Showing posts with label Upay. Show all posts
Showing posts with label Upay. Show all posts

Friday, January 30, 2015

शत्रु पीड़ा अथवा संकट निवारण हेतु बजरंग बाण प्रयोग

शत्रु पीड़ा अथवा संकट निवारण हेतु बजरंग बाण प्रयोग 
=====================================
आज का समय भौतिकता का समय है |प्रतियोगिता का समय है |ऐसे में कभी कोई समस्या -संकट तो कभी कोई आती रहती है |अक्सर शत्रु भी पीड़ा पहुचाते है |कभी ज्ञात कभी अज्ञात |कभी रोग सताता है ,कभी रोजगार |ऐसे में कभी विशिष्ट कनकट के निवारण हेतु बजरंग बाण का प्रयोग किया जा सकता है |बजरंग बाण हनुमान जी की पूजा है ,इसे अनुष्ठान रूप में करने के लिए बजरंग बाण का १०८ पाठ लगातार किया जाता है |इसमें साधक या अनुष्ठान करता को इस दौरान उठाना नहीं चाहिए और इसे संकल्प पूर्वक करना चाहिए |इसलिए समस्त तैयारी पहले से होनी चाहिए एयर साधक को पूर्ण तैयार होकर बैठना चाहिए |इस साधना में लगभग तीन से चार घंटे का समय लग सकता है|

जब आप किसी समस्या के निवारण के लिए बजरंग बाण का अनुष्ठान करना चाहें तो पहले दिन का चुनाव करें |इसके लिए शनिवार या मंगलवार उत्तम होते हैं |पूजन में पांच अनाजों को पीसकर उससे दिया बनाया और उसे ही जलाया जाता है ,अतः गेहूं ,चावल ,मूंग ,उड़द और काले तिल एक दिन पूर्व ही भिगोकर रखें और अनुष्ठान के दिन उन्हें पीसकर मिश्रित कर दीपक बनाएं |दीपक में तिल का तेल डालें |बत्ती लाल कच्चे धागे का उपयोग करें ,अगर यह नहीं मिलता तो सफ़ेद कच्चे धागे को लाल रंग से रंग लें |इस धागे को अपने लम्बाई के बराबर तोड़ लें और उससे मोड़कर बत्ती का निर्माण करें |दीपक और बत्ती का निर्माण ऐसा हो की यह पूरे अनुष्ठान काल में जलता रहे बुझे नहीं |हनुमान साधना में दीपदान का बहुत महत्व है |पूजन में लाल मिठाई अथवा लड्डू का प्रयोग करें |लाल कपडा बिछाएं |कलश स्थापना करें आदि |हनुमान जी का चित्र अथवा मूर्ती पहले से अपने पास रखें |गुगुल का धुप रखें |साधना शांत वातावरण में होनी चाहिए अतः घर का एकांत कमरा अथवा पूजा स्थान चुने |अगर यहाँ दिक्कत हो तो समस्त सामग्री के साथ किसी हनुमान मंदिर में बैठकर अनुष्ठान संपन्न करें 

पूर्ण रूप से पवित्र -शुद्ध हो ऊनि अथवा कुश के आसन पर बैठें |पूजा में लगने वाली आवश्यक सामग्री पहले से व्यवस्थित कर अपने पास रखें |पवित्री कारन आचमन के बाद अपने सामने एक बाजोट या चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उसपर हनुमान जी का चित्र स्थापित करें |दीपक जलाएं और संकल्प करें |हनुमान जी की और दीपक की पूजा करें फिर बजरंग बाण का पाठ शुरू करें |पूर्ण बजरंग बाण का पाठ हो जाने पर उसे पुनः करें इस प्रकार १०८ बार पाठ करें |ध्यान हनुमान जी के मूर्ती या चित्र पर एकाग्र रखने का प्रयास करें |दीपक जलता रहे और गुगुल की धूनी होती रहे |१०८ पाठ पूर्ण हो जाने पर अपने पाठ जप को हनुमान जी के दाहिने हाथ में समर्पित कर प्रार्थना करें की वे आपकी मनोकामना पूर्ण करें |पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें |उम्मीद करें की आपकी मनोकामना पूर्ण होगी |इस पाठ से दुर्भाग्य ,दारिद्र्य ,भूत-प्रेत प्रकोप का नाश होता है |असाध्य शारीरिक कष्ट से राहत मिलती है |संकट से मुक्ति मिलती है|
::::::::::::::::::बजरंग बाण :::::::::::::::::
========================== 
ध्यान
=====
अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।
दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।
चौपाई
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।
बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।
अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।
अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।
जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।
गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।
सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।
जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।
वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।
जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।
बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।
इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।
जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।
जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।
उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।
ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।
ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।
हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।
हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।
जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।
जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।
जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।
जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।
जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।
ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।
राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।
विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।।
तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।
यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।
सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।
एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।
याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।
मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।
भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।
प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।
आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।।
दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।
यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।
शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।।
तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।
दोहा
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

पति-पत्नी के बीच अनबन को दूर करने के मंत्र


पति-पत्नी के बीच अनबन को दूर करने के मंत्र

=================================

पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही पवित्र और अटूट होता है, लेकिन यह एक ऐसा रिश्ता भी है जहां कलह-क्लेश की सबसे ज्यादा गुंजाइश होती है। कभी-कभी यह क्लेश काफी बढ़ जाता है, जो जिंदगी को तबाह करने पर भी तुल जाता है। इस आपसी सामंजस्य को बेहतर बनाने के लिए कुछ ऐसे मंत्र भी हैं, जिनका जाप आपके इस कलह-क्लेश को आपसे दूर कर सकता है। आइए, जानें वैवाहिक जीवन को बेहतर बनाने और आपसी अनबन को दूर भगाने के लिए किन मंत्रों का जाप करना उचित है। कुछ जोड़े कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ते-झगड़ते रहते हैं, जिनके कारण उनका वैवाहिक जीवन एकदम खराब हो जाता है। इसे दूर करने के लिए आप सूर्योदय से पहले स्नान आदि के बाद किसी मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और इस मंत्र का जाप करें।


ओम् नम: संभवाय च मयो भवाय च नम:
शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।।

सुकृति एस्ट्रो वास्तु रिसर्च सेंटर करनाल। 



Thursday, January 29, 2015

गृह कलह निवारण एवं शुद्धि हेतु प्रयोग

गृह कलह निवारण एवं शुद्धि हेतु प्रयोग


यदि निरंतर घर में कलह का वातावरण बना रहता हो,अशांति बनी रहती हो.व्यर्थ का तनाव बना रहता हो तो.
थोड़ी सी गूगल लेकर " ॐ ह्रीं मंगला दुर्गा ह्रीं ॐ " मंत्र का १०८ बार जाप कर गूगल को अभी मंत्रित कर दे
और उसे कंडे पर जलाकर पुरे घर में घुमा दे.ये सम्भव न हो तो गूगल ५ अगरबत्ती पर भी ये प्रयोग किया जा सकता है.घर में शांति का वातावरण बनने लगेगा।

सुकृति एस्ट्रो वास्तु रिसर्च सेंटर 
करनाल 

Friday, October 10, 2014

दुर्भाग्य और परिहार

दुर्भाग्य और परिहार

कुछ लोगों के जीवन में शादी के बाद उथल पुथल शुरू हो जाती है | यदि शादी के बाद आप कुछ अच्छा अनुभव नहीं कर रहे हैं या भाग्य साथ नहीं दे रहा है तो जन्मकुंडली में इसके कारण का पता लगा कर इसका परिहार किया जा सकता है |
यदि शुक्र पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो शादी के बाद भाग्य चमकने की बजाये दुर्भाग्य में भी बदल सकता है | ऐसी स्थिति में यह जानना आवश्यक है कि वह कौन सा ग्रह है जो शुक्र पर बुरा प्रभाव डाल रहा है | मैं एक एक करके सभी ग्रहों का वर्णन करता हूँ |
चन्द्र, बुध और गुरु से शुक्र को उतनी हानि नहीं होती इसलिए केवल उन्ही ग्रहों की चर्चा करूंगा जो शुक्र या विवाह के लिए बाधक बन सकते हैं |
इनमे सबसे ऊपर नाम आता है राहू का | राहू यदि भाग्य में अवरोध पैदा कर रहा हो तो बहुत ही चमत्कारी उपाय है | धर्म स्थान मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारा आदि में जो थोड़ी बहुत गन्दी जगह दिखे वहां पर राहू का वास होता है | उस जगह पर झाड़ू लगाने से आप राहू को धर्म के स्थान से अलग कर सकते हैं | रोज न हो सके तो प्रत्येक शनिवार को यह उपाय करें | इसके अतिरिक्त किसी से स्टील का कोई बर्तन मुफ्त में न लें | यदि पहले लिया हो तो किसी तरह उसे वापस कर दें या उसकी कीमत दे दें |
शनि से शुक्र को उतना नुक्सान नहीं पहुँचता जितना सूर्य, मंगल और राहू से होता है | यदि शनि भाग्य में अवरोध का कारण हो तो किसी बुजुर्ग को कपडे भेंट करें | मंदिर / धर्मस्थान में पेठा दान करें | इसके अतिरिक्त एक और आजमाया हुआ उपाय है जो बहुत लाभदायक सिद्ध होता है | शुक्रवार के दिन स्टील का नया ताला खरीद लें और शनिवार की सुबह पांच बजे से पहले किसी धर्म स्थान में दान कर दें | ताले को बंद करके चाबी बीच में ही छोड़ दें और आते हुए पीछे मुड़कर न देखें |
मंगल यदि भाग्य में अवरोध पैदा कर रहा हो तो मंगलवार के दिन तंदूरी रोटी और खीर के साथ कद्दू की सब्जी का भोजन और कुछ पैसे किसी विकलांग व्यक्ति को दोपहर के समय दें | हर मंगलवार यह उपाय करें |
यदि सूर्य भाग्य में बाधक बन जाए तो आलस्य छोड़ दीजिये और सूर्योदय से पूर्व उठाना प्रारम्भ कर दीजिये | स्नानोपरांत ताम्बे के पात्र में जल भरकर थोडा दूध और केसर मिला कर यह जल सूर्यदेव को तब अर्पण कीजिये जब सूर्य उदय हो  रहा हो | केवल चालीस दिन में भाग्य में आ रहा अवरोध समाप्त हो जाएगा |

Saturday, October 4, 2014

यदि नहीं मिल पा रहा मनचाहा जॉब,

यदि नहीं मिल पा रहा मनचाहा जॉब, तो बस इतना कर लीजिए

क्या आप भी नौकरी की तलाश में है? क्या आप अपनी वर्तमान नौकरी से खुश नहीं हैं? क्या आप नौकरी बदलना चाहते हैं? पेश है कुछ आसान से चमत्कारी टोटके खास आपके लिए, जो निश्चित रूप से दिलाएंगे आपको मनचाहा आकर्षक जॉब। तुरंत आजमाएं यह सरल से 10 उपाय-

बजरंग बली का फोटो जिसमें उनका उड़ता हुआ चित्र हो घर में रखना चाहिए और उसकी पूजा करना चाहिए।

आपको नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाना है तो घर से निकलने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

शनिवार के दिन शनि देव का विधिपूर्वक पूजन करके नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र – ॐ शं शनैश्चराय नम:

रोज सुबह पक्षियों को सात प्रकार के अनाजों को एकसाथ मिलाकर खिलाएं और मंदिर में दर्शन करें।

एक नींबू के ऊपर चार लौंग गाड़ दें और ‘ॐ श्री हनुमते नम:’ मंत्र का 108 बार जप करके नींबू को अपने साथ लेकर जाएं। आपका काम अवश्य बन जाएगा।

रोजाना शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अक्षत यानी चावल अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस उपाय से व्यक्ति को अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।इ
इंटरव्यू देने जाते समय यदि रास्ते में कोई गाय नजर आ जाए तो उसे आटा-गुड़ खिला कर जाएं।

रूके हुए कार्य सिद्धि के लिए यह टोटका बहुत ही लाभदायक है।

किसी भी गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई हो। उनकी आराधना करें। उनके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो इस लौंग तथा सुपारी को साथ लेकर जाएं, तो काम सिद्ध होगा।

श्रीकृष्ण का मूलमंत्र ‘कृं कृष्णाय नमः’ है। अपना सुख चाहने वाले प्रत्येक मनुष्य को इस मूलमंत्र का जाप प्रातः काल नित्य क्रिया व स्नानादि के पश्चात एक सौ आठ बार करना चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्य सभी बाधाओं एवं कष्टों से सदैव मुक्त रहते है। 

सुकृति एस्ट्रो वास्तु रिसर्च सेंटर, करनाल 

Saturday, September 27, 2014

नियमों का करेंगे पालन तभी सिद्ध होंगे उपाय

नियमों का करेंगे पालन तभी सिद्ध होंगे उपाय
=========================================
कुछ परिस्थितियों में अगर आप बार बार मेहनत करने पर भी कार्य में सफल
नहीं हो पा रहे और आपका आत्मविश्वास बार बार धोखा दे रहा हे
तो ज्योतिष के माध्यम से आप अपने प्रतिकुल ग्रहों को अनुकुल करने
का प्रयास करते हैं। आप उपाय करने की ठान तो लेते हैं आप उपाय
भी करते हो कुछ लोगो को फायदा होता है कुछ लोगो को नहीं -- में
आपसे कहना चाहूंगी की उपाय करने के भी कुछ नियम होते हैंयदि आप उन
नियमो के आधार पर उपाय करे तो अबश्य सिद्ध होंगे उपाय जैसे--
1 अपनी किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए उपाय करें
तो उसके प्रति मन में श्रद्धा रखें।
2 सच्ची भावना से किए गए उपाय अवश्य सिद्ध होते हैं एवं
मनचाही मुरादों की पूर्ति होती है। केवल कार्य की सिद्धि के लिए
अनमने मन से किए गए उपाय अपना प्रभाव नहीं दिखाते।
3 किसी भी उपाय को होंद में लाने के लिए ब्रह्म मूहर्त के बाद एवं सूर्य
अस्त होने से पहले करें, रात को किए गए उपाय विपरीत प्रभाव दे सकते
हैं। जब चन्द्र ग्रहण होता है उस समय जो उपाय होंद में लाए जाते हैं वह
रात के समय ही किए जाते हैं।
5 अगर आप उपाय करने में असमर्थ हैं तो आपका जिन से खून
का रिश्ता हो वह आपके स्थान पर उपाय कर सकते हैं।
ऐसा करना उतना ही फलदाई होगा जितना आपके स्वयं आपने हाथों से
उपाय करना।
6 एक दिन में एक ही उपाय को होंद में लाएं। दो उपाय एक साथ करने से
वह प्रभावहीन हो जाते हैं।
7 उपाय करते समय पंडित जी जो नियम र्निधारित करें उन पर अवश्य अमल
करें अन्यथा उपाय का कोई लाभ नहीं होगा।
8 जितने दिन अथवा जितनी अवधी के लिए उपाय करने को कहा जाए
वैसा ही करें। उस में अपनी सुविधा अनुरूप कोई बदलाव मत लाएं।
10 घर में सूतक अथवा पातक चल रहा हो तो 40 दिन तक उपाय मत करें

Sunday, May 4, 2014

लाल किताब के अचूक उपाय धन संपत्ति दिलाएं

लाल किताब के अचूक उपाय धन संपत्ति दिलाएं
=========================================

Photo: लाल किताब के अचूक उपाय धन संपत्ति दिलाएं
=========================================
1 लोहे के पात्र में जल, चीनी, घी तथा दूध का मिश्रण बना कर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।

2 कच्ची धानी के तेल से दीपक जलाएं, उसमें लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। समस्त विध्नों का नाश होगा और धन प्राप्ती के साधन बनने लगेंगे।

3 धनहानि हो रही हो तो बृहस्पतिवार के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल से सुंदर रंगोली बनाएं अथवा गुलाल का छिड़काव करके देसी घी का दो मुख वाला दीपक जलाएं। जब दीपक बढ़ जाए तो उसे चलते हुए पानी में परवाह कर दें।

4 मुट्ठी भर काले तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर से सात बार फेर कर घर की उत्तर दिशा में फेंक दें। धनहानि समाप्त हो जाएगी।

5 घर से धन का अभाव दूर करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें, प्रतिदिन कुत्ते को दूध पिलाएं। घर के सभी कमरों में मोर पंख रखें।

6 आर्थिक तंगी से परेशान हों तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) का रोपण करें।

7 मां लक्ष्मी के श्री स्वरूप के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाने से धन लाभ होने लगता है।

8 कारोबार में दिन दुगुनी रात चौगुणी तरक्की करने के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाएं।

9 घर में सुख समृद्धि का समावेश करवाने के लिए उत्तर पश्चिमी कोण में मिट्टी के बर्तन में थोड़े से सोने-चांदी के सिक्के किसी लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर उस बर्तन को गेहूं अथवा चावलों से भर दें।

10 कलह क्लेश से निजात पाने के लिए पके हुए मिट्टी के घड़े पर लाल रंग का पेंट करके उसके मुख पर मोली बांधें और उसके बीच जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें।1 लोहे के पात्र में जल, चीनी, घी तथा दूध का मिश्रण बना कर पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है।

2 कच्ची धानी के तेल से दीपक जलाएं, उसमें लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। समस्त विध्नों का नाश होगा और धन प्राप्ती के साधन बनने लगेंगे।

3 धनहानि हो रही हो तो बृहस्पतिवार के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल से सुंदर रंगोली बनाएं अथवा गुलाल का छिड़काव करके देसी घी का दो मुख वाला दीपक जलाएं। जब दीपक बढ़ जाए तो उसे चलते हुए पानी में परवाह कर दें।

4 मुट्ठी भर काले तिल लेकर परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर से सात बार फेर कर घर की उत्तर दिशा में फेंक दें। धनहानि समाप्त हो जाएगी।

5 घर से धन का अभाव दूर करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें, प्रतिदिन कुत्ते को दूध पिलाएं। घर के सभी कमरों में मोर पंख रखें।

6 आर्थिक तंगी से परेशान हों तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) का रोपण करें।

7 मां लक्ष्मी के श्री स्वरूप के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाने से धन लाभ होने लगता है।

8 कारोबार में दिन दुगुनी रात चौगुणी तरक्की करने के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाएं।

9 घर में सुख समृद्धि का समावेश करवाने के लिए उत्तर पश्चिमी कोण में मिट्टी के बर्तन में थोड़े से सोने-चांदी के सिक्के किसी लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर उस बर्तन को गेहूं अथवा चावलों से भर दें।

10 कलह क्लेश से निजात पाने के लिए पके हुए मिट्टी के घड़े पर लाल रंग का पेंट करके उसके मुख पर मोली बांधें और उसके बीच जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए पानी में प्रवाहित कर दें।

मानसिक तनाव से मुक्ति का अचूक मंत्र ....... तनाव से देता है छुटकारा, यह चमत्कारी मंत्र

मानसिक तनाव से मुक्ति का अचूक मंत्र ....... तनाव से देता है छुटकारा, यह चमत्कारी मंत्र
==========================================

यदि आप किसी वजह से मानसिक तनाव में रहते हैं अथवा किसी अज्ञात भय से पीड़ित हैं, अपने आपको असु‍रक्षित महसूस करते हैं तो उसके लिए 11 बुधवार लगातार 1 नारियल नीले वस्त्र में लपेटकर किसी भिखारी को दान करें।

अपने शयनकक्ष में तांबे का एक पिरामिड स्थापित करें।
नित्य मानसिक रूप से निम्न मंत्र का जाप अवश्य किया करें।

मंत्र :
ॐ अतिक्रकर महाकाय, कल्पान्त दहनोपम
भैरवाय नमस्तुभ्यमनुज्ञां दातुमहसि!!

इस उपरोक्त उपाय से एक ओर जहां आपको मानसिक तनाव/ भय/ दबाव इत्यादि से मुक्ति मिलेगी वहीं परिवार में अगर कोई नकारात्मक‍ विचारधारा का है तो उसके विचारों में भी परिवर्तन आना आरंभ होगा।

रावण सहिंता के ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत को

रावण सहिंता के ये उपाय चमका देंगे आपकी किस्मत को 
======================================
बहुत कम लोग जानते हैं। रावण सभी शास्त्रों का जानकार और श्रेष्ठ विद्वान था।
रावण ने भी ज्योतिष और तंत्र शास्त्र की रचना की है। दशानन ने ऐसे कई उपाय बताए हैं जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत रातोंरात बदल सकती है।

यहां जानिए रावण संहिता के अनुसार कुछ ऐसे तांत्रिक उपाय जिनसे किसी भी व्यक्ति की किस्मत चमक सकती है...
महाज्ञानी रावण कई चीजों में पारंगत था। ज्योतिष शास्त्र में भी उसे महारत हासिल थी। तंत्र शास्त्र का भी वह महाज्ञाता था। इसी वजह से जो भी दशानन के संपर्क में आता था वह सहसा ही उससे मोहित हो जाता था।

बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि रावण का प्रभाव उसकी तांत्रिक साधना के बल पर था। रावण कई ऐसे उपाय भी करता था जिससे जो भी सामान्य इंसान उसे देखता था वह आकर्षित हो जाता था।

रावण संहिता में कुछ ऐसे ही खास प्रकार के तांत्रिक तिलक की चर्चा की गई है। जो भी व्यक्ति यह तिलक लगाता है सहज ही लोग उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं। यहां जानिए कि कौन-कौन से हैं वह तांत्रिक तिलक......

1. धन प्राप्ति का उपाय: किसी भी शुभ मुहूर्त में या किसी शुभ दिन में सुबह जल्दी उठें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होकर किसी पवित्र नदी या जलाशय के किनारे जाएं। किसी शांत एवं एकांत स्थान पर वट वृक्ष के नीचे चमड़े का आसन बिछाएं। आसन पर बैठकर धन प्राप्ति मंत्र का जप करें।

धन प्राप्ति का मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं नम: ध्व: ध्व: स्वाहा।

इस मंत्र का जप आपको 21 दिनों तक करना चाहिए। मंत्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें। 21 दिनों में अधिक से अधिक संख्या में मंत्र जप करें।
जैसे ही यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा आपको अचानक धन प्राप्ति अवश्य कराएगा।

2.यदि किसी व्यक्ति को धन प्राप्त करने में बार-बार रुकावटें आ रही हों तो उसे यह उपाय करना चाहिए।
यह उपाय 40 दिनों तक किया जाना चाहिए। इसे अपने घर पर ही किया जा सकता है। उपाय के अनुसार धन प्राप्ति मंत्र का जप करना है। प्रतिदिन 108 बार।
मंत्र: ऊँ सरस्वती ईश्वरी भगवती माता क्रां क्लीं, श्रीं श्रीं मम धनं देहि फट् स्वाहा।
इस मंत्र का जप नियमित रूप से करने पर कुछ ही दिनों महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो जाएगी और आपके धन में आ रही रुकावटें दूर होने लगेंगी।

3. यदि आप दसों दिशाओं से यानी चारों तरफ से पैसा प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें। यह उपाय दीपावली के दिन किया जाना चाहिए।
दीपावली की रात में विधि-विधान से महालक्ष्मी का पूजन करें। पूजन के सो जाएं और सुबह जल्दी उठें। नींद से जागने के बाद पलंग से उतरे नहीं बल्कि यहां दिए गए मंत्र का जप 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ नमो भगवती पद्म पदमावी ऊँ ह्रीं ऊँ ऊँ पूर्वाय दक्षिणाय उत्तराय आष पूरय सर्वजन वश्य कुरु कुरु स्वाहा।
शय्या पर मंत्र जप करने के बाद दसों दिशाओं में दस-दस बार फूंक मारें। इस उपाय से साधक को चारों तरफ से पैसा प्राप्त होता है

4.सफेद आंकड़े को छाया में सुखा लें। इसके बाद कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध में मिलाकर इसे पीस लें और इसका तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का समाज में वर्चस्व हो जाता है।

5.यदि आपको ऐसा लगता है कि किसी स्थान पर धन गढ़ा हुआ है और आप वह धन प्राप्त करना चाहते हैं तो यह उपाय करें।
गड़ा धन प्राप्त करने के लिए यहां दिए गए मंत्र का जप दस हजार बार करना होगा।
मंत्र: ऊँ नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा।
गड़े हुए धन के दर्शन करने के लिए विधि इस प्रकार है। किसी शुभ दिवस में यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या करें। मंत्र सिद्धि हो जाने के बाद जिस स्थान पर धन गड़ा हुआ है वहां धतुरे के बीज, हलाहल, सफेद घुघुंची, गंधक, मैनसिल, उल्लू की विष्ठा, शिरीष वृक्ष का पंचांग बराबर मात्रा में लें और सरसों के तेल में पका लें। इसके बाद इस सामग्री से गड़े धन की शंका वाले स्थान पर धूप-दीप ध्यान करें। यहां दिए गए मंत्र का जप हजारों की संख्या में करें।
ऐसा करने पर उस स्थान से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का साया हट जाएगा। भूत-प्रेत का भय समाप्त हो जाएगा। साधक को भूमि में गड़ा हुआ धन दिखाई देने लगेगा।
ध्यान रखें तांत्रिक उपाय करते समय किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी का परामर्श अवश्य लें।

6.शास्त्रों के अनुसार दूर्वा घास चमत्कारी होती है। इसका प्रयोग कई प्रकार के उपायों में भी किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति सफेद दूर्वा को कपिला गाय यानी सफेद गाय के दूध के साथ पीस लें और इसका तिलक लगाएं तो वह किसी भी काम में असफल नहीं होता है।

7.महालक्ष्मी की कृपा तुरंत प्राप्त करने के लिए यह तांत्रिक उपाय करें।
किसी शुभ मुहूर्त जैसे दीपावली, अक्षय तृतीया, होली आदि की रात यह उपाय किया जाना चाहिए। दीपावली की रात में यह उपाय श्रेष्ठ फल देता है। इस उपाय के अनुसार आपको दीपावली की रात कुमकुम या अष्टगंध से थाली पर यहां दिया गया मंत्र लिखें।
मंत्र: ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी, महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ ह्रीं नम:।
इस मंत्र का जप भी करना चाहिए। किसी साफ एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला या कमल गट्टे की माला के साथ मंत्र जप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। अधिक से अधिक इस मंत्र की आपकी श्रद्धानुसार बढ़ा सकते हैं।
इस उपाय से आपके घर में महालक्ष्मी की कृपा बरसने लगेगी।

8.अपामार्ग के बीज को बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें, लेप बना लें। इस लेप को लगाने से व्यक्ति का समाज में आकर्षण काफी बढ़ जाता है। सभी लोग इनके कहे को मानते हैं।

9.यदि आप देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की कृपा से अकूत धन संपत्ति चाहते हैं तो यह उपाय करें।
उपाय के अनुसार आपको यहां दिए जा रहे मंत्र का जप तीन माह तक करना है। प्रतिदिन मंत्र का जप केवल 108 बार करें।
मंत्र: ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवाणाय, धन धन्याधिपतये धन धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।
मंत्र जप करते समय अपने पास धनलक्ष्मी कौड़ी रखें। जब तीन माह हो जाएं तो यह कौड़ी अपनी तिजोरी में या जहां आप पैसा रखते हैं वहां रखें। इस उपाय से जीवनभर आपको पैसों की कमी नहीं होगी।

10.यदि आप घर या समाज या ऑफिस में लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं तो बिल्वपत्र तथा बिजौरा नींबू लेकर उसे बकरी के दूध में मिलाकर पीस लें। इसके बाद इससे तिलक लगाएं। ऐसा करने पर व्यक्ति का आकर्षण बढ़ता है।

(मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक हैं. सूर्य मुद्रा :- हस्त-मुद्रा-चिकित्सा

(मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक हैं. सूर्य मुद्रा :- हस्त-मुद्रा-चिकित्सा
========================================================

मानव-सरीर अनन्त रहस्योंसे भरा हुआ है । शरीरकी अपनी एक मुद्रामयी भाषा है । जिसे करनेसे शारीरिक स्वास्थ्य-लाभ में सहयोग होता है । यह शरीर पंचतत्त्वोंके योगसे बना है । पाँच तत्त्व ये हैं-
(1) पृथ्वी, (2) जल, (3) अग्नि, (4) वायु, एवं (5) आकाश । शरीर में जब भी इन तत्त्वोंका असंतुलन होता है, तो रोग पैदा हो जाते हैं । यदि हम इनका संतुलन करना सीख जायँ तो बीमार हो ही नहीं सकते एवं यदि हो भी जायँ तो इन तत्त्वोंको संतुलित करके आरोग्यता वापस ला सकते हैं ।

हस्त-मुद्रा-चिकित्साके अनुसार हाथ तथा हाथोंकी अँगुलियों और अँगुलियोंसे बननेवाली मुद्राओंमें आरोग्यका राज छिपा हुआ है । हाथकी अँगुलियोंमें पंचतत्त्व प्रतिष्ठित हैं ।

ऋषि-मुनियोंने हजारों साल पहले इसकी खोज कर ली थी एवं इसे उपयोगमें बराबर प्रतिदिन लाते रहे, इसीलिये वे लोग स्वस्थ रहते थे । ये शरीरमें चैतन्यको अभिव्यक्ति देनेवाली कुंजियाँ हैं ।

मनुष्यका मस्तिष्क विकसित है, उसमें अनंत क्षमताएँ हैं । ये क्षमताएँ आवृत हैं, उन्हें अनावृत करके हम अपने लक्ष्यको पा सकते हैं ।

नृत्य करते समय भी मुद्राएँ बनायी जाती हैं, जो शरीर हजारों नसों एवं नाडियोंको प्रभावित करती हैं और उनका प्रभाव भी शरीरपर अच्छा पड़ता है ।

हस्त-मुद्राएँ तत्काल ही असर करना शुरू कर देती हैं । जिस हाथमें ये मुद्राएँ बनाते हैं, शरीरके विपरीत भागमें उनका तुरंत असर होना शुरू हो जाता है । इन सब मुद्राओंका प्रयोग करते समय वज्रासन, पद्मासन अथवा सुखासनका प्रयोग करना चाहिये ।

इन मुद्राओंको प्रतिदिन तीससे पैंतालीस मिनटतक करनेसे पूर्ण लाभ होता है । एक बारमें न कर सके तो दो-तीन बारमें भी किया जा सकता है ।

किसी भी मुद्राको करते समय जिन अँगुलियोंका कोई काम न हो उन्हें सीधी रखे ।
सूर्य मुद्रा हमारे भीतर के अग्नि तत्व को संचालित करती है। सूर्य की अँगुली अनामिका को रिंग फिंगर भी कहते हैं। इस अँगुली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य ऊर्जा स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करती है और यूरेनस कामुकता, अंतर्ज्ञान और बदलाव का प्रतीक है।

विधि : अंगूठे से तीसरी अंगुली अनामिका (रिंग फिंगर) को मोड़कर उसके ऊपरी नाखून वाले भाग को अंगूठे के जड़ (गद्देदार भाग) पर दवाब(हल्का) डालें और अंगूठा मोड़कर अनामिका पर निरंतर दवाब(हल्का) बनाये रखें तथा शेष अँगुलियों को अपने सीध में सीधा रखें.....इस तरह जिस मुद्रा का निर्माण होगा उसे सूर्य मुद्रा कहते हैं...

लाभ : इस मुद्रा का रोज दो बार 5 से 15 मिनट के लिए अभ्यास करने से शरीर का कोलेस्ट्रॉल घटता है। वजन कम करने के लिए भी इस मुद्रा का उपयोग किया जाता है। पेट संबंधी रोगों में भी यह मुद्रा लाभदायक है। बेचैनी और चिंता कम होकर दिमाग शांत बना रहता है। यह मुद्रा शरीर की सूजन मिटाकर उसे हलका बनाती है।
यह मुद्रा शारीरिक स्थूलता (मोटापा) घटाने में अत्यंत सहायक होता है...जो लोग मोटापे से परेशान हैं,इस मुद्रा का प्रयोग कर फलित होते देख सकते हैं..

( अनामिका को महत्त्व लगभग सभी धर्म सम्प्रदाय में दिया गया है.इसे बड़ा ही शुभ और मंगलकारी माना गया है.हिन्दुओं में पूजा पाठ उत्सव आदि पर मस्तक पर जो तिलक लगाया जाता है,वह इसलिए कि ललाट में जिस स्थान पर तिलक लगाया जाता है योग के अनुसार मस्तक के उस भाग में द्विदल कमल होता है और अनामिका द्वारा उस स्थान के स्पर्श से मस्तिष्क की अदृश्य शक्ति जागृत हो जाती हैं,व्यक्तित्व तेजोमय हो जाता है)

किसी व्यक्ति को वश में कैसे करें

जानिए, किसी व्यक्ति को वश में कैसे करें
=========================================
सभी को किसी ना किसी को अपने वश में करना है। जो लोग लालची हैं उन्हें धन से वश में करें, जो लोग घमंडी हैं उन्हें मान-सम्मान देकर, जो मूर्ख हैं उनकी प्रशंसा करके और जो लोग विद्वान हैं उन्हें ज्ञान की बातों से वश में किया जा सकता है। वशीकरण है क्या...? यही कि जो आप बोलें, जो आप चाहें... वह ही हो जाए। कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस उसके वश में हो, पत्नी सोचती है पति वश में रहे, पति की भी सोच ऐसी ही रहती है। कोई दोस्त को अपने वश में करना चाहता है तो कोई अपनी औलाद को। लड़कों को लड़कियों को वश में करना है तो लड़कियों को लड़के अपने वश में चाहिए।

वशीकरण के लिए सबसे जरूरी है ध्यान...। एक जगह, एक बिंदू, एक स्थान, किसी भी उस वस्तु पर जिसे अपने वश में करना हो उसके लिए अपना मन केंद्रित करना ही ध्यान है। ध्यान से आपके शरीर में अद्भूत ऊर्जा का विकास होगा। भगवान शिव के बारे सभी जानते ही हैं वे युगों-युगों तक ध्यान में रहते हैं। जितना आप मेडिटेशन करेंगे आपके चेहरे पर तेज बढ़ जाएगा, एक मधुर मुस्कान सदा आपके चेहरे पर खिली दिखाई देगी, आपका व्यक्तित्व निखर जाएगा, आपके चलने, बोलने में आत्मविश्वास दिखाई देगा। जब ऐसा होने लगेगा तो जब आप बोलना शुरू करेंगे वहां सभी आपको ही सुनते दिखाई देंगे, आपकी मधुर मुस्कान और चेहरे की चमक के आगे आपका बॉस, आपका जीवन साथी, आपके मित्र आसानी से आपका कहा मान लेंगे। बस यही है वशीकरण का आसान और सुगम मार्ग

वशीकरण तिलक लगाने से किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है। शुद्ध सिन्दूर, शुद्ध केसर, शुद्ध गोरोचन को समान मात्रा में लेकर किसी चांदी की डिबिया या कटोरी में रख लें। प्रातः सूर्योदय के उपरांत इस डिबिया में से तिलक लेकर भृकुटि के मध्य आज्ञाचक्र पर लगाएं। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं, इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है। तिलक लगाते वक्त निम्नलिखित मन्त्र का जाप करें ऊँ नमः सर्व लोक वशंकराय कुरु कुरु स्वाहा।

1. तिलक के अभाव में सत्कर्म सफल नहीं होते। देव पूजन, मंत्र जप, होम तीर्थ शौच आदि कार्यों में नीचे से ऊपर की ओर अर्ध्वपुण्द्र लगाकर शुभ कृत्य करने चाहिए।

2. तिलक बैठकर लगाना चाहिए। भगवान पर चढ़ाने से बचे हुए चन्दन को ही लगाना चाहिए।

3. माथे पर तिलक लगाना प्रतीक है कि दोनों आंखों के बीच में उस परम शक्ति का या परमात्मा का निवास है जिसे पाकर हम सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकते हैं।

4. जब भी हम किसी परेशानी में होते हैं तो हमारा हाथ अपने आप ही माथे पर चला जाता है क्योंकि हमारी सारी परेशानियां उस परमलोक मे जाकर ही समाप्त होती हैं।

Tuesday, November 12, 2013

शुभ और अशुभ भकूट


शुभ और अशुभ भकूट (Auspicious Bhakoot & malefic Bhakoot in Marriage Compatibility)


ज्योतिष के अनुसार वर और कन्या की कुण्डली मिलायी जाती है। कुण्डली मिलान से पता चलता है कि वर कन्या की कुण्डली मे कितने गुण मिलते हैं, कुल 36 गुणों में से 18 से अधिक गुण मिलने पर यह आशा की जाती है कि वर वधू का जीवन खुशहाल और प्रेमपूर्ण रहेगा.

भकूट का तात्पर्य वर एवं वधू की राशियों के अन्तर से है। यह 6 प्रकार का होता है जो क्रमश: इस प्रकार है:-

कुण्डली में गुण मिलान के लिए अष्टकूट(Ashtkoot) से विचार किया जाता है इन अष्टकूटों में एक है भकूट (Bhakoot)। भकूट अष्टकूटो में 7 वां है,भकूट निम्न प्रकार के होते हैं.

1. प्रथम - सप्तक 2. द्वितीय - द्वादश 3. तृतीय - एकादश 4. चतुर्थ - दशम 5. पंचम - नवम 6. षडष्टक

ज्योतिष के अनुसार निम्न भकूट अशुभ (Malefic Bhakoota) हैं.
द्विर्द्वादश,(Dwirdadasha or Dwitiya Dwadash Bhakoot)
नवपंचक (Navpanchak Bhakoota) एवं
षडष्टक (Shadashtak Bhakoota)

शेष निम्न तीन भकूट शुभ (Benefic Bhakoota) हैं. इनके रहने पर भकूट दोष (Bhakoot Dosha) माना जाता है.
प्रथम-सप्तक,(Prathap Saptak Bhakoota)
तृतीय-एकादश (Tritiya Ekadash Bhakoot)
चतुर्थ-दशम (Chaturth Dasham Bhakoot)

भकूट जानने के लिए वर की राशि से कन्या की राशि तक तथा कन्या की राशि से वर की राशि तक गणना करनी चाहिए। यदि दोनों की राशि आपस में एक दूसरे से द्वितीय एवं द्वादश भाव में पड़ती हो तो द्विर्द्वादश भकूट होता है। वर कन्या की राशि परस्पर पांचवी व नवी में पड़ती है तो नव-पंचम भकूट होता है, इस क्रम में अगर वर-कन्या की राशियां परस्पर छठे एवं आठवें स्थान पर पड़ती हों तो षडष्टक भकूट बनता है। नक्षत्र मेलापक में द्विर्द्वादश, नव-पंचक एवं षडष्टक ये तीनों भकूट अशुभ माने गये हैं। द्विर्द्वादश को अशुभ की इसलिए कहा गया है क्योंकि द्सरा स्थान(12th place) धन का होता है और बारहवां स्थान व्यय का होता है, इस स्थिति के होने पर अगर शादी की जाती है तो पारिवारिक जीवन में अधिक खर्च होता है।

नवपंचक (Navpanchak) भकूट को अशुभ कहने का कारण यह है कि जब राशियां परस्पर पांचवें तथा नवमें स्थान (Fifth and Nineth place) पर होती हैं तो धार्मिक भावना, तप-त्याग, दार्शनिक दृष्टि तथा अहं की भावना जागृत होती है जो दाम्पत्य जीवन में विरक्ति तथा संतान के सम्बन्ध में हानि देती है। षडष्टक भकूट को महादोष की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि कुण्डली में 6ठां एवं आठवां स्थान(Sixth and Eighth Place) मृत्यु का माना जाता हैं। इस स्थिति के होने पर अगर शादी की जाती है तब दाम्पत्य जीवन में मतभेद, विवाद एवं कलह ही स्थिति बनी रहती है जिसके परिणामस्वरूप अलगाव, हत्या एवं आत्महत्या की घटनाएं भी घटित होती हैं। मेलापक के अनुसार षडष्टक में वैवाहिक सम्बन्ध नहीं होना चाहिए।

शेष तीन भकूट- प्रथम-सप्तम, तृतीय - एकादश तथा चतुर्थ -दशम शुभ होते हैं। शुभ भकूट (Auspicious Bhakoot) का फल निम्न हैं
मेलापक में राशि अगर प्रथम-सप्तम हो तो शादी के पश्चात पति पत्नी दोनों का जीवन सुखमय होता है और उन्हे उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
वर कन्या का परस्पर तृतीय-एकादश भकूट हों तो उनकी आर्थिक अच्छी रहती है एवं परिवार में समृद्धि रहती है,
जब वर कन्या का परस्पर चतुर्थ-दशम भकूट हो तो शादी के बाद पति पत्नी के बीच आपसी लगाव एवं प्रेम बना रहता है।


इन स्थितियों में भकूट दोष नहीं लगता है:
1. यदि वर-वधू दोनों के राशीश आपस में मित्र हों।
2. यदि दोनों के राशीश एक हों।
3. यदि दोनों के नवमांशेश आपस में मित्र हों।
4. यदि दोनों के नवमांशेश एक हो।

परीक्षा/प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए कुछ खास उपाय

परीक्षा/प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए कुछ खास उपाय

1. अध्धयन कक्ष में कभी भी कोई कॉपी किताबें पेन पेंसिल को खुला न रखें ।

2. अध्धयन कक्ष में कॉपी किताबों को हमेशा उनकी नियत स्थान , बैग या अलमारी में ही सलीके से रखें , यह जरुर ध्यान रखें की पड़ाई की मेज, कुर्सी टूटी न हो , कापी, किताबें फटी न हो उन सभी पर जरा भी धूल मिटटी न रहे ,लगातार वहां पर साफ सफाई होती रहे ।

3. पड़ने की मेज पर खाना नहीं खाना चाहिए , खाना खाते समय पड़ाई की टेबिल पर कॉपी किताबें बंद करके ,खाना खाने के लिए बनाये गए स्थान पर ही खाना चाहिए ।

4. हमेशा पड़ाई प्रारंभ करते समय अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए कॉपी किताबों को अपने मस्तक से लगाकर पड़ाई शुरू करें , यही प्रक्रिया पड़ाई को समाप्त करते समय भी दोहराएँ ।

5. पड़ने का सर्वोतम समय ब्रह्म मुहूर्त अर्थात सुबह के 4 बजे का माना गया है उस काल में पड़ाई करते समय हमें कई गुना ज्यादा और तेजी से अपना पाठ याद होता है इसलिए पड़ने वाले छात्रों को सुबह सवेरे पड़ाई की आदत अवश्य ही डालनी चाहिए ।

6. पड़ते समय छात्र का मुंह सदैव ईशान कोण ( उत्तर पूर्व ) की तरफ ही होना चाहिए इसलिए उसकी मेज इस तरह से हो की उसका मुंह ईशान कोण की तरफ ही रहे ।

7. विधार्थी को घर पर पड़ते समय जूते - मोज़े नहीं पहनने चाहिए ।

8. इमली के ताजे पत्ते ब्रहस्पति वार को अपनी किताबों में रखने से भी विधार्थी की बुद्धि त्रीव होती है । 

9. अष्ट सरस्वती यंत्र को गले में धारण करवाने से भी विधार्थी की बुद्धि का विकास होता है ।

10. मोर का पंख अपने पास रखने से विधार्थी का अपने स्कूल कालेज में सम्मान बड़ता है ।

11.तुलसी के पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर प्रतिदिन उसका रस विधार्थी को पिलाने से भी उसकी स्मरण शक्ति का विकास होता है । 

12. किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्ति हेतु हर गुरुवार को नियम से किसी भी गाय को पीले पेड़े अवश्य खिलाये ।

13. विद्यार्थी को चहिये की वह गणेश चालीसा का पाठ करें और बुधवार को गणपति जी को बेसन के लड्डू और दूर्वा अर्पित करें, विद्यार्थी को चाहिए की वह अपनी पड़ाई की मेज या कमरे की ईशान की दीवार पर माँ सरस्वती की तस्वीर जरुर लगायें और रोज उनसे बेहतर विद्या प्राप्ति के लिए आग्रह करें ।

14. पड़ाई में उत्कर्ष सफलता हेतु छात्र में यह संस्कार डाले जाएँ की वह सदैव अपने माता पिता, घर के अन्य बडे् बुजुर्ग के रोज चरण स्पर्श करें और अपने गुरुजनों को पूर्ण सम्मान दें , ऐसा करने से उस छात्र पर हमेशा ईश्वर की कृपा बनी रहती है ।

15. परीक्षा देने जाते समय यदि छात्र मीठा दही या अन्य कोई भी मीठा खाकर जाये तो उसे निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है ।

16. किसी भी विद्यार्थी छात्र छात्रा को कभी भी भूलकर परीक्षा में नकल नहीं करनी चाहिए , चाहे उसे कुछ नंबरों का नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े ,नकल करने पर विद्या की देवी माँ सरस्वती उससे कुपित हो जाती है , और उसे लगातार पड़ाई में कठनाइयों का सामना करना पड़ता है ।

17. परीक्षा में शत प्रतिशत सफलता के लिए विद्यार्थी छात्र छात्रा को रोज नियम से उगते हुए सूर्य देव को फूल ,लाल चंदन, चावल आदि डालकर जल चडाने एवं उनका ध्यान करने से अति विशेष लाभ की प्राप्ति होती है , इस नियम का जीवन पर्यंत पालन करने से व्यक्ति को जीवन में सदैव सफलता की प्राप्ति होती है ।

18. ब्राम्ही का नित्य सेवन करने वाले विधार्थियों की बुद्धि त्रीव होती है स्मरण शक्ति बडती है इसलिए उन्हें परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त होती हैं।

19. जिन विद्यार्थियों को परीक्षा में उत्तर भूल जाने की आदत हो, उन्हें परीक्षा में अपने पास कपूर और फिटकरी रखनी चाहिए। इससे मानसिक रूप से मजबूती बनी रहती है और यह नकारात्मक ऊर्जा को भी हटाती हैं ।

20. विद्यार्थियों के कमरे में यथासंभव हरे रंग के परदे लगवाने चाहिए इससे एकाग्रता आती है और मन भी शांत रहता है । 

21. विद्यार्थियों के कमरे में दीवार पर नीम की डाली लगनी चाहिए इससे कमरे में शुद्ध हवा के साथ साथ सकारात्मक उर्जा का भी प्रभाव बना रहता है । 

22. भगवान गणोश जी को हर बुधवार के दिन दूर्वा चढ़ाने से बच्चों में कुशाग्र बुद्धि विकसित होती है। 

23. परीक्षा में जाने से पूर्व मीठे दही पर तुलसी के पत्ते रखकर ग्रहण करके घर से निकलें। 

24. साधारणतया मस्तिष्क का केवल 3 से 7 प्रतिशत भाग ही सक्रिय हो पाता है। शेष भाग सुप्त रहता है, जिसमें अनंत ज्ञान छिपा रहता है। ऐसी विलक्षण शक्ति को जाग्रत करने के दोनों कानों के नीचे के भाग को अंगूठे और अंगुलियों से दबाकर नीचे की ओर खीचें। पूरे कान को ऊपर से नीचे करते हुए मरोड़ें। सुबह 4-5 मिनट और दिन में जब भी समय मिले, कान के नीचे के भाग को खींचे। 

25.सिर व गर्दन के पीछे बीच में मेडुला नाड़ी होती है। इस पर अंगुली से 3-4 मिनट मालिश करें। इससे एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ा हुआ याद रहता है। 

26.उत्तर दिशा में मुंह करके पिरामिड की आकृति की टोपी पहनकर पढ़ाई करने से पढ़ा हुआ बहुत शीघ्र याद होता है। टोपी, कागज, गत्ता या मोटे कपड़े की बनाई जा सकती है। 

27.परीक्षा के लिए घर से निकलते समय पहले दायाँ पैर घर से बाहर निकाले और परीक्षा कक्ष में भी पहले दायाँ पैर ही अन्दर रखे । 

28.परीक्षा के लिए घर से जाते समय किसी भी मंदिर में आधा किलो दूध देकर जाये ईश्वर की कृपा से आपमें प्रबल आत्मविश्वास बना रहेगा । 

29. 125 ग्राम बादाम और 125 ग्राम सौंफ को मिलाकर बारीक़ कूट लें । इसको प्रतिदिन एक तोला रात में सोते समय पानी के साथ ले लें । शरीर स्वस्थ रहेगा दिमाग और नज़र दोनों ही तेज़ होते है ।

30. किसी शुभ मुहूर्त में लाल सुलेमानी हक़ीक को धारण करने से भी दिमाग तेज़ होता है ...निर्णय लेने में आसानी रहती है । 


31. बच्चो की पड़ाई में सफलता के लिए शुक्ल पक्ष के ब्रहस्पतिवार को सवा मीटर पीले कपड़े में 2 किलो चने की दाल बांधकर किसी भी लक्ष्मी नारायण मंदिर में दे आयें और प्रभु से अपने बच्चो की शिक्षा में सर्वश्रेष्ठ सफलता के लिए प्रार्थना करें । ऐसा लगातार 5 ब्रहस्पतिवार को अवश्य ही करें ।