी के सिक्के किसी लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर उस बर्तन को गेहूं अथवा चावलों से भर दें।

10 कलह क्लेश से निजात पाने के लिए पके हुए मिट्टी के घड़े पर लाल रंग का पेंट करके उसके मुख पर मोली बांधें और उसके बीच जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें।1 लोहे के पात्र में जल, चीनी, घी तथा दूध का मिश्रण बना कर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।

2 कच्ची धानी के तेल से दीपक जलाएं, उसमें लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। समस्त विध्नों का नाश होगा और धन प्राप्ती के साधन बनने लगेंगे।

3 धनहानि हो रही हो तो बृहस्पतिवार के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल से सुंदर रंगोली बनाएं अथवा गुलाल का छिड़काव करके देसी घी का दो मुख वाला दीपक जलाएं। जब दीपक बढ़ जाए तो उसे चलते हुए पानी में परवाह कर दें।

4 मुट्ठी भर काले तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर से सात बार फेर कर घर की उत्तर दिशा में फेंक दें। धनहानि समाप्त हो जाएगी।

5 घर से धन का अभाव दूर करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें, प्रतिदिन कुत्ते को दूध पिलाएं। घर के सभी कमरों में मोर पंख रखें।

6 आर्थिक तंगी से परेशान हों तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) का रोपण करें।

7 मां लक्ष्मी के श्री स्वरूप के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाने से धन लाभ होने लगता है।

8 कारोबार में दिन दुगुनी रात चौगुणी तरक्की करने के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाएं।

9 घर में सुख समृद्धि का समावेश करवाने के लिए उत्तर पश्चिमी कोण में मिट्टी के बर्तन में थोड़े से सोने-चांदी के सिक्के किसी लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर उस बर्तन को गेहूं अथवा चावलों से भर दें।

10 कलह क्लेश से निजात पाने के लिए पके हुए मिट्टी के घड़े पर लाल रंग का पेंट करके उसके मुख पर मोली बांधें और उसके बीच जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें।

ऊपरी हवा पहचान और निदान

ऊपरी हवा पहचान और निदान
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हम जहां रहते हैं वहां कई ऐसी शक्तियां होती हैं, जो हमें दिखाई नहीं देतीं किंतु बहुधा हम पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं जिससे हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो उठता है और हम दिशाहीन हो जाते हैं। इन अदृश्य शक्तियों को ही आम जन ऊपरी बाधाओं की संज्ञा देते हैं। भारतीय ज्योतिष में ऐसे कतिपय योगों का उल्लेख है जिनके घटित होने की स्थिति में ये शक्तियां शक्रिय हो उठती हैं और उन योगों के जातकों के जीवन पर अपना प्रतिकूल प्रभाव डाल देती हैं।
ज्योतिश सिद्धांत के अनुसार गुरु पित्रदोश, शनि यमदोष, चन्द्र व शुक्र जल देवी दोष, राहु सर्प व प्रेत दोष, मंगल शाकिनी दोष, सूर्य देव दोष एवं बुध कुल देवता दोष का कारक होता है। राहु, शनि व केतु ऊपरी हवाओं के कारक ग्रह हैं। जब किसी व्यक्ति के लग्न (शारीर), गुरु (ज्ञान), त्रिकोण (धर्म भाव) तथा द्विस्वभाव राशियों पर पाप ग्रहों का प्रभाव होता है, तो उस पर ऊपरी हवा क़ी संभावना होती है।
प्राय: सभी धर्मग्रंथों में ऊपरी हवाओं, नज़र दोषों आदि का उल्लेख है। कुछ ग्रंथों में इन्हें बुरी आत्मा कहा गया है तो कुछ अन्य में भूत-प्रेत और जिन्न।

कब और किन परिस्थितियों में डालती हैं ऊपरी हवाओं किसी व्यक्ति पर अपना प्रभाव?
जब कोई व्यक्ति दूध पीकर या कोई सफ़ेद मिठाई खाकर किसी चौराहे पर जाता है, तब ऊपरी हवाएं उस पर अपना प्रभाव डालती हैं। गन्दी जगहों पर इन हवाओं का वास होता है, इसीलिए ऐसे जगहों पर जाने वाले लोगों को ये हवाएं अपने प्रभाव में ले लेती हैं। इन हवाओं का प्रभाव रजस्वला स्त्रियों पर भी पड़ता है। कुएं, बावड़ी आदि पर भी इनका वास होता है। विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों के अवसर पर ये हवाएं सक्रिय होती हैं। इसके अतिरिक्त रात और दिन के 12 बजे दरवाजे क़ी चौखट पर इनका प्रभाव होता है।

दूध व सफ़ेद मिठाई चन्द्र के घोतक हैं। चौराहा राहु का घोतक है। चन्द्र राहु का शत्रु है, अतः जब कोई व्यक्ति उक्त चीजों का सेवन कर चौराहे पर जाता है, तो उस पर ऊपरी हवाओं के प्रभाव क़ी संभावना रहती है।

कोई स्त्री जब राजस्वला होती है, तब उसका चन्द्र व मंगल दोनों दुर्बल हो जाते हैं। ये दोनों राहु व शनि के शत्रु हैं। रजस्वलावस्था में स्त्री अशुद्ध होती है और अशुद्धता राहु क़ी घोतक है। ऐसे में उस स्त्री पर ऊपरी हवाओं के प्रकोप क़ी संभावना रहती है। कुएं एवं बावड़ी का अर्थ होता है जल स्थान और चन्द्र जल स्थान का कारक है। चन्द्र राहु का शत्रु है, इसलिये ऐसे स्थानों पर ऊपरी हवाओं का प्रभाव होता है।
मनुष्य क़ी दायीं आँख पर सूर्य का और बायीं पर चन्द्र का नियंत्रण होता है। इसलिए ऊपरी हवाओं का प्रभाव सबसे पहले पहले आँखों पर ही पड़ता है।

किसी स्त्री के सप्तम भाव में शनि, मंगल और राहु या केतु क़ी युति हो, तो उसके उसके पिशाच पीड़ा से ग्रस्त होने की संभावना रहती है। गुरु नीच राशि अथवा नीच राशि के नवांश में हो, या राहु सेयुत हो और उस पर पाप ग्रहों क़ी दृष्टी हो, तो जातक क़ी चंडाल प्रवति होती है।

पंचम भाव में शनि का सम्बन्ध बने तो व्यक्ति प्रेत एवं क्षुद्र देवियों क़ी भक्ति करता है।

* उपरी हवाओं से मुक्ति हेतु हनुमान चालीसा का पाठ और गायत्री का जप तथा हवं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अग्नि तथा लाल मिर्ची जलानी चाहिए।

* रोज़ सूर्यास्त के समय एक साफ़- सुथरे बर्तन में गाय का आधा किलो कच्चा दूध लेकर उसमें शुद्ध शहद क़ी 9 बूँदें मिला लें। फिर स्नान करके, शुद्ध वस्त्र पहनकर मकान क़ी छत से नीचे तक प्रत्येक कमरे, जीने, गैलरी आदि में उस दूध के छींटे देते हुए द्वार तक और बस हुए दूध को मुख्य द्वार के बाहर गिरा दें। क्रिया के दौरान इष्टदेव का स्मरण करते रहे। यह क्रिया इक्कीस दिन तक नियमित रूप से करें, घर पर प्रभावी उपरी हवाएं दूर हो जायेंगी।

* रविवार को बांह पर काले धतूरे क़ी जड़ बांधें, उपरी हवाओं से मुक्ति मिलेगी ।
* लहसून के रस में हींग घोलकर आँख में डालने या सुंघाने से पीड़ित व्यक्ति को उपरी हवाओं से मुक्ति मिल जाती है।

* उपरी बाधाओं से मुक्ति हेतु निम्नोक्त मंत्र का यथासंभव जप करना चाहिए। "ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः कोशेश्वस्य नमो ज्योति पंतगाय नमो रुदाय नम: सिद्धि स्वाहा।"

* घर के मुख्य द्वार के समीप श्वेतार्क का पौधा लगायें, घर उपरी हवाओं से मुक्त रहेगा।
* उपले या लकड़ी के कोयले जलाकर उसमें धूनी क़ी विशिष्ट वस्तुएं डालें और उससे उत्पन्न होने वाला धुंआ पीड़ित व्यक्ति को सुंघाएं। यह क्रिया किसी ऐसे व्यक्ति से करवाएं जो अनुभवी हो और जिसमें पर्याप्त आत्मबल हो।

* प्रातः काल बीज मंत्र 'क्लीं' का उच्चारण करते हुए काली मिर्च के 9 दाने सिर पर से घुमाकर दक्षिण दिशा क़ी और फेंक दें, उपरी बला दूर हो जायेगी।

* रविवार को स्नानादि से निवृत्त होकर काले कपडे क़ी छोटी थैली में तुलसी के 8 पत्ते, 8 काली मिर्च और सहदेई क़ी जड़ बंधकर गले में धारण करें, नजर दोष बाधा से मुक्ति मिलेगी।

* निम्नोक्त मंत्र का 108 बार जप करके सरसों का तेल अभिमंत्रित कर लें और उससे पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर मालिश करें, व्यक्ति पीडामुक्त हो जाएगा। मंत्र : ॐ नमोह काली कपाला देहि देहि स्वाहा ।
उपरी हवाओं के शक्तिशाली होने क़ी स्थिति में शाबर मन्त्रों का जप एवं प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग करने के पूर्व इन मन्त्रों का दीपावली क़ी रात को अथवा होलिका दहन क़ी रात को जलती हुई होली के सामने या फिर शमशान में 108 बार जप कर इन्हें सिद्ध कर लेना चाहिए। यहाँ यह उल्लेख कर देना आवश्यक है क़ी इन्हें सिद्ध करने के इच्छुक साधकों में पर्याप्त आत्मबल होना चाहिए, अन्यथा हानि हो सकती है।

* थोड़ी सी हल्दी को 3 बार निम्नलिखित मंत्र से अभिमंत्रित करके अग्नि में इस तरह चोदें क़ी उसका धुंआ रोगी के मुख क़ी और जाए। इसे हल्दी बाण मंत्र कहते हैं।

हल्दी गीरी बाण बाण को लिया हाथ उठाय ।

हल्दी बाण से नीलगिरी पहाड़ थहराय ॥

यह सब देख बोलत बीर हनुमान ।

डाइन योगिनी भूत प्रेत मुंड काटौ तान ॥

आज्ञा कामरू कामाक्षा माई ।

आज्ञा हाडि की चंडी की दोहाई ॥
* एक मुठ्ठी धुल को निम्नोक्त मंत्र से 3 बार अभिमंत्रित करें और नज़र दोष से ग्रस्त व्यक्ति पर फेकें, व्यक्ति को दोष से मुक्ति मिलेगी।
ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्ति के सरल उपाय
ऊपरी हवाओं से मुक्ति हेतु शास्त्रों में अनेक उपाय बताए गए हैं। अथर्ववेद में इस हेतु कई मंत्रों व स्तुतियों का उल्लेख है। आयुर्वेद में भी इन हवाओं से मुक्ति के उपायों का विस्तार से वर्णन किया गया है। यहां कुछ प्रमुख सरल एवं प्रभावशाली उपायों का विवरण प्रस्तुत है।

ऊपरी हवाओं से मुक्ति हेतु हनुमान चालीसा का पाठ और गायत्री का जप तथा हवन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अग्नि तथा लाल मिर्ची जलानी चाहिए।
रोज सूर्यास्त के समय एक साफ-सुथरे बर्तन में गाय का आधा किलो कच्चा दूध लेकर उसमें शुद्ध शहद की नौ बूंदें मिला लें। फिर स्नान करके, शुद्ध वस्त्र पहनकर मकान
की छत से नीचे तक प्रत्येक कमरे, जीने, गैलरी आदि में उस दूध के छींटे देते हुए द्वार तक आएं और बचे हुए दूध को मुख्य द्वार के बाहर गिरा दें। क्रिया के दौरान इष्टदेव का स्मरण करते रहें। यह क्रिया इक्कीस दिन तक नियमित रूप से करें, घर पर प्रभावी ऊपरी हवाएं दूर हो जाएंगी।
रविवार को बांह पर काले धतूरे की जड़ बांधें, ऊपरी हवाओं से मुक्ति मिलेगी।
लहसुन के रस में हींग घोलकर आंख में डालने या सुंघाने से पीड़ित व्यक्ति को ऊपरी हवाओं से मुक्ति मिल जाती है।
ऊपरी बाधाओं से मुक्ति हेतु निम्नोक्त मंत्र का यथासंभव जप करना चाहिए।
" ओम नमो भगवते रुद्राय नमः कोशेश्वस्य नमो ज्योति पंतगाय नमो रुद्राय नमः सिद्धि स्वाहा।''
घर के मुख्य द्वार के समीप श्वेतार्क का पौधा लगाएं, घर ऊपरी हवाओं से मुक्त रहेगा।
उपले या लकड़ी के कोयले जलाकर उसमें धूनी की विशिष्ट वस्तुएं डालें और उससे उत्पन्न होने वाला धुआं पीड़ित व्यक्त्ि को सुंघाएं। यह क्रिया किसी ऐसे व्यक्ति से करवाएं जो अनुभवी हो और जिसमें पर्याप्त आत्मबल हो।
प्रातः काल बीज मंत्र ÷क्लीं' का उच्चारण करते हुए काली मिर्च के नौ दाने सिर पर से घुमाकर दक्षिण दिशा की ओर फेंक दें, ऊपरी बला दूर हो जाएगी।
रविवार को स्नानादि से निवृत्त होकर काले कपड़े की छोटी थैली में तुलसी के आठ पत्ते, आठ काली मिर्च और सहदेई की जड़ बांधकर गले में धारण करें, नजर दोष बाधा से मुक्ति मिलेगी।
निम्नोक्त मंत्र का १०८ बार जप करके सरसों का तेल अभिमंत्रित कर लें और उससे पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर मालिश करें, व्यकित पीड़ामुक्त हो जाएगा।
मंत्र : ओम नमो काली कपाला देहि देहि स्वाहा।
ऊपरी हवाओं के शक्तिषाली होने की स्थिति में शाबर मंत्रों का जप एवं प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग करने के पूर्व इन मंत्रों का दीपावली की रात को अथवा होलिका दहन की रात को जलती हुई होली के सामने या फिर श्मषान में १०८ बार जप कर इन्हें सिद्ध कर लेना चाहिए। यहां यह उल्लेख कर देना आवष्यक है कि इन्हें सिद्ध करने के इच्छुक साधकों में पर्याप्त आत्मबल होना चाहिए, अन्यथा हानि हो सकती है।
निम्न मंत्र से थोड़ा-सा जीरा ७ बार अभिमंत्रित कर रोगी के शरीर से स्पर्श कराएं और उसे अग्नि में डाल दें। रोगी को इस स्थिति में बैठाना चाहिए कि उसका धूंआ उसके मुख के सामने आये। इस प्रयोग से भूत-प्रेत बाधा की निवृत्ति होती है।

मंत्र : जीरा जीरा महाजीरा जिरिया चलाय। जिरिया की शक्ति से फलानी चलि जाय॥ जीये तो रमटले मोहे तो मशान टले। हमरे जीरा मंत्र से अमुख अंग भूत चले॥ जाय हुक्म पाडुआ पीर की दोहाई॥
एक मुट्ठी धूल को निम्नोक्त मंत्र से ३ बार अभिमंत्रित करें और नजर दोष से ग्रस्त व्यक्ति पर फेंकें, व्यक्ति को दोष से मुक्ति मिलेगी।
मंत्र : तह कुठठ इलाही का बान। कूडूम की पत्ती चिरावन। भाग भाग अमुक अंक से भूत। मारुं धुलावन कृष्ण वरपूत। आज्ञा कामरु कामाख्या। हारि दासीचण्डदोहाई।
थोड़ी सी हल्दी को ३ बार निम्नलिखित मंत्र से अभिमंत्रित करके अग्नि में इस तरह छोड़ें कि उसका धुआं रोगी के मुख की ओर जाए। इसे हल्दी बाण मंत्र कहते हैं।
हल्दी गीरी बाण बाण को लिया हाथ उठाय। हल्दी बाण से नीलगिरी पहाड़ थहराय॥ यह सब देख बोलत बीर हनुमान। डाइन योगिनी भूत प्रेत मुंड काटौ तान॥ आज्ञा कामरु कामाक्षा माई। आज्ञा हाड़ि की चंडी की दोहाई॥
जौ, तिल, सफेद सरसों, गेहूं, चावल, मूंग, चना, कुष, शमी, आम्र, डुंबरक पत्ते और अषोक, धतूरे, दूर्वा, आक व ओगां की जड़ को मिला लें और उसमें दूध, घी, मधु और गोमूत्र मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें। फिर संध्या काल में हवन करें और निम्न मंत्रों का १०८ बार जप कर इस मिश्रण से १०८ आहुतियां दें।
मंत्र : ओम नमः भवे भास्कराय आस्माक अमुक सर्व ग्रहणं पीड़ा नाशनं कुरु-कुरु स्वाहा।

मानसिक तनाव से मुक्ति का अचूक मंत्र ....... तनाव से देता है छुटकारा, यह चमत्कारी मंत्र

मानसिक तनाव से मुक्ति का अचूक मंत्र ....... तनाव से देता है छुटकारा, यह चमत्कारी मंत्र
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यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीड़ित हैं, अपने आपको असु‍रक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए 11 बुधवार लगातार 1 नारियल नीले वस्त्र में लपेटकर किसी भिखारी को दान करें।

अपने शयनकक्ष में तांबे का एक पिरामिड स्थापित करें।
नित्य मानसिक रूप से निम्न मंत्र का जाप अवश्य किया करें।

मंत्र :
ॐ अतिक्रकर महाकाय, कल्पान्त दहनोपम
भैरवाय नमस्तुभ्यमनुज्ञां दातुमहसि!!

इस उपरोक्त उपाय से एक ओर जहां आपको मानसिक तनाव/ भय/ दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलेगी वहीं परिवार में अगर कोई नकारात्मक‍ विचारधारा का है तो उसके विचारों में भी परिवर्तन आना आरंभ होगा।

वैदिक ज्योतिष »----ज्योतिष--कसौटी पर खरे उतरते वैज्ञानिक नियम

वैदिक ज्योतिष »----ज्योतिष--कसौटी पर खरे उतरते वैज्ञानिक नियम
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Photo: वैदिक ज्योतिष »----ज्योतिष--कसौटी पर खरे उतरते वैज्ञानिक नियम
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ज्योतिष को संसार में विज्ञान का दर्जा देने से कितने ही विज्ञान-कर्ता कतराते है. कारण और निवारण का सिद्धान्त अपना कर भौतिक जगत की श्रेणी मे ज्योतिष को तभी रखा जा सकता है, जब उसे पूरी तरह से समझ लिया जाये. वातावरण के परिवर्तन जैसे तूफ़ान आना,चक्रवात का पैदा होना और हवाओं का रुख बदलना,भूकम्प आना,बाढ की सूचना देना आदि मौसम विज्ञान के अनुसार कथित किया जाता है.
पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के द्वारा ब्रहमाण्ड से आने वाली अनन्त शक्तियों का प्रवाह का कथन पुराणो मे भी मिलता है. जिन्हे धनात्मक शक्तियों का रूप प्रदान किया गया है और दक्षिणी ध्रुव से नकारात्मक शक्तियों का प्रवाह पृथ्वी पर प्रवाहित होने से ही वास्तु-शास्त्र को कथित करने में वैज्ञानिकों को सहायता मिली है.कहावत है कि जब हवायें थम जाती है तो आने वाले किसी तूफ़ान का अंदेशा रहता है. यह सब प्राथमिक सूचनायें भी हमें ज्योतिष द्वारा ही मिलती है. वातावरण की जानकारी और वातावरण के द्वारा प्रेषित सूचनाओं के आधार पर ही प्राचीन समय से ही वैज्ञानिक अपने कथनो को सिद्ध करते आये है,जो आज तक भी सत्यता की कसौटी पर सौ प्रतिशत खरे उतरते है. अगर आज का मानव अनिष्ट सूचक घटनाओ को इस विज्ञान के माध्यम से जान ले तो वह मानव की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि होगी.
ब्रह्माजी से जब सर्व प्रथम यह विद्या गर्ग ऋषि ने प्राप्त की और उसके बाद अन्य लोग इस विद्या को जान सके. प्राचीन काल से ही ऋषियों-मुनियों ने अपनी खोजबीन और पराविज्ञान की मदद से इस विद्या का विकास किया, उन रहस्यों को जाना जिन्हे आज का मानव अरबों-खरबों डालर खर्च करने के बाद भी पूरी तरह से प्राप्त नही कर सका है. तल,वितल,सुतल,तलातल,पाताल,धरातल और महातल को ऋषियों ने पहले ही जान लिया था उनकी व्याख्या "सुखसागर" आदि ग्रंथों में बहुत ही विस्तृत रूप से की गई है. प्राकृतिक रहस्यों को सुलझाने के लिये परा और अपरा विद्याओं को स्थापित कर दिया था. परा विद्याओं का सम्बन्ध वेदों में निहित किया था. ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत खगोलशास्त्र,पदार्थ विज्ञान,आयुर्वेद और गणित का अध्ययन प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है. उस समय के एक डाक्टर को ज्योतिषी और अध्यापक होना अनिवार्य माना जाता था और ज्योतिषी को भी डाक्टरी और अध्यापन मे प्रवीण होना जरूरी था. कालान्तर के बाद आर्यभट्ट और बाराहमिहिर ने शास्त्र का संवर्धन किया और अपने आधार से ठोस आधार प्रदान किये.
"भास्कराचार्य" ने तो न्यूटन से बहुत पहले ही पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण-शक्ति का प्रतिपादन कर दिया था,जिसे उन्होने अपने ग्रंथ "सिद्धान्तशिरोमणि" में प्रस्तुत किया है. "आकृष्ट शक्ति च महीतया,स्वस्थ गुरं स्वभिमुखं स्वंशवत्या" अर्थात पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है,जिससे वह अपने आस पास की वस्तुओं को आकर्षित करती है.
आज से २२०० साल पहले बाराहमिहिर ने २७ नक्षत्रों और ७ ग्रहों तथा ध्रुव तारे का को वेधने के लिये एक बडे जलाशय में स्तम्भ का निर्माण करवाया था,जिसकी चर्चा "भागवतपुराण" मे की गई है. स्तम्भ मे सात ग्रहों के लिये सात मंजिले,और २७ नक्षत्रों के लिये २७ रोशनदान काले पत्थरों से निर्मित करवाये थे. इसके चारों तरफ़ २७ वेधशालायें मन्दिरों के रूप में बनी थीं. प्राचीन भारतीय शासक कुतुब्द्दीन ऐबक ने उन सब वेधशालाओं को तुडवाकर वहाँ मस्जिद बनवा दी थी और रही सही कसर अन्ग्रेजी शासन नें निकाल दी, जिन्होने इस स्तम्भ के ऊपरी भाग को भी तुडवा दिया था. हालॉकि आज भी वह ७६ फ़ुट शेष है. यह वही दिल्ली की प्रसिद्ध "कुतुबमीनार" है, जिसे सारी दुनिया जानती है.
ज्योतिष विज्ञान आज भी उतना ही उपयोगी है,जितना कि कभी पुरातन काल में था. मुस्लिम ज्योतिषी इब्बनबतूता और अलबरूनो ने भारत मे रह कर संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राप्त किया और अनेक ज्योतिष ग्रंथों का अरबी भाषा में अनुवाद किया और अरब देशों में इसका प्रचार प्रसार किया. "अलबरूनो" ने "इन्डिका" नामक ग्रन्थ लिखा जिसका अनुवाद बाद में जर्मन भाषा में किया गया था. जर्मन विद्वानो ने जब यह पुस्तक पढी तो उनका ध्यान भारत की ओर आकर्षित हुआ और उन लोगो ने यहां के अनेक प्राचीन ग्रन्थों का अनुवाद किया. यूनान के प्रसिद्ध "यवनाचार्य" ने भारत मे ही रह कर कई ग्रन्थ ज्योतिष के लिखे.
लन्दन के प्रसिद्ध विद्वान "फ़्रान्सिस हचिंग" ने शोध द्वारा यह सिद्ध किया कि मिश्र के "पिरामिड" और उनमे रखे जाने वाले शवों का स्थान ज्योतिषीय रूप रेखा के द्वारा ही तय किया जाता था
कसौटी पर खरे उतरते वैज्ञानिक नियम:---
ब्रह्मांड की अति सूक्षम हलचल का प्रभाव भी पृथ्वी पर पडता है. सूर्य और चन्द्र का प्रत्यक्ष प्रभाव हम आसानी से देख और समझ सकते है. सूर्य के प्रभाव से ऊर्जा और चन्द्रमा के प्रभाव से समुद में ज्वार-भाटा को भी समझ और देख सकते है. जिसमे अष्ट्मी के लघु ज्वार और पूर्णमासी के दिन बृहद ज्वार का आना इसी प्रभाव का कारण है. पानी पर चन्द्रमा का प्रभाव अत्याधिक पडता है. मनुष्य के अन्दर भी पानी की मात्रा अधिक होने के कारण चन्द्रमा का प्रभाव मानवी प्रकृति पर भी पडता है. पूर्णिमा के दिन होने वाली अपराधों में बढोत्तरी को देखकर इसे आसानी से समझा जा सकता है. जो लोग मानसिक रूप से विक्षिप्त होते हैं, उनकी विक्षिप्तता भी इसी तिथि को अधिक रहती है. आत्महत्या वाले कारण भी इसी तिथि को अधिक देखने को मिलते है. इस दिन सामान्यत: स्त्रियों में मानसिक तनाव भी कुछ अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.
शुक्ल पक्ष मे वनस्पतियां अधिक तीव्रता से बढती है. सूर्योदय के पश्चात वन्स्पतियों और प्राणियों में स्फ़ूर्ति का प्रभाव अधिक बढ जाता है. आयुर्वेद भी चन्द्रमा का विज्ञान है जिसके अन्तर्गत वनस्पति जगत का सम्पूर्ण मिश्रण है. कहा भी जाता है कि "संसार का प्रत्येक अक्षर एक मंत्र है. प्रत्येक वनस्पति एक औषधि है और प्रत्येक मनुष्य एक अपना गुण रखता है. बस आवश्यकता महज उसे पहचानने की होती है".
’ग्रहाधीन जगत सर्वम". विज्ञान की मान्यता है कि सूर्य एक जलता हुआ आग का गोला है,जिससे सभी ग्रह पैदा हुए है. गायत्री मन्त्र मे सूर्य को सविता या परमात्मा माना गया है. रूस के वैज्ञानिक "चीजेविस्की" ने सन १९२० में अन्वेषण किया था कि हर ११ वर्ष के अन्तराल पर सूर्य में एक विस्फ़ोट होता है जिसकी क्षमता १००० अणुबम के बराबर होती है. इस विस्फ़ोट के समय पृथ्वी पर उथल-पुथल, लडाई झगडे, मारकाट होती है. युद्ध भी इसी समय मे अधिक होते है. पुरुषों का खून पतला हो जाता है. पेडों के तनों में पडने वाले वलय बडे होते है. आमतौर पर आप देखें तो पायेंगें कि श्वास रोग सितम्बर से नबम्बर तक अधिक रूप से बढ जाता है. मासिक धर्म के आरम्भ में १४,१५,या १६ दिन गर्भाधान की अधिक सम्भावना होती है.
बताईये क्या इतने सब कारण क्या ज्योतिष को विज्ञान कहने के लिये पर्याप्त नही है?ज्योतिष को संसार में विज्ञान का दर्जा देने से कितने ही विज्ञान-कर्ता कतराते है. कारण और निवारण का सिद्धान्त अपना कर भौतिक जगत की श्रेणी मे ज्योतिष को तभी रखा जा सकता है, जब उसे पूरी तरह से समझ लिया जाये. वातावरण के परिवर्तन जैसे तूफ़ान आना,चक्रवात का पैदा होना और हवाओं का रुख बदलना,भूकम्प आना,बाढ की सूचना देना आदि मौसम विज्ञान के अनुसार कथित किया जाता है.
पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के द्वारा ब्रहमाण्ड से आने वाली अनन्त शक्तियों का प्रवाह का कथन पुराणो मे भी मिलता है. जिन्हे धनात्मक शक्तियों का रूप प्रदान किया गया है और दक्षिणी ध्रुव से नकारात्मक शक्तियों का प्रवाह पृथ्वी पर प्रवाहित होने से ही वास्तु-शास्त्र को कथित करने में वैज्ञानिकों को सहायता मिली है.कहावत है कि जब हवायें थम जाती है तो आने वाले किसी तूफ़ान का अंदेशा रहता है. यह सब प्राथमिक सूचनायें भी हमें ज्योतिष द्वारा ही मिलती है. वातावरण की जानकारी और वातावरण के द्वारा प्रेषित सूचनाओं के आधार पर ही प्राचीन समय से ही वैज्ञानिक अपने कथनो को सिद्ध करते आये है,जो आज तक भी सत्यता की कसौटी पर सौ प्रतिशत खरे उतरते है. अगर आज का मानव अनिष्ट सूचक घटनाओ को इस विज्ञान के माध्यम से जान ले तो वह मानव की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि होगी.

ब्रह्माजी से जब सर्व प्रथम यह विद्या गर्ग ऋषि ने प्राप्त की और उसके बाद अन्य लोग इस विद्या को जान सके. प्राचीन काल से ही ऋषियों-मुनियों ने अपनी खोजबीन और पराविज्ञान की मदद से इस विद्या का विकास किया, उन रहस्यों को जाना जिन्हे आज का मानव अरबों-खरबों डालर खर्च करने के बाद भी पूरी तरह से प्राप्त नही कर सका है. तल,वितल,सुतल,तलातल,पाताल,धरातल और महातल को ऋषियों ने पहले ही जान लिया था उनकी व्याख्या "सुखसागर" आदि ग्रंथों में बहुत ही विस्तृत रूप से की गई है. प्राकृतिक रहस्यों को सुलझाने के लिये परा और अपरा विद्याओं को स्थापित कर दिया था. परा विद्याओं का सम्बन्ध वेदों में निहित किया था. ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत खगोलशास्त्र,पदार्थ विज्ञान,आयुर्वेद और गणित का अध्ययन प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है. उस समय के एक डाक्टर को ज्योतिषी और अध्यापक होना अनिवार्य माना जाता था और ज्योतिषी को भी डाक्टरी और अध्यापन मे प्रवीण होना जरूरी था. कालान्तर के बाद आर्यभट्ट और बाराहमिहिर ने शास्त्र का संवर्धन किया और अपने आधार से ठोस आधार प्रदान किये.
"भास्कराचार्य" ने तो न्यूटन से बहुत पहले ही पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण-शक्ति का प्रतिपादन कर दिया था,जिसे उन्होने अपने ग्रंथ "सिद्धान्तशिरोमणि" में प्रस्तुत किया है. "आकृष्ट शक्ति च महीतया,स्वस्थ गुरं स्वभिमुखं स्वंशवत्या" अर्थात पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है,जिससे वह अपने आस पास की वस्तुओं को आकर्षित करती है.
आज से २२०० साल पहले बाराहमिहिर ने २७ नक्षत्रों और ७ ग्रहों तथा ध्रुव तारे का को वेधने के लिये एक बडे जलाशय में स्तम्भ का निर्माण करवाया था,जिसकी चर्चा "भागवतपुराण" मे की गई है. स्तम्भ मे सात ग्रहों के लिये सात मंजिले,और २७ नक्षत्रों के लिये २७ रोशनदान काले पत्थरों से निर्मित करवाये थे. इसके चारों तरफ़ २७ वेधशालायें मन्दिरों के रूप में बनी थीं. प्राचीन भारतीय शासक कुतुब्द्दीन ऐबक ने उन सब वेधशालाओं को तुडवाकर वहाँ मस्जिद बनवा दी थी और रही सही कसर अन्ग्रेजी शासन नें निकाल दी, जिन्होने इस स्तम्भ के ऊपरी भाग को भी तुडवा दिया था. हालॉकि आज भी वह ७६ फ़ुट शेष है. यह वही दिल्ली की प्रसिद्ध "कुतुबमीनार" है, जिसे सारी दुनिया जानती है.
ज्योतिष विज्ञान आज भी उतना ही उपयोगी है,जितना कि कभी पुरातन काल में था. मुस्लिम ज्योतिषी इब्बनबतूता और अलबरूनो ने भारत मे रह कर संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राप्त किया और अनेक ज्योतिष ग्रंथों का अरबी भाषा में अनुवाद किया और अरब देशों में इसका प्रचार प्रसार किया. "अलबरूनो" ने "इन्डिका" नामक ग्रन्थ लिखा जिसका अनुवाद बाद में जर्मन भाषा में किया गया था. जर्मन विद्वानो ने जब यह पुस्तक पढी तो उनका ध्यान भारत की ओर आकर्षित हुआ और उन लोगो ने यहां के अनेक प्राचीन ग्रन्थों का अनुवाद किया. यूनान के प्रसिद्ध "यवनाचार्य" ने भारत मे ही रह कर कई ग्रन्थ ज्योतिष के लिखे.
लन्दन के प्रसिद्ध विद्वान "फ़्रान्सिस हचिंग" ने शोध द्वारा यह सिद्ध किया कि मिश्र के "पिरामिड" और उनमे रखे जाने वाले शवों का स्थान ज्योतिषीय रूप रेखा के द्वारा ही तय किया जाता था
कसौटी पर खरे उतरते वैज्ञानिक नियम:---
ब्रह्मांड की अति सूक्षम हलचल का प्रभाव भी पृथ्वी पर पडता है. सूर्य और चन्द्र का प्रत्यक्ष प्रभाव हम आसानी से देख और समझ सकते है. सूर्य के प्रभाव से ऊर्जा और चन्द्रमा के प्रभाव से समुद में ज्वार-भाटा को भी समझ और देख सकते है. जिसमे अष्ट्मी के लघु ज्वार और पूर्णमासी के दिन बृहद ज्वार का आना इसी प्रभाव का कारण है. पानी पर चन्द्रमा का प्रभाव अत्याधिक पडता है. मनुष्य के अन्दर भी पानी की मात्रा अधिक होने के कारण चन्द्रमा का प्रभाव मानवी प्रकृति पर भी पडता है. पूर्णिमा के दिन होने वाली अपराधों में बढोत्तरी को देखकर इसे आसानी से समझा जा सकता है. जो लोग मानसिक रूप से विक्षिप्त होते हैं, उनकी विक्षिप्तता भी इसी तिथि को अधिक रहती है. आत्महत्या वाले कारण भी इसी तिथि को अधिक देखने को मिलते है. इस दिन सामान्यत: स्त्रियों में मानसिक तनाव भी कुछ अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.
शुक्ल पक्ष मे वनस्पतियां अधिक तीव्रता से बढती है. सूर्योदय के पश्चात वन्स्पतियों और प्राणियों में स्फ़ूर्ति का प्रभाव अधिक बढ जाता है. आयुर्वेद भी चन्द्रमा का विज्ञान है जिसके अन्तर्गत वनस्पति जगत का सम्पूर्ण मिश्रण है. कहा भी जाता है कि "संसार का प्रत्येक अक्षर एक मंत्र है. प्रत्येक वनस्पति एक औषधि है और प्रत्येक मनुष्य एक अपना गुण रखता है. बस आवश्यकता महज उसे पहचानने की होती है".
’ग्रहाधीन जगत सर्वम". विज्ञान की मान्यता है कि सूर्य एक जलता हुआ आग का गोला है,जिससे सभी ग्रह पैदा हुए है. गायत्री मन्त्र मे सूर्य को सविता या परमात्मा माना गया है. रूस के वैज्ञानिक "चीजेविस्की" ने सन १९२० में अन्वेषण किया था कि हर ११ वर्ष के अन्तराल पर सूर्य में एक विस्फ़ोट होता है जिसकी क्षमता १००० अणुबम के बराबर होती है. इस विस्फ़ोट के समय पृथ्वी पर उथल-पुथल, लडाई झगडे, मारकाट होती है. युद्ध भी इसी समय मे अधिक होते है. पुरुषों का खून पतला हो जाता है. पेडों के तनों में पडने वाले वलय बडे होते है. आमतौर पर आप देखें तो पायेंगें कि श्वास रोग सितम्बर से नबम्बर तक अधिक रूप से बढ जाता है. मासिक धर्म के आरम्भ में १४,१५,या १६ दिन गर्भाधान की अधिक सम्भावना होती है.
बताईये क्या इतने सब कारण क्या ज्योतिष को विज्ञान कहने के लिये पर्याप्त नही है?

रावण सहिंता के ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत को

रावण सहिंता के ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत को 
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बहुत कम लोग जानते हैं। रावण सभी शास्त्रों का जानकार और श्रेष्ठ विद्वान था।
रावण ने भी ज्योतिष और तंत्र शास्त्र की रचना की है। दशानन ने ऐसे कई उपाय बताए हैं जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत रातोंरात बदल सकती है।

यहां जानिए रावण संहिता के अनुसार कुछ ऐसे तांत्रिक उपाय जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत चमक सकती है...
महाज्ञानी रावण कई चीजों में पारंगत था। ज्योतिष शास्त्र में भी उसे महारत हासिल थी। तंत्र शास्त्र का भी वह महाज्ञाता था। इसी वजह से जो भी दशानन के संपर्क में आता था वह सहसा ही उससे मोहित हो जाता था।

बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि रावण का प्रभाव उसकी तांत्रिक साधना के बल पर था। रावण कई ऐसे उपाय भी करता था जिससे जो भी सामान्य इंसान उसे देखता था वह आकर्षित हो जाता था।

रावण संहिता में कुछ ऐसे ही खास प्रकार के तांत्रिक तिलक की चर्चा की गई है। जो भी व्यक्ति यह तिलक लगाता है सहज ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं। यहां जानिए कि कौन-कौन से हैं वह तांत्रिक तिलक......

1. धन प्राप्ति का उपाय: किसी भी शुभ मुहूर्त में या किसी शुभ दिन में सुबह जल्दी उठें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे जाएं। किसी शांत एवं एकांत स्थान पर वट वृक्ष के नीचे चमड़े का आसन बिछाएं। आसन पर बैठकर धन प्राप्ति मंत्र का जप करें।

धन प्राप्ति का मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं नम: ध्व: ध्व: स्वाहा।

इस मंत्र का जप आपको 21 दिनों तक करना चाहिए। मंत्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। 21 दिनों में अधिक से अधिक संख्या में मंत्र जप करें।
जैसे ही यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा आपको अचानक धन प्राप्ति अवश्य कराएगा।

2.यदि किसी व्यक्ति को धन प्राप्त करने में बार-बार रुकावटें आ रही हों तो उसे यह उपाय करना चाहिए।
यह उपाय 40 दिनों तक किया जाना चाहिए। इसे अपने घर पर ही किया जा सकता है। उपाय के अनुसार धन प्राप्ति मंत्र का जप करना है। प्रतिदिन 108 बार।
मंत्र: ऊँ सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्लीं, श्रीं श्रीं मम धनं देहि फट् स्वाहा।
इस मंत्र का जप नियमित रूप से करने पर कुछ ही दिनों महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो जाएगी और आपके धन में आ रही रुकावटें दूर होने लगेंगी।

3. यदि आप दसों दिशाओं से यानी चारों तरफ से पैसा प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। यह उपाय दीपावली के दिन किया जाना चाहिए।
दीपावली की रात में विधि-विधान से महालक्ष्मी का पूजन करें। पूजन के सो जाएं और सुबह जल्दी उठें। नींद से जागने के बाद पलंग से उतरे नहीं बल्कि यहां दिए गए मंत्र का जप 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ नमो भगवती पद्म पदमावी ऊँ ह्रीं ऊँ ऊँ पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आष पूरय सर्वजन वश्य कुरु कुरु स्वाहा।
शय्या पर मंत्र जप करने के बाद दसों दिशाओं में दस-दस बार फूंक मारें। इस उपाय से साधक को चारों तरफ से पैसा प्राप्त होता है

4.सफेद आंकड़े को छाया में सुखा लें। इसके बाद कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर इसे पीस लें और इसका तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का समाज में वर्चस्व हो जाता है।

5.यदि आपको ऐसा लगता है कि किसी स्थान पर धन गढ़ा हुआ है और आप वह धन प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें।
गड़ा धन प्राप्त करने के लिए यहां दिए गए मंत्र का जप दस हजार बार करना होगा।
मंत्र: ऊँ नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा।
गड़े हुए धन के दर्शन करने के लिए विधि इस प्रकार है। किसी शुभ दिवस में यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या करें। मंत्र सिद्धि हो जाने के बाद जिस स्थान पर धन गड़ा हुआ है वहां धतुरे के बीज, हलाहल, सफेद घुघुंची, गंधक, मैनसिल, उल्लू की विष्ठा, शिरीष वृक्ष का पंचांग बराबर मात्रा में लें और सरसों के तेल में पका लें। इसके बाद इस सामग्री से गड़े धन की शंका वाले स्थान पर धूप-दीप ध्यान करें। यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या में करें।
ऐसा करने पर उस स्थान से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का साया हट जाएगा। भूत-प्रेत का भय समाप्त हो जाएगा। साधक को भूमि में गड़ा हुआ धन दिखाई देने लगेगा।
ध्यान रखें तांत्रिक उपाय करते समय किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें।

6.शास्त्रों के अनुसार दूर्वा घास चमत्कारी होती है। इसका प्रयोग कई प्रकार के उपायों में भी किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति सफेद दूर्वा को कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध के साथ पीस लें और इसका तिलक लगाएं तो वह किसी भी काम में असफल नहीं होता है।

7.महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए यह तांत्रिक उपाय करें।
किसी शुभ मुहूर्त जैसे दीपावली, अक्षय तृतीया, होली आदि की रात यह उपाय किया जाना चाहिए। दीपावली की रात में यह उपाय श्रेष्ठ फल देता है। इस उपाय के अनुसार आपको दीपावली की रात कुमकुम या अष्टगंध से थाली पर यहां दिया गया मंत्र लिखें।
मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी, महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ ह्रीं नम:।
इस मंत्र का जप भी करना चाहिए। किसी साफ एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला या कमल गट्टे की माला के साथ मंत्र जप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। अधिक से अधिक इस मंत्र की आपकी श्रद्धानुसार बढ़ा सकते हैं।
इस उपाय से आपके घर में महालक्ष्मी की कृपा बरसने लगेगी।

8.अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें, लेप बना लें। इस लेप को लगाने से व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है। सभी लोग इनके कहे को मानते हैं।

9.यदि आप देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की कृपा से अकूत धन संपत्ति चाहते हैं तो यह उपाय करें।
उपाय के अनुसार आपको यहां दिए जा रहे मंत्र का जप तीन माह तक करना है। प्रतिदिन मंत्र का जप केवल 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।
मंत्र जप करते समय अपने पास धनलक्ष्मी कौड़ी रखें। जब तीन माह हो जाएं तो यह कौड़ी अपनी तिजोरी में या जहां आप पैसा रखते हैं वहां रखें। इस उपाय से जीवनभर आपको पैसों की कमी नहीं होगी।

10.यदि आप घर या समाज या ऑफिस में लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं तो बिल्वपत्र तथा बिजौरा नींबू लेकर उसे बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें। इसके बाद इससे तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का आकर्षण बढ़ता है।

(मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक हैं. सूर्य मुद्रा :- हस्त-मुद्रा-चिकित्सा

(मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक हैं. सूर्य मुद्रा :- हस्त-मुद्रा-चिकित्सा
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मानव-सरीर अनन्त रहस्योंसे भरा हुआ है । शरीरकी अपनी एक मुद्रामयी भाषा है । जिसे करनेसे शारीरिक स्वास्थ्य-लाभ में सहयोग होता है । यह शरीर पंचतत्त्वोंके योगसे बना है । पाँच तत्त्व ये हैं-
(1) पृथ्वी, (2) जल, (3) अग्नि, (4) वायु, एवं (5) आकाश । शरीर में जब भी इन तत्त्वोंका असंतुलन होता है, तो रोग पैदा हो जाते हैं । यदि हम इनका संतुलन करना सीख जायँ तो बीमार हो ही नहीं सकते एवं यदि हो भी जायँ तो इन तत्त्वोंको संतुलित करके आरोग्यता वापस ला सकते हैं ।

हस्त-मुद्रा-चिकित्साके अनुसार हाथ तथा हाथोंकी अँगुलियों और अँगुलियोंसे बननेवाली मुद्राओंमें आरोग्यका राज छिपा हुआ है । हाथकी अँगुलियोंमें पंचतत्त्व प्रतिष्ठित हैं ।

ऋषि-मुनियोंने हजारों साल पहले इसकी खोज कर ली थी एवं इसे उपयोगमें बराबर प्रतिदिन लाते रहे, इसीलिये वे लोग स्वस्थ रहते थे । ये शरीरमें चैतन्यको अभिव्यक्ति देनेवाली कुंजियाँ हैं ।

मनुष्यका मस्तिष्क विकसित है, उसमें अनंत क्षमताएँ हैं । ये क्षमताएँ आवृत हैं, उन्हें अनावृत करके हम अपने लक्ष्यको पा सकते हैं ।

नृत्य करते समय भी मुद्राएँ बनायी जाती हैं, जो शरीर हजारों नसों एवं नाडियोंको प्रभावित करती हैं और उनका प्रभाव भी शरीरपर अच्छा पड़ता है ।

हस्त-मुद्राएँ तत्काल ही असर करना शुरू कर देती हैं । जिस हाथमें ये मुद्राएँ बनाते हैं, शरीरके विपरीत भागमें उनका तुरंत असर होना शुरू हो जाता है । इन सब मुद्राओंका प्रयोग करते समय वज्रासन, पद्मासन अथवा सुखासनका प्रयोग करना चाहिये ।

इन मुद्राओंको प्रतिदिन तीससे पैंतालीस मिनटतक करनेसे पूर्ण लाभ होता है । एक बारमें न कर सके तो दो-तीन बारमें भी किया जा सकता है ।

किसी भी मुद्राको करते समय जिन अँगुलियोंका कोई काम न हो उन्हें सीधी रखे ।
सूर्य मुद्रा हमारे भीतर के अग्नि तत्व को संचालित करती है। सूर्य की अँगुली अनामिका को रिंग फिंगर भी कहते हैं। इस अँगुली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य ऊर्जा स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करती है और यूरेनस कामुकता, अंतर्ज्ञान और बदलाव का प्रतीक है।

विधि : अंगूठे से तीसरी अंगुली अनामिका (रिंग फिंगर) को मोड़कर उसके ऊपरी नाखून वाले भाग को अंगूठे के जड़ (गद्देदार भाग) पर दवाब(हल्का) डालें और अंगूठा मोड़कर अनामिका पर निरंतर दवाब(हल्का) बनाये रखें तथा शेष अँगुलियों को अपने सीध में सीधा रखें.....इस तरह जिस मुद्रा का निर्माण होगा उसे सूर्य मुद्रा कहते हैं...

लाभ : इस मुद्रा का रोज दो बार 5 से 15 मिनट के लिए अभ्यास करने से शरीर का कोलेस्ट्रॉल घटता है। वजन कम करने के लिए भी इस मुद्रा का उपयोग किया जाता है। पेट संबंधी रोगों में भी यह मुद्रा लाभदायक है। बेचैनी और चिंता कम होकर दिमाग शांत बना रहता है। यह मुद्रा शरीर की सूजन मिटाकर उसे हलका बनाती है।
यह मुद्रा शारीरिक स्थूलता (मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक होता है...जो लोग मोटापे से परेशान हैं,इस मुद्रा का प्रयोग कर फलित होते देख सकते हैं..

( अनामिका को महत्त्व लगभग सभी धर्म सम्प्रदाय में दिया गया है.इसे बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है.हिन्दुओं में पूजा पाठ उत्सव आदि पर मस्तक पर जो तिलक लगाया जाता है,वह इसलिए कि ललाट में जिस स्थान पर तिलक लगाया जाता है योग के अनुसार मस्तक के उस भाग में द्विदल कमल होता है और अनामिका द्वारा उस स्थान के स्पर्श से मस्तिष्क की अदृश्य शक्ति जागृत हो जाती हैं,व्यक्तित्व तेजोमय हो जाता है)

हाथ में कौन सी अंगुली पर तिल हो तो क्या होता है?

हाथ में कौन सी अंगुली पर तिल हो तो क्या होता है?
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Photo: हाथ में कौन सी अंगुली पर तिल हो तो क्या होता है?
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिल भी हमारे स्वभाव और भविष्य को प्रभावित करते हैं। शरीर के अलग-अलग अंगों पर तिल होना अलग-अलग प्रभाव देता है। ऐसा माना जाता है कि पुरुषों के लिए दाएं अंग पर तिल होना शुभ है और बाएं अंग पर तिल होना अशुभ। जबकि स्त्रियों के लिए बाएं अंग पर तिल होना शुभ है तो दाएं अंग पर तिल होना अशुभ माना जाता है।
जिन लोगों के हाथों पर तिल होते हैं वे चतुर होते हैं। गुरु पर्वत यानि इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग पर तिल हो तो व्यक्ति धार्मिक हो सकता है। दायीं हथेली पर तिल हो तो व्यक्ति बलवान होता है। कुछ परिस्थितियों में दायीं हथेली का तिल व्यक्ति को धनवान भी बनाता है। बायीं हथेली पर तिल हो तो व्यक्ति खर्चीला तथा कंजूस हो सकता है।
तर्जनी यानि इंडेक्स फिंगर पर तिल:जिसकी तर्जनी पर तिल हो, वह विद्यावान, गुणवान और धनवान किंतु शत्रुओं से पीडि़त होता है।
अनामिका या रिंग फिंगर पर तिल:जिसकी अनामिका पर तिल हो तो वह ज्ञानी, यशस्वी, धनी और पराक्रमी होता है।
कनिष्ठका या लिटिल फिंगर पर तिल:कनिष्ठका पर तिल हो तो वह व्यक्ति संपत्तिवान होता है, किंतु उसका जीवन दुखमय होता है।
अंगूठे या थम्ब पर तिल: अंगूठे पर तिल हो तो व्यक्ति कार्यकुशल, व्यवहार कुशल तथा न्यायप्रिय होता है।
मध्यमा या मीडिल फिंगर पर तिल:मध्यमा पर तिल उत्तम फलदायी होता है। व्यक्ति सुखी होता है। उसका जीवन शांतिपूर्ण होता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तिल भी हमारे स्वभाव और भविष्य को प्रभावित करते हैं। शरीर के अलग-अलग अंगों पर तिल होना अलग-अलग प्रभाव देता है। ऐसा माना जाता है कि पुरुषों के लिए दाएं अंग पर तिल होना शुभ है और बाएं अंग पर तिल होना अशुभ। जबकि स्त्रियों के लिए बाएं अंग पर तिल होना शुभ है तो दाएं अंग पर तिल होना अशुभ माना जाता है।

जिन लोगों के हाथों पर तिल होते हैं वे चतुर होते हैं। गुरु पर्वत यानि इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग पर तिल हो तो व्यक्ति धार्मिक हो सकता है। दायीं हथेली पर तिल हो तो व्यक्ति बलवान होता है। कुछ परिस्थितियों में दायीं हथेली का तिल व्यक्ति को धनवान भी बनाता है। बायीं हथेली पर तिल हो तो व्यक्ति खर्चीला तथा कंजूस हो सकता है।


तर्जनी यानि इंडेक्स फिंगर पर तिल:जिसकी तर्जनी पर तिल हो, वह विद्यावान, गुणवान और धनवान किंतु शत्रुओं से पीडि़त होता है।


अनामिका या रिंग फिंगर पर तिल:जिसकी अनामिका पर तिल हो तो वह ज्ञानी, यशस्वी, धनी और पराक्रमी होता है।


कनिष्ठका या लिटिल फिंगर पर तिल:कनिष्ठका पर तिल हो तो वह व्यक्ति संपत्तिवान होता है, किंतु उसका जीवन दुखमय होता है।


अंगूठे या थम्ब पर तिल: अंगूठे पर तिल हो तो व्यक्ति कार्यकुशल, व्यवहार कुशल तथा न्यायप्रिय होता है।


मध्यमा या मीडिल फिंगर पर तिल:मध्यमा पर तिल उत्तम फलदायी होता है। व्यक्ति सुखी होता है। उसका जीवन शांतिपूर्ण होता है।

किसी व्यक्ति को वश में कैसे करें

जानिए, किसी व्यक्ति को वश में कैसे करें
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सभी को किसी ना किसी को अपने वश में करना है। जो लोग लालची हैं उन्हें धन से वश में करें, जो लोग घमंडी हैं उन्हें मान-सम्मान देकर, जो मूर्ख हैं उनकी प्रशंसा करके और जो लोग विद्वान हैं उन्हें ज्ञान की बातों से वश में किया जा सकता है। वशीकरण है क्या...? यही कि जो आप बोलें, जो आप चाहें... वह ही हो जाए। कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस उसके वश में हो, पत्नी सोचती है पति वश में रहे, पति की भी सोच ऐसी ही रहती है। कोई दोस्त को अपने वश में करना चाहता है तो कोई अपनी औलाद को। लड़कों को लड़कियों को वश में करना है तो लड़कियों को लड़के अपने वश में चाहिए।

वशीकरण के लिए सबसे जरूरी है ध्यान...। एक जगह, एक बिंदू, एक स्थान, किसी भी उस वस्तु पर जिसे अपने वश में करना हो उसके लिए अपना मन केंद्रित करना ही ध्यान है। ध्यान से आपके शरीर में अद्भूत ऊर्जा का विकास होगा। भगवान शिव के बारे सभी जानते ही हैं वे युगों-युगों तक ध्यान में रहते हैं। जितना आप मेडिटेशन करेंगे आपके चेहरे पर तेज बढ़ जाएगा, एक मधुर मुस्कान सदा आपके चेहरे पर खिली दिखाई देगी, आपका व्यक्तित्व निखर जाएगा, आपके चलने, बोलने में आत्मविश्वास दिखाई देगा। जब ऐसा होने लगेगा तो जब आप बोलना शुरू करेंगे वहां सभी आपको ही सुनते दिखाई देंगे, आपकी मधुर मुस्कान और चेहरे की चमक के आगे आपका बॉस, आपका जीवन साथी, आपके मित्र आसानी से आपका कहा मान लेंगे। बस यही है वशीकरण का आसान और सुगम मार्ग

वशीकरण तिलक लगाने से किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है। शुद्ध सिन्दूर, शुद्ध केसर, शुद्ध गोरोचन को समान मात्रा में लेकर किसी चांदी की डिबिया या कटोरी में रख लें। प्रातः सूर्योदय के उपरांत इस डिबिया में से तिलक लेकर भृकुटि के मध्य आज्ञाचक्र पर लगाएं। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं, इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है। तिलक लगाते वक्त निम्नलिखित मन्त्र का जाप करें ऊँ नमः सर्व लोक वशंकराय कुरु कुरु स्वाहा।

1. तिलक के अभाव में सत्कर्म सफल नहीं होते। देव पूजन, मंत्र जप, होम तीर्थ शौच आदि कार्यों में नीचे से ऊपर की ओर अर्ध्वपुण्द्र लगाकर शुभ कृत्य करने चाहिए।

2. तिलक बैठकर लगाना चाहिए। भगवान पर चढ़ाने से बचे हुए चन्दन को ही लगाना चाहिए।

3. माथे पर तिलक लगाना प्रतीक है कि दोनों आंखों के बीच में उस परम शक्ति का या परमात्मा का निवास है जिसे पाकर हम सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकते हैं।

4. जब भी हम किसी परेशानी में होते हैं तो हमारा हाथ अपने आप ही माथे पर चला जाता है क्योंकि हमारी सारी परेशानियां उस परमलोक मे जाकर ही समाप्त होती हैं।

Wednesday, November 27, 2013

स्वप्न फल ....स्वप्नों का अर्थ


स्वप्न फल ....स्वप्नों का अर्थ

स्वप्नों के संबंध में प्राचीन शास्त्रीय उल्लेख, शकुन शास्त्र की प्राचीनता तथा वर्तमान में प्रासंगिकता, स्वप्नों के वैज्ञानिक तथा मनोवैज्ञानिक कारण तथा भूत, भविष्य एवं वर्तमान से उनका संबंध, शकुनों एवं अपशकुनों की व्याख्या और उनके दुष्प्रभावों के निवारण के लिए शास्त्रीय उपाय.
1अ-2 आ-3 इ-4 उ-5 ऊ-6 औ-7 ऐ-8 क-9 ख-10 ग-11 घ-12 च-13 स-14 छ-15 ज-16 झ-17 ट-18 ठ-19 ड-20 त-21 थ-22 ध-23 न-24 प-25 फ-26 ब-27 भ-28 म-29 य-30 र-31 ल-32 व-33 श-34 श्र-35 ह-36 द-

मानव मन का स्वप्नों के साथ गहरा संबंध है निद्रा की अवस्था में भी मस्तिष्क सक्रिय रहता है। अवचेतन मन की इच्छाएँ, दिन प्रतिदिन के तनाव एवं चिन्ताएं स्वप्न के रूप में दिखाई देती हैं। मनोवैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि कभी-कभी स्वप्न भविष्य में होने वाली घटनाओं का भी संकेत देते हैं। स्वप्नों से भविष्य संकेत की पुष्टि कई प्राचीन ग्रंथों द्वारा होती है।
मानव मस्तिष्क अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के प्रयत्नों में आदि काल से ही सक्रिय है। परंतु जब किसी कारण इसकी कुछ अधूरी इच्छाएं पूर्ण नहीं हो पाती जो कि मस्तिष्क के किसी कोने में जाग्रत अवस्था में रहती है तो वह स्वप्न का रूप ले लती हैं। आधुनिक विज्ञान में इस विषय में कहा है कि स्वप्न'' मानव की दबी हुई इच्छाओं का प्रकाशन करते हैं जिनको हमने अपनी जाग्रत अवस्था में कभी-कभी विचारा होता है। अर्थात स्वप्न हमारी वो इच्छाएं हैं जो किसी भी प्रकार के भय से जाग्रत् अवस्था में पूर्ण नहीं हो पाती हैं व स्वप्नों में साकार होकर हमें मानसिक संतुष्टि व तृप्ति देती है सपने या स्वप्न आते क्यों है? इस प्रश्न का कोई ठोस प्रामाणिक उत्तर आज तक खोजा नहीं जा सका है।
विज्ञान मानता है कि नींद का हमारे मस्तिष्क में होने वाले उन परिवर्तनों से संबंध होता है, जो सीखने और याददाश्त बढ़ाने के साथ-साथ मांस पेशियों को भी आराम पहुंचाने में सहायक होते हैं। इस नींद की ही अवस्था में न्यूरॉन (मस्तिष्क की कोशिकाएं) पुनः सक्रिय हो जाती हैं।
वैज्ञानिकों ने नींद को दो भागों में बांटा है पहला भाग आर ई एम अर्थात् रैपिड आई मुवमेंट है। (जिसमें अधिकतर सपने आते हैं) इसमें शरीर शिथिल परंतु आंखें तेजी से घूमती रहती हैं और मस्तिष्क जाग्रत अवस्था से भी ज्यादा गतिशील होता है। इस आर ई एम की अवधि १० से २० मिनट की होती है तथा प्रत्येक व्यक्ति एक रात में चार से छह बार आर ई एम नींद लेता है। यह स्थिति नींद आने के लगभग १.३० घंटे अर्थात ९० मिनट बाद आती है। इस आधार पर गणना करें तो रात्रि का अंतिम प्रहर आर ई एम का ही समय होता है (यदि व्यक्ति समान्यतः १० बजे रात सोता है तो ) जिससे सपनों के आने की संभावना बढ़ जाती है।
सपने बनते कैसे हैं : दिन भर विभिन्न स्रोतों से हमारे मस्तिष्क को स्फुरण (सिगनल) मिलते रहते हैं। प्राथमिकता के आधार पर हमारा मस्तिष्क हमसे पहले उधर ध्यान दिलवाता है जिसे करना अति जरूरी होता है, और जिन स्फुरण संदेशों की आवश्यकता तुरंत नहीं होती उन्हें वह अपने में दर्ज कर लेता है। इसके अलावा प्रतिदिन बहुत सी भावनाओं का भी हम पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। जो भावनाएं हम किसी कारण वश दबा लेते हैं गुस्सा आदि वह भी हमारे अवचेतन मस्तिष्क में दर्ज हो जाती हैं। रात को जब शरीर आराम कर रहा होता है मस्तिष्क अपना काम कर रहा होता है। इस दौरान हमें चेतनावस्था में कोई स्कुरण संकेत भावनाएं आदि नहीं मिल रही होती उस समय मस्तिष्क दिन भर मिले संकेतों को लेकर सक्रिय होता है जिनसे स्वप्न प्रदर्शित होते हैं।
यह वह स्वप्न होते हैं जो मस्तिष्क को दिनभर मिले स्फुरण, भावनाओं को दर्शाते हैं जिन्हें दिन में हमने किसी कारण वश रोक लिया था। जब तक यह प्रदर्शित नहीं हो पाता तब तक बार-बार नजर आता रहता है तथा इन पर नियंत्रण चाहकर भी नहीं किया जा सकता
भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार भूत, वर्तमान और भविष्य का सूक्ष्म आकार हर समय वायुमंडल में विद्यमान रहता है। जब व्यक्ति निद्रावस्था में होता है तो सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है। यही संपर्क स्वप्न का कारण और स्वप्न का माध्यम बनता है।
व्यक्ति सक्रिय है, वह स्वप्न अवश्य देखता है। सभी प्राणियों में मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जो स्वप्न देख सकता है। अर्थात् जो मनुष्य स्वप्न नहीं देखता, वह जीवित नहीं रह सकता। इसका अभिप्राय यह है कि जो जीवित और सक्रिय है, वह स्वप्न अवश्य देखता है। केवल जन्म से अंधे व्यक्ति स्वप्न नहीं देख सकते लेकिन वे भी स्वप्न में ध्वनियां तो सुनते ही हैं। अर्थात स्वप्न तो उनको भी आते हैं। स्वप्न सोते हुए ही नहीं, जागते हुए भी देखे जा सकते हैं। इस प्रकार स्वप्न को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।
जागृत अवस्था के स्वप्न
निद्रावस्था के स्वप्न
जागृत अवस्था के स्वप्न कवियों, दार्शनिकों, प्रेमी-प्रेमिकाओं, अविवाहित किशोर, युवक-युवतियों को अधिक आते हैं। ये स्वप्न कलात्मक होते हैं। भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार भूत, वर्तमान और भविष्य का सूक्ष्म आकार हर समय वायुमंडल में विद्यमान रहता है। जब व्यक्ति निद्रावस्था में होता है तो सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है। यही संपर्क स्वप्न का कारण और स्वप्न का माध्यम बनता है। जिस व्यक्ति विशेष की साधना इतनी प्रबल होती है कि वह जागृतावस्था में या ध्यानावस्था में इन भूत-भविष्य के सूक्ष्म आकारों से संपर्क कर लेता है, वही योगी और भविष्यदृष्टा कहलाता है।अवचेतन मन की पहुंच हमारे शरीर तक ही सीमित नहीं, वरन् वह विश्व के किसी भी भाग में जब चाहे पहुंच सकता है। अतः भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों का ज्ञान अवचेतन मन से ही संभव है। नीचे कुछ मुख्य-मुख्य स्वप्नों के भावों फलों का संक्षिप्त वर्णन किया जा रहा है। स्वप्न फलों के संबंध में निम्न बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है। रात्रि में तीन बजे से सूर्योदय के पूर्व के स्वप्न सात दिन में, मध्य रात्रि के स्वप्न 1 माह में, मध्य रात्रि से पहले के स्वप्न 1 वर्ष में अपना फल प्रदान करते हैं। दिन के स्वप्न महत्वहीन होते हैं। एक रात में एक से अधिक स्वप्न आएं तो अंतिम ही फलदायक होगा
शुभ स्वप्न
जो व्यक्ति स्वप्नावस्था में घोड़ा, हाथी, सफेद बैल, जूते, रथ में स्वयं को सवार देखता है-उसे ग्राम, नगर, राज्य अथवा देश से अवश्य ही सम्मान की प्राप्ति होती है।
जो व्यक्ति स्वप्न में देवी लक्ष्मी की मूर्ति देखने से धन की प्राप्ति होती है।
जो व्यक्ति गोरैया, नीलकंठ, कबूतर, सारस, तोता व तीतर दिखाई देने से गृहस्थ जीवन खुशहाल होता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को किसी महल के ऊँचे बुर्ज पर खड़े देखना भावी जीवन में उन्नति का संकेत है।
जो व्यक्ति किसी बड़े जलाशय, सरोवर, नदी अथवा सागर में स्वयं को तैरता देखने वाला मनुष्य सभी प्रकार के संकटों से मुक्त हो जाता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में उल्लू देखने से भगवती लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति होती है।
जो व्यक्ति स्वप्नावस्था में तिल, चावल गेहूं, सरसों, जौ, अन्न का ढेर, पुष्प, छाता, ध्वज, दही, पान, कमल, कलश, शंख और सोने के गहने देखता है उसे सभी प्रकार का सुख मिलता है।
जो व्यक्ति यदि कोई रोगी स्वप्न में दवाई की बोतल टूटी हुई देखता है तो वह शीघ्र ही रोग मुक्त हो जाता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में फल देखना बहुत शुभ होता है।
जो व्यक्ति यदि आप स्वयं को किसी ऊंचाई पर चढ़ता देखें तो यह भविष्य में उन्नति का संकेत है।
जो व्यक्ति यदि आप स्वप्न में नए वस्त्र पहने दिखते हैं तो आपको कोई मांगलिक कार्य का संदेश मिलने वाला है।
जो व्यक्ति यदि आप किसी वृद्ध व्यक्ति अथवा साधु को देखते हैं तो आपको बड़ा लाभ अथवा सम्मान मिलने वाला है।
अशुभ स्वप्न
जो व्यक्ति यदि स्वप्न में किसी बच्चे का जन्म होता दिखाई दे तो सावधान होना चाहिए क्योंकि यह आगामी दुर्घटना का संकेत है
जो व्यक्ति यदि स्वप्न में किसी रोते बच्चे को देखें तो कोई संकट आने वाला है।
जो व्यक्ति स्वप्न में जिस व्यक्ति को दक्षिण दिशा में खड़े पितर बुलाते हैं उसको अपना अंतिम समय आया हुआ जान लेना चाहिए।
जो व्यक्ति स्वप्न में कोई खंडहर, सुनसान जगह देखना, भटक जाना और निकलने का कोई मार्ग न मिलना हानि कारक होता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि कोई किसी के पांवों को कटा हुआ देखेगा तो उसके जीवन में अनेक प्रकार की आर्थिक और व्यवसायिक बाधाएं आने वाली हैं।
जो व्यक्ति स्वप्न में किसी बारात में शामिल होना अशुभ है।
जो व्यक्ति स्वप्न में किसी की हत्या होते देखने का अर्थ है कि कोई आपके खिलाफ बगावत कर रहा है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि कोई सोना चांदी आदि धातुओं की चोरी करता है तो यह अशुभ है। इस का प्रभाव व्यवसाय पर पड़ सकता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि कोई पानी में डूबता जा रहा है तो यह आने वाले संकटों का सूचक है।
जो व्यक्ति यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को डोरी से बंधा हुआ देखता है तो उसे शीघ्र ही किसी अपराध में बंदी बनाया जा सकता है।
जो व्यक्ति स्वप्न में यदि ऐसा प्रतीत हो कि कोई व्यक्ति स्वप्न देखने वाले की पत्नी का अपहरण करके ले जा रहा है तो शीघ्र ही उसके धन की हानि होती है।
अनिष्ट फल नाशक उपाय
यदि मन यह स्वीकार करे कि देखे गए स्वप्न का परिणाम अनिष्टकारी हो सकता है तो उसके निवारण का उपाय अवश्य किया जाना चाहिए। चित्रकूट वास के समय श्री राम ने भी एक स्वप्न देखा था जिसके अनिष्ट फल के निवारण हेतु उन्होंने भगवान शंकर की पूजा की थी। उचित उपाय करने से बुरे स्वप्न से होने वाला दुष्प्रभाव अत्यन्त क्षीण अथवा समाप्त हो जाता है। यदि स्वप्न अधिक भयानक और रात्रि १२ से २ बजे देखा जए तो तुरंत श्री शिव का नाम स्मरण करें। ÷ऊँ नमः शिवाय' का जप करते हुए सो जाएं। तत्पश्चात् ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि करके शिवमंदिर में जाकर जल चढ़ाएं पूजा करें व पुजारी को कुछ दान करें। इससे संकट नष्ट हो जाता है।
यदि स्वप्न ४ बजे के बाद देखा गया है और स्वप्न बुरा है, तो प्रातः उठकर बिना किसी से कुछ बोले तुलसी के पौधे से पूरा स्वप्न कह डालें। कोई दुष्परिणाम नहीं होगा। स्नान के बाद ÷ऊँ नमः शिवाय' का १०८ बार जप करें।
हनुमान जी सब प्रकार का अनिष्ट दूर करने वाले हैं। बुरे स्वप्न का अनिष्ट दूर करने के लिए सुंदरकांड, बजरंग बाण, संकटमोचन स्तोत्र अथवा हनुमान चालीसा का पाठ भी सांयकाल के समय किया जा सकता है। यदि स्वप्न बहुत बुरा है और आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो सुबह उठकर सफेद कागज पर स्वप्न को लिखें फिर उसे जला दें। राख नाली में पानी डाल कर बहा दें। फिर स्नान करके एक माला शिव के मंत्र ऊँ नमः शिवाय' का जप करें। दुष्प्रभाव नष्ट हो जाएगा।
रोगी स्वप्न फल
1.यदि रोगी सिर मुंडाएं ,लाल या काले वस्त्र धारण किए किसी को सपने में देखता है या अंग भंग व्यक्ति को देखता है तो रोगी की दशा अच्छी नही है ।
2. यदि रोगी सपने मे किसी ऊँचे स्थान से गिरे या पानी में डूबे या गिर जाए तो समझे कि रोगी का रोग अभी और बड़ सकता है।
3. यदि सपने में ऊठ,शेर या किसी जंगली जानवर की सवारी करे या उस से भयभीत हो तो समझे कि रोगी अभी किसी और रोग से भी ग्र्स्त हो सकता है।
4. यदि रोगी सपने मे किसी ब्राह्मण,देवता राजा गाय,याचक या मित्र को देखे तो समझे कि रोगी जल्दी ही ठीक हो जाएगा ।
5.यदि कोई सपने मे उड़ता है तो इस का अभिप्राय यह लगाया जाता है कि रोगी या सपना देखने वाला चिन्ताओं से मुक्त हो गया है ।
6.यदि सपने मे कोई मास या अपनी प्राकृति के विरूध भोजन करता है तो ऐसा निरोगी व्यक्ति भी रोगी हो सकता है ।
7,यदि सपने में साँप देखता है तो ऐसा व्यक्ति आने वाले समय मे परेशानी में पड़ सकता है ।या फिर मनौती आदि के पूरा ना करने पर ऐसे सपनें आ सकते हैं।

1 स्वप्नों का अर्थ अ-
अप्सरा देखना – धन और मान सम्मान की प्राप्ति
अर्थी देखना – धन लाभ हो
अमरुद खाना – धन मिले
अनानास खाना – पहले परेशानी फिर राहत मिले
अदरक खाना – मान सम्मान बढे
अनार के पत्ते खाना – शादी शीघ्र हो
अखरोट देखना – भरपुर भोजन मिले तथा धन वृद्धि हो
अनाज देखना -चिंता मिले
अनार खाना (मीठा ) – धन मिले
अजनबी मिलना – अनिष्ट की पूर्व सूचना
अजवैन खाना – स्वस्थ्य लाभ
अध्यापक देखना – सफलता मिले
अँधेरा देखना – विपत्ति आये
अँधा देखना – कार्य में रूकावट आये
अमलतास के फूल – पीलिया या कोढ़ का रोग होना
अरहर देखना – शुभ
अरहर खाना – पेट में दर्द
अरबी देखना – सर दर्द या पेट दर्द
अलमारी बंद देखना – धन प्राप्ति हो
अलमारी खुली देखना – धन हानि हो
अंगूर खाना – स्वस्थ्य लाभ
अंग रक्षक देखना – चोट लगने का खतरा
अपने को आकाश में उड़ते देखना – सफलता प्राप्त हो
अपने पर दूसरौ का हमला देखना – लम्बी उम्र
अंग कटे देखना – स्वास्थ्य लाभ
अंग दान करना – उज्जवल भविष्य , पुरस्कार
अंगुली काटना – परिवार में कलेश
अंगूठा चूसना – पारवारिक सम्पति में विवाद
अन्तेस्ति देखना – परिवार में मांगलिक कार्य
अस्थि देखना – संकट टलना
अंजन देखना – नेत्र रोग
अंक देखना विषम – शुभ
अस्त्र से स्वयं को कटा देखना – शीघ्र कष्ट मिले
अपने दांत गिरते देखना – बंधू बांधव को कष्ट हो
आंसू देखना – परिवार में मंगल कार्य हो
आवाज सुनना – अछा समय आने वाला है
आंधी देखना – संकट से छुटकारा
आंधी में गिरना – सफलता मिलेगी
अपने आप को अकेला देखना – लम्बी यात्रा
अख़बार पढ़ना, खरीदना – वाद विवाद
अचार खाना , बनाना – सिर दर्द, पेट दर्द
अट्हास करना – दुखद समाचार मिले
अध्यक्ष बनना – मान हानि
अध्यन करना -असफलता मिले
अपहरण देखना – लम्बी उम्र
अभिमान करना – अपमानित होना
अध्र्चन्द्र देखना – औरत से सहयोग मिले
अमावस्या होना – दुःख संकट से छुटकारा
अगरबत्ती देखना – धार्मिक अनुष्ठान हो
अगरबत्ती जलती देखना – दुर्घटना हो
अगरबत्ती अर्पित करना – शुभ
अपठनीय अक्षर पढना – दुखद समाचार मिले
अंगीठी जलती देखना – अशुभ
अंगीठी बुझी देखना – शुभ
अजीब वस्तु देखना – प्रियजन के आने की सूचना
अजगर देखना – शुभ
अस्त्र देखना – संकट से रक्षा
अंगारों पर चलना – शारीरिक कष्ट
अंक देखना सम – अशुभ
2 स्वप्नों का अर्थ आ-
आइना देखना – इच्छा पूरण हो , अछा दोस्त मिले
आइना में अपना मुहं देखना – नौकरी में परेशानी , पत्नी में परेशानी
आसमान देखना – ऊचा पद प्राप्त हो
आसमान में स्वयं को देखना – अच्छी यात्रा का संकेत
आसमान में स्वयं को गिरते देखना – व्यापार में हानि
आग देखना – गलत तरीके से धन की प्राप्ति हो
आग जला कर भोजन बनाना – धन लाभ , नौकरी में तरक्की
आग से कपडा जलना – अनेक दुख मिले , आँखों का रोग
आजाद होते देखना – अनेक चिन्ताओ से मुक्ति
आलू देखना – भरपूर भोजन मिले
आंवला देखना – मनोकामना पूर्ण न होना
आंवला खाते देखना – मनोकामना पूर्ण होना
आरू देखना – प्रसनता की प्राप्ति
आक देखना – शारारिक कष्ट
आम खाते देखना – धन और संतान का सुख
आलिंगन देखना पुरुष का औरत से – काम सुख की प्राप्ति
आलिंगन देखना औरत का पुरुष से – पति से बेवफाई की सूचना
आलिंगन देखना पुरुष का पुरुष से- शत्रुता बढ़ना
आलिंगन देखना औरत का औरत से – धन प्राप्ति का संकेत
आत्महत्या करना या देखना – लम्बी आयु
आवारागर्दी करना – धन लाभ हो नौकरी मिले
आँचल देखना – प्रतियोगिता में विजय
आँचल से आंसू पोछना – अछा समय आने वाला है
आँचल में मुँह छिपाना – मान समान की प्राप्ति
आरा चलता हुआ देखना – संकट शीघ्र समाप्त होगे
आरा रूका हुआ देखना- नए संकट आने का संकेत
आवेदन करना या लिखना – लम्बी यात्रा हो
आश्रम देखना – व्यापार में घाटा
आट्टा देखना – कार्य पूरा हो
आइसक्रीम खाना – सुख शांति मिले
3 स्वप्नों का अर्थ इ
इमली खाते देखना – औरत के लिए शुभ ,पुरुष के लिए अशुभ
इडली साम्भर खाते देखना – सभी से सहयोग मिले
इष्ट देव की मूर्ति चोरी होना – मृत्युतुल्य कष्ट आये
इश्तहार पढना – धोखा मिले, चोरी हो
इत्र लगाना – अछे फल की प्राप्ति, मान सम्मान बढेगा
इमारत देखना – मान सम्मान बढे, धन लाभ हो
ईंट देखना – कष्ट मिलेगा
इंजन चलता देखना – यात्रा हो , शत्रु से सावधान
इन्द्रधनुष देखना – संकट बढे , धन हानि हो
इक्का देखना हुकम का – दुःख व् निराशा मिले
इक्का देखना ईंट का -कष्टकारक स्तिथि
इक्का देखना पान का -पारवारिक क्लेश
इक्का देखना चिड़ी का – गृह क्लेश ,अतिथि आने की सूचना
4 स्वप्नों का अर्थ उ-
उजाड़ देखना – दूर स्थान की यात्रा हो
उस्तरा प्रयोग करना – यात्रा में धन लाभ हो
उपवन देखना – बीमारी की पूर्व सूचना
उदघाटन देखना – अशुभ संकेत
उदास देखना – शुभ समाचार मिले
उधार लेना या देना – धन लाभ का संकेत
स्वयं को उड़ते देखना – गंभीर दुर्घटना की पूर्व सूचना
उछलते देखना -दुखद समाचार मिलने का संकेत
उल्लू देखना -दुखों का संकेत
उबासी लेना – दुःख मिले
उल्टे कपडे पहनना – अपमान हो
उजाला देखना – भविष्य में सफलता का संकेत
उजले कपडे देखना -इज्जत बढे , विवाह हो
उठना और गिरना – संघर्ष बढेगा
उलझे बाल या धागे देखना – परेशानिया बढेगी
उस्तरा देखना – धन हानि , चोरी का भय
5 स्वप्नों का अर्थ ऊ
ऊंघना – धन हानि , चोरी का भय
ऊंचाई पर अपने को देखना – अपमानित होना
ऊन देखना – धन लाभ हो
ऊंचे पहाड़ देखना – काफी मेहनत के बाद कार्य सिद्ध होना
ऊंचे वृक्ष देखना – मनोकामना पूरी होने में समय लगना
6 स्वप्नों का अर्थ औ-
औषधी देखना – गलत संगति देखना
7 स्वप्नों का अर्थ ऐ-
ऐनक लगते देखना – विद्या मिले, ख़ुशी इज्जत मिले
8 स्वप्नों का अर्थ क
कब्र खोदना – धन पाए , मकान बनाये
कत्ल करना स्वयं का – अच्छा सपना है , बुरे काम से बचे
कद अपना छोटा देखना – अपमान सहना , परेशानी उठाना
कद अपना बड़ा देखना – भारी संकट आना
कसम खाते देखना – संतान का दुःख भोगना
कलम देखना – विद्या धन की प्राप्ति
कर्जा देना – खुशहाली आये
कर्जा लेना – व्यापार में हानि
कला कृतिया देखना – मान समान बढे
कपूर देखना – व्यापार में लाभ
कबाडी देखना – अच्छे दिनों की शुरूआत
कबूतर देखना – प्रेमिका से मिलना
कबूतरों का झुंड – शुभ समाचार मिले
कमल का फूल – ज्ञान की प्राप्ति
कपास देखना – सुख समृधि हो
कंगन देखना – अपमान हो
कदू देखना – पेट दर्द
कन्या देखना – धन वृद्धि हो
कफन देखना – लम्बी उम्र
कली देखना – स्वास्थ्य खराब हो
कछुआ देखना – शुभ समाचार मिले
कलश देखना – सफलता
कम्बल देखना – बीमारी आये
कपडा धोना – पहले रूकावट , फिर लाभ
कटा सिर देखना – शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी
कब्रिस्तान देखना – निराशा हो
कंघी देखना – चोट लगना , दांत या कान में दर्द
कसरत – बीमारी आने की सूचना
काली आँखे देखना – व्यापार में लाभ
काला रंग देखना – शुभ फल
काजू खाना – नया व्यापार शुरू हो
कान देखना – शुभ समाचार
कान साफ करना – अच्छी बातो का ज्ञान
काउंटर देखना – लेने देने में लाभ हो
कारखाना देखना – दुर्घटना में फसने की सूचना
काली बिल्ली देखना – लाभ हो
कुंडल पहने देखना – संकट हो
कुबडा देखना – कार्य में विघ्न
कुमकुम देखना – कार्य में सफलता
कुल्हाडी देखना – परिश्रम अधिक, लाभ कम
कुत्ता भोंकना – लोगो द्वारा मजाक उड़ना
कुत्ता झपटे – शत्रु की हार
कुर्सी खाली देखना – नौकरी मिले
कूड़े का ढेर देखना – कठिनाई के बाद धन मिले
किला देखना – ख़ुशी प्राप्त हो
कील देखना / ठोकना – परिवार में बटवारा हो
केश संवारना – तीर्थ यात्रा
केला खाना / देखना – ख़ुशी हो
केक देखना – अच्छी वस्तु मिले
कैमरा देखना – अपने भेद छिपा कर रखे
कोढ़ी देखना – धन का लाभ
कोहरा – संकट समाप्त हो
कोठी देखना – दुःख मिले
कोयल देखना / सुनना – शुभ समाचार
कोया देखना – शुभ संकेत
किसी ऊंचे स्थान से कूदना – असफलता
कद लम्बा देखना – मृत्युतुल्य कष्ट हो
कद घटना – अपमान हो
कटोरा देखना – बनते काम बिगढ़ना
कनस्तर खाली देखना – शुभ
कनस्तर भरा देखना – अशुभ
कमंडल देखना – परिवार के किसी सदस्य से वियोग
करवा चौथ – औरत देखे तो आजीवन सधवा, पुरुष देखे तो धन धान्य संपूरण
कागज कोरा – शुभ
कागज लिखा देखना – अशुभ
कुर्सी पर स्वयं को बैठे देखना – नया पद, पदोनती
कुर्सी पर अन्य को बैठे देखना – अपमान
कब्र खोदना – मकान का निर्माण करना
कपूर देखना – व्यापार नौकरी में लाभ
कबूतर देखना – प्रेमिका से मिलन
कपडा बेचते देखना – व्यापार में लाभ
कपडे पर खून के दाग – व्यर्थ बदनामी
कछुआ देखना – धन आशा से अधिक मिलना
कमल ककडी देखना – सात्विक भोजन में आनंद, ख़ुशी मिले
कपास देखना – सुख, समृधि घर आये
करी खाना – विधवा से विवाह, विधुर से विवाह
कृपाण – धरम कार्य पूर्ण होने की सूचना
कान देखना – शुभ समाचार
कान कट जाना – अपनों से वियोग
काला कुत्ता देखना – कार्य मे सफलता
काउंटर देखना – लेन देन में लाभ
काली बिल्ली देखना – शुभ समाचार
पीली बिल्ली देखना – अशुभ समाचार
काना व्यक्ति देखना – अनकूल समय नहीं
कीडा देखना – शक्ति का प्रतीक
कुम्हार देखना – शुभ समाचार
केतली देखना – दांपत्य जीवन में शांति हो
केला देखना या खाना – शुभ समाचार
कैंची – अकारण किसी से वाद- विवाद होना
कोठी देखना – दुःख मिले
कोयला देखना – प्रेम के जाल में फँस कर दुःख पाए
कुरान- सुख शांति की भावना बढे
9 स्वप्नों का अर्थ ख
खरोंच लगना -शरीर स्वस्थ हो
खटमल देखना – जीवन में संघर्ष
खटमल मारना – कठिनाई से छुटकारा
खरबूजा देखना -सफलता मिले
ख़त पढ़ना – शुभ समाचार
खरगोश देखना – औरत से बेवफाई
खलिहान देखना – सम्मान बडे
खटाई खाना – धन हानि हो
खाली खाट देखना -बीमार पड़ने की सूचना
खाली बर्तन देखना – काम में हानि
खिलखिलाना – दुखद समाचार मिलने का संकेत
खिल्ली उडाना -लोगो से निराशा मिले
खिलौना देखना – आँखों को सुख मिले
खुजली होना – रोग से छुटकारा पाने का संकेत
ख़ुशी देखना – परेशानी बढे
खुशबू लगाना – सम्मान बढे
खून खराबा -सौभाग्य वृद्धि
खून देखना – धन मिले
खून की वर्षा देखना – देश में अकाल पड़े
खून में लोटना – धन-सम्पति प्राप्त होने का संकेत
खेल कूद में भाग लेना – भाग्यौनात्ति होना
खेत देखना -यात्रा हो , विद्या व् धन की वृद्धि
खेत काटते देखना – पत्नी से मन मुटाव होना
खोपडी देखना – बौधिक कार्यो में सफलता
10 स्वप्नों का अर्थ ग
गधा देखना -प्यार मिले
गधा लदा हुआ देखना – व्यापार में लाभ हो
गधे की चीख सुनना – दुख हो
गधे की सवारी करना – शुभ समाचार मिले
गाय देखना – धन लाभ हो
गाय या बैल पीले रंग की देखना – महामारी आने के लक्षण
गरम पानी देखना – बुखार या अन्य बीमारी आये
गंजा सिर देखना – परीक्षा में पास हो, सम्मान बड़े
गली देखना – सुनसान गली देखने से लाभ , भीड़ वाली गली देखने से मृत्यु का समाचार
गवाही देना -अपराध में फंसना
गमला देखना – खाली देखने पर झंझट , फूल खिले देखने पर शुभ
गलीचा देखना या उस पर बैठना – शोक में शामिल होना
ग्वाला /ग्वालिन देखना – शुभ फल
गाजर देखना – फसल अच्छी हो
गाड़ी देखना – यात्रा सार्थक हो
गलिया देते देखना – बदनामी हो
गायत्री पाठ करना – दुर्लभ स्वप्न मान सम्मान बड़े
गिलास देखना – घरेलू खर्चो में कमी होगी
गिनती करना – काम में हानि
गिरगिट देखना – झगडे में फसने का संकेत
गिलहरी देखना – बहुत शुभ
गीदढ़ देखना – शत्रु से भय मिले
गीली वस्तु देखना – लम्बी बीमारी आने के संकेत
गीता देखना – दुर्लभ समय
गुलाब देखना – सम्मान में वृद्धि
गुढ खाना – सफलता मिले
गुडिया देखना – जल्दी विवाह का संकेत
गुठली खाना या फेंकना – काफी धन आने की सूचना
गेंहू देखना – काफी मेहनत कर के कमाई होना
गेंद देखना – परेशानी होना
गेंदे का फूल देखना – मानसिक अशांति
गेरुआ वस्त्र देखना – समय शुभ है
गीता – कष्ट दूर हो
ग्रन्थ साहिब – धार्मिक कार्यो में रूचि हो
11 स्वप्नों का अर्थ घ
घडी देखना – यात्रा पर जानाधमाका सुनना – कष्ट बढे
घडी गुम हो जाना – यात्रा का कार्यकर्म स्थगित होना
घर देखना (सजा हुआ ) – संपत्ति में हानि
घर देखना (खंडहर ) – संपत्ति में लाभ
घर में किसी और का प्रवेश देखना – शत्रु पर विजय
घर में आग देखना – सरकार से लाभ हो
घर सोने का देखना – घर में आग लगने का संकेत
घर लोहे का देखना – मान सम्मान बढेगा
घडा भरा देखना – धन लाभ हो
घंटे की आवाज़ सुनना – चोरी होने का संकेत
घंटाघर देखना – अशुभ समाचार
घाट देखना – तीर्थ यात्रा पर जाने का संकेत
घायल देखना – संकट से छुटकारा
घास देखना – लाभ होगा
घी देखना – धन दौलत बढे
घुटने टेकना – वाद विवाद में सफलता मिले
घुंघरू की आवाज सुनना – मान सम्मान बढेगा
घूंघट देखना – नया व्यापार शुरू हो
घोड़ा सजा हुआ देखना – कार्य में हानि
घोड़ा काला देखना -मान सम्मान बढेगा
घोड़ा या हाथी पर चड़ना – उन्नत्ति हो
12 स्वप्नों का अर्थ च
चलता पहिया देखना – कारोबार में उन्नत्ति हो
चप्पल पहनना – यात्रा पर जाना
चक्की देखना – मान सम्मान बढेगा
चमडा देखना – दुःख हो
चबूतरा देखना -मान सम्मान बढेगा
चट्टान देखना (काली ) – शुभ
चट्टान देखना (सफेद ) – अशुभ
चपत मारना – धन हानि हो
चपत खाना – शुभ फल की प्राप्ति
चरबी देखना – आग लगने का संकेत
चलना जमीन पर -नया रोजगार मिले
चलना पानी पर – कारोबार में हानि
चलना आसमान पर – बीमारी आने का संकेत
चन्द्र ग्रहण देखना – सभी कार्य बिगडे
चमगादर उड़ता देखना – लम्बी यात्रा हो
चमगादर लटका देखना – अशुभ संकेत
चम्मच देखना – नजदीकी व्यक्ति धोखा दे
चप्पल देखना – यात्रा पर जाना
चटनी खाना – दुखो में वृद्धि
चरखा चलाना – मशीनरी खराब हो
चश्मा खोना – चोरी के संकेत
चांदी के बर्तन में दूध पीना – संम्पत्ति में वृद्धि हो
चारपाई देखना – हानि हो
चादर शरीर पर लपेटना -गृह क्लेश बढे
चादर मैली देखना – धन लाभ हो
चादर समेट कर रखना – चोरी होने का संकेत
चंचल आँखे देखना – बीमारी आने की सूचना
चांदी का सामान देखना – गृह क्लेश बढे
चोकलेट खाना -अच्छा समय आने वाला है
चाय देखना – धन वृद्धि हो
चावल देखना – कठिनाई से धन मिले
चाकू देखना – अंत में विजय
चित्र देखना – पुराने मित्र से मिलन हो
चिडिया देखना – मेहमान आने का संकेत
चींटी देखना – धन लाभ हो
चींटिया बहुत अधिक देखना – परेशानी आये
चील देखना – बदनामी हो
चींटी मारना – तुंरत सफलता मिले
चुम्बन लेना – आर्थिक समृधि हो
चुम्बन देना – मित्रता बढे
चुटकी काटना – परिवार में कलेश
चुंगी देना – चलते काम में रूकावट
चुंगी लेना – आर्थिक लाभ
चूल्हा देखना – उत्तम भोजन प्राप्त हो
चूरन खाना – बीमारी में लाभ
चेचक निकलना – धन की प्राप्ति
चोर पकड़ना – धन आने की सूचना
चोटी पर स्वयं को देखना – हानि हो
चोराहा देखना – यात्रा में सफलता
चौकीदार देखना – अचानक धन आये
चौथ का चाँद देखना – बहुत अशुभ
चुडैल देखना -धन हानि हो
चूहा देखना -औरत से धोखा
चूहा फंसा देखना – शरीर को कष्ट
चूहा चूहे दानी से निकलते देखना – कष्ट से मुक्ति
चूहा मरा देखना – धन लाभ
चूहा मारना – धन हानि
चूडिया तोड़ना – पति दीर्घायु हो (औरत के लिए
13 स्वप्नों का अर्थ स
स्याही देखना – सरकार से सम्मान मिले
स्टोव जलाना – भोजन अच्छा मिले
संडास देखना – धन वृद्धि हो
संगीत देखना या सुनना – कष्ट बढे
संदूक देखना – पत्नी सेवा करे , अचानक धन मिले
सगाई देखना या उसमे शामिल होना -
सजा पाना – संकटों से छुटकारा मिलाना
सट्टा खेलना – धोखा होने का संकेत
सलाद खाते देखना – धन वृद्धि हो
सर्कस देखना – बहुत मेहनत करनी पड़े
सलाई देखना – मान सम्मान बढे
सरसों का साग खाना – बीमारी दूर हो
सरसों देखना – व्यापार में लाभ हो
ससुर देखना – शुभ समाचार मिले
सर कटा देखना – विदेश यात्रा हो
सर फटा देखना – कारोबार में हानि हो
सर मुंडाना – गृह कलेश में वृद्धि हो
सर के बाल झड़ते देखना – क़र्ज़ से मुक्ति मिले
ससुराल जाना – गृह कलेश में वृद्धि हो
समुद्र पार करना – उनत्ति मिले
साइकिल देखना -सफलता मिले
साइकिल चलाना – काम में तरक्की मिले
साइन बोर्ड देखना – व्यापार में लाभ हो
सावन देखना – जीवन में ख़ुशी मिले
साडी देखना – विवाह हो , दाम्पत्य जीवन में सुख मिले
सारस देखना – धन वृद्धि हो
साला या साली देखना – दाम्पत्य जीवन में सुख हो , मेहमान आये , धनवृद्धि हो
सागर सूखता देखना -बीमारी आये , अकाल पड़े
सारंगी बजाना – अपयश मिले , धन हानि हो
साग देखना – अचानक विवाद हो , सावधान रहे
साबुन देखना – स्वस्थ्य लाभ हो , बीमारी दूर हो
सांप मारना या पकड़ना – दुश्मन पर विजय हो , अचानक धन मिले
सांप से डर जाना -नजदीकी मित्र से विश्वासघात मिले
सांप से बातें करना -शत्रु से लाभ मिले
सांप नेवले की लडाई देखना – कोर्ट कचेहरी जाना पड़े
सांप के दांत देखना -नजदीकी रिश्तेदार हानि पहुंचाएंगे
सांप छत्त से गिरना – घर में बीमारी आये तथा कोर्ट कचहरी में हानि हो
सांप का मांस देखना या खाना – अपार धन आये परन्तु घर में धन रुके नहीं
सिपाही देखना – कानून के विपरीत काम कारनेका संकेत
सिनेमा देखना – समय व्यर्थ में नष्ट हो
सिगरेट पीते देखना -व्यर्थ में धन बर्बाद हो
सिलाई मशीन देखना – पति पत्नी में झगडा हो
सिलाई करना – बिगडा काम बन जाये
सियार देखना -धन हानि हो , बीमारी आये
सिन्दूर देखना – दुर्घटना की सम्भावना
सिन्दूर देवता पर चडाना – मनोकामना पूर्ण हो
सीताफल देखना -कुछ समय के बाद गरीबी दूर होगी
सीता जी को देखना -मान सम्मान बढे
सीमा पार करना -विदेश व्यापार में लाभ हो
सिप्पी देखना – उसे देखने पर हानि , उठाने पर लाभ
सीना चौडा होना – लोकप्रियता में वृद्धि हो
सीड़ी पर चढ़ना – काम में असफलता मिले
सुनहार देखना – साथी से धोखा मिले
सुटली कमर में बंधना -गरीबी आये , संघर्ष करना पढ़े
सुम्भा देखना (लोहे का)- कार्य में सफलता मिले , विवाह हो
सुदर्शन चक्र देखना – बईमानी का दंड शीघ्र मिले
सुपारी देखना -विवाह शीघ्र हो , मित्रों की संख्या में वृद्धि हो
सुनहरी रंग देखना – रुका हुआ धन मिले
सुरंग देखना या सुरंग में प्रवेश करना – नया कार्य आरंभ हो
सूई देखना – एक देखने पर सुख तथा अनेक देखने पर कष्ट में वृद्धि हो
सुलगती आग देखना – शोक समाचार मिले
सुन्दर स्त्री देखना – मान सम्मान में हानि हो
सुनहरी धूप देखना – सरकार से धन लाभ हो , मान सम्मान बढे
सुराही देखना – गृहस्थी में तनाव हो , पति या पत्नी का चरित्र ख़राब हो , रोग दूर हो
सुगंध महसूस करना – चमड़ी की बीमारी आये
सुनसान जगह देखना – बलवृद्धि हो
सूद लेते देखना – मुफ्त का धन मिले
सूद देते देखना -धन नाश हो , गरीबी आये
सूली पर चढ़ना – चिन्ताओ से मुक्ति हो , शुभ समाचार मिले
सूर्य देखना – धन संपत्ति तथा मान सम्मान बढे
सूर्य की तरह अपना चेहरा चमकता देखना – पुरस्कार मिले , मान सम्मान बढे
सूअर देखना – बुरे कामों में फँसना पड़े , बुरे लोगों से दोस्ती हो तथा मानहानि हो
सूअर का दूध पीना – चरित्र खराब हो , जेल जाना पढ़े
सूरजमुखी का फूल देखना – संकट आने की सूचना
सूर्य चन्द्र आदि का विनाश देखना – मृत्यु तुल्य कष्ट मिले
सेम की फली देखना – धन हानि हो परन्तु अच्छा भोजन मिले
सेब का फल देखना – दुःख व् सुख में बराबर वृद्धि हो
सेंध लगाना – प्रिये वस्तु गुम होना
सेवा करना – मेहनत का फल मिलेगा
सेवा करवाना – स्वस्थ्य खराब होने के लक्षण है
सेहरा बंधना – दाम्पत्य जीवन में कलेश की संभावना
सैनिक देखना – साहस में वृद्धि हो
सोंठ खाना – धन हानि हो , स्वस्थ्य में सुधार हो
सोना देखना – परिवार में बीमारी बढे , धन हानि हो
सोना मिलना – धन वृद्धि हो
सोना दुसरे को देना – अपनी मुर्खता से दूसरों को लाभ पहुंचाना
सोना लुटाना – परेशानिया बढे , अपमान सहना पढ़े
सोना गिरवी रखना – बईमानी करे और अपमान हो
सोते हुए शेर को देखना – निडरता से कार्य करे , सफलता मिलेगी
सोलह श्रृंगार देखना -स्वस्थ्य खराब होने का संकेत
स्वप्न में मानिक रत्न देखना – शक्ति तथा अधिकारों में वृद्धि
स्वप्न में मोती रत्न देखना – मानसिक शांति मिले
स्वप्न में मूंगा रत्न देखना – शत्रु पर विजय मिले
स्वप्न में पन्ना रत्न देखना – व्यवसाय में वृद्धि हो
स्वप्न में पुखराज रत्न देखना -वैर विरोध की भावना बढे
स्वप्न में हीरा रत्न देखना – आर्थिक प्रगति हो
स्वप्न में नीलम रत्न देखना – उन्नत्ति हो
स्वप्न में गोमेद रत्न देखना – समस्या अचानक आये
स्वप्न में लहसुनिया रत्न देखना – मान सम्मान बढे
स्वप्न में फेरोज़ा रत्न देखना – व्यवसाय में वृद्धि

सफेद चूडिया देखना – धन लाभ हो
14 स्वप्नों का अर्थ छ
छत देखना -मकान बने
छड़ी देखना – संतान से लाभ हो
छतरी लगाकर चलना – मुसीबतों से छुटकारा मिलना
छत्र देखना – राज दरबार में सम्मान मिले
छलनी देखना – व्यापार में हानि
छल्ला पहनना – शिक्षा में वृद्धि
छलांग लगाना – असफलता हाथ लगे
छम छम की आवाज़ आये – मेहमान आये
छाज देखना – सम्मान बढे
छाछ पीना -धन लाभ हो
छापाखाना देखना – धन लाभ
छात्रो का समूह देखना – शिक्षा में लाभ
छिपकली देखना – दुश्मन से कष्ट
छींक आना – अशुभ लक्षण
छुआरा खाना – धन लाभ हो
छुरा देखना – दुश्मन से भय हो
छोटे बच्चे देखना – इच्छा पूरण हो
15 स्वप्नों का अर्थ ज
जमघट देखना – कार्य की प्रशंषा मिलेगी
जयकार सुनना- संकट में पड़ना
जलना – मान सम्मान की प्राप्ति
ज्योतिष देखना – संतान को कष्ट
जटाधारी साधु देखना – शुभ लक्षण
जहाज देखना – दुर्घटना में फंसने का सूचक
खाली जंजीर देखना – इल्जाम लगेगा
स्वयं को जंजीर में जकडे देखना – समस्याओ से छुटकारा
जल देखना – संकट आएगा
जड़े देखना -शुभ स्वप्न
ज्वालामुखी देखना – स्थान परिवर्तन की पूर्व सूचना
जमीन खोदना – कठिनाई से लाभ हो
जंगल देखना – कष्ट दूर हो
जलेबी खाना – सुख सुविधाय बढे
जलता घर देखना -बीमारी परेशानी बढे
जलता मुर्दा देखना – शुभ समाचार
जादू देखना या करना -धन हानि
जाल देखना (मकडी का ) – शुभ लक्षण
जाल देखना ( मचली का ) -संकट का संकेत
जामुन खाना या देखना – यात्रा पर जाना पड़े
जलूस देखना -नौकरी में उनत्ति हो
जूए देखना या मारना – मानसिक चिंता
जूते से पीटना – मान सम्मान बढे
जूते से स्वयं पीटना – मान सम्मान मिलेगा
जेब खाली देखना -अशुभ है
जेब भरी देखना -खर्च अधिक होने का सूचक
जेल देखना – जग हँसी हो
जेल से छूटना – कार्य में सफलता
जोकर देखना – समय बर्बाद हो
16 स्वप्नों का अर्थ झ
झगडा देखना -शुभ समाचार
झरना देखना (ठंडे पानी का ) – शुभ है
झरना देखना (गर्म पानी का ) – बीमारी आये
झंडा देखना सफेद या मंदिर का -शुभ समाचार
झंडा देखना हरा – यात्रा में कष्ट
झंडा देखना पीला – बीमारी आये
झाडू लगाना – घर में चोरी हो
झुनझुना देखना – परिवार में ख़ुशी हो
17 स्वप्नों का अर्थ ट
टंकी खाली देखना – शुभ लक्षण
टंकी भरी देखना – अशुभ घटना का संकेत
टाई सफेद देखना – अशुभ
टाई रंगीन देखना – शुभ
टेलेफोन करना – मित्रो की संख्या में वृद्धि
टोकरी खाली देखना – शुभ लक्षण
टोकरी भरी देखना – अशुभ घटना का संकेत
टोपी उतारना – मान सम्मान बढे
टोपी सिर पर रखना – अपमान हो
18 स्वप्नों का अर्थ ठ
ठण्ड में ठिठुरना – सुख मिले
19 स्वप्नों का अर्थ ड
डंडा देखना – दुश्मन से सावधान रहे
डफली बजाना – घर में उत्सव की सूचना
डाक खाना देखना – बुरा समाचार मिले
डाकिया देखना – शुभ सूचना मिले
डॉक्टर देखना – निराशा मिले
डाकू देखना – धन वृद्धि हो
20 स्वप्नों का अर्थ त
तरबूज देखना – धन लाभ
तराजू देखना – कार्य निष्पक्ष पूर्ण हो
तबला बजाना – जीवन सुखपूर्वक गुजरे
तकिया देखना – मान सम्मान बढे
तलवार देखना – शत्रु पर विजय
तपस्वी देखना -मन शांत हो
तला पकवान खाना – शुभ समाचार मिले
तलाक देना – धन वृद्धि हो
तमाचा मारना -शत्रु पर विजय
तराजू में तुलना – भयंकर बीमारी हो
तवा खाली देखना – अशुभ लक्षण
तवे पर रोटी सेकना – संपत्ति बढे
तहखाना देखना या उसमे प्रवेश करना – तीर्थ यात्रा पर जाने का संकेत
ताम्बा देखना – सरकार से लाभ मिले
तालाब में तैरना – स्वस्थ्य लाभ
ताला देखना -चलते काम में रूकावट
ताली देखना – बिगडे काम बनेगे
तांगा देखना – सुख मिले, सवारी का लाभ हो
ताबीज बांधना – काम में हानि हो
ताबीज़ देखना – शुभ समय का आगमन
ताश देखना – मित्र अथवा पडोसी से लडाई हो
तारा देखना – अशुभ
तितली देखना – विवाह हो या प्रेमिका मिले
तितली उड़ कर दूर जाना – दांपत्य जीवन में क्लेश हो
तिल देखना – कारोबार में लाभ
तिराहा देखना – लडाई झगडा हो
त्रिशूल देखना – अच्छा मार्ग दर्शन मिले
त्रिमूर्ति देखना – सरकारी नौकरी मिले
तितली पकड़ना – नई संतान हो
तिजोरी बंद करना – धन वृद्धि हो
तिजोरी टूटती देखना – कारोबार में बढोतरी
तिलक करना – व्यापार बढे
तूफान देखना या उसमे फँसना – संकट से छुटकारा मिले
तेल या तेली देखना – समस्या बढे
तोलना – महंगाई बढे
तोप देखना -शत्रु पर विजय
तोता देखना – ख़ुशी मिले
तोंद बढ़ी देखना – पेट में परेशानी हो
तोलिया देखना – स्वस्थ्य लाभ हो
21 स्वप्नों का अर्थ थ
थप्पर खाना – कार्य में सफलता
थप्पर मारना – झगडे में फँसना
थक जाना – कार्य में सफलता मिले
थर थर कंपना -मान सम्मान बढे
थाली भरी देखना – अशुभ
थाली खाली देखना – सफलता मिले
थूकना – मान सम्मान बढे
थैली भरी देखना – जमीन जायदाद में वृद्धि
थैली खाली देखना – जमीन जायदाद में झगडा हो
22 स्वप्नों का अर्थ ध
धनिया हरा देखना – यात्रा पर जाना पढ़े
धतूरा खाना – संकट से बचना
धनुष देखना – सभी कर्मो में सफलता मिले
धब्बे देखना – शुभ संकेत
धरोहर लाना या देखना – व्यापार में हानि हों
धार्मिक आयोजना देखना – शुभ संकेत
धागा देखना – कार्य में वृद्धि हों
धुरी देखना – मान सम्मान में वृद्धि हों
धमाका होना – संकटों में वृद्धि हो
धार्मिक स्थल देखना -मंदिर – शुभ कार्य में धन लगे
धार्मिक स्थल देखना -गुरुद्वारा – ज्ञान की प्राप्ति हो
धार्मिक स्थल देखना -मस्जिद – समस्या का समाधान मिले
धार्मिक स्थल देखना -चर्च – मानसिक शांति बढे
धर्म ग्रन्थ देखने का फल – रामायण – संघर्ष के बाद सफलता मिले
धुआ देखना – कष्ट बढे , परेशानी में फंसना पढ़े
धुंध देखना – शुभ समाचार मिले
धुन सुनना – परेशानी बढे
धूमधाम देखना – परेशानी बढे
धूल देखना – यात्रा हों
धोबी देखना – काम में सफलता मिले
धोती देखना – यात्रा पर जाना पड़े

23 स्वप्नों का अर्थ न
नल खुला देखना – काम शीघ्र होगा
नल बंद देखना – काम कठिनाई से होगा
नरक देखना- कठिनाइयाँ बढे
नगीना देखना – सरकार से लाभ हों , शुभ समाचार मिले
नगाडा देखना – धन लाभ , प्रसिधी मिले
नमाज़ पढ़ते देखना – कष्ट दूर हों , शान्ति मिलेगी
नमक खाना – झगडे में फँसना
नमक देखना – बीमारी दूर हों , व्यापार में लाभ हों
नमकदानी देखना – गृहस्थी का सुख मिले
नशे में स्वयं को देखना – धन वृद्धि हों परन्तु परिशानिया बढे
नरगिस का फूल देखना – पारिवारिक सुख मिले
नदी नाले में गिरते देखना – अनेक संकट आने का संकेत
नक्कता मनुष्य देखना – धन तथा मान सम्मान बढे
नक़ल करना – काम में असफलता मिले
नक़ल करते देखना – यात्रा में रुकावट , काम बिगडे
नक्शा बनाना – नई योजनाये शुरू हों
नकसीर बहना – दिमागी परेशानिया आये
नकाब लगाना – गंभीर बीमारी आये
नट देखना – पारिवारिक सुख शाति मिले
नसवार सूंघना – मानसिक परिशानिया बढे
नदी देखना – भविष्य सुखद हों
नदी में स्नान करना – काम में सफलता मिले
नदी में गिरना – संकट के बाद सुख मिले
नहर खोदना – कार्य सम्बन्धी योजनाये मिले
नंगा होना – विलासिता बढे
नदी , वृक्ष, या पर्वत देखना – दुःख दूर हो , धन मिले
नाटक देखना – भविष्य अनिश्चित हो
नाखून टूटना – सफलता देरी से मिले
नाक बहुत बड़ी देखना – मान सम्मान बढे , प्रमोशन हो
नाखून देखना – काम में परेशानी हो
नाक से खून बहना – धन में वृद्धि हो
नाटक देखना – गृहस्थी का सुख मिले
नाटक में भाग लेना – धोखा मिले
नारियल देखना – धन लाभ हो , अच्छा भोजन मिले
नाक पर चोट लगना -मान सम्मान में हानि हो
नासूर देखना – बीमारी से छुटकारा मिले
नापतोल करना – व्यापार में हानि हो
नाग के बिल में जाते देखना – धन संग्रह हो
नाग के बिल से बाहर निकलते देखना – धन हानि हो
नाग का डंग मारना – मान सम्मान बढे
नाग का घर में देखना – देखे गए स्थान की पवित्रता का संकेत
नाग उठाये देखना – - संपत्ति प्राप्त का संकेत
नाना नानी देखना – पारिवारिक सुख बढे
नाडा बंधना या टूटना – पारिवारिक कलेश बढे
नाला देखना – गहरा संकट आये
नाव देख्ना – गृहस्थी का सुख मिले
नाव में बैठना – अनेक संकट आये
नाई से हजामत बनवाना – धोखा मिले
नारियल देख्ना – शुभ संकेत , धार्मिक आयोजना हो
नाला देख्ना – कार्य में सफलता मिले
नारद देख्ना – धन लाभ परन्तु लड़ाई झगडा हो
नाभि देख्ना – प्रगति तथा धन लाभ हो
निरादर देख्ना – मान सम्मान बढे
निशाना लगाना – पुरानी इच्छा पूर्ण हो
नितम्ब देख्ना – गृहस्थी का सुख मिले
नीम का व्रक्ष देख्ना -बिमारी दूर होना
नीलम देख्ना -शुभ समाचार मिले , दुश्मन परस्त हो
नींद में सोना या नींद से उठाना – धन लाभ हो
नीलकंठ देख्ना – मान सम्मान बढे , विवाह हो
नींबू काटना या निचोड़ना – धार्मिक कार्य हो
नुकीली चीज़ से चोट लगना – वाद विवाद में फसना
नुकीला जूता देखना – मान सम्मान बढे
नेवला देखना – संकट समाप्त हो , स्वर्णाभूषण मिले
24 स्वप्नों का अर्थ प
परी देखना – सफलता मिले , स्वस्थ्य लाभ हो , मान सम्मान में वृद्धि हो , धन बढे
पहाड़ देख्ना – शत्रु पर विजय हो
पम्प से पानी निकालना – व्यवसाय में रुकावट आये
प्रसाद बाँटना – रोग कम हो , समृध्धि बढे
पहाड़ पर चढ़ना – मान सम्मान तथा धन बढे
पहाड़ से उतरना -व्यापार में मंदा हो
परदेशी देखना – मनोकामना पूरण हो
पटका बांधना – मान सम्मान तथा धन बढे
पटाखा देखना – ख़ुशी मिले
पलंग देखना – अपमानित होना पड़े
पनघट सूना देखना – कही से निमंत्रण आये
पनघट पर भीड़ देखना – परिवार में उत्सव हो
परिवार देखना – शुभ फल मिले
पनीर खाना – धन वृद्धि हो
पपीता खाना – पेट खराब हो
पहरेदार देखना – चोरी की सम्भावना
पंजीरी खाना – बीमारी आने की सूचना
परछाई देखना अशुभ समाचार
पगड़ी देखना – धन हानि हो
पर्दा सफेद देखना – मान – सम्मान में हानि
पर्दा काला देखना – धन वृद्धि हो
पर्स देखना – गुप्त कार्य पूरा हो
पहिया देखना – प्रगति तेज हो
पंडाल देखना – किसी बड़े उत्सव में शामिल होना
पत्तल देखना या उसमें खाना -शुभ लक्षण
पत्थर देखना या मारना – सरकार से लाभ हो
पत्र लिखना – परेशानी हो
प्याज खाना या खिलाना – दुर्भाग्य पूर्ण घटना घटे
प्रशंसा सुनना – अशुभ संकेत
प्रसाद बाँटना – शुभ फल मिले
प्याऊ बनवाना – धन वृद्धि हो
परीक्षा में बैठना – कार्य में असफलता
पतंग उडाना – लम्बी यात्रा हो
पढ़ना या पढाना – काम में सफलता
पकवान खाना या बनाना – दुखो में वृद्धि हो
पहिया देखना – यात्रा सफल हो
पानी देखना – सुख समृधि बढे
पानी पीते देखना – धन वृद्धि हो
पोलिश करना -नौकरी में तरक्की हो
पान का वृक्ष देखना – संतान की समृधि हो
पागल देखना – शुभ कार्य में वृद्धि हो
पानदान देखना – मित्रता में वृद्धि हो
पाउडर लगाना – मान सम्मान बढे
पार्वती माता देखना – सुख समृधि बढे
पायल बजते देखना – स्त्री से वियोग हो
पारितोषिक मिलना – अपमानित होना पढ़े
पालकी पर बैठना – स्वस्थ्य खराब हो
पालना देखना – पारिवारिक सुख मिले
पालना झुलाना – संतान के लिए कष्ट बढे
पार्सल लेना – अचानक लाभ मिले
पाताल देखना – मान सम्मान बढे , प्रशंसा मिले
पाद मरना या अनुभव करना – व्यापार में लाभ हो व्यवसायिक यात्रा
पार करना (तैरकर) – मान सम्मान बढे
पिटारा देखना – धन लाभ हो
पिजरा देखना – स्वस्थ्य खराब हो
पिजरा खाली देखना – धन वृद्धि हो
पिजरे में पक्षी देखना – गृह कलेश हो
पीपल देखना – शुभ सन्देश मिले
पीला रंग देखना स्वास्थ्य खराब हो
पीठ देखना – मित्र से लाभ हो
पीतल के बर्तन देखना – धन लाभ हो , व्यापार बढे
पीली सरसों देखना – सब प्रकार से शुभ हो
पुस्तकालय देखना – समृधि बढे
पुस्तक खोना – मानहानि हो
पुस्तक मिलना – मान सम्मान में वृद्धि हो
पुजारी बनना – जीवन में उन्नति हो
पुडिया बंधना – शारीरिक कष्ट बढे
पुरस्कार मिलना – हानि हो
पुल पार करना – धन लाभ हो
पुल टूटते देखना – संकट से छुटकारा हो
पूजा पाठ करना – सुख शान्ति तथा समृद्धि की सूचना
पूर्वज देखना – शुभ स्वप्ना , समृद्धि बढे
पूजा या प्रार्थना करना – मानसिक शान्ति मिले
प्रेम प्रस्ताव रखना – विवाह में विलंभ हो
पेड़ पौधे देखना – कार्य में लाभ हो
पेटी खोलना – चोरी की संभावना
पेशाब करना – संकट दूर हो , धनप्राप्ति हो
पेढा खाना – मुह में रोग हो
पैर कटे देखना – शत्रु पर विजय हो
पैर खुजलाना – यात्रा शीघ्र हो
पैबंद लगाना – कष्ट के पूर्व सूचना
पैसा मिलना – मुफ्त का धन मिले
पेन पेंसिल देखना – परीक्षा में उत्तीरण हो
पोचा लगाना – स्थान परिवर्तन हो
पोशाक पहनना – बीमारी आने का संकेत
25 स्वप्नों का अर्थ फ
फलाहार करना – सुख समृद्धि बढे
फटे कपडे देखना – धनहानि हो , चिंताए बढे
फ़कीर देखना – काम में सफलता मिले
फ़रिश्ता देखना – मनोकामना पूर्ण हो
फंदा लगाना या देखना – मुसीबतों से छुटकारा मिले
फफोला टूटना – मुसीबतें समाप्त हो
फवारा देखना – सभी मुसीबते दूर हो ,प्रसन्नता बढे
फाखता देखना – पत्नी की ओर से कष्ट मिले , मानसिक ग्लानी हो
फाटक देखना – मुकदमा समाप्त हो
फाटक पार करना -सफलता मिले
फिटकरी देखना – धन लाभ हो
फांसी लगाना – जीवन में दिशा परिवर्तन हो
फिरोजा रत्न देखना – शत्रुओं पर विजय हो
फूलवारी देखना – मनपसंद विवाह होना , ख़ुशी मिले
फुल्का खाते देखना – आर्थिक समृद्धि हो , परन्तु शोक समाचार मिले
फुलझडी छूटते देखना – विवाह में सम्मिलित हो
फुहार पढ़ते देखना – धन संमृद्धि बढे
फूलदान देखना – मान सम्मान बढे
फूटी आँख देखना – शारीरिक व् आर्थिक कष्ट बढे
फूंक मारना – सामाजिक कार्यो में मान सम्मान बढे
फूल खिलते देखना – प्रसन्नता बढे , संतान हो
फूल जलते देखना – प्रिय व्यक्ति की मृत्यु देखना
26 स्वप्नों का अर्थ ब
बतक पानी में देखना – शुभ समाचार मिले
बतख ज़मीन पर देखना -धन हानि हो
बन्दर देखना – धन वृद्धि हो , अच्छा भोजन मिले
बटन लगाना – संकट आने की सूचना
बटन देखना – धन बढे
बरसात देखना शहर पर – खुशहाली बढे
बरसात देखना अपने घर पर – संकट आये
बरसात में छत्री लगाकर चलना – संकट दूर हो
बकरी चुराना या खोना – लडाई हो
बर्फ खाना – चिंताए दूर हो
बर्फ गिरते देखना – आर्थिक समृद्धि हो
बनिए को दरवाज़े पर देखना – क़र्ज़ बढे
बटुआ देखना – धन लाभ हो , रोग दूर हो
बनयान पेहेनना – धन बढे , सुख शान्ति मिले
बगुला देखना – सफ़ेद देखने पर लाभ , काला देखने पर हानि हो
बधाई का सन्देश मिलना – दुखद सूचना मिले
बछिया देखना – शुभ समाचार मिले
बाल गिरते देखना – आर्थिक कष्ट बढे
बाजू काटना – अपमानित होना पढ़े
बाजू पर चोट लगाना – माता पिता के लिए अनिष्टकारक
बाजू कटी देखना – शत्रु पर विजय मिले
बांस देखना – लगातार उन्नति हो
बाज़ देखना – दुर्घटना में फँसना पढ़े
बाज़ द्वारा झपट्टा मारना – पहाड़ से गिरने के लक्षण
बरात में जाना – अशुभ समाचार मिले
बाघ देखना – शत्रु पर विजय हो
बारहसिंघा देखना – दूर स्थान की यात्रा हो
बाढ़ देखना – संकटों से छुटकारा हो
बाढ़ में घिरना – वातावरण सुखद हो
बाढ़ में फंसे आदमियों को बचाना – गृह कलेश बढ़ना
बाढ़ के पानी में तैरना -व्यापार में सफलता मिले
बाढ़ में लोगों को डूबते देखना – लम्बी यात्रा हो
बादल बरसते देखना -पारिवारिक सुख शान्ति या समृद्धि
बादल से बिजली गिरते देखना -अशुभ समाचार मिले
बादल को छूना – धन वृद्धि हो
बाज़ार में स्वयं घूमना – अच्छे समाचार मिले
बाज़ार देखना – धन हानि हो , व्यापार में घाटा हो
बाजीगरी देखना – षडयंत्र में फसना पढ़े
बादाम खाना – स्वस्थ्य खराब हो , अस्पताल में भर्ती होना पढ़े
बादाम देखना – धन वृद्धि हो
बादशाह देखना – धन वृद्धि हो , मान सम्मान बढे
बाल कटे देखना सर के – क़र्ज़ से छुटकारा मिले
बाल काले देखना(अपने सर के) – अधिक धन मिले
बाल सफ़ेद देखना (अपने) – समाज में उच्च स्थान मिले
बाल कटे देखना – गृह कलेश बढे
बाल देखना (हथेली या तलुओं में) – क़र्ज़ में फसना पढ़े
बाल देखना (बगल के या नाभि के नीचे के) – अपमानित होना पढ़े
बातें बहुत करना – काम में वृद्धि हो , मान सम्मान बढे
बालू देखना – धन लाभ हो
बालू छानते देखना – आर्थिक परेशानी बढे
बिछु , सांप या भयानक जीव देखना – धन मिले
बौना देखना – शुभ समय नज़दीक है
बाइबल – ज्ञान में वृद्धि हो
27 स्वप्नों का अर्थ भ
भण्डार देखना – काफी धन लाभ हो
भटठा देखना – भूमि तथा भवन में वृद्धि हो
भभूत लगाना – शीघ्र विवाह हो तथा गृहस्थी का सुख मिले
भाई देखना – भाई की आयु वृद्धि हो तथा ,रोग दूर हो
भाभी देखना – स्वयं को कष्ट मिले , भतीजा जन्मे
भागते देखना – कष्ट मिटे , अच्छा समय आने वाला है
भंग का नशा करना – अपमानित होना पढ़े
भांड देखना -लडाई झगडा अथवा वाद विवाद में फँसना पड़े
भाला लेकर चलना – शत्रु पर विजय हो
भाला मारना – अपमानित होना पढ़े
भाले के खेल का प्रदर्शन करना – संकट या दुर्घटना आये
भीड़ का छठा देखना – काफी लाभ मिले
भीड़ का काटना – दुःख आये
भिन्डी देखना – सुखो में वृद्धि हो , आलस्य बढे
भिखारी देखना – कार्य के अच्छे परिणाम मिले
भीगते देखना – सुख समृद्धि में वृद्धि हो
भीख मांगना या देना – पारिवारिक सुख – संपत्ति तथा समृद्धि बढे
भीड़ देखना या उसमे चलना – कार्य अधूरा हो
भीड़ को उग्र रूप में देखना – कार्य में सफलता मिले
भूचाल देखना – तबाही आये , जनता पर संकट पढ़े
भूसा देखना – पशुओं से लाभ मिले
भूमिगत स्वयं को देखना – भयंकर बीमारी आये या विपत्ति बढे
भेडिया देखना – विश्वाश घात हो खतरे की सूचना
भेड़ अकेली देखना – अशुभ हो
भेड़ो को समूह देखना – लाभ हो
भैंसा देखना – संघर्ष करने से सफलता मिलेगी
भैस देखना – अच्छा भोजन मिले
28 स्वप्नों का अर्थ म
मछर देखना – अपमानित होना पड़े
मछली देखना – गृहस्थी का सुख मिले
मखी देखना – धन हानि हो
मकडी देखना – बहुत अधिक मेहनत करनी पड़े
मकान बनते देखना – मान सम्मान में वृद्धि हो
मलाई खाना – धन वृद्धि हो
मंदिर या मस्जिद देखना – खुशहाली बढे
मंदिर में पुजारी देखना – गृह कलेश बढे
मर जाना – धन वृद्धि हो
मखमल पर बैठना – लम्बी बीमारी आये
मगरमच देखना – शुभ समाचार मिले
मंत्री देखना – मान सम्मान में वृद्धि हो
माला ( पूजा वाली ) शुभ समय आने का संकेत
माला फूलों की पहनाना- मान सम्मान में वृद्धि हो
मातम करना – खुशहाली बढे
माली देखना – घर में समृधि बढे
मिर्च खाना – काम में सफलता मिले
मिर्गी से पीड़ित होना या देखना – बुद्दि तेज हो
मिठाई खाना या बाँटना – बिगडे काम बने
मीट खाना – मनोकामना पूरण हो
मुर्दा उठा कर ले जाते देखना – बिना कमाया माल मिले
मुर्दे को जिन्दा देखना – चिंता दूर हो
मुर्दा शारीर से आवाज़ आना – बना काम बिगड़ जाना
मुर्दों का समूह देखना – गलत सोसाइटी में काम करना पड़े
मुर्दे को नहलाना – धन वृद्धि हो
मुर्दे को कुछ देना – शुभ समाचार
मुर्दे के साथ खाना -अच्छा समय आये
मुर्गा देखना -विदेश व्यापार बढे
मुर्गी देखना -गृहस्थी का सुख मिले
मोहर लगाना – धन वृद्धि हो
मुरझाये फूल देखना – संतान को कष्ट हो
मुंडन कराना या होते देखना -गृहस्थी का तनाव दूर हो
मुहर्रम देखना – कारोबार में उन्नत्ति हो
मूंगा पहनना या देखना – कारोबार में उन्नत्ति हो
मूंग मसूर या मोठ देखना – अनेक परेशानी हो
मोची देखना -यात्रा लाभदायक हो
मोम देखना – झगडे या विवाद में समझोता हो
मोर नाचते देखना – शुभ समाचार मिले
मोर मोरनी देखना – दांपत्य सुख में वृद्धि हो
मोजा पहनना – पति पत्नी में प्रेम बड़े
मोमबत्ती देखना – विवाह हो
29 स्वप्नों का अर्थ य
यन्त्र बनाना या देखना – अशुभ फल हो
यग करना या देखना – धन वृद्धि हो
यमराज देखना – बीमारी दूर हो
योजना बनाना -अशुभ फल
योगासन करना – शुभ फल
30 स्वप्नों का अर्थ र
रजाई ओड़ना – धन मिले
रजाई नई बनवाना – स्थान परिवर्तन हो
रजाई फटी पुरानी देखना – शुभ कार्य के लिए निमंत्रण हो
रस्सी लपेटना – सफलता मिले
रथ देखना -यात्रा करनी पड़े
रसभरी खाना – विवाह हो
रसगुल्ला खाना – धन वृद्धि हो
रद्दी देखना – रुका हुआ धन मिले
रंग करना – सम्बंधित वास्तु की हानि हो
रक्षा करना – मान सम्मान में वृद्धि हो
रफू करना – नई वस्त्रो या आभूषनो की प्राप्ति हो
रक्षा बंधन देखना – धन वृद्धि हो
रसोई घर गन्दा देखना – अच्छा भोजन मिले
रसोई घर स्वछ देखना -धन का संकट आये
रास्ता देखना (साफ) -तरक्की मिले
रास्ता देखना (टेड़ा मेडा ) परेशानी हो
राख देखना – धन नाश हो
रॉकेट देखना – धन संपत्ति में वृद्धि हो
रात देखना -परेशानी आये
राइ देखना – काम में रूकावट आये
राक्षश देखना – संकट आये
रामलीला देखना – सुख सौभाग्य में वृद्धि
रिश्वत लेना – सावधान रहे
रिवाल्वर चलाना – शत्रुता समाप्त हो
रिक्शा देखना या उसमे बैठना – प्रसन्त्ता बढे
रेलवे स्टेशन देखना -लाभदायक यात्रा हो
रेल देखना – कष्ट दायक यात्रा हो
रेडियो बजता देखना – प्रगति में रूकावट हो
रेफ्रिजिरटर देखना – आर्थिक लाभ हो
रेगिस्तान देखना – धन सम्पदा में वृद्धि
रोजा रखना – आर्थिक संकट आने का संकेत
रोना – मान सम्मान में वृद्धि हो
रोशनदान से देखना – विदेश से धन की प्राप्ति हो
रोटी खाना या पकाना – बीमारी आने का संकेत
रोटी बाँटना – धन लाभ हो
रोटी फैंकना या गिरी हुई देखना – देश में मन न लगे , विदेश की यात्रा शीघ्र हो
31 स्वप्नों का अर्थ ल
लंगर खाना या देखना -धन वृद्धि हो ,व्यवसाय में तेजी आये
लंगूर देखना -शुभ समाचार मिले
लंगोटी देखना -आर्थिक कठिनाईया बढे
लकीर खींचना -गृह कलेश बढे , अनावश्यक झगडे हो
लटकना या लटकते हुए देखना -सोचा हुआ काम शीघ्र बने , आर्थिक समृद्धि बढे
लड़का गोद में देखना (अपना) – धन वृद्धि हो , व्यवसाय में तेजी आये
लड़का गोद में देखना (अनजान) – परेशानी बढे ,घर में कलेश हो
लड़ना – विद्रोहियों के साथ – देश तथा समाज में अशांति फैले
लगाम देखना -मान सम्मान बढे , धन वृद्धि हो
लक्ष्मी का चित्र देखना -धन तथा सुख सौभाग्य की वृद्धि हो
लहसुन देखना – धन वृद्धि हो परन्तु अन्न व् सब्जी के व्यापार में हानि हो
लक्कड़ बाघ देखना – नयी मुसीबतें आने का संकेत
लपटें देखना (आग की ) – परिवार में शान्ति बढे , झगडा ख़तम हो
लाल आँखे देखना – शुभ फल की प्राप्ति
लालटेन जलना – चलते हुए काम में रोड़ा अटके
लालटेन बुझाना – अनेक समस्या स्वयं निपट जाये
लाट या मीनार देखना -आयु वृद्धि हो , सुख शान्ति बढे
लाठी देखना -सुख शांति में वृद्धि हो ,अच्छे सहयोगी मिले
लाल टीका देखना -सत्संग से लाभ हो, कामो में सफलता मिले
लाल वस्त्र दिखाई देना – धन नाश हो ,खतरा बढे
लाल आकाश में देखना -लडाई झगडा व् आतंक में वृद्धि ,धन तथा देश की हानि हो
लिबास (अपने कपडे)सफ़ेद देखना – सुख , शान्ति तथा समृद्धि में वृद्धि हो
लिबास हरा देखना – धन दौलत बढे , स्वस्थ्य अच्चा हो
लिबास पीला देखना -स्वस्थ्य में खराबी आये ,चोरी हो
लिबास मैला देखना -धन हानि हो ,खराब समय आने वाला है
लिफाफा खोलना -समाज में मानहानि हो , गुप्त बात सामने आये
लोहा देखना – काफी मेहनत करने के बाद सफलता मिले
लोहार देखना – मान सम्मान बढे , शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो
लोबिया खाना – धन तथा व्यवसाय में वृद्धि हो
लौकी देखना या खाना -शुभ समाचार मिले , धन वृद्धि हो ,नौकरी में पदोंनिती हो
32 स्वप्नों का अर्थ व
वकील देखना – कठिनाई बढे , झगडा हो
वजीफा पाना -काम में असफलता मिले , धनहानि हो
वरमाला देखना या डालना -घर में कलेश हो मित्र से लडाई हो
वसीयत करना -भूमि सम्बन्धी विवाद हो , घर में तनाव बढे
वायदा करना – झूठ बोलने की आदत पढ़े
वाह वाह करके हसना -मान सम्मान का ध्यान रखे , शत्रु बदनाम करेंगे
वार्निश करना (घर की वस्तुओं पर)- परिवार पर संकट आये, स्वस्थ्य खराब हो
वाष्प उड़ते देखना – धनहानि हो , दुर्घटना तथा शारीरिक कष्ट हो
विदाई समारोह में भाग लेना – व्यापार में तेजी आये , धन वृद्धि हो
विमान देखना – धन हानि हो
विस्फोट देखना या सुनना – नया कारोबार शुरू हो , बड़े व्यक्तियों से मुलाकात हो
वीणा बजाना (स्वयं द्वारा) – धन धान्य तथा समृद्धि प्राप्त हो
वीणा बजाना – शोक समारोह में शामिल होना पड़े , (दूसरो द्वारा)मानसिक कष्ट हो
वृद्धा देखना – अशुभ समाचार मिले
33 स्वप्नों का अर्थ श
शंख बजाना, देखना, सुनना – शुभ समाचार
शंकरजी को देखना – सुखो में वृद्धि
शरबत देखना – बीमारी दूर हो
शतरंज देखना – समय व्यर्थ में बर्बाद हो
शराब देखना – बिना कमाया धन मिले
शराब पीना – धन वृद्धि हो
शमा (दीपक )देखना – मान सम्मान में वृद्धि हो
शमा दान देखना – बीमारी दूर हो
शहद की मक्खी देखना – धन वृद्धि हो
शहद देखना – शुभ कार्यो में रूचि बढे
शरीफा खाना या देखना – स्वस्थ्य में लाभ हो
शहतूत देखना – अच्छा भोजन मिले
शहनाई बजाना या देखना – दुखद समाचार मिले
शमशान पर जाना – आयु वृद्धि हो
शहर को जाना – धन वृद्धि हो
शहर का विनाश देखना – अपना निवास स्थान खाली करना पड़े
शव के साथ चलना – भाग्य वृद्धि
शरीर की मालिश करना – रोग बढे
शमियाना देखना – धन वृद्धि हो
श्राद्ध करना – अच्छा समय आने की सूचना
शाल ओड़ना -अपयश मिले
शार्क मछली देखना – विदेश यात्रा हो
शिकार करना – परिवार पर संकट आये
शीशा देखना – लम्बी बीमारी आये
शीशा तोड़ना – परेशानी आये
शेर देखना – शत्रु पर विजय हो
शोक मगन होना – घर में उत्सव का आयोजन हो
34 स्वप्नों का अर्थ श्र
श्रंगार करना – प्रेम प्रसंगों में वृद्धि हो
श्रंगार दान टूटना – दांपत्य जीवन में सुख व् सफलता मिले
35 स्वप्नों का अर्थ ह
हड्डी देखना – शुभ समाचार मिले , स्वस्थ्य में लाभ
हरियाली देखना – मन प्रसन्न रहेगा
हल्दी की गाँठ देखना – आर्थिक प्रगति हो
हल्दी पीसी देखना – परेशानी आये हकीम देखना – बीमारी आये परन्तु ज्ञान भी बढे
हत्या होते देखना – दीर्घायु हो , दुश्मनों से सावधान रहे
हत्या करना – लडाई झगडा शान्ति हो
हरा रंग देखना – सुख शान्ति में वृद्धि हो
हथौडा देखना – सम्मान मिले परन्तु परिश्रम अधिक हो
हशीश पीते देखना – कष्टों में वृद्धि हो
हजामत बनते देखना – ठगे जाने की संभावना
हज करना – मनोकामना पूर्ण हो
हमला होना – दुर्घटना की पूर्व
हवा में उड़ते देखना – यात्रा में कष्ट आये
हवा तेजी से चलते देखना – दुखो में वृद्धि हो
हवा माध्यम चलते देखना -शत्रु हानि पहुंचाए
हथकडी देखना – परेशानियां बढे
हथेली देखना (पुरुष का) – शत्रुता बढे
हथेली देखना (स्त्री का ) – प्यार बढे
हवेली देखना – किसी नजदीकी व्य समाचार
हलवाई की दूकान देखना – इच्छाए बहुत बढे परन्तु अपूर्ण रहे
हवाई जहाज़ देखना – व्यापार में अधिक झूठ बोलना पढ़े , लाभ हो
हँसना – अकारण परेशानी बढे
हसती स्त्री देखना – गृह कलेश बढे
हसाना (दूसरों के द्वारा ) – मनोकामना पूर्ण हो
हसुली देखना – जीवन में आनंद बढे
हाथ देखना – अच्चे मित्रों से मुलाकात हो
हाथ कटा हुआ देखना – लडाई में हानि हो
हाथ पर चित्रकारी देखना – आजीविका के लिए संघर्ष करना पढ़े
हाथ धोना – काम अपूर्ण रहे , नाकामयाबी मिले
हाथ से आसमान छूना – मनोकामना पूर्ण हो , काम में तरक्की मिले
हाथ बंधे देखना – बुरे काम का बुरा नतीजा भुगतना पढ़े
हाथी देखना – संतान हो , नया कार्य शुरू हो
हाथी की सवारी करना – मान सम्मान बढे , सरकार से लाभ हो
हाथी मस्त देखना – धनवृद्धि हो
हिसाब किताब लगाना – अपव्यय हो , काम में सावधानी बरते
हिरन देखना – सफलता मिले , शीघ्र विवाह हो , धन लाभ हो
हिमपात देखना – बिगडे काम बने , काफी धन की प्राप्ति हो
हिमखंड देखना – किसी नजदीकी मित्र से धोखा मिलने की संभावना है
हीरा देखना – धन वृद्धि हो परन्तु संघर्ष अधिक हो
हुंकार सुनना – शत्रु से पराजय होना पड़े
हुक्का पीना या पिलाना – मित्रता बढे
हुक्का पीते देखना – व्यर्थ में समय खराब हो
हुकुम का इक्का देखना – चलते हुए काम में रुकावट आएगी , निराशा बढे
होटल देखना – काम में तंगी आये , धन की कमी हो
36 स्वप्नों का अर्थ द
दरवाजा बंद देखना – चिंता बढे
दही देखना -धन लाभ हो
दलिया खाना या देखना – स्वस्थ्य कुछ समय के लिए ख़राब हो
दरार देखना – घर में फूट
दलदल देखना – काम में आलस्य हो
दरवाजा खोलना – नया कार्य शुरू हो
दरवाजा गिरना – अशुभ संकेत
दक्षिणा लेना या देना – व्यापार में घाटा
दमकल चलाना – धन वृद्धि हो
दर्पण देखना – मानसिक अशांति
दस्ताना पहनना – शुभ समाचार
दहेज़ लेना या देना – चोरी की सम्भावना
दरजी को काम करते देखना – कोर्ट से छुटकारा
दवा खाना या खिलाना – अच्छा मित्र मिले
दवा गिरना – बीमारी दूर हो
दांत टूटना – शुभ
दांत में दर्द देखना -नया कार्य शुरू हो
दाडी देखना – मानसिक परेशानी हो
दादा या दादी देखना जो मृत हो – मान सम्मान बढे
दान लेना – धन वृद्धि हो
दान देना – धन हानि हो
दाह क्रिया देखना – सोचा हुआ कार्य बनने के संकेत
दातुन करना -कष्ट मिटे
दाना डालना पक्षियो को – व्यापार में लाभ हो
दाग देखना – चोरी हो
दामाद देखना -पुत्री को कष्ट हो
दाल कपड़ो पर गिरना -शुभ लक्षण
दाल पीना – कार्य में रूकावट
दाढ़ी सफेद देखना – काम में रूकावट
दाढ़ी काली देखना – धन वृद्धि हो
दियासिलाई जलाना – दुश्मनी बढे
दीपक बुझा देना – नया कार्य शुरू हो
दीपक जलाना – अशुभ समाचार मिले
दीवाली देखना – व्यापार में घाटा हो
दीपक देखना – मान सम्मान बढे
दुल्हन देखना – सुख मिले
दुकान करना – मान सम्मान बढे
दुकान बेचना – मानहानि हो
दुकान खरीदना – धन का लाभ होना
दुकान बंद होना – कष्टों में वृद्धि हो
दुपट्टा देखना – स्वस्थ्य में सुधार हों
दूल्हा /दुल्हन बनना – मानहानि हों
दूल्हा /दुल्हन बारात सहित देखना -बीमारी आये
दूरबीन देखना – मान सम्मान में हानि हों
दूध देखना – आर्थिक लाभ मिले
दुकान पर बैठना – प्रतिष्ट बढे,धन लाभ हों
देवता से मंत्र प्राप्त होना – नए कार्य में सफलता
देवी देवता देखना – सुख संपत्ति की वृद्धि होना
दोना देखना – धन संपत्ति प्राप्त होना
दोमुहा सांप देखना – दुर्घटना हों, मित्र द्वारा विश्वासघात मिले
दौड़ना – कार्य में असफलता हों
देवी देवता देखना – कृष्ण – प्रेम संबंधो में वृद्धि
देवी देवता देखना – राम – सफलता मिले
देवी देवता देखना – शिव – मानसिक शांति बढे
देवी देवता देखना – विष्णु – सफलता मिले
देवी देवता देखना – ब्रह्मा – अच्छा समय आने वाला है
देवी देवता देखना – हनुमान -शत्रु का नाश हो
देवी देवता देखना – दुर्गा – रोग दूर हो
देवी देवता देखना – सीता – पहले कष्ट मिले फिर समृधि हो
देवी देवता देखना – राधा – शारीरिक सुख मिले
देवी देवता देखना – लक्ष्मी – धन धन्य की प्राप्ति हो
देवी देवता देखना – सरस्वती -भविष्य सुखद हो
देवी देवता देखना – पार्वती – सफलता मिले
देवी देवता देखना – नारद -दूर से शुभ समाचार मिले