आज का समय भौतिकता का समय है |प्रतियोगिता का समय है |ऐसे में कभी कोई समस्या -संकट तो कभी कोई आती रहती है |अक्सर शत्रु भी पीड़ा पहुचाते है |कभी ज्ञात कभी अज्ञात |कभी रोग सताता है ,कभी रोजगार |ऐसे में कभी विशिष्ट कनकट के निवारण हेतु बजरंग बाण का प्रयोग किया जा सकता है |बजरंग बाण हनुमान जी की पूजा है ,इसे अनुष्ठान रूप में करने के लिए बजरंग बाण का १०८ पाठ लगातार किया जाता है |इसमें साधक या अनुष्ठान करता को इस दौरान उठाना नहीं चाहिए और इसे संकल्प पूर्वक करना चाहिए |इसलिए समस्त तैयारी पहले से होनी चाहिए एयर साधक को पूर्ण तैयार होकर बैठना चाहिए |इस साधना में लगभग तीन से चार घंटे का समय लग सकता है|Friday, January 30, 2015
शत्रु पीड़ा अथवा संकट निवारण हेतु बजरंग बाण प्रयोग
आज का समय भौतिकता का समय है |प्रतियोगिता का समय है |ऐसे में कभी कोई समस्या -संकट तो कभी कोई आती रहती है |अक्सर शत्रु भी पीड़ा पहुचाते है |कभी ज्ञात कभी अज्ञात |कभी रोग सताता है ,कभी रोजगार |ऐसे में कभी विशिष्ट कनकट के निवारण हेतु बजरंग बाण का प्रयोग किया जा सकता है |बजरंग बाण हनुमान जी की पूजा है ,इसे अनुष्ठान रूप में करने के लिए बजरंग बाण का १०८ पाठ लगातार किया जाता है |इसमें साधक या अनुष्ठान करता को इस दौरान उठाना नहीं चाहिए और इसे संकल्प पूर्वक करना चाहिए |इसलिए समस्त तैयारी पहले से होनी चाहिए एयर साधक को पूर्ण तैयार होकर बैठना चाहिए |इस साधना में लगभग तीन से चार घंटे का समय लग सकता है|पति-पत्नी के बीच अनबन को दूर करने के मंत्र
पति-पत्नी के बीच अनबन को दूर करने के मंत्र
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ओम् नम: संभवाय च मयो भवाय च नम:
शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।।
Thursday, January 29, 2015
गृह कलह निवारण एवं शुद्धि हेतु प्रयोग
यदि निरंतर घर में कलह का वातावरण बना रहता हो,अशांति बनी रहती हो.व्यर्थ का तनाव बना रहता हो तो.
Friday, October 10, 2014
दुर्भाग्य और परिहार
Saturday, October 4, 2014
यदि नहीं मिल पा रहा मनचाहा जॉब,
क्या आप भी नौकरी की तलाश में है? क्या आप अपनी वर्तमान नौकरी से खुश नहीं हैं? क्या आप नौकरी बदलना चाहते हैं? पेश है कुछ आसान से चमत्कारी टोटके खास आपके लिए, जो निश्चित रूप से दिलाएंगे आपको मनचाहा आकर्षक जॉब। तुरंत आजमाएं यह सरल से 10 उपाय-
बजरंग बली का फोटो जिसमें उनका उड़ता हुआ चित्र हो घर में रखना चाहिए और उसकी पूजा करना चाहिए।
आपको नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाना है तो घर से निकलने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
शनिवार के दिन शनि देव का विधिपूर्वक पूजन करके नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र – ॐ शं शनैश्चराय नम:
रोज सुबह पक्षियों को सात प्रकार के अनाजों को एकसाथ मिलाकर खिलाएं और मंदिर में दर्शन करें।
एक नींबू के ऊपर चार लौंग गाड़ दें और ‘ॐ श्री हनुमते नम:’ मंत्र का 108 बार जप करके नींबू को अपने साथ लेकर जाएं। आपका काम अवश्य बन जाएगा।
रोजाना शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अक्षत यानी चावल अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस उपाय से व्यक्ति को अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।इ
इंटरव्यू देने जाते समय यदि रास्ते में कोई गाय नजर आ जाए तो उसे आटा-गुड़ खिला कर जाएं।
रूके हुए कार्य सिद्धि के लिए यह टोटका बहुत ही लाभदायक है।
किसी भी गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई हो। उनकी आराधना करें। उनके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो इस लौंग तथा सुपारी को साथ लेकर जाएं, तो काम सिद्ध होगा।
श्रीकृष्ण का मूलमंत्र ‘कृं कृष्णाय नमः’ है। अपना सुख चाहने वाले प्रत्येक मनुष्य को इस मूलमंत्र का जाप प्रातः काल नित्य क्रिया व स्नानादि के पश्चात एक सौ आठ बार करना चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्य सभी बाधाओं एवं कष्टों से सदैव मुक्त रहते है।
Saturday, September 27, 2014
नियमों का करेंगे पालन तभी सिद्ध होंगे उपाय
नियमों का करेंगे पालन तभी सिद्ध होंगे उपाय
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कुछ परिस्थितियों में अगर आप बार बार मेहनत करने पर भी कार्य में सफल
नहीं हो पा रहे और आपका आत्मविश्वास बार बार धोखा दे रहा हे
तो ज्योतिष के माध्यम से आप अपने प्रतिकुल ग्रहों को अनुकुल करने
का प्रयास करते हैं। आप उपाय करने की ठान तो लेते हैं आप उपाय
भी करते हो कुछ लोगो को फायदा होता है कुछ लोगो को नहीं -- में
आपसे कहना चाहूंगी की उपाय करने के भी कुछ नियम होते हैंयदि आप उन
नियमो के आधार पर उपाय करे तो अबश्य सिद्ध होंगे उपाय जैसे--
1 अपनी किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए उपाय करें
तो उसके प्रति मन में श्रद्धा रखें।
2 सच्ची भावना से किए गए उपाय अवश्य सिद्ध होते हैं एवं
मनचाही मुरादों की पूर्ति होती है। केवल कार्य की सिद्धि के लिए
अनमने मन से किए गए उपाय अपना प्रभाव नहीं दिखाते।
3 किसी भी उपाय को होंद में लाने के लिए ब्रह्म मूहर्त के बाद एवं सूर्य
अस्त होने से पहले करें, रात को किए गए उपाय विपरीत प्रभाव दे सकते
हैं। जब चन्द्र ग्रहण होता है उस समय जो उपाय होंद में लाए जाते हैं वह
रात के समय ही किए जाते हैं।
5 अगर आप उपाय करने में असमर्थ हैं तो आपका जिन से खून
का रिश्ता हो वह आपके स्थान पर उपाय कर सकते हैं।
ऐसा करना उतना ही फलदाई होगा जितना आपके स्वयं आपने हाथों से
उपाय करना।
6 एक दिन में एक ही उपाय को होंद में लाएं। दो उपाय एक साथ करने से
वह प्रभावहीन हो जाते हैं।
7 उपाय करते समय पंडित जी जो नियम र्निधारित करें उन पर अवश्य अमल
करें अन्यथा उपाय का कोई लाभ नहीं होगा।
8 जितने दिन अथवा जितनी अवधी के लिए उपाय करने को कहा जाए
वैसा ही करें। उस में अपनी सुविधा अनुरूप कोई बदलाव मत लाएं।
10 घर में सूतक अथवा पातक चल रहा हो तो 40 दिन तक उपाय मत करें
Sunday, May 4, 2014
लाल किताब के अचूक उपाय धन संपत्ति दिलाएं
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1 लोहे के पात्र में जल, चीनी, घी तथा दूध का मिश्रण बना कर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।2 कच्ची धानी के तेल से दीपक जलाएं, उसमें लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। समस्त विध्नों का नाश होगा और धन प्राप्ती के साधन बनने लगेंगे।
3 धनहानि हो रही हो तो बृहस्पतिवार के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल से सुंदर रंगोली बनाएं अथवा गुलाल का छिड़काव करके देसी घी का दो मुख वाला दीपक जलाएं। जब दीपक बढ़ जाए तो उसे चलते हुए पानी में परवाह कर दें।
4 मुट्ठी भर काले तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर से सात बार फेर कर घर की उत्तर दिशा में फेंक दें। धनहानि समाप्त हो जाएगी।
5 घर से धन का अभाव दूर करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें, प्रतिदिन कुत्ते को दूध पिलाएं। घर के सभी कमरों में मोर पंख रखें।
6 आर्थिक तंगी से परेशान हों तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) का रोपण करें।
7 मां लक्ष्मी के श्री स्वरूप के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाने से धन लाभ होने लगता है।
8 कारोबार में दिन दुगुनी रात चौगुणी तरक्की करने के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाएं।
9 घर में सुख समृद्धि का समावेश करवाने के लिए उत्तर पश्चिमी कोण में मिट्टी के बर्तन में थोड़े से सोने-चांदी के सिक्के किसी लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर उस बर्तन को गेहूं अथवा चावलों से भर दें।
10 कलह क्लेश से निजात पाने के लिए पके हुए मिट्टी के घड़े पर लाल रंग का पेंट करके उसके मुख पर मोली बांधें और उसके बीच जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें।
मानसिक तनाव से मुक्ति का अचूक मंत्र ....... तनाव से देता है छुटकारा, यह चमत्कारी मंत्र
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अपने शयनकक्ष में तांबे का एक पिरामिड स्थापित करें।
नित्य मानसिक रूप से निम्न मंत्र का जाप अवश्य किया करें।
मंत्र :
ॐ अतिक्रकर महाकाय, कल्पान्त दहनोपम
भैरवाय नमस्तुभ्यमनुज्ञां दातुमहसि!!
इस उपरोक्त उपाय से एक ओर जहां आपको मानसिक तनाव/ भय/ दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलेगी वहीं परिवार में अगर कोई नकारात्मक विचारधारा का है तो उसके विचारों में भी परिवर्तन आना आरंभ होगा।
रावण सहिंता के ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत को
(मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक हैं. सूर्य मुद्रा :- हस्त-मुद्रा-चिकित्सा
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मानव-सरीर अनन्त रहस्योंसे भरा हुआ है । शरीरकी अपनी एक मुद्रामयी भाषा है । जिसे करनेसे शारीरिक स्वास्थ्य-लाभ में सहयोग होता है । यह शरीर पंचतत्त्वोंके योगसे बना है । पाँच तत्त्व ये हैं-
(1) पृथ्वी, (2) जल, (3) अग्नि, (4) वायु, एवं (5) आकाश । शरीर में जब भी इन तत्त्वोंका असंतुलन होता है, तो रोग पैदा हो जाते हैं । यदि हम इनका संतुलन करना सीख जायँ तो बीमार हो ही नहीं सकते एवं यदि हो भी जायँ तो इन तत्त्वोंको संतुलित करके आरोग्यता वापस ला सकते हैं ।
हस्त-मुद्रा-चिकित्साके अनुसार हाथ तथा हाथोंकी अँगुलियों और अँगुलियोंसे बननेवाली मुद्राओंमें आरोग्यका राज छिपा हुआ है । हाथकी अँगुलियोंमें पंचतत्त्व प्रतिष्ठित हैं ।
ऋषि-मुनियोंने हजारों साल पहले इसकी खोज कर ली थी एवं इसे उपयोगमें बराबर प्रतिदिन लाते रहे, इसीलिये वे लोग स्वस्थ रहते थे । ये शरीरमें चैतन्यको अभिव्यक्ति देनेवाली कुंजियाँ हैं ।
मनुष्यका मस्तिष्क विकसित है, उसमें अनंत क्षमताएँ हैं । ये क्षमताएँ आवृत हैं, उन्हें अनावृत करके हम अपने लक्ष्यको पा सकते हैं ।
नृत्य करते समय भी मुद्राएँ बनायी जाती हैं, जो शरीर हजारों नसों एवं नाडियोंको प्रभावित करती हैं और उनका प्रभाव भी शरीरपर अच्छा पड़ता है ।
हस्त-मुद्राएँ तत्काल ही असर करना शुरू कर देती हैं । जिस हाथमें ये मुद्राएँ बनाते हैं, शरीरके विपरीत भागमें उनका तुरंत असर होना शुरू हो जाता है । इन सब मुद्राओंका प्रयोग करते समय वज्रासन, पद्मासन अथवा सुखासनका प्रयोग करना चाहिये ।
इन मुद्राओंको प्रतिदिन तीससे पैंतालीस मिनटतक करनेसे पूर्ण लाभ होता है । एक बारमें न कर सके तो दो-तीन बारमें भी किया जा सकता है ।
किसी भी मुद्राको करते समय जिन अँगुलियोंका कोई काम न हो उन्हें सीधी रखे ।
सूर्य मुद्रा हमारे भीतर के अग्नि तत्व को संचालित करती है। सूर्य की अँगुली अनामिका को रिंग फिंगर भी कहते हैं। इस अँगुली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य ऊर्जा स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करती है और यूरेनस कामुकता, अंतर्ज्ञान और बदलाव का प्रतीक है।
विधि : अंगूठे से तीसरी अंगुली अनामिका (रिंग फिंगर) को मोड़कर उसके ऊपरी नाखून वाले भाग को अंगूठे के जड़ (गद्देदार भाग) पर दवाब(हल्का) डालें और अंगूठा मोड़कर अनामिका पर निरंतर दवाब(हल्का) बनाये रखें तथा शेष अँगुलियों को अपने सीध में सीधा रखें.....इस तरह जिस मुद्रा का निर्माण होगा उसे सूर्य मुद्रा कहते हैं...
लाभ : इस मुद्रा का रोज दो बार 5 से 15 मिनट के लिए अभ्यास करने से शरीर का कोलेस्ट्रॉल घटता है। वजन कम करने के लिए भी इस मुद्रा का उपयोग किया जाता है। पेट संबंधी रोगों में भी यह मुद्रा लाभदायक है। बेचैनी और चिंता कम होकर दिमाग शांत बना रहता है। यह मुद्रा शरीर की सूजन मिटाकर उसे हलका बनाती है।
यह मुद्रा शारीरिक स्थूलता (मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक होता है...जो लोग मोटापे से परेशान हैं,इस मुद्रा का प्रयोग कर फलित होते देख सकते हैं..
( अनामिका को महत्त्व लगभग सभी धर्म सम्प्रदाय में दिया गया है.इसे बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है.हिन्दुओं में पूजा पाठ उत्सव आदि पर मस्तक पर जो तिलक लगाया जाता है,वह इसलिए कि ललाट में जिस स्थान पर तिलक लगाया जाता है योग के अनुसार मस्तक के उस भाग में द्विदल कमल होता है और अनामिका द्वारा उस स्थान के स्पर्श से मस्तिष्क की अदृश्य शक्ति जागृत हो जाती हैं,व्यक्तित्व तेजोमय हो जाता है)
किसी व्यक्ति को वश में कैसे करें
Tuesday, November 12, 2013
शुभ और अशुभ भकूट
शुभ और अशुभ भकूट (Auspicious Bhakoot & malefic Bhakoot in Marriage Compatibility)
ज्योतिष के अनुसार वर और कन्या की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलान से पता चलता है कि वर कन्या की कुण्डली मे कितने गुण मिलते हैं, कुल 36 गुणों में से 18 से अधिक गुण मिलने पर यह आशा की जाती है कि वर वधू का जीवन खुशहाल और प्रेमपूर्ण रहेगा.
भकूट का तात्पर्य वर एवं वधू की राशियों के अन्तर से है। यह 6 प्रकार का होता है जो क्रमश: इस प्रकार है:-
कुण्डली में गुण मिलान के लिए अष्टकूट(Ashtkoot) से विचार किया जाता है इन अष्टकूटों में एक है भकूट (Bhakoot)। भकूट अष्टकूटो में 7 वां है,भकूट निम्न प्रकार के होते हैं.
1. प्रथम - सप्तक 2. द्वितीय - द्वादश 3. तृतीय - एकादश 4. चतुर्थ - दशम 5. पंचम - नवम 6. षडष्टक
ज्योतिष के अनुसार निम्न भकूट अशुभ (Malefic Bhakoota) हैं.
द्विर्द्वादश,(Dwirdadasha or Dwitiya Dwadash Bhakoot)
नवपंचक (Navpanchak Bhakoota) एवं
षडष्टक (Shadashtak Bhakoota)
शेष निम्न तीन भकूट शुभ (Benefic Bhakoota) हैं. इनके रहने पर भकूट दोष (Bhakoot Dosha) माना जाता है.
प्रथम-सप्तक,(Prathap Saptak Bhakoota)
तृतीय-एकादश (Tritiya Ekadash Bhakoot)
चतुर्थ-दशम (Chaturth Dasham Bhakoot)
भकूट जानने के लिए वर की राशि से कन्या की राशि तक तथा कन्या की राशि से वर की राशि तक गणना करनी चाहिए। यदि दोनों की राशि आपस में एक दूसरे से द्वितीय एवं द्वादश भाव में पड़ती हो तो द्विर्द्वादश भकूट होता है। वर कन्या की राशि परस्पर पांचवी व नवी में पड़ती है तो नव-पंचम भकूट होता है, इस क्रम में अगर वर-कन्या की राशियां परस्पर छठे एवं आठवें स्थान पर पड़ती हों तो षडष्टक भकूट बनता है। नक्षत्र मेलापक में द्विर्द्वादश, नव-पंचक एवं षडष्टक ये तीनों भकूट अशुभ माने गये हैं। द्विर्द्वादश को अशुभ की इसलिए कहा गया है क्योंकि द्सरा स्थान(12th place) धन का होता है और बारहवां स्थान व्यय का होता है, इस स्थिति के होने पर अगर शादी की जाती है तो पारिवारिक जीवन में अधिक खर्च होता है।
नवपंचक (Navpanchak) भकूट को अशुभ कहने का कारण यह है कि जब राशियां परस्पर पांचवें तथा नवमें स्थान (Fifth and Nineth place) पर होती हैं तो धार्मिक भावना, तप-त्याग, दार्शनिक दृष्टि तथा अहं की भावना जागृत होती है जो दाम्पत्य जीवन में विरक्ति तथा संतान के सम्बन्ध में हानि देती है। षडष्टक भकूट को महादोष की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि कुण्डली में 6ठां एवं आठवां स्थान(Sixth and Eighth Place) मृत्यु का माना जाता हैं। इस स्थिति के होने पर अगर शादी की जाती है तब दाम्पत्य जीवन में मतभेद, विवाद एवं कलह ही स्थिति बनी रहती है जिसके परिणामस्वरूप अलगाव, हत्या एवं आत्महत्या की घटनाएं भी घटित होती हैं। मेलापक के अनुसार षडष्टक में वैवाहिक सम्बन्ध नहीं होना चाहिए।
शेष तीन भकूट- प्रथम-सप्तम, तृतीय - एकादश तथा चतुर्थ -दशम शुभ होते हैं। शुभ भकूट (Auspicious Bhakoot) का फल निम्न हैं
मेलापक में राशि अगर प्रथम-सप्तम हो तो शादी के पश्चात पति पत्नी दोनों का जीवन सुखमय होता है और उन्हे उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
वर कन्या का परस्पर तृतीय-एकादश भकूट हों तो उनकी आर्थिक अच्छी रहती है एवं परिवार में समृद्धि रहती है,
जब वर कन्या का परस्पर चतुर्थ-दशम भकूट हो तो शादी के बाद पति पत्नी के बीच आपसी लगाव एवं प्रेम बना रहता है।
इन स्थितियों में भकूट दोष नहीं लगता है:
1. यदि वर-वधू दोनों के राशीश आपस में मित्र हों।
2. यदि दोनों के राशीश एक हों।
3. यदि दोनों के नवमांशेश आपस में मित्र हों।
4. यदि दोनों के नवमांशेश एक हो।
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