Sunday, November 3, 2013

घर के मुख्यद्वार के सामने पेड़ हो तो

वास्तु और फेंगशुई के अनुसार घर में छोटे-छोटे और कुछ विशेष पेड़ पौधों को लगाना अच्छा माना जाता है तुलसी और बेंबु, मनीप्लांट, अपराजिता, जैसे कई पौधे हैं जिन्हे घर में लगाना बहुत शुभ माना जाता है लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उन पेड़ो या पौधो का घर के सामने होना अच्छा नहीं माना जाता है।

- कई बंगलों में मुख्य द्वार के सामने कैक्टस के छोट पौधे लगा देते हैं, चाँदनी बेल या मनीप्लांट लगा देते हैं, जिससे मुख्य द्वार में अवरोध पैदा हो जाता है। इस प्रकार के घर में भी बाधा का कारण बनता है।

- मुख्य द्वार के सामने तीखे या अंदर की ओर कोई नुकीली चीज हो तो वहाँ रहने वालों को कोई न कोई बाधा आती रहेगी। इसी प्रकार यदि घर के सामने बिजली का खंभा या ट्रांसफार्मर लगा हो तो आपके यहाँ अच्छी ऊर्जा आने के बजाय निगेटिव ऊर्जा आएगी, जिसके कारण उस घर में रहने वाले लोगों को मानसिक तनाव होगा। उनका स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं रहेगा।

- पूर्व में पीपल का पेड़ नहीं होना चाहिए। अकारण भय व धन की हानि होती है।

- आग्नेय में अनार का पेड़ अति शुभ परिणाम देने वाला होता है। दक्षिण में गुलर का पेड़ शुभ रहेगा। नैऋत्य में इमली शुभ रहती है।

- दक्षिण नैऋत्य में जामुन और कदंब का पेड़ शुभ रहता है। उत्तर में पाकड़ का पेड़ लगाना ठीक रहेगा।

- ईशान में आँवला का पेड़ अति फलदायी रहता है। ईशान-पूर्व में आम का पेड़ शुभ रहता है। इस प्रकार हम पेड़ लगाकर शुभाशुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।

- मुख्य द्वार के सामने कोई रास्ता द्वार की ओर जा रहा हो तब भी बाधा का कारण बनता है। ग्रह स्वामी की अकाल मृत्यु हो सकती है। घर के सामने वृक्ष बड़ा रहे तो वहाँ रहने वालों की प्रगति में बाधा का कारण बनता है। यदि उस वृक्ष की छाँव घर पर पड़ती हो तो नुकसानप्रद रहता है। जबकि उसकी छाया कहीं से भी मकान पर नहीं पड़ती हो तो हानि नहीं होगी।

-कई जगह बंगलों में या घरों के सामने लंबे अशोक वृक्ष लगा दिए जाते हैं, जिससे घर में आड़ सी हो जाती है। यहाँ भी घर में रहने वालों की प्रगति के मार्ग में बाधा का कारण बनता है। जहाँ तक हो सके मुख्य द्वार को बाधा से रहित ही रखना चाहिए।

कमल गट्टे से धन प्राप्ति के अचूक उपाय

Kamal Gatta Mala
धन प्राप्ति के लिए किए जाने वाले तंत्र प्रयोगों में कई वस्तुओं का उपयोग किया जाता है, कमल गट्टा भी उन्हीं में से एक है। कमल गट्टा कमल के पौधे में से निकलते हैं व काले रंग के होते हैं। यह बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। मंत्र जप के लिए इसकी माला भी बनती है। इसके अलावा भी इसके कई प्रयोग हैं। इसके कुछ प्रयोग नीचे लिखे हैं जिनसे माता लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है।


उपाय

1- जो व्यक्ति प्रत्येक बुधवार को 108 कमलगटटे के बीज लेकर घी के साथ एक-एक करके अग्नि में 108 आहुतियां देता है। उसके घर से दरिद्रता हमेशा के लिए चली जाती है।

2- जो व्यक्ति पूजा-पाठ के दौरान की माला अपने गले में धारण करता है उस पर लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।

3- यदि रोज 108 कमल के बीजों से आहुति दें और ऐसा 21 दिन तक करें तो आने वाली कई पीढिय़ां सम्पन्न बनी रहती हैं।

4- यदि दुकान में कमल गट्टे की माला बिछा कर उसके ऊपर भगवती लक्ष्मी का चित्र स्थापित किया जाए तो व्यापार में कमी आ ही नहीं सकती। उसका व्यापार निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर होता रहता है।

5- कमल गट्टे की माला भगवती लक्ष्मी के चित्र पर पहना कर किसी नदी या तालाब में विसर्जित करें तो उसके घर में निरंतर लक्ष्मी का आगमन बना रहता है।

Tuesday, October 29, 2013

राजनीति में प्रवेश एवं सफलता के लिये ज्योतिष योग

According to Ravan Sahita- राजनीति में प्रवेश एवं सफलता के लिये ज्योतिष योग (Astrology Yoga for Carrer in Politics)

Astrology Yoga for Carrer in Politics
अन्य व्यवसायों एवं कैरियर की भांति ही राजनीति में प्रवेश करने वालों की कुंडली में भी ज्योतिष योग होते हैं. राजनीति में सफल रहे व्यक्तियों की कुंडली में ग्रहों का विशिष्ट संयोग देखा गया है,

1. आवश्यक भाव : छठा, सांतवा, दसवां व ग्यारहवां घर (Important Houses for Carrer in Politics)
सफल राजनेताओं की कुण्डली में राहु का संबध छठे, सांतवें, दशवें व ग्यारहवें घर से देखा गया है. कुण्डली के दशवें घर को राजनीति का घर कहते है. सत्ता में भाग लेने के लिये दशमेश या दशम भाव में उच्च का ग्रह बैठा होना चाहिए.

और गुरु नवम में शुभ प्रभाव में स्थिति होने चाहिए. या दशम घर या दशमेश का संबध सप्तम घर से होने पर व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त करता है. छठे घर को सेवा का घर कहते है. व्यक्ति में सेवा भाव होने के लिये इस घर से दशम /दशमेश का संबध होना चाहिए. सांतवा घर दशम से दशम है इसलिये इसे विशेष रुप से देखा जाता है.

2. आवश्यक ग्रह: राहु, शनि, सूर्य व मंगल . (Important Houses: Rahu, Saturn, Sun and Mars)
राहु को सभी ग्रहों में नीति कारक ग्रह का दर्जा दिया गया है. इसका प्रभाव राजनीति के घर से होना चाहिए. सूर्य को भी राज्य कारक ग्रह की उपाधि दी गई है. सूर्य का दशम घर में स्वराशि या उच्च राशि में होकर स्थित हो व राहु का छठे घर, दसवें घर व ग्यारहवें घर से संबध बने तो यह राजनीति में सफलता दिलाने की संभावना बनाता है. इस योग में दूसरे घर के स्वामी का प्रभाव भी आने से व्यक्ति अच्छा वक्ता बनता है.

शनि दशम भाव में हो या दशमेश से संबध बनाये और इसी दसवें घर में मंगल भी स्थिति हो तो व्यक्ति समाज के लोगों के हितों के लिये काम करने के लिये राजनीति में आता है. यहां शनि जनता के हितैशी है तथा मंगल व्यक्ति में नेतृ्त्व का गुण दे रहा है. दोनों का संबध व्यक्ति को राजनेता बनने के गुण दे रहा है.

3. अमात्यकारक : राहु/ सूर्य (Amatyakarak Rahu and Sun)
राहु या सूर्य के अमात्यकारक बनने से व्यक्ति रुचि होने पर राजनीति के क्षेत्र में सफलता पाने की संभावना रखता है. राहु के प्रभाव से व्यक्ति नीतियों का निर्माण करना व उन्हें लागू करने की ण्योग्यता रखता है. राहु के प्रभाव से ही व्यक्ति में स्थिति के अनुसार बात करने की योग्यता आती है. सूर्य अमात्यकारक होकर व्यक्ति को समाज में उच्च पद की प्राप्ति का संकेत देता है. नौ ग्रहों में सूर्य को राजा का स्थान दिया गया है.

4. नवाशं व दशमाशं कुण्डली (Navamsha and Dashamasha Kundli)
जन्म कुण्डली के योगों को नवाशं कुण्डली में देख निर्णय की पुष्टि की जाती है. किसी प्रकार का कोई संदेह न रहे इसके लिये जन्म कुण्डली के ग्रह प्रभाव समान या अधिक अच्छे रुप में बनने से इस क्षेत्र में दीर्घावधि की सफलता मिलती है. दशमाशं कुण्डली को सूक्ष्म अध्ययन के लिये देखा जाता है. तीनों में समान या अच्छे योग व्यक्ति को राजनीति की उंचाईयों पर लेकर जाते है.

5. अन्य योग (Other planets combination)
(1) नेतृ्त्व के लिये व्यक्ति का लग्न सिंह अच्छा समझा जाता है. सूर्य, चन्द्र, बुध व गुरु धन भाव में हों व छठे भाव में मंगल, ग्यारहवे घर में शनि, बारहवें घर में राहु व छठे घर में केतु हो तो एसे व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है. यह योग व्यक्ति को लम्बे समय तक शासन में रखता है. जिसके दौरान उसे लोकप्रियता व वैभव की प्राप्ति होती है.

(ख) कर्क लग्न की कुण्डली में दशमेश मंगल दूसरे भाव में , शनि लग्न में, छठे भाव में राहु, तथा लग्नेश की दृष्टि के साथ ही सूर्य-बुध पंचम या ग्यारहवें घर में हो तो व्यक्ति को यश की प्राप्ति होती.

(ग) वृ्श्चिक लग्न की कुण्डली में लग्नेश बारहवे में गुरु से दृ्ष्ट हो शनि लाभ भाव में हो, राहु -चन्द्र चौथे घर में हो, शुक्र स्वराहि के सप्तम में लग्नेश से दृ्ष्ट हो तथा सूर्य ग्यारहवे घर के स्वामी के साथ युति कर शुभ स्थान में हो और साथ ही गुरु की दशम व दूसरे घर पर दृ्ष्टि हो तो व्यक्ति प्रखर व तेज नेता बनता है.

गरीब को भी धनवान बना सकते हैं ये टोटके


गरीब को भी धनवान बना सकते हैं ये टोटके

गरीब को भी धनवान बना सकते हैं ये टोटके जीवन की ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान तंत्र शास्त्र से नहीं किया जा सकता। ऐसा माना जाता है कि तंत्र शास्त्र के देवता भगवान शंकर है। उन्हीं की कृपा से टोने-टोटके प्रभावशाली होकर तुरंत फल प्रदान करते हैं। यदि आप धन की कमी होने के कारण परेशान हैं तो नीचे लिखे साधारण टोटके करें। धन संबंधी आपकी हर समस्या दूर हो जाएगी।

टोटके

- पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में शंखपुष्पी की जड़ को विधिवत लेकर आएं और उसे धूप देकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए चांदी की डिब्बी में रखें। इसे अपनी तिजोरी में रखने से आर्थिक समस्या दूर हो जाएगी।

- यदि अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बने तो मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग लगाएं और 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह प्रयोग तीन मंगलवार तक करें।

- पीपल के पत्ते पर राम लिखकर तथा कुछ मीठा रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। इससे धन लाभ होने लगेगा।

- तिजोरी में गुंजा के बीज रखने से भी धन की वृद्धि होती है।

- शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को लक्ष्मी-नारायण मंदिर में जाकर शाम के समय नौ वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को खीर के साथ मिश्री का भोजन कराएं तथा उपहार में कोई लाल वस्तु दें। यह उपाय लगातार तीन शुक्रवार करें।

- शुक्रवार के दिन से प्रतिदिन शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं।

Wednesday, September 25, 2013

सुख-समृद्धि

सुख-समृद्धि॰

यदि परिश्रम के पश्चात् भी कारोबार ठप्प हो, या धन आकर खर्च हो जाता हो तो यह टोटका काम में लें। किसी गुरू पुष्य योग और शुभ चन्द्रमा के दिन प्रात: हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे “संकटनाशन गणेश स्तोत्र´´ के 11 पाठ करें। तत्पश्चात् इस थैली में 7 मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, एक पंचमुखी रूद्राक्ष, एक चांदी का रूपया या 2 सुपारी, 2 हल्दी की गांठ रख कर दाहिने मुख के गणेश जी को शुद्ध घी के मोदक का भोग लगाएं। फिर यह थैली तिजोरी या कैश बॉक्स में रख दें। गरीबों और ब्राह्मणों को दान करते रहे। आर्थिक स्थिति में शीघ्र सुधार आएगा। 1 साल बाद नयी थैली बना कर बदलते रहें।
2॰ किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर “बटुक भैरव स्तोत्र´´ का एक पाठ कर के गौ, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा वर्ष में 4-5 बार करने से कार्य बाधाएं नष्ट हो जाएंगी।
3॰ रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें `जय गणेश काटो कलेश´।
4॰ सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की `कुशा´ की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के पश्चात् किसी शुभ कार्य में दानादि दें।
7॰ किसी शनिवार को, यदि उस दिन `सर्वार्थ सिद्धि योग’ हो तो अति उत्तम सांयकाल अपनी लम्बाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़ें। उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। तब पत्ते पर अपनी कामना रुपी नापा हुआ लाल रेशमी सूत लपेट दें और पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और कामनाओं की पूर्ति होती है।
८॰ रविवार पुष्य नक्षत्र में एक कौआ अथवा काला कुत्ता पकड़े। उसके दाएँ पैर का नाखून काटें। इस नाखून को ताबीज में भरकर, धूपदीपादि से पूजन कर धारण करें। इससे आर्थिक बाधा दूर होती है। कौए या काले कुत्ते दोनों में से किसी एक का नाखून लें। दोनों का एक साथ प्रयोग न करें।
9॰ प्रत्येक प्रकार के संकट निवारण के लिये भगवान गणेश की मूर्ति पर कम से कम 21 दिन तक थोड़ी-थोड़ी जावित्री चढ़ावे और रात को सोते समय थोड़ी जावित्री खाकर सोवे। यह प्रयोग 21, 42, 64 या 84 दिनों तक करें।
10॰ अक्सर सुनने में आता है कि घर में कमाई तो बहुत है, किन्तु पैसा नहीं टिकता, तो यह प्रयोग करें। जब आटा पिसवाने जाते हैं तो उससे पहले थोड़े से गेंहू में 11 पत्ते तुलसी तथा 2 दाने केसर के डाल कर मिला लें तथा अब इसको बाकी गेंहू में मिला कर पिसवा लें। यह क्रिया सोमवार और शनिवार को करें। फिर घर में धन की कमी नहीं रहेगी।
11॰ आटा पिसते समय उसमें 100 ग्राम काले चने भी पिसने के लियें डाल दिया करें तथा केवल शनिवार को ही आटा पिसवाने का नियम बना लें।
12॰ शनिवार को खाने में किसी भी रूप में काला चना अवश्य ले लिया करें।
13॰ अगर पर्याप्त धर्नाजन के पश्चात् भी धन संचय नहीं हो रहा हो, तो काले कुत्ते को प्रत्येक शनिवार को कड़वे तेल (सरसों के तेल) से चुपड़ी रोटी खिलाएँ।
14॰ संध्या समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है। सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए, किन्तु गीले पैर नहीं सोना चाहिए। इससे धन का क्षय होता है।
15॰ रात्रि में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है। अत: समृद्धि चाहने वालों को तथा जिन व्यक्तियों को आर्थिक कष्ट रहते हों, उन्हें इनका सेवन रात्रि भोज में नहीं करना चाहिये।
16॰ भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है। जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए।
17॰ सुबह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं। जूठे हाथों से या पैरों से कभी गौ, ब्राह्मण तथा अग्नि का स्पर्श न करें।
18॰ घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाये गये फूल या हार के सूख जाने पर भी उन्हें घर में रखना अलाभकारी होता है।
19॰ अपने घर में पवित्र नदियों का जल संग्रह कर के रखना चाहिए। इसे घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है।
20॰ रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र हो, तब गूलर के वृक्ष की जड़ प्राप्त कर के घर लाएं। इसे धूप, दीप करके धन स्थान पर रख दें। यदि इसे धारण करना चाहें तो स्वर्ण ताबीज में भर कर धारण कर लें। जब तक यह ताबीज आपके पास रहेगी, तब तक कोई कमी नहीं आयेगी। घर में संतान सुख उत्तम रहेगा। यश की प्राप्ति होती रहेगी। धन संपदा भरपूर होंगे। सुख शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होगी।
21॰ `देव सखा´ आदि 18 पुत्रवर्ग भगवती लक्ष्मी के कहे गये हैं। इनके नाम के आदि में और अन्त में `नम:´ लगाकर जप करने से अभीष्ट धन की प्राप्ति होती है। यथा - ॐ देवसखाय नम:, चिक्लीताय, आनन्दाय, कर्दमाय, श्रीप्रदाय, जातवेदाय, अनुरागाय, सम्वादाय, विजयाय, वल्लभाय, मदाय, हर्षाय, बलाय, तेजसे, दमकाय, सलिलाय, गुग्गुलाय, ॐ कुरूण्टकाय नम:।
धन लाभ के लिए :
9. शनिवार की शाम को माह (उड़द) की दाल के दाने पर थोड़ी सी दही और सिंदूर डालकर पीपल के नीचे रख आएं। वापस आते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें। यह क्रिया शनिवार को ही शुरू करें और ७ शनिवार को नियमित रूप से किया करें, धन की प्राप्ति होने लगेगी।

जानिए पूर्व जन्म में आपने कौन सा काम किया है

जानिए पूर्व जन्म में आपने कौन सा काम किया है
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कहते हैं जीवन में जो भी सुख और दुःख मिलता है उसका संबंध पूर्व जन्म के कर्मों से होता है। इसलिए जीवन में परेशानी आने पर हम सोचने लगते हैं कि आखिर पूर्व जन्म में हमने ऐसी कौन सी गलतियां की है जिसकी सजा हमे भगवान दे रहा है। अगर आपको यह जानने की चाहत है कि पूर्व जन्म में आपने कौन सी गलतियां की हैं तो इसमें लाल किताब आपकी मदद कर सकता है।

सरकारी कार्यों में बेईमानी का परिणाम
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लाल किताब में बताया गया है कि पूर्व जन्म के कर्मों को कुण्डली के आठवें घर से जाना जा सकता है। अगर आपकी कुण्डली में आठवें घर में सूर्य बैठा है और आपको जन्म स्थान से दूर संघर्ष पूर्ण जीवन बिताना पड़ रहा है।

इसका मतलब है कि पूर्व जन्म में आपने किसी बेकसूर व्यक्ति को सताया है। पूर्व जन्म में सरकारी क्षेत्र से जुड़े कार्यों में रहकर बेईमानी करने वाले को वर्तमान जीवन में सरकारी दंड एवं सरकारी क्षेत्र से जुड़े कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

बार-बार असफलता का कारण
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जिनकी कुण्डली में गुरू आठवें घर में अशुभ स्थिति में होता है उन्हें बार-बार अपने प्रयास में असफलताओं का सामना करना पड़ता है। परिश्रम करने पर भी इनके हिस्से का यश और सम्मान किसी और को मिल जाता है। संतान सुख के मामले में इन्हें कष्ट का सामना करना पड़ता है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जो लोग पूर्व जन्म में अपने माता-पिता, गुरूजन एवं आश्रितों का अनादर करते हैं। शरण में आए व्यक्ति के साथ धोखा करते हैं उनकी कुण्डली में गुरू आठवें घर में बैठकर उन्हें पूर्व जन्म में किए कर्मों की सजा देता है।

तब दूसरों के किए गलती की सजा मिलती है
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ज्योतिषशास्त्र में शनि को न्यायकर्ता कहा गया है। जिनकी कुण्डली में शनि आठवें घर में हो और दूसरों के किए गलतियों की सजा भुगतनी पड़े तो समझ लीजिए कि आपने पूर्व जन्म में किसी लाचार व्यक्ति को सताया है। जो लोग मदिरा का सेवन करते हैं और परस्त्री से संबंध के कारण अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाते हैं।

उनकी कुण्डली शनि आठवें घर में बैठकर पूर्व जन्म में किए पाप का दंड देता है। ऐसे व्यक्तियों को अधिकारियों से दंड मिलता है। बार-बार अपमानित होते हैं तथा संपत्ति विवाद में उलझते हैं। परिश्रम से प्राप्त सफलता भी अधिक समय तक कायम नहीं रह पाती है।

पूर्वजन्म में जीवनसाथी को सताने वाले
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शुक्र वैवाहिक जीवन एवं भौतिक सुख का कारण होता है। यह कुण्डली में शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति का दांपत्य जीवन सुखद होता है और धन वैभव की प्राप्ति होती है। लेकिन जो लोग पूर्व जन्म में जीवनसाथी को सताते हैं और परस्त्री अथवा पुरूष से संबंध रखते हैं उनकी कुण्डली में शुक्र अशुभ होकर आठवें घर में बैठता है। ऐसे व्यक्ति को धन की लालच के कारण समाज में अपमानित होना पड़ता है। इनका दांपत्य जीवन कष्टमय होता है। प्रेम में इन्हें असफलता मिलती है।

बांझपन दूर करने के लिए इन्हें आजमायें !

बांझपन दूर करने के लिए इन्हें आजमायें !

सुबह के समय 5 कली लहसुन की चबाकर ऊपर से दूध पीयें। यह प्रयोग पूरी सर्दी के मौसम में रोज करने से स्त्रियों का बांझपन दूर हो जाता है।

मासिक-धर्म ठीक होने पर भी यदि संतान न होती हो तो रूई के फाये में फिटकरी लपेटकर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह निकालने पर रूई में दूध की खुर्चन सी जमा होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खुर्चन आता रहे। जब खुर्चन आना बंद हो जाए तो समझना चाहिए कि बांझपन रोग समाप्त हो गया है।

यदि किसी स्त्री को मासिक-धर्म नियमित रूप से सही मात्रा में होता होता हो, परन्तु गर्भ नहीं ठहरता हो तो उन स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में तुलसी के बीज चबाने से या पानी में पीसकर लेने अथवा काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भधारण हो जाता है। यदि गर्भ स्थापित न हो तो इस प्रयोग को 1 वर्ष तक लगातार करें। इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण के योग्य बनता है।

छाया में सूखी सफेद आक की जड़ को महीन पीसकर, एक-दो ग्राम की मात्रा में 250 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ स्त्री को सेवन करायें। शीतल पदार्थो का पथ्य देवें। इससे बंद ट्यूब व नाड़ियां खुलती हैं, व मासिक-धर्म व गर्भाशय की गांठों में भी लाभ होता है।

बृहस्पति और शुक्र

बृहस्पति और शुक्र दो ग्रह हैं जो पुरूष और स्त्री का प्रतिनिधित्व करते हैं.मुख्य रूप ये दो ग्रह वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख, संयोग और वियोग का फल देते हैं.

बृहस्पति और शुक्र दोनों ही शुभ ग्रह हैं (Venus and Jupiter are benefic planets).सप्तम भाव जीवन साथी का घर होता है (7th House is of the spouse).इस घर में इन दोनों ग्रहों की स्थिति एवं प्रभाव के अनुसार विवाह एवं दाम्पत्य सुख का सुखद अथवा दुखद फल मिलता है.पुरूष की कुण्डली में शुक्र ग्रह पत्नी एवं वैवाहिक सुख का कारक होता है और स्त्री की कुण्डली में बृहस्पति.ये दोनों ग्रह स्त्री एवं पुरूष की कुण्डली में जहां स्थित होते हैं और जिन स्थानों को देखते हैं उनके अनुसार जीवनसाथी मिलता है और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है.

ज्योतिषशास्त्र का नियम है कि बृहस्पति जिस भाव में होता हैं उस भाव के फल को दूषित करता है (Jupiter has bad effect on the house it is in) और जिस भाव पर इनकी दृष्टि होती है उस भाव से सम्बन्धित शुभ फल प्रदान करते हैं.जिस स्त्री अथवा पुरूष की कुण्डली में गुरू सप्तम भाव में विराजमान होता हैं उनका विवाह या तो विलम्ब से होता है अथवा दाम्पत्य जीवन के सुख में कमी आती है.पति पत्नी में अनबन और क्लेश के कारण गृहस्थी में उथल पुथल मची रहती है.

दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने में बृहस्पति और शुक्र का सप्तम भाव और सप्तमेश से सम्बन्ध महत्वपूर्ण होता है (Jupiter & Venus relationship with seventh house).जिस पुरूष की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह शुक बृहस्पति से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर गुणों वाली अच्छी जीवनसंगिनी मिलती है.इसी प्रकार जिस स्त्री की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह बृहस्पति शुक्र से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर और अच्छे संस्कारों वाला पति मिलता है.

शुक्र भी बृहस्पति के समान सप्तम भाव में सफल वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है.सप्तम भाव का शुक्र व्यक्ति को अधिक कामुक बनाता है जिससे विवाहेत्तर सम्बन्ध की संभावना प्रबल रहती है.विवाहेत्तर सम्बन्ध के कारण वैवाहिक जीवन में क्लेश के कारण गृहस्थ जीवन का सुख नष्ट होता है.बृहस्पति और शुक्र जब सप्तम भाव को देखते हैं अथवा सप्तमेश पर दृष्टि डालते हैं (Jupiter & Venus aspect the seventh lord) तो इस स्थिति में वैवाहिक जीवन सफल और सुखद होता है.लग्न में बृहस्पति अगर पापकर्तरी योग (Papkartari Yoga) से पीड़ित होता है तो सप्तम भाव पर इसकी दृष्टि का शुभ प्रभाव नहीं होता है ऐसे में सप्तमेश कमज़ोर हो या शुक्र के साथ हो तो दाम्पत्य जीवन सुखद और सफल रहने की संभावना कम रहती है.

Sunday, August 25, 2013

प्रेम विवाह

प्रेम विवाह करने वाले लडके व लडकियों को एक-दुसरे को समझने
के अधिक अवसर प्राप्त होते है. इसके फलस्वरुप दोनों एक-दूसरे
की रुचि, स्वभाव व पसन्द-नापसन्द को अधिक कुशलता से समझ
पाते है. प्रेम विवाह करने वाले वर-वधू भावनाओ व स्नेह की प्रगाढ
डोर से बंधे होते है. ऎसे में जीवन की कठिन परिस्थितियों में
भी दोनों का साथ बना रहता है.
पर कभी-कभी प्रेम विवाह करने वाले वर-वधू के विवाह के बाद
की स्थिति इसके विपरीत होती है. इस स्थिति में दोनों का प्रेम
विवाह करने का निर्णय शीघ्रता व बिना सोचे समझे हुए प्रतीत
होता है. आईये देखे कि कुण्डली के कौन से योग प्रेम विवाह
की संभावनाएं बनाते है.
1. राहु के योग से प्रेम विवाह की संभावनाएं (Yogas of Rahu
increase the chances of a love marriage)
1) जब राहु लग्न में हों परन्तु सप्तम भाव पर गुरु
की दृ्ष्टि हों तो व्यक्ति का प्रेम विवाह होने की संभावनाए
बनती है. राहु का संबन्ध विवाह भाव से होने पर
व्यक्ति पारिवारिक परम्परा से हटकर विवाह करने
का सोचता है. राहु को स्वभाव से संस्कृ्ति व लीक से हटकर कार्य
करने की प्रवृ्ति का माना जाता है.
2.) जब जन्म कुण्डली में मंगल का शनि अथवा राहु से संबन्ध
या युति हो रही हों तब भी प्रेम विवाह कि संभावनाएं बनती है.
कुण्डली के सभी ग्रहों में इन तीन ग्रहों को सबसे अधिक अशुभ व
पापी ग्रह माना गया है. इन तीनों ग्रहों में से कोई भी ग्रह जब
विवाह भाव, भावेश से संबन्ध बनाता है तो व्यक्ति के अपने
परिवार की सहमति के विरुद्ध जाकर विवाह करने की संभावनाएं
बनती है.
3.) जिस व्यक्ति की कुण्डली में सप्तमेश व शुक्र पर शनि या राहु
की दृ्ष्टि हो, उसके प्रेम विवाह करने की सम्भावनाएं बनती है.
(Aspect of Rahu on the seventh lord, saturn or venus increases
chances of love marriage)
4) जब पंचम भाव के स्वामी की उच्च राशि में राहु या केतु स्थित
हों तब भी व्यक्ति के प्रेम विवाह के योग बनते है.
2. प्रेम विवाह के अन्य योग (Other astrological yogas for love
marriage)
1) जब किसी व्यक्ति कि कुण्ड्ली में मंगल अथवा चन्द्र पंचम भाव
के स्वामी के साथ, पंचम भाव में ही स्थित हों तब अथवा सप्तम
भाव के स्वामी के साथ सप्तम भाव में ही हों तब भी प्रेम विवाह
के योग बनते है.
2) इसके अलावा जब शुक्र लग्न से पंचम अथवा नवम अथवा चन्द लग्न
से पंचम भाव में स्थित होंने पर प्रेम विवाह की संभावनाएं बनती है.
(Venus in fifth or ninth house from ascendant or fifth house
from Moon increases love marriage chances)
3) प्रेम विवाह के योगों में जब पंचम भाव में मंगल हों तथा पंचमेश व
एकादशेश का राशि परिवतन अथवा दोनों कुण्डली के
किसी भी एक भाव में एक साथ स्थित हों उस स्थिति में प्रेम
विवाह होने के योग बनते है.
4) अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में पंचम व सप्तम भाव के
स्वामी अथवा सप्तम व नवम भाव के स्वामी एक-दूसरे के साथ
स्थित हों उस स्थिति में प्रेम विवाह कि संभावनाएं बनती है.
5) जब सप्तम भाव में शनि व केतु
की स्थिति हों तो व्यक्ति का प्रेम विवाह हो सकता है. (When
Saturn or ketu are in the seventh house the chances for love
marriage increase)
6) कुण्डली में लग्न व पंचम भाव के स्वामी एक साथ स्थित
हों या फिर लग्न व नवम भाव के स्वामी एक साथ बैठे हों,
अथवा एक-दूसरे को देख रहे हों इस स्थिति में व्यक्ति के प्रेम
विवाह की संभावनाएं बनती है.
7) जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्र व सप्तम भाव के
स्वामी एक -दूसरे से दृ्ष्टि संबन्ध बना रहे हों तब भी प्रेम विवाह
की संभावनाएं बनती है.
जब सप्तम भाव का स्वामी सप्तम भाव में ही स्थित हों तब
विवाह का भाव बली होता है. तथा व्यक्ति प्रेम विवाह कर
सकता है.
9) पंचम व सप्तम भाव के स्वामियों का आपस में युति,
स्थिति अथवा दृ्ष्टि संबन्ध हो या दोनों में राशि परिवर्तन
हो रहा हों तब भी प्रेम विवाह के योग बनते है. (Combinatin of
fifth and the seventh house and mutual aspect or sign
exchange causes love marriage)
10) जब सप्तमेश की दृ्ष्टि, युति, स्थिति शुक्र के साथ द्वादश
भाव में हों तो, प्रेम विवाह होता है.
11) द्वादश भाव में लग्नेश, सप्तमेश कि युति हों व भाग्येश इन से
दृ्ष्टि संबन्ध बना रहा हो, तो प्रेम विवाह की संभावनाएं
बनती है. (Conjunction of lagna lord seventh house or aspect
increases chances of love marriage)
12) जब जन्म कुण्डली में शनि किसी अशुभ भाव
का स्वामी होकर वह मंगल, सप्तम भाव व सप्तमेश से संबन्ध बनाते
है. तो प्रेम विवाह हो सकता है.

वास्तु व जीवन में महत्वपूर्ण, बाँसुरी

वास्तु व जीवन में महत्वपूर्ण, बाँसुरी


बाँसुरी को शान्ति, शुभता एवं स्थिरता का प्रतीक
माना जाता है. यह उन्नति, प्रगति एवं सकारात्मक
गुणों की वृद्धि की सूचक भी होती है. फेगशुई और हमारे
शास्त्रों में शुभ वस्तुओं में बाँसुरी का अत्यधिक महत्व है.
फेंगशुई
बाँसुरी के उपायों का महत्व इसलिए भी अधिक है,
क्योंकि वास्तु शास्त्र में जहां कहीं किसी दोष से
पूर्णतः मुक्ति के लिए अशुभ निर्माण कार्य
को तोड़ना आवश्यक होता है, वहीं फेंगशुई में अशुभ निर्माण
को तोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं होती है. अपितु पैगोडा,
बाँसुरी आदि सकरात्मक वस्तुओं का प्रयोग कर के उस दोष से
मुक्ति पा लेते है.
बाँसुरी का निर्माण बाँस के ताने से होता है.
सभी वनस्पतियों में बाँस सबसे तेज गति से बढ़ने
वाला पौधा होता है.इसी कारण से यह विकास का प्रतीक
है.और किसी भी वातावरण में यह अपना अस्तित्व बनाए
रखने की क्षमता इसमें होती है. यदि किसी भी दूकान
या व्यवसाय स्थल पर इसके पौधे को लगाया जाए तो जैसे
बाँस के पौधे की वृद्धि तेज गति से होगी, वैसे ही उस दूकान
या व्यवसाय स्थल के मालिक की भी प्रगति होगी. बाँस के
पौधे के ये सभी गुण बाँसुरी में भी विद्यमान होते है.
बाँसुरी का उपयोग न केवल फेंगशुई में, वरन वास्तु शास्त्र
एवं ग्रह दोष निवारण में बहुत ही उपयोगी है. वास्तु में बीम
संबंधी दोष, द्वार वेध, वृक्ष वेध, वीथी वेध
आदि सभी वेधो के निराकरण में और अशुभ निर्माण
संबंधी वास्तु दोषों में बाँसुरी का प्रयोग होता है. ग्रह
दोषों के अंतर्गत शनि, राहू आदि पाप ग्रहों से सम्बन्धित
दोषों के निवारण में बाँसुरी का कोई विपरीत प्रभाव
नहीं होता है.
लेकिन बाँसुरी के प्रयोग में एक सावधानी अवश्य
रखनी चाहिए वह यह है कि, जहां कहीं भी इसे लगाया जाए,
वहां इसे बिलकुल सीधा नहीं लगा कर
थोड़ा तिरछा लगाना चाहिए तथा इसका मुंह नीचे की तरफ
होना चाहिए.
जापान, चीन, हांगकांग, मलेशिया और मध्य एशिया में
इसका प्रयोग बहुतायत में किया जाता है. यदि किसी के
विकास में अनेक प्रयास करने के बाद भी बाधाए उत्पन्न
हो रही हो तो इस बाँसुरी का प्रयोग अवश्य
ही करना चाहिए.वैसे तो ”बाँसुरी एक फायदे अनेक है”. लेकिन
यहां मै इस लेख मेंबाँसुरी के आसान और अचूक रामबाण उपाय
दे रहा हूं जो कि पग पग पर हमारे लिए सहायक बनते है, और
हमारी समस्याओं का पूर्ण रूप से समाधान करते है.
१:- बाँसुरी बाँस के पौधे से निर्मित होने के कारण शीघ्र
उन्नतिदायक प्रभाव रखती है अतः जिन व्यक्तियों को जीवन
में पर्याप्त सफलता प्राप्त नहीं हो पा रही हो,
अथवा शिक्षा, व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो,
तो उसे अपने बैडरूम के दरवाजे पर
दो बाँसुरियों को लगाना चाहिए.
२:- यदि घर में बहुत ही अधिक वास्तु दोष है, या दो या तीन
दरवाजे एक सीध में है, तो घर के मुख्यद्वार के ऊपर
दो बाँसुरी लगाने से लाभ मिलता है तथा वास्तु दोष धीरे धीरे
समाप्त होने लगता है.
३:- यदि आप आध्यात्मिक रूप से उन्नति चाहते है, या फिर
किसी प्रकार की साधना में सफलता चाहते है तो, अपने
पूजा घर के दरवाजे पर भी बाँसुरिया लगाए. शीघ्र
ही सफलता प्राप्त होगी.
४:- बैडरूम में पलंग के ऊपर अथवा डाइनिंग टेबल के ऊपर
बीम हो तो, इसका अत्यंत खराब प्रभाव पड़ता है. इस दोष
को दूर करने के लिए बीम के दोनों ओर एक एक बाँसुरी लाल
फीते में बाँध कर लगानी चाहिए. साथ ही यह भी ध्यान रखे
कि बाँसुरी को लगाते समय बाँसुरी का मुंह नीचे की ओर
होना चाहिए.
५:- यदि बाँसुरी को घर के मुख हाल में या प्रवेश द्वार पर
तलवार की तरह “क्रास” के रूप में लगाया जाए,
तो आकस्मिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
६:- घर के सदस्य यदि बीमार अधिक हों अथवा अकाल मृत्यु
का भय या अन्य कोई स्वास्थ्य से सम्बन्धित समस्या हो,
तो प्रत्येक कमरें के बाहर और बीमार व्यक्ति के सिरहाने
बाँसुरी का प्रयोग करना चाहिए इससे अति शीघ्र लाभ
प्राप्त होने लगेगा.
७:- यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में शनि सातवें भाव
में अशुभ स्थिति में होकर विवाह में देर करवा रहे हो,
अथवा शनि की साढ़ेसती या ढैया चल रही हो, तो एक
बाँसुरी में चीनी या बूरा भरकर किसी निर्जन स्थान में
दबा देना लाभदायक होता है इससे इस दोष से
मुक्ति मिलती है.
८:- यदि मानसिक चिंता अधिक तेहती हो अथवा पति-
पत्नी दोनों के बीच झगड़ा रहता हो, तो सोते समय सिरहाने
के नीचे बाँसुरी रखनी चाहिए.
९:- यदि आप एक बाँसुरी को गुरु-पुष्य योग में शुभ मुहूर्त में
पूजन कर के अपने गल्ले में स्थापित करते है तो इसके कारण
आपके कार्य-व्यवसाय में बढोत्तरी होगी, और धन आगमन
के अवसर प्राप्त होंगे.
१०:- पाश्चात्य देशो में इसे घरों में तलवार की तरह से
भी लटकाया जाता है.इसके प्रभाव स्वरुप अनिष्ट एवं अशुभ
आत्माओं एवं बुरे व्यक्तियों से घर की रक्षा होती है.
११:- घर और अपने परिवार की सुख समृधि और सुरक्षा के
लिए एक बाँसुरी लेकर श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात
बारह बजे के बाद भगवान श्री कृष्ण के हाथों में सुसज्जित
कर दे तो इसके प्रभाव से पूरे वर्ष आपकी और आपके परिवार
की रक्षा तो होगी ही तथा सभी कष्ट व बाधाए भी दूर
होती जायेगी.
बाँसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब
बाँसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है, तो बुरी आत्माएं
दूर हो जाति है. और जब इसे बजाया जाता है,
तो ऐसी मान्यता है कि घरों में शुभ चुम्बकीय प्रवाह
का प्रवेश होता है.
इस प्रकार बाँसुरी प्रकृति का एक अनुपम वरदान है.
यदि सोच समझ कर इसका उपयोग किया जाए तो वास्तु
दोषों का बिना किसी तोड़ फोड के निवारण कर अशुभ फलो से
बचा जा सकता है. जहां रत्न धारण, रुद्राक्ष, यंत्र, हवन,
आदि श्रमसाध्य और खर्चीले उपाय है,
वहीं बाँसुरी का प्रयोग सस्ता, सुगम और प्रभावी होता है.
अपनी आवश्यकता के अनुसार इसका प्रयोग करके लाभ
उठाया जा सकता है

सन्तान प्राप्ति हेतु जानिए कुछ रहस्यमयी बातें एवम सरल उपाय !!!


सन्तान प्राप्ति हेतु जानिए कुछ रहस्यमयी बातें एवम सरल उपाय !!!


प्रायः देखने में आया है की किसी को संतान तो पैदा हुए लेकिन वो कुछ दीन बाद ही परलोक सुधर गया या अकाल मृत्यु को प्राप्त हो गया है… किसी को संतान होती ही नहीं है , कोए पुत्र चाहता है तो कोए कन्या … हमारे ऋषि महर्षियों ने हजारो साल पहले ही संतान प्राप्ति के कुछ नियम और सयम बताये है ,संसार की उत्पत्ति पालन और विनाश का क्रम पृथ्वी पर हमेशा से चलता रहा है,और आगे चलता रहेगा। इस क्रम के अन्दर पहले जड चेतन का जन्म होता है,फ़िर उसका पालन होता है और समयानुसार उसका विनास होता है। मनुष्य जन्म के बाद उसके लिये चार पुरुषार्थ सामने आते है,पहले धर्म उसके बाद अर्थ फ़िर काम और अन्त में मोक्ष, धर्म का मतलब पूजा पाठ और अन्य धार्मिक क्रियाओं से पूरी तरह से नही पोतना चाहिये,धर्म का मतलब मर्यादा में चलने से होता है,माता को माता समझना पिता को पिता का आदर देना अन्य परिवार और समाज को यथा स्थिति आदर सत्कार और सबके प्रति आस्था रखना ही धर्म कहा गया है,अर्थ से अपने और परिवार के जीवन यापन और समाज में अपनी प्रतिष्ठा को कायम रखने का कारण माना जाता है,काम का मतलब अपने द्वारा आगे की संतति को पैदा करने के लिये स्त्री को पति और पुरुष को पत्नी की कामना करनी पडती है,पत्नी का कार्य धरती की तरह से है और पुरुष का कार्य हवा की तरह या आसमान की तरह से है,गर्भाधान भी स्त्री को ही करना पडता है,वह बात अलग है कि पादपों में अमर बेल या दूसरे हवा में पलने वाले पादपों की तरह से कोई पुरुष भी गर्भाधान करले। धरती पर समय पर बीज का रोपड किया जाता है,तो बीज की उत्पत्ति और उगने वाले पेड का विकास सुचारु रूप से होता रहता है,और समय आने पर उच्चतम फ़लों की प्राप्ति होती है,अगर वर्षा ऋतु वाले बीज को ग्रीष्म ऋतु में रोपड कर दिया जावे तो वह अपनी प्रकृति के अनुसार उसी प्रकार के मौसम और रख रखाव की आवश्यकता को चाहेगा,और नही मिल पाया तो वह सूख कर खत्म हो जायेगा,इसी प्रकार से प्रकृति के अनुसार पुरुष और स्त्री को गर्भाधान का कारण समझ लेना चाहिये। जिनका पालन करने से आप तो संतानवान होंगे ही आप की संतान भी आगे कभी दुखों का सामना नहीं करेगा…
कुछ राते ये भी है जिसमे हमें सम्भोग करने से बचना चाहिए .. जैसे अष्टमी, एकादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा और अमवाश्या .चन्द्रावती ऋषि का कथन है कि लड़का-लड़की का जन्म गर्भाधान के समय स्त्री-पुरुष के दायां-बायां श्वास क्रिया, पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूर्यस्वर तथा चन्द्रस्वर की स्थिति पर निर्भर करता है।गर्भाधान के समय स्त्री का दाहिना श्वास चले तो पुत्री तथा बायां श्वास चले तो पुत्र होगा।
यदि आप पुत्र प्राप्त करना चाहते हैं और वह भी गुणवान, तो हम आपकी सुविधा के लिए हम यहाँ माहवारी के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
मासिक स्राव के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है।
१- चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
२- पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
३- छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
४- सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
५- आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
६- नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
७- दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
८- ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
९- बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
१०- तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
११- चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
१२- पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।
१३- सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।
सहवास से निवृत्त होते ही पत्नी को दाहिनी करवट से 10-15 मिनट लेटे रहना चाहिए, एमदम से नहीं उठना चाहिए।

बच्चों के कक्ष की आंतरिक सुसज्जा

बच्चों के कक्ष की आंतरिक सुसज्जा


बच्चों का कक्ष हमेशा पश्चिम, उत्तर अथवा पूर्व दिशा में होना चाहिए। बच्चों के कक्ष की आंतरिक सुसज्जा बालक घर की मात्र रौनक ही नहीं, अपितु पुरे घर की शक्ति और उमंग का स्रोत है। बच्चों के बिना घर आत्माविहीन हो जाता है। बच्चे घर को उल्लासमय जीवन से सींचते हैं। अत: उनके पालन के लिए एक संतुलित वास्तुसम्मत वातावरण का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। 

यह संतुलन उनके लिए सही स्थान की व्यवस्था प्रदान करने से लेकर प्रेम और उल्लास के वातावरण का निर्माण करने तक मददगार सिद्ध हो सकता है। :------बच्चों के कमरे का प्रवेश द्वार उत्तर अथवा पूर्व दिशा में होना चाहिए। खिड़की अथवा रोशनदान पूर्व में रखना उत्तम है। पढ़ने की टेबल का मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पुस्तकें ईशान कोण में रखी जा सकती हैं।बच्चों का मुख पढ़ते समय उत्तर अथवा पूर्व दिशा में होना चाहिए।एक छोटा-सा पूजास्थल अथवा मंदिर बच्चों के कमरे की ईशान दिशा में बनाना उत्तम है। इस स्थान में विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की मूर्ति अथवा तस्वीर लगाना शुभ है।

कमरे का ईशान कोण का क्षेत्र सदैव स्वच्छ रहना चाहिए और वहां पर किसी भी प्रकार का व्यर्थ का सामान, कूड़ा, कबाड़ा नहीं होना चाहिए।

अलमारी, कपबोर्ड़, पढ़ने का डेस्क और बुक शेल्फ व्यवस्थित ढंग से रखा जाना चाहिए। सोने का बिस्तर नैऋत्य कोण में होना चाहिए। सोते समय सिरदक्षिण दिशा में हो तो उत्तम है, परंतु बालक अपना सिर पूर्व दिशा में भी रख कर सो सकते हैं।
कमरे के मध्य में भारी सामान न रखें।
कमरे में हरे रंग के हलके शेड्स करवाना उत्तम है, इससे बच्चों में बुद्धिमता की वृद्धि होती है।
कमरे के मध्य का स्थान बच्चों के खेलने के लिए खाली रखें।

बच्चों के कमरे का द्वार कदापि भी सीढ़ियों के अथवा शौचालय के सम्मुख न हो, अन्यथा ऐसे परिवार के 

बच्चे मां-बाप के नियमानुसार अनुसरण नहीं करेंगे।
बच्चों के कक्ष के ईशान कोण और ब्रह्म स्थान की ओर भी विशेष ध्यान दें कि वहां पर बेवजह का सामरन एकत्रित न हो।
यह क्षेत्र सदैव स्वच्छ और बेकार के सामान से मुक्त होना चाहिए।

वास्तु दोष को दूर करने के लिए विशेष उपाय


वास्तु दोष को दूर करने के लिए किसी विशेष उपाय की आवश्यकता नहीं है ...
यदि हम अगर अपनी दैनिक दिनचर्या में इन उपायों को शामिल कर लें, तो बहुत सी समस्यायों को
इन छोटी-छोटी मगर अत्यधिक प्रभावशाली उपायों से दूर कर सकतें हैं ......

1- सूर्यास्त व सूर्योदय होने से पहले मुख्य प्रवेश द्वार की साफ-सफाई हो जानी चाहिए।
2- सायंकाल होते ही यहां पर उचित रोशनी का प्रबंध होना भी जरूरी हैं।

3- दरवाजा खोलते व बंद करते समय किसी प्रकार की आवाज नहीं आना चाहिए,
4- बरामदे और बालकनी के ठीक सामने भी प्रवेश द्वार का होना अशुभ होता हैं.

5- प्रवेश द्वार पर गणेश व गज लक्ष्मी के चित्र लगाने से सौभाग्य व सुख में निरंतर वृद्धि होती है,

6- पूरब व उत्तर दिशा में अधिक स्थान छोड़ना चाहिए

7- मांगलिक कार्यो व शुभ अवसरों पर प्रवेश द्वार को आम के पत्ते व हल्दी तथा चंदन जैसे शुभ व
कल्याणकारी वनस्पतियों से सजाना शुभ होता है.

8- प्रवेश द्वार को सदैव स्वच्छ रखना चाहिए,
9- किसी प्रकार का कूड़ा या बेकार सामान प्रवेश द्वार के सामने कभी न रखे,
10- प्रातः व सायंकाल कुछ समय के लिए दरवाजा खुला रखना चाहिए.
11- सांय काल घर की दहलीज़ पर दीपक अवश्य जलाएं इससे घर का पित्र दोष भी समाप्त होता है
एवं नकारात्मक शक्तियों का घर में प्रवेश नहीं हो पाता .
12- बैठक के कमरे में द्वार के सामने की दीवार पर दो सूरजमुखी के या ट्यूलिप के फूलों का चित्र
लगाएं.

13- घर के बाहर के बगीचे में दक्षिण-पश्चिम के कोने को सदैव रोशन रखें.

14- घर के अंदर दरवाजे के सामने कचरे का ‍डिब्बा न रखें.

15- घर के किसी भी कोने में अथवा मध्य में जूते-चप्पल (मृत चर्म) न रखेंजूतों के रखने का स्थान
घर के प्रमुख व्यक्ति के कद का एक चौथाई हो, उदाहरण के तौर पर 6 फुट के व्यक्ति (घर का प्रमुख) के
घर में जूते-चप्पल रखने का स्थल डेढ़ फुट से ऊंचा न हो....

Saturday, June 8, 2013

ऐसे स्थान जहां मकान बनाने से होता है नुकसान


हर व्यक्ति का सपना होता है अपना घर। महंगाई के इस जमाने में एक आम आदमी को अपना घर बसाने के लिए जीवन भर की जमा पूंजी लगानी पड़ती है। इसलिए जरूरी है कि घर ऐसे स्थान पर हो जहां आप अपने परिवार के साथ सुकून के पल बिताएं।

वास्तुविज्ञान में कहा गया है कि जहां दक्षिण दिशा ढाल वाली हो उस स्थान पर घर बनाने से स्त्रियों को कष्ट होता है। इसी तरह वास्तु में कई अन्य स्थानों का भी उल्लेख किया गया है जिसका वर्णन भविष्य पुराण में भी मिलता है।

भविष्य पुराण के अनुसार घर ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां की भूमि की ढाल पूर्व या उत्तर की ओर हो। मंदिर पूजनीय और पवित्र स्थान होता है लेकिन इसके आस-पास का स्थान गृहस्थों के निवास के लिए नहीं होता है।

इसका कारण संभवतः यह हो सकता है कि मंदिर की घंटी, मंत्र और शंख की ध्वनि भक्ति की भावना को अधिक उभारता है जिससे गृहस्थी से मन उचाट हो सकता है। घर पर मंदिर की छाया का पड़ना उन्नति में बाधक होता है।

जिस स्थान पर मांस-मदिरा बेचा जाता हो, जुआ खेलने वाले लोग आते हों ऐसे स्थान पर भी घर नहीं बसाना चाहिए। इससे घर में रहने वालों को मान-सम्मान का खतरा रहता है।

घर में रहने वालों पर नकारात्मक सोच हावी रहता है जिससे व्यक्तित्व के विकास में बाधा आती है। नगर का द्वार, चौक-चौराहे, राजकर्मचारी के निवास स्थान एवं राजमार्ग के आस-पास भी घर नहीं बसाना चाहिए।

घर बसाने के लिए उचित स्थान
  • भविष्य पुराण कहता है कि गृहस्थों को ऐसे स्थान पर घर बसाना चाहिए जहां बुद्घिजीवी और विद्वान लोग रहते हों।
  • जहां आवागमन के लिए साफ और सुव्यवस्थित रास्ते बनें हों।
  • जहां घर बसाने जा रहे हों वहां के लोगों के व्यवहार के विषय में पहले जान लें। जहां के लोग व्यवहारिक हों, समय-समय पर एक दूसरे का साथ दें, वहां पर घर बसाएं।
  • दुष्ट विचार रखने वालों के आस-पास घर नहीं बसाना चाहिए। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अधिक धनवान एवं अपने से कम आय वालों के बीच बसना भी उचित नहीं होता है।
  • भविष्य पुराण कहता है कि पड़ोसियों के बारे में जानने के बाद ज़मीन की पूरी जानकारी कर लें कि, इस पर कोई विवाद तो नहीं है।
  • पड़ोसियों को हमेशा मित्र बनाए रखने की कोशिश करें।

इन वास्तुदोष के कारण घरों में होती है चोरियां

किसी घर में चोरी क्यों होती है? सुरक्षा की कमी और मालिक की लापरवाही। लेकिन आप यकीन नहीं करेंगे कि वास्तुदोष भी किसी घर में चोरी कराने में अहम भूमिका निभाता है। घर में उत्पन्न वास्तुदोष चोरी के लिए जिम्मेदार होता है।

चोरी और डकैती की घटना को वास्तु काफी हद तक प्रभावित करते हैं। जिन घरों में वास्तु संबंधी दोष होता है आमतौर पर उन घरों में इस तरह की घटनाएं घटित होती हैं।

वास्तुशास्त्र के नियमानुसार जिनके घर का मुख्य दरवाजा पूर्व आग्नेय यानी पूर्व दिशा के अंतिम भाग में दक्षिण की ओर होता है उस घर में चोरी की आशंका प्रबल रहती है। ऐसे घर में कलह एवं अग्नि संबंधी दुर्घटनाएं भी होती हैं।

अगर घर का मुख्य दरवाजा बाहर की ओर झुका है तो उसे जल्दी ठीक करवा लेना चाहिए। इससे घर का मालिक अक्सर घर से बाहर रहता है और घर में चोरी की आशंका रहती है। पूर्व और दक्षिण भाग घर एवं आंगन से नीचा है तो उसे ऊंचा करने की व्यवस्था कर लें क्योंकि घर का यह वास्तुदोष आपकी जमा पूंजी चोरी करवा सकता है। इस वास्तुदोष से शत्रुओं के कारण भी नुकसान होता है।

उत्तर की अपेक्षा पश्चिम भाग अधिक बढ़ा हुआ होना दोषपूर्ण माना जाता है। इस स्थिति में विरोधियों की संख्या बढ़ती और घर में चोरी की घटनाएं होती हैं। पूर्व एवं उत्तर दिशा में मुख्य द्वार तिरछा नहीं होना चाहिए। इससे भी चोरी की आशंका बढ़ जाती है।

चोरी एवं दुर्घटना में कमी लाने के लिए हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि आग्नेय दिशा में ढलान नहीं हो। इस दिशा में गड्डे एवं बोरबेल, कुआं एवं पानी की टंकी नहीं हो। दक्षिण दिशा में उत्तर दिशा से अधिक सामान रखें, पश्चिम दिशा में पूर्व दिशा से कम खाली स्थान हो। चारदीवारी की दक्षिण नैऋत्य और पूर्व आग्नेय में मुख्य द्वार नहीं हो।

घर में ही कहीं मौजूद है आत्महत्या का कारण

जब कोई आत्महत्या करता है तो उसके भाग्य के साथ-साथ उसके घर के वास्तुदोष भी अहम भूमिका निभाते हैं।

जिस घर में आत्महत्या होती है उस घर में दो या दो से अधिक वास्तुदोष अवश्य होते हैं। जिनमें से एक घर के ईशान कोण (उत्तर पूर्व) में होता है और दूसरा दोष नैऋत्य कोण (दक्षिण पश्चिम) में होता है। इन दिशाओं में भूमिगत पानी की टंकी, कुआं, बोरवेल, बेसमेंट या किसी भी प्रकार से इस कोने का फर्श नीचा हो या घर के दक्षिण दिशा का दक्षिणी कोना या दक्षिण पश्चिम का दक्षिणी भाग का बढ़ा हुआ हो तो वास्तु बुरी तरह प्रभावित होता है।

इस दोष के साथ यदि घर के पश्चिम नैऋत्य कोण में मुख्य द्वार हो तो घर के पुरूष सदस्य द्वारा और यदि मुख्य द्वार दक्षिण नैऋत्य कोण में हो तो उस घर की स्त्री द्वारा आत्महत्या करने की संभावना रहती है।

दूसरा वास्तुदोष घर के ईशान कोण में होता है। घर का यह कोना अंदर दब जाए, कट जाए, गोल हो जाए या किसी कारण दक्षिण पूर्व की दीवार पूर्व की ओर आगे बढ़ जाए तो घर के पुरूष सदस्य द्वारा और यदि उत्तर पश्चिमी दीवार का का उत्तरी भाग आगे बढ़ा हुआ हो तो स्त्री सदस्य आत्महत्या कर सकती है।

घर के दक्षिण नैऋत्य में मार्ग प्रहार हो यानी इस दिशा में कोई रास्ता आकर मिल रहा हो तब स्त्रियां और पश्चिम नैऋत्य में कोई मार्ग आकर घर के द्वार के पास मिल रहा हो तब पुरूष इस प्रकार का कदम उठाते हैं।

जमीन के पूर्व आग्नेय कोण को किसी भी चीज से ढकना नहीं चाहिए अन्यथा पुरूषों में निराशा और आत्महत्या की भावना बलवती होती है जबकि वायव्य ढका हुआ हो तब स्त्रियां निराश होकर इस तरह के कदम उठाती हैं।

वास्तु के अनुसार इस तरह की घटना से बचने के लिए जरूरी है कि घर बनवाते समय वास्तु के इन दोषों को ध्यान में रखते हुए घर बनवाएं। अगर किराये पर घर ले रहे हैं तो ध्यान रखें कि घर में ऐसे वास्तुदोष न हो।

Friday, June 7, 2013

2014 तक जन्म लेने वाले बच्चे होंगे भाग्यशाली, लेकिन?

saturn sas yoga effect in birth chart इन दिनों शनि अपनी उच्च राशि तुला में वक्री होकर चल रहे हैं। इस राशि में शनि 2 नवंबर 2014 तक रहेगें। जिन बच्चों का जन्म इस अवधि में होगा उनकी कुण्डली में शश नामक शुभ योग होगा। इस योग को ज्योतिषशास्त्र में राजयोग की श्रेणी में रखा गया है।

माना जाता है कि जिनकी कुण्डली में यह योग होता है वह उच्च पद प्राप्त करते हैं। सम्मान और धन दोनों इनके पास होता है। ज्योतिषशास्त्री के अनुसार जिनका जन्म मेष, कर्क, तुला अथवा मकर लग्न में होता है उनकी कुण्डली में यह उच्च कोटि का राजयोग बनता है।

लेकिन वैवाहिक जीवन की दृष्टि से कर्क लग्न वालों की कुण्डली में शश योग प्रतिकूल फल देता है। भगवान राम की जन्मकुण्डली इस लिहाज से उल्लेखनीय है। चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दोपहर में भगवान राम का जन्म कर्क लग्न में हुआ।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार राम के जन्म के समय सूर्य, मंगल, शनि, गुरु और शुक्र ग्रह अपनी-अपनी उच्च राशि में थे। चंद्रमा अपनी ही राशि कर्क में था जिसके साथ बृहस्पति भी मौजूद थे। कर्क राशि में बृहस्पति सबसे अधिक मजबूत स्थिति में होते हैं। बुध अपने मित्र शुक्र की वृष राशि में था।

बृहस्पति के उच्च राशि में होने कारण इनकी कुण्डली में हंस योग, शनि के तुला राशि में होने से शश योग, मंगल उच्च राशि में होने से रूचक योग बन रहा था। लेकिन शनि का शुभ योग इनके वैवाहिक जीवन के लिए अशुभ योग बन गया।

पहले रावण द्वारा द्वारा सीता का हरण कर लिये जाने के कारण राम को सीता का वियोग सहना पड़ा। बाद में सीता की पवित्रता पर उंगली उठाये जाने के कारण राम ने सीता को वन भेज दिया और विरह की आग में जलन पड़ा। इसलिए जिनकी जन्म कर्क लग्न में होगा उन्हें वैवाहिक जीवन से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Monday, May 20, 2013

'गुरू' का आशीर्वाद पाने के लिए आजमाएं ये उपाय

jupiter transit in gemini remedy नवग्रहों में धर्म, धन, मांगलिक कार्य का कारक ग्रह गुरू इस महीने के अंत में वृष राशि से निकलकर बुध की राशि मिथुन में पहुंचेगा। गुरू इस राशि में 19 जून 2014 तक रहेगा। इसलिए इसका असर भी लंबे समय तक रहेगा।

गुरू का यह गोचर वृषसिंह, तुलाधनु एवं कुंभ राशि वालों के लिए शुभ है जबकि मेषमिथुनकर्ककन्यावृश्चिक,मकर एवं मीन राशि वालों के लिए अनुकूल नहीं है। 

जिनकी कुण्डली में गुरू शुभ स्थिति में नहीं है उनके लिए गुरू का शुभ गोचर भी पूर्ण शुभ फल नहीं देता है इसलिए गुरू के शुभ फलों में वृद्धि तथा अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए लाल किताब के कुछ आसान उपाय आजमा सकते हैं। 

  • भोजन में केसर का प्रयोग करें। दूध में केसर मिलाकर पीने से भी लाभ मिलेगा। इससे सौन्दर्य भी निखरता है। स्नान के बाद नाभि एवं माथे पर केसर का तिलक लगाएं। अगर केसर उपलब्ध नहीं हो तो हल्दी का तिलक कर सकते हैं।
  • गुरूवार के दिन स्नान करने के जल में नागर मोथा नामक वनस्पति डालकर स्नान करें। नागर मोथा नहीं होने पर केसर डालकर भी स्नान किया जा सकता है।
  • गुरूवार के दिन केले के पौधे घर में अथवा भगवान विष्णु के मंदिर में लगाएं। इसदिन केले के पौधे की पूजा भी करें। केला नहीं खाएं।
  • जिस पलंग पर आप सोते हैं उसके चारों कोनों में सोने की कील अथवा सोने का तार लगवाएं।
  • गुरूवार के दिन पीपल की जड़ को जल सींचे एवं चना दाल, गुड़ एवं बूंदी का लड्डू चढ़ाएं। साधु एवं ब्राह्मण का आदर करें। इन्हें चना दान, पीला कपड़ा, हल्दी, केसर अथवा धार्मिक पुस्तक दान दें।
  • मंत्र जप से भी गुरू को शुभ फलदायी बनाया जा सकता है। प्रतिदिन ओम बृं बृहस्पतये नम: मंत्र का अथवा ओम, ग्रां ग्रीं, ग्रौं स: गुरवे नम: मंत्र का 108 बार जप करें। गुरू के गोचर की अवधि में विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी लाभप्रद रहता है।

मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्तियों के ये हैं गुण

मंगलवार के स्वामी कुमार कार्तिकेय हैं। इस दिन के देवता हनुमान को माना गया है। जिन लोगों का जन्म मंगलवार के दिन होता है वह अंक नौ से प्रभावित होते हैं। इनमें नौ, उन्नीस, सत्ताईस तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्तियों के गुण पाये जाते हैं। इस दिन जन्म लेने वाले व्यक्तियों का रंग सांवला होता है। इनके बाल कर्ली होते हैं। गर्दन लंबे और कंधे चौड़े होते हैं।

इनकी आंखों का रंग हल्का पीलापन लिये होता है। मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति सहासी और महत्वाकांक्षी होते हैं। सेना, पुलिस, खेल एवं दूसरे साहसिक क्षेत्रों में यह कामयाब होते हैं। जिनकी कुण्डली में मंगल की स्थिति अच्छी नहीं होती है वह गलत कार्यों में अपनी क्षमताओं का प्रयोग करने लगते हैं।

मंगलवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति की एक अन्य विशेषता यह होती है कि यह अपने अलवा किसी अन्य पर जल्दी भरोसा नहीं करते हैं। अपने इस स्वभाव के कारण कई बार कठिनाईयों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति एक बार जो काम अपने हाथ में ले लेते हैं उसे हर हाल में पूरा करने की कोशिश करते हैं।

कठिन परिस्थितियों में यह अपना धैर्य जल्दी नहीं खोते हैं। संघर्ष करने की इनमें गजब की क्षमता होती है। फायदे के लिए जोखिम उठाने के लिए भी तैयार रहते हैं। इस दिन जन्म लेने वाले व्यक्तियों को त्वचा एवं रक्त संबंधी रोग होने की संभावना रहती है। जिन महिलाओं का जन्म मंगलवार के दिन होता है उनका स्वभाव चिड़चिड़ा होता है और वाणी में मिठास की कमी रहती है।

उम्र का 28 से लेकर 32 वर्ष का समय इनके लिए महत्वपूर्ण होता है। मंगल की स्थिति अच्छी हो तो इस समय काफी तरक्की करते हैं अन्यथा व्यक्तिगत जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सोमवार को जन्म हुआ है तो खा सकते हैं प्यार में धोखा

सोमवार को जिन लोगों का जन्म होता है वह तोल मोलकर बोलने वाले होते हैं। ऐसे लोग अक्सर किसी न किसी विषय को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। इनका मन काफी चंचल होता है। महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय यह काफी सोच-विचार करते, दूसरों की सलाह का इन पर जल्दी असर होता है। 

ज्योतिषशास्त्र में सोमवार को चन्द्रमा का दिन बताया गया है, यानी इस दिन का स्वामी चन्द्रमा होता है। इसलिए इन पर चन्द्रमा का विशेष प्रभाव रहता है। अंक ज्योतिष के अनुसार इस दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति में अंक दो का प्रभाव देखा जाता है। इनका रंग साफ होता है और आंखें सुंदर होती है। सौम्य और खुशमिजाज होने के कारण यह दोस्तों में काफी लोकप्रिय रहते हैं।

इस दिन जन्म लेने वाले पुरूषों का व्यवहार महिलाओं के प्रति शालीन होता है। जबकि इस दिन जन्म लेने वाली महिलाओं को प्यार के मामलों में अधिक सावधान और व्यवहारिक रहने की जरूरत होती है अन्यथा इन्हें धोखा मिलता है। 

सोमवार के दिन जिनका जन्म होता है वह बहुत अधिक कल्पनाशील होते हैं। इनके विचार बहुत जल्दी-जल्दी बदलते रहते हैं इसलिए किसी काम की शुरूआत बड़े जोश से करते हैं लेकिन काम में जरा सी परेशानी आने पर काम को बीच में छोड़कर नये काम में लग जाते हैं। वात और कफ से संबंधित रोग से इन्हें अधिक परेशानी होती है। 24 से 25 वर्ष की आयु इनके लिए काफी महत्वपूर्ण रहती है।