Friday, September 9, 2011

घर में शांति /सुकून के लिए वास्तु सिद्धांत


घर में शांति /सुकून के लिए वास्तु सिद्धांत ----


वास्तु के अनुसार घर की सजावट करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें :-
1) घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अथवा 'ॐ' की आकृति लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
2) जिस भूखंड या मकान पर मंदिर की पीठ पड़ती है, वहाँ रहने वाले दिन-ब-दिन आर्थिक व शारीरिक परेशानियों में घिरते रहते है।
3) समृद्धि की प्राप्ति के लिए नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश अवश्य रखना चाहिए।
4) घर में ऊर्जात्मक वातावरण बनाने में सूर्य की रोशनी का विशेष महत्व होता है इसलिए घर की आंतरिक साज-सज्जा ऐसी होनी चाहिए कि सूर्य की रोशनी घर में पर्याप्त रूप में प्रवेश करे।
5) घर में कलह अथवा अशांति का वातावरण हो तो ड्राइंग रूम में फूलों का गुलदस्ता रखना श्रेष्ठ होता है।
6) अशुद्ध वस्त्रों को घर के प्रवेश द्वार के मध्य में नहीं रखना चाहिए।
7) वास्तु के अनुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए।
8) गृहस्थ के बेडरूम में भगवान के चित्र अथवा धार्मिक महत्व की वस्तुएँ नहीं लगी होना चाहिए।
9) घर में देवस्थान की दीवार से शौचालय की दीवार का संपर्क नहीं होना चाहिए।

गृह कलह/क्लेश निवारण हेतु सरल और आसन उपाय----

वर्तमान समय में सभी परिवार चाहे वह संयुक्त हो या एकल परिवार हो गृह कलह से पीड़ित नजर आते है। गृह कलह के कारण परिवार के सभी सदस्यों में हृदय रोग, मधुमेह, उन्माद जैसी भयानक बीमारियां उत्पन्न हो सकती है एवं कभी-कभी यह गृह कलह प्राण-घातक (आत्मघातक) भी जो जाते है। गृह कलह मुख्य रूप से सास-बहु, पिता-पुत्र, भाई-बहिन-भाई, देवरानी-जेठानी, ननद-भाभी, पति-पत्नि के बीच दिखाई देता है।


आइये हम और आप ज्योतिषीय दृष्टि से गृह कलह के कारणों एवं उनके उपाय के बारे में जानें----

ज्योतिष् के अनुसार जन्म कुण्डली में सप्तम भाव सप्तमेश, सप्तम् भाव में स्थित ग्रह सप्तम् भाव पर दृष्टि डालने वाले गृह तथा सप्तम् भाव के कारक ग्रह से व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन के बारे में विचार किया जाता है। यदि जातक का सप्तम् बलहीन हो सप्तम् भाव पर शनि, मंगल, सूर्य या राहु-केतु पापी कूरुर ग्रह का प्रभाव हो गुरु एवं शुक्र अस्त हो या पापक्रांत (पापकरतारी) हों तो दाम्पत्य सुख में बाधा आती है।
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सूर्य-ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय----

जातक की कुण्डली में यदि सूर्य प्रथम, द्वितीय और सप्तम् भावों पर प्रभाव होने पर और बलहीन व नीच राशि के सूर्य के सप्तम् भाव में होने पर जातक अहंकारी, स्वाभिमानी, अड़ियल एवं जिद्दी स्वाभाव का होता है। पत्नी या परिवार के अन्य लोगों से स्वाभिमान का टकराव उत्पन्न होता है और जो गृह कलह का कारण बनता है।
उपाय -
1. सूर्योदय से पूर्व स्नानादि कर भगवान् सूर्य को ताँबे के लोटे में पवित्र शुद्ध जल भरकर उसमें लाल पुष्प, रोरी, अक्षत, मसूर दाल या मलका, गुड़ डालकर सूर्योदय काल में निम्न मंत्र पढ़ते हुए अध्र्य दें। एहि सूर्य! सहस्त्रांशो ! तेजोराशे! जगत्पते! अनुकम्प मां भक्त्या गृहाणाघ्र्यं दिवाकर!
2. ताँबे की अगुँठी या कड़ा दाहिने हाथ में घारण करें।
3. रविवार को दोपहर के समय लाल गाय को हाथों में भरकर गेहूँ खिलाए। कृपया जीमन में न डालें।
4. सूर्य भगवान के हृदय स्त्रोत का पाठ करें।
5. किसी विद्वान पण्डित से सूर्य की शान्ति जप सहित करवाए।
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मंगल ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय----
मंगल एक उग्र एवं पापी ग्रह माना जाता है। जब जन्म कुण्डली में मंगल प्रथम, चैथे, सातवें, आठवें, या बारहवें भाव में स्थित हों तो जातक मंगली कहलाता है। मंगल जातक स्वभाव में विशेष प्रभाव करता है। मंगल के प्रभाव से जातक क्रोधी, उग्रता पूर्ण, एवं चड़चिडाहट पूर्ण व्यवहार करता है। यदि लग्न अथवा सप्तम भाव पर मंगल स्थित हो या सप्तम् भाव पर मंगल का प्रभाव (नीच दृष्टि, शत्रु) हो तथा किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो जातक क्रोधी, अहंकारी, अभिमानी होता है और ये स्वभाव पति-पत्नी एवं परिवार के अन्य जनों के मध्य विवाद, गृह कलह का कारण उत्पन्न होता है।
उपाय-----
1. मंगलवार के दिन लाल गाय को गुड रोटी खिलाए
2. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
3. शुक्ल पक्ष के मंगलवार का स्नानादि कर हनुमान मंदिर (दक्षिणमुखी) में चमेली का तेल सिन्दूर, गुड़, चना, एवं जनेऊ चढ़ाए और हनुमान संकट मोचन का पाठ करें। ऐसा लगातार सात मंगलवार करें।
4. मसूर दाल, गेंहूँ, गुड़, लाल पुष्प, ताँम्र-पात्र कुछ द्रव्य(दक्षिणा) सहित मंगलवार को ब्राह्मण या भिक्षुक को दान करें।
5. बन्दरों को चना-गुड़ खिलाए।
6. घर के सभी लोग संयुक्त रूप से भोजन करें। (दिन में एक बार भी कर सकते है।)
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शनि ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय-----
यदि शनि की दृष्टि प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ अथव सप्तम् भाव में प्रभाव डालती है और साथ ही शनि अन्य पापी ग्रहों से सम्बन्ध बनता हों तो ऐसे शनि दाम्पत्य जीवन को उत्साह उमंग से क्षीण, परस्पर अकर्षक से विहीन बनता है। पति-पत्नी एवं परिवार के सदस्य साथ में रहते हुए पृथक रहने के समान जीवन व्यतीत करते हैं। आपस में चिड़चिडापर युक्त, कडवाहट युक्त एवं रूखा व्यवहार करते है। जिसके फलस्वरूप गृह कलह उत्पन्न होती है।
उपाय------
1. हनुमान चालीसा का पाठ नित्य करें।
2. सोलह सोमवार व्रत करें।
3. स्फाटिक या पारद शिवलिंग पर नित्य गाय का कच्चा दुध चढ़ाए फिर शुद्ध जल चढ़ाऐं और ओम् नमः शिवाय मन्त्र का जाप करें।
4. प्रदोष व्रत रखें।
5. प्रत्येक शनिवार को सूर्योदय के समय पीपल में तिल युक्त जल चढ़ाऐं और शाम को (सूर्यअस्त के बाद) तेल का दीपक जलाऐं।
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राहु ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय------------------
जातक की कुण्डली में प्रथम, द्वितीय , चतुर्थ, सप्तम् भाव में राहु के दुष्प्रभाव के कारण दाम्पत्य जीवन एवं परिवार में विवाद, झगडे़ इत्यादि विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ सकता है। राहु आकस्मिक क्रोध, वाणी कटुता, लोभ उत्पन्न करता है। जो गृह कलह का कारण होता है।
उपाय---------------
1. उड़द, तिल, तेल, काला कपड़ा छाता, सूपा, लोहे की चाकू, बुधवार के दिन सफाई कर्मचारी वर्ग के लोगों को दान करें।
2. शनिवार के दिन नीले वस्त्र में चार नारियल बांध कर नदी (बहते जलाशय) में लगातार सात शनिवार प्रवाहित करें।
3. केसर का तिलक माथे पर लागाऐं ।
4. मछली एवं पंक्षी को दाना खिलाऐं।
5. रुद्राभिषेक पूजन प्रत्येक प्रदोष में करें।
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पति-पत्नी के मध्य गृह कलह दूर करने हेतु उपाय-------
1. यदि पति-पत्नी के माध्य वाक् युद्ध होता रहता है तो दोनों पति-पत्नी को बुधवार के दिन दो घण्टे का मौन व्रत धारण करें।
2. पति को चाहिए की शुक्रवार को अपनी पत्नी को सुन्दर सुगन्ध युक्त पुष्प एवं इत्र भेंट करें एवं चाँदी की कटोरी चम्मच से दही शक्कर पत्नी को खिलाऐं।
3. पति को चाहिए की पत्नी की माँग में सिन्दूर भरें एवं पत्नी पति के मस्तक पर पीला तिलक लगाऐं।
4. स्त्री को चाहिए की अपने शयन कक्ष में 100 ग्राम सौंफ प्रातःकाल स्नान के बाद लाल कपडे में बांधकर रखें।
5. पति-पत्नी दोनों को फिरोज रत्न चाँदी में अनामिका आगुँली में धारण करें।
6. प्रतिदिन पति-पत्नी लक्ष्मी-नारायण या गौरी-शंकर के मन्दिर में जाऐं, सुगन्धित पुष्प चढ़ाऐं और दाम्पत्य सुख हेतु प्रार्थना करें।
7. पति-पत्नी सोमवार को दो-मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
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सास-बहु के बीच कलेश दूर करने के उपाय---------
1. घर के बर्तन के गिरने टकराने की आवाज न आने दें।
2. घर सजाकर सुन्दर रखें।
3. बहू को चाहिए की सूर्योदय से पहले घर में झाडू लगाकर कचड़े को घर के बाहर फेंके।
4. पितरों का पूजन करें।
5. प्रतिदिन पहली रोटी गाय को एवं आखरी रोटी कुत्ते को खिलाऐं।
6. ओम् शांति मन्त्र का जाप सास-बहू दोनों 21 दिन तक लगातर 11-11 माला करें।
7. रोटी बनाते समय तवा गर्म होने पर पहले उस पर ठंडे पानी के छींटे डाले और फिर रोटी बनाएं।
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भाई-भाई के बीच गृह कलह दूर करने के उपाय--------
1. गणेश जी एवं स्वामी कार्तिक जी का पूजन प्रतिदिन करें।
2. शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाऐं।
3. विष्णु जी को तुलसी पत्र चढ़ाऐं।
4. माता-पिता एवं पूजनीय व्यक्तियों के चरण स्पर्श करें।
5. ओम् रामाय नमः मन्त्र का जप करें।
6. रामायण या रामचरित्र मानस का यथा शक्ति पाठ करें।
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देवरानी-जेठानी एवं ननद-भाभी में गृह कलह को दूर करने के उपाय-------
1. गाय के गोबर का दीपक बनाकर तेल रुई सहित उसे जलाऐं एवं मुख्य दरवाजे में रख कर उसमें थोड़ा गुड़ डालें।
2. ओम् नमः शिवशक्तिस्वरूपाय मम गृहे शांति कुरु-कुरु स्वाहा इस मन्त का जप 41 दिन तक नित्य 11 माला (रुद्राक्षमाला से) करें।
3. शिवलिंग में दूध एवं गंगाजल चढ़ाऐं और फिर बिल्व पत्र और पुष्प घर के सभी लोग चढ़ाऐं।
4. घर को सुन्दर, सजावट युक्त रखें एवं घर के चारों कोनो में शंख ध्वनि करें।
5. गीता का पाठ करें।
6. शिव जी का पूजन अपने पूरे परिवार सहित करें।
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गृह कलह शान्ति हेतु अन्य उपाय-------------
1. प्रतिदिन आटा गूथते समय एक चुटकी नकम एवं एक चुटकी बेसन उसमें मिला लें।
2. गेंहूँ चक्की पर पिसने जाने से पहले उसमें थोड़े से चने मिला दें तथा केवल सोमवार एवं शनिवार को ही गेंहूँ पिसवाऐं।
3. दुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्री में विद्वान पण्डित से कराऐं।
4. चीटियों का शक्कर खिलाऐं ।
5. घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में शौंच का स्थान न रखें एवं उस स्थान को साफ, और भार युक्त वास्तु से दूर रखें।
6. जो ग्रह कलह कारक हों उनकी वस्तुओं का दान करें।
7. कुण्डली के बली ग्रहों के मंत्रों का जप विद्वान पण्डित जी से या स्वयं किसी गुरु के सानिध्य में करें।
8. तेज स्वर (ऊंची आवाज) में बात न करें।

Sunday, September 4, 2011

गालों का रंग बता देता है हाव-भाव और आदत


क्या आप जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति के गालों के रंग को देखकर उसका स्वभाव मालूम किया जा सकता है? जी हां, यह संभव है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शरीर के अंगों की बनावट को देखते हुए किसी भी व्यक्ति के स्वभाव, हाव-भाव और आदतों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जिन ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव हमारे ऊपर सर्वाधिक होता है उसी के अनुसार हमारे गुण और अवगुण होते हैं।

जिन लोगों के गालों का सफेद रंग होता है वे अक्सर अस्वस्थ रहते हैं। वे अधिकांशत: किसी न किसी बीमारी से त्रस्त रहते हैं। ऐसे लोगों में निराशा रहती है और वे आलसी भी हो सकते हैं। इन लोगों में अनिश्चितता की भावना अधिक होती है। हर कार्य को अपने ही ढंग से करते हैं। इसके अलावा जिन लोगों के गालों का रंग लाल है वे लोग थोड़े गुस्से वाले होते हैं। छोटी-छोटी बातों में ही इन्हें क्रोध आ जाता है।

ये लोग साहसी, युद्धप्रिय व उत्तेजित व्यक्तित्व के होते हैं। ये लोग किसी भी कार्य को बहुत अच्छे ढंग से पूर्ण करते हैं। जिन लोगों के गालों का रंग गुलाबी दिखाई देता है वे लोग संतुलित मानसिकता के होते हैं।

किसी भी परिस्थिति में खुद को बहुत अच्छे से सेट कर लेते हैं। हर कार्य को करने की इनकी एक विशेष शैली होती है। इन लोगों को जीवन में कई उपलब्धियां हासिल होती हैं। किसी भी व्यक्ति के संबंध में सटीक भविष्यवाणी करने के लिए उसके विषय में गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता होती है। तभी सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

तिल्ली के तेल का दीपक जलाएं और गरीबी से पीछा छुड़ाएं...

धर्म-ज्योतिष को मानने वाले लोग शनिदेव और शनि के प्रभावों को अच्छे से जानते हैं। ऐसा माना जाता है कि शनि बुरे फल ही प्रदान करता है। ज्योतिष के अनुसार शनि को न्यायाधिश का पद प्राप्त है। इसी वजह से इन्हें क्रूर देवता माना जाता है। हमारे द्वारा किए गए कर्मों का फल शनिदेव साढ़ेसाती और ढैय्या के समय में प्रदान करते हैं।

यदि किसी व्यक्ति से जाने-अनजाने कोई पाप या गलत कार्य हो गया है तो शनिदेव ऐसे लोगों को निश्चित समय पर इन कर्मों का फल प्रदान करते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अत्यधिक कष्ट भोगना पड़ रहे हैं तो इन अशुभ फलों के प्रभावों को कम करने के लिए कुछ ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं।

कुछ लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो उसे जीवनभर कई प्रकार के कष्ट उठाने पड़ते हैं। ऐसे में प्रति शनिवार यह उपाय अपनाएं-

शनिवार को प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि करके पवित्र हो जाएं। इसके बाद जल, दूध, तिल्ली के तेल का दीपक लेकर किसी पीपल के वृक्ष के समीप जाएं। अब पीपल पर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष के नीचे तिल्ली के तेल के दीपक को प्रज्जवलित करें। शनिदेव प्रार्थना करें कि आपकी सभी समस्याएं दूर हो और बुरे समय से पीछा छुट जाए। इसके बाद पीपल की सात परिक्रमा करें।

घर लौट कर एक कटोरी में तेल लें और उसमें अपना चेहरा देखकर इस तेल का दान करें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में आपको सकारात्मक फल प्राप्त होने लगेंगे। इसके प्रभाव से आपके घर की पैसों से जुड़ी समस्त समस्याएं दूर होने लगेंगी और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलेगी।

पैसों की किल्लत दूर करे यह लक्ष्मी-गणेश मंत्र

पैसों की किल्लत दूर करे यह लक्ष्मी-गणेश मंत्र
ज़िंदगी और गृहस्थ धर्म के सही संतुलन के लिए जरूरी है- आजीविका। जिससे मिलने वाला अर्थ या धन सभी सुख और सुविधाओं को आसान बना देता है। यही कारण है कि हर व्यक्ति छोटा-बड़ा व्यवसाय या फिर नौकरी करता है। किंतु अनेक अवसरों पर ऐसी स्थिति बनती है कि तमाम कोशिशों के बाद भी व्यक्ति व्यापार में घाटे या मंदी के दौर से गुजरने लगता है। ऐसी हालात किसी को भी बेहद परेशान कर देती है।
शास्त्रों में ऐसी ही हालात से बचने या बाहर आने के लिए देव उपासना का महत्व बताया गया है। जिसे किसी भी व्यक्ति को थोड़ा समय देकर जरूर करना चाहिए।
हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश विघ्रहर्ता और माता लक्ष्मी धन और ऐश्वर्य की देवी के रूप में पूजी जाती है। इसलिए यहां जानते हैं भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी के स्मरण का एक ऐसा ही आसान मंत्र, जो व्यवसाय में हो रहे घाटे से बचाता है और पैसों की किल्लत दूर कर धनलाभ देता है -
- बुधवार या चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की मूर्ति एक पात्र या चौकी पर विराजित कर उनके सामने घी का दीप जलाएं।
- श्री गणेश की गंध, अक्षत, दूर्वा, पुष्प से पूजा कर कम से कम 108 बार इस गणेश-महालक्ष्मी मंत्र का जप करें।
ऊँ गणेश महलक्ष्यै नम:।
या
ऊँ गं लक्ष्म्यै आगच्छ आगच्छ फट्।।
- मंत्र जप पूरे होने पर लड्डू का भोग लगाकर श्री गणेश और महालक्ष्मी से घाटे से उबारने और आर्थिक कृपा की प्रार्थना करें। ऐसा मंत्र जप और गणेश लक्ष्मी का ध्यान कुछ ही दिनों में शुभ नतीजा देगा।

कुंवारे लोगों के कमरे में ये रंग होगा तो शादी में आएंगी परेशानियां

हमें प्राप्त होने वाले सुख-दुख काफी हद तक हमारे घर के वास्तु पर भी निर्भर करते हैं। यदि जहां हम रहते हैं उस स्थान  या घर पर वास्तु दोष हों तो लाख कोशिशों के बाद भी सफलता मुश्किल से ही प्राप्त होती है।

जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है और पारिवारिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इन अशुभ प्रभावों के चलते ध्यान रखना चाहिए कि घर में कोई वास्तु दोष न हो।

मनुष्य जीवन के 16 संस्कार मुख्य रूप से बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है विवाह। विवाह के संबंध में ऐसा माना जाता है कि जोडिय़ां भगवान ही बनाते हैं और शादी का समय भी भगवान द्वारा ही तय किया जाता है।

कई युवाओं की शादी बहुत विलंब से होती हैं। इसके पीछे भी वास्तु दोष एक कारण हो सकता है। इसी वजह से विवाह योग्य लड़के और लड़कियों का कमरा वास्तु के अनुसार ही बनाया और सजाया जाना चाहिए।

कुंवारे लड़के और लड़कियों के कमरे में मुख्य रूप से काला रंग नहीं होना चाहिए। इनके कमरे में काले रंग के परदे, काले रंग के दरवाजे, काली अलमारियां, काली खिड़कियां, टेबल, बेड या पलंग आदि सभी आवश्यक वस्तुएं काले रंग की नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर विवाह योग्य लड़के और लड़किया की शादी में कई बाधाएं आती हैं।

विवाह प्रस्ताव नहीं आते हैं और यदि आते भी हैं तो बात पक्की नहीं हो पाती है। काला रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इससे नेगेटिव एनर्जी अधिक एक्टिव हो जाती है और बुरा प्रभाव देती है। इस वजह से विवाह योग्य युवाओं को कमरे में काले रंग से परहेज करना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगलदोष है तो उसे कमरे में अधिक से अधिक लाल या गुलाबी रंग की वस्तुएं रखनी चाहिए। इससे विवाह में आ रही रुकावटें स्वत: दूर हो जाएंगी। इसके अलावा कुंडली में यदि अन्य किसी ग्रह बाधा की वजह से विवाह में विलंब हो रहा हो तो उसका उचित उपचार किया जाना चाहिए।

जन्म तारीख से जानें कब होगी आपकी सेहत खराब..!

जी हां अगर आप बीमार होने से पहले ही सावधान होना चाहते हैं या जानना चाहते है तो अपनी जन्म तारीख को जोडऩा शुरू कर दें। न्यूमरोलॉजी के अनुसार अंक बीमार होने से पहले ही बता देते हैं कि कौन सा महीना आपकी सेहत के लिए खराब रहेगा? किस महीने में आपको अपनी सेहत के लिए सावधान रहना चाहिए? जानें क्या कहती है न्यूमरोलॉजी...



मूलांक-1: जिन लोगों की जन्म तारीख 1,10,19 या 28 है।

सावधानी: अंक 1 वालों को जनवरी, अक्तूबर और दिसंबर के महीनों में अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना चाहिए।

मूलांक-2: जन्म दिनांक 2,11,20,29

सावधानी: अगर आपकी जन्म तारीख उपर बताए गए नंबरों में से है तो जनवरी, फरवरी और जुलाई के महीनों में स्वास्थ्य व खान-पान आदि में सावधानी बरतना चाहिए।

मूलांक-3: जन्म दिनांक 3,12,21,30

सावधानी: अंक तीन वालों को  फरवरी, जून, सिंतबर और दिसंबर में अपनी सेहत का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।

मूलांक-4: जन्म दिनांक 4,13,22,31

सावधानी: अपने अंक के  स्वामी अनुसार अंंक 4 वाले लोगों को जनवरी, फरवरी, जुलाई, अगस्त व सितंबर इन पांच महीनों में अपने स्वास्थ्य पर विशेष गौर करना चाहिए।

मूलांक-5:जन्म दिनांक 5,14,23

सावधानी: आपको जून, सिंतबर और दिसंबर के महीनों में अपने स्वास्थ्य के बारे में सावधानी बरतना चाहिए।

मूलांक-6:जन्म दिनांक 6,15,24

सावधानी: आपको अंक का स्वामी शुक्र है इसलिए अंक 6 वालों को मई, अक्तूबर एवं नवंबर के महीने में उन्हें सावधानी रखनी चाहिए।

मूलांक-7: जन्म दिनांक 7,16,25

सावधानी: केतु के अंक वाले होने के कारण आपको जनवरी-फरवरी और जुलाई-अगस्त के चार महीनों में अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सावधानी रखनी चाहिए।

मूलांक-8: जन्म दिनांक 8,17,26

सावधानी: आपके अंक का स्वामी शनि होने के कारण अंक आठ वालों को जनवरी, फरवरी, जुलाई और दिसंबर के महीनों में पूर्ण रूप से सावधान रहना चाहिए।

मूलांक-9:जन्म दिनांक 9,18,27

सावधानी: उपर बताइ गई तारीखों में जन्में लोगों का अंक स्वामी मंगल होता है ऐसे लोगों को  पूरे वर्ष अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए।

Thursday, September 1, 2011

टेढ़े गुरु के बुरे असर से बचाएंगे राशि अनुसार ये उपाय..


टेढ़े गुरु के बुरे असर से बचाएंगे राशि अनुसार ये उपाय...
30 अगस्त को दोपहर से गुरु अपनी सीधी चाल बदल कर टेढ़ी चाल पर आ गया है। अब गुरु टेढ़ा हो गया है, टेढ़े गुरु के उल्टे असर से बचने के लिए और सामान्य फल को शुभ बनाने के लिए राशि अनुसार उपाय करें। राशि अनुसार उपाय करने से आप पर गुरु का अशुभ असर कम हो जाएगा साथ ही अगर आपके लिए गुरु अच्छा फल देने वाला है तो आपके सभी काम पूरे होने लगेंगे।

गुरु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ये उपाय करें-


मेष- 43 दिनों तक प्रतिदिन एक तांबे का सिक्का नदी में प्रवाहित करें। चमत्कारिक परिणाम प्राप्त होंगे।

वृष- पीला रूमाल सदैव अपने पास रखें।

मिथुन- प्रतिदिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।

कर्क- घर में पीले रंग के फूल का पौधा लगाएं।

सिंह- प्रतिदिन विष्णु मंदिर जाएं और ब्राह्मण या अन्य किसी जरूरत मंद को धन का दान करें।

कन्या- गुरुवार का व्रत रखें।

तुला- भगवान विष्णु को गुड़-चने की दाल का प्रसाद अर्पित करें।

वृश्चिक- घी, दही, आलू और कपूर का दान करें।

धनु - किसी मन्दिर के पूजारी को भोजन कराएं।

मकर - पीली गाय को घास खिलाएं।

कुंभ - हल्दी एवं पीले चंदन से भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें।

मीन- केसर का तिलक लगाएं।

Saturday, August 20, 2011

शेयर बाजार या लॉटरी, हर बार किस्मत होती है इनके साथ...

गुरु और चंद्रमा मिलकर एक शुभ योग बनाते हैं। इस योग का नाम गजकेसरी योग है। यह योग जिस कुंडली में होता है उसके जीवन में पद प्रतिष्ठा और पैसों की कोई कमी नही होती। इसके कारण अचानक धन लाभ के योग बनते है।



- अगर कुंडली के दुसरे भाव में गुरु और चंद्रमा मीन राशि में होते हैं तो ऐसे व्यक्ति को अचानक शेयर या लॉटरी से धन लाभ मिलता है।

- अगर गुरु केन्द्र भाव यानी चौथे भाव में अपनी ही राशि धनु यानी 9 अंक के साथ होता है तो पंचमहापुरूष योग में से एक हंस योग बनाता है। ऐसे योग से जातक को अचानक पैसा मिलता है ।

- कुंडली के पांचवे भाव में स्थित गुरु और चंद्रमा लाभ भाव यानि ग्यारहवें भाव को देखते हैं और इसी स्थान से गुरु की पांचवी नजर किस्मत के घर पर भी पड़ती है। ऐसा योग जिसकी कुंडली में बनता है। उसकी किस्मत अचानक पलटती है और उसे शेयर बाजार या लॉटरी से धन मिलता है।

- गुरु अपनी ही राशि मीन में यानी 12 नंबर के साथ किस्मत के घर (नवें भाव) में हो तो इस घर में गुरु के होने से किस्मत साथ देेती है और शेयर या लॉटरी से धन लाभ होता है।

- कुंडली के लाभ भाव (ग्यारहवें घर) में चंद्रमा की राशि कर्क यानि 4 अंक के साथ गुरु और चंद्र  धन लाभ देने वाले माने जाते हैं।


- अगर सातवें भाव में स्थित राशि का स्वामी छठें, आठवें या बारहवें घर में हो तो जीवनसाथी सामान्य स्तर की नौकरी करने वाला होता है।

- अगर किसी कुंडली के सातवें घर में स्थित राशि का स्वामी पाप ग्रह होता है यानी सातवें घर में सिंह, कुंभ, मकर, मेष या वृश्चिक राशि हो और सूर्य, शनि या मंगल अपनी निच राशि में हो या शत्रु राशि में हो तो जीवनसाथी की कमाई ज्यादा  नही होती।

Sunday, August 14, 2011

किचन में पानी हमेशा गैस स्टेंड से ऊंचाई पर रखें, नहीं तो...


किचन में पानी हमेशा गैस स्टेंड से ऊंचाई पर रखें, नहीं तो...

आग और पानी को एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है। पानी हमेशा आग को बुझा देता है और आग भी पानी को सुखाने की क्षमता रखती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए वास्तु शास्त्र में कुछ खास बातें बताई गई हैं।

वास्तु के अनुसार कीचन में रखी वस्तुओं से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि संबंधित रहती है। किचन रखे जाने वाले सभी सामान को वास्तु अनुसार ही रखना चाहिए। कीचन में पीने का पानी और गैस स्टोव्ह के लिए विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता है। इन्हें व्यवस्थित ढंग से नहीं रखने की स्थिति में परिवार में शांति नहीं रहती है।

आग और पानी की प्रकृति एक-दूसरे के प्रति विरोधी रहती है अत: इन दोनों को अलग-अलग स्थानों पर ही रखना चाहिए। कभी भी गैस के पास ही पानी नहीं रखना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि पानी हमेशा गैस स्टोव्ह से ऊंचाई पर ही हो। दोनों बराबरी से नहीं रखे होना चाहिए।

ऐसा नहीं होने पर पति-पत्नी के बीच झगड़े होते रहते हैं और परिवार में अशांति बनी रहती है। जिससे सभी सदस्यों को मानसिक क्लेश झेलना पड़ता है।

अनोखा उपाय- चमक उठेगी आपकी किस्मत, पानी में डालें काले तिल और...

क्या आपके व्यवसाय में धन हानि अधिक हो रही है? क्या आपके घर-परिवार में परेशानियों की वजह से रिश्तों में दरार पड़ गई है? क्या आपके बच्चों को बीमारियां सताती रहती हैं? क्या भाग्य आपका साथ नहीं दे रहा है? यदि इस प्रकार के प्रश्नों से आप परेशान हैं तो यहां एक सटीक ज्योतिषीय उपाय बताया जा रहा है, जिससे आपकी सभी परेशानियां गायब हो जाएंगी।

जीवन से जुड़ी किसी भी प्र
कार की समस्या को दूर करने के लिए शिव आराधना श्रेष्ठ उपाय है। प्रतिदिन शिवजी का विधि-विधान से पूजन करें। यदि विधिवत पूजन कर
ने में असमर्थ हैं तो प्रतिदिन एक लौटे में शुद्ध जल भरें और उसमें थोड़े काले तिल डाल दें। अब इस जल को शिवलिंग पर ऊँ नम: शिवाय मंत्र जप के साथ चढ़ाएं। ध्यान रहे जल पतली धार से चढ़ाएं और मंत्र का जप करते रहें। इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जप बेहद फायदेमंद रहता है।

ऐसा प्रतिदिन करें। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर पवित्र हो जाएं फिर किसी भी सिद्ध शिव मंदिर में जाएं। जल चढ़ाने के साथ पुष्प और बिल्व पत्र भी अवश्य चढ़ाएं। इस उपाय को अपनाने से कुछ ही दिनों में चमत्कारिक फल की प्राप्ति होने लगेगी। ध्यान रहे इस उपाय के साथ ही अधार्मिक कर्मों से खुद को दूर रखें। किसी का दिल न दुखाएं और वृद्धजनों का सम्मान करें।

बर्थ डेट से जानें कौन सा लकी स्टोन चमकाएगा आपकी किस्मत

वैसे तो ज्योतिष में ज्यादातर लोग कुंडली और चंद्र राशि के अनुसार रत्न पहनते हैं।  लेकिन कुछ लोगों को अपनी राशि नही मालूम होती और उनके पास कुंडली भी नही होती है इसलिए ज्योतिष में सूर्य राशि यानी जन्म तारिख के अनुसार रत्न पहने जा सकते हैं। सूर्य राशि के अनुसार आप जान सकते है कि आपका लकी स्टोन कौन सा  है।


-14 अप्रेल से 14 मई के बीच जन्म लेने वालों की राशि मेष होती है इसके अनुसार अगर मूंगा पहने तो किस्मत हमेशा साथ रहती है।

- सूर्य राशि के अनुसार 15 मई 14 से जून के बीच जन्म लेने वाले लोगों की राशि वृष होती है इसलिए हीरा पहनने से इस राशि वालों के लाभ होगा।

-15 जून से 15 जुलाई के बीच जन्म लेने वालों की सूर्य राशि मिथुन होती है इसलिए पन्ना रत्न इस राशि वालों के लिए लकी रत्न साबित होगा।

- सूर्य राशि के अनुसार 16 जुलाई से 16 अगस्त के मध्य जन्म लेने वालों का लकी स्टोन मोती होता है।

- 17 अगस्त से 16 सितंबर के बीच जन्म लेने वाले लोगों के लिए लकी स्टोन माणिक्य होता है क्योंकि इस समय सूर्य अपनी ही राशि में रहता है।

- सूर्य राशि के अनुसार 17 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच जन्म लेने वालों को किस्मत चमकाने के लिए पन्ना रत्न पहनना चाहिए।

- 17 अक्टूबर से 16 नवंबर तक सूर्य तुला राशि में होता है इसलिए इस समय में जन्म लेने वालों को लकी रत्न के रूप में हीरा पहनना चाहिए।

- 17 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच जन्म लेने वालों का भाग्यशाली रत्न मूंगा होता है।

- सूर्य राशि के अनुसार 16 दिसंबर से 13 जनवरी के बीच जन्म लेने वालों का लकी रत्न पुखराज होता है।

- 14 जनवरी से 12 फरवरी तक सूर्य मकर राशि में रहता है। इसलिए इस समय जन्म लेने वालों को लकी स्टोन के रूप में नीलम पहनना चाहिए।

- 13 फरवरी से 12 मार्च तक कुंभ राशि में सूर्य का भ्रमण होता है इसलिए इस समय में जन्म लेेने वालों को शनि का भी भाग्यशाली रत्न नीलम होता है।

- 13 मार्च से 13 अप्रेल के बीच जन्म लेने वाले अगर पुखराज पहनें तो ऐसे लोगों की किस्मत अचानक बदल जाती है।

सपने में खुद को ईमानदारी से पैसा कमाता हुआ देखे तो, मिलेगा पैसा ही पैसा

जागती आंखों से खूब पैसा कमाने का सपना सभी देखते हैं लेकिन यदि कोई व्यक्ति नींद में पैसों से संबंधित कोई सपना देखता है तो ज्योतिष के अनुसार यह शुभ संकेत है।

स्वप्न ज्योतिष के अनुसार हमारे सपनों का संबंध भविष्य से होता है। इनमें कई प्रकार के इशारे छुपे होते हैं। इन संकेतों को समझने से आने वाले कल में होने वाली शुभ या अशुभ घटनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यदि सपनों में शुभ घटनाओं का संकेत है तब तो ठीक है। यदि किसी अशुभ समय की ओर इशारा मिल रहा है तो इस बुरे समय के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा सकते हैं।

यदि कोई व्यक्ति सपने में खुद को ईमानदारी से पैसा कमाता हुआ देखता है तो उसे निकट भविष्य में काफी धन की प्राप्ति होने के योग बनेंगे। इसके विपरित यदि कोई व्यक्ति सपने में किसी बुरे काम से धन प्राप्त करता है तो उसे आने वाले समय में कई प्रकार की परेशानियां झेलना पड़ सकती है।

सपने में किसी संत या महात्मा से धन मिले तो यह बहुत ही शुभ स्वप्न है। इसके प्रभाव से भविष्य में धन, दौलत और मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है।

Saturday, August 13, 2011

बिजनेस, प्यार, दोस्ती...ऐसे नाम वालों से रहें सावधान

ज्योतिष में 12 राशियोंको उनके स्वभाव, प्रकृति, तत्व और गुणों के आधार पर बांटा गया है। सभी लोगों पर अपनी अपनी राशियों का प्रभाव होता है। राशियों की प्रकृति और स्वभाव के अनुसार सभी लोगों पर इसका असर भी पड़ता है। ज्योतिष में राशियों की प्रकृति और स्वभाव तीन तरह के बताए गए हैं। चर, स्थिर और द्विस्वभाव।

जिन लोगों की राशि की प्रकृति द्विस्वभाव होती है ऐसे लोगों से बिजनेस, प्यार, दोस्ती और अन्य क्षेत्रों में सावधान रहना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग अपनी राशि के प्रभाव से विश्वास करने योग्य नही होते। द्विस्वभाव राशि के लोग अचानक अपना निर्णय बदल देते हैं।

कैसे नाम वालों से रहें सावधान
 
मिथुन ( का की कु घ ड़ छ के को हा)- जिन लोगों का नाम इन अक्षरों से शुरु होता है उनकी राशि मिथुन और राशि स्वामी बुध होता है। बुध को ज्योतिष में बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है। मिथुन राशि वाले बुध के प्रभाव से किसी निर्णय पर स्थिर नही रह सकते।

कन्या-( टो पा पी पू ष ण ठ पे पो)- इन अक्षरों के नाम वालों की राशि कन्या होती है और इस राशि का भी स्वामी बुध है। बुध को ज्योतिष में वाणी का कारक ग्रह माना जाता है। इस राशि के लोगों के दिमाग में हमेशा दो बातें चालती रहती है। यह बोलते कुछ और है, करते कुछ और है।

धनु- (ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे)- जिन लोगों का नाम इन अक्षरों से शुरु होता है उनकी धनु राशि होती है। गुरु और चंद्रमा के प्रभाव से इस राशि के लोग द्विस्वभाव वाले होते हैं यनि समय आने पर अपना फायदा देखकर बदल जाने वाले होते हैं।

मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो चा ची )-  इस राशि वालों का फल भी धनु राशि वालों की तरह होता है।

जीवनसाथी के साथ कभी पटरी नहीं बैठ पाएगी अगर हथेली में....

हथेली में बुध पर्वत यानी लिटिल फिंगर के नीचे के क्षेत्र पर जो आड़ी रेखाएं होती है उन्हें विवाह रेखा कहा जाता है। इस पर्वत पर अगर कई रेखाएं दिखाई दे रही हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि सभी रेखा शादी की हैं अर्थात आपकी उतनी शादी होगी। इस पर्वत पर दिखने वाली सभी रेखाओं में से वही रेखा विवाह रेखा होगी जो सबसे गहरी और लम्बी होगी अन्य रेखा किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध को दर्शाती है।
शादी के बाद जीवन कैसा होगा?वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा या नहीं कहीं जीवन साथी से अनबन तो नहीं होगी आदी बातें किसी के हाथ में उपस्थित विवाह रेखा के साथ ही मस्तिष्क रेखा व सूर्य रेखा को देखकर भी जानी जा सकती है।
अगर जीवनसाथी के साथ अनबन रहती है या आप जानना चाहते हैं कि शादी के बाद कहीं अनबन तो नहीं रहेगी इसके लिए देखिए कि सूर्य रेखा मस्तिष्क रेखा से निकलकर बीच-बीच में टूटी तो नहीं है। अगर ऐसा है तो अपने जीवनसाथी पर विश्वास कीजिए और उन्हें समझने की कोशिश कीजिए अन्यथा किसी और के कारण आपके वैवाहिक जीवन में अशांति और अनबन रहेगी। इसके अलावा आप यह भी देखिए कि सूर्य पर्वत से निकलकर पतली सी रेखा हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा को कटती हुई जीवन रेखा से तो नहीं मिल रही है अगर ऐसा है तो आप समझ लीजिए आपकी कामयाबी के बीच जीवनसाथी से अनबन बहुत बड़ा कारण है।
जीवन साथी आपका साथ इस जीवन में कब तक निभायेगा यानी क्या आप उसे तन्हा छोड़ जाएंगे या वो आपको छोड़ जाएगा यह भी आप हाथ की रेखाओं से जान सकते हैं। हस्तरेखा विज्ञान कहता है अगर विवाह रेखा झुककर हृदय रेखा को छू रहा है तो इसका अर्थ है कि आप अपने जीवनसाथी को अकेला छोड़ जाएंगे। विवाह रेखा के सिरे पर क्रास का चिन्ह दिख रहा है तो यह संकेत है कि जीवनसाथी अचानक बीच सफर में छोड़कर दुनियां से विदा हो जाएगा।

पर्स में होंगी ये चीजें, तो बनी रहेगी पैसों की किल्लत...



रुपए या नोटों को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने का कार्य हमारे पर्स बखूबी निभाते हें। हर परिस्थिति में आपके नोट पर्स
में सही ढंग से रखे रहते हैं। जिससे उनके कटने या फटने का डर नहीं रहता।

पर्स में पैसा रखा जाता है अत: इस संबंध में वास्तु द्वारा कई महत्वपूर्ण टिप्स दी गई हैं। जिन्हें अपनाने पर व्यक्ति को भी धन की कमी का एहसास ही नहीं होता है।

हमारे जीवन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों का संबंध वास्तु से है। वास्तु शास्त्र हमारे आसपास फैली सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के सिद्धांतों पर कार्य करता है।

जो वस्तु नकारात्मक ऊर्जा फैलाती हैं उन्हें हमारे आसपास से हटा देना चाहिए। क्योंकि इनसे हमारे सुख और कमाई पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आय बढ़ाने या फिजूल खर्चों में कमी करने के लिए पर्स का वास्तु भी ठीक करने की आवश्यकता होती है। पर्स में सिक्के और नोट दोनों को ही अलग-अलग स्थानों पर रखना चाहिए। इसके अलावा पर्स में मृत व्यक्तियों के चित्र रखना भी शुभ नहीं माना जाता है। अत: इस प्रकार के चित्रों को भी पर्स में नोटों के साथ नहीं रखें। पर्स में संत-महात्मा के चित्र रखे जा सकते हैं। यदि कोई संत या महात्मा देह त्याग चुके हैं तब भी उनके चित्र या फोटो पर्स रखे जा सकते हैं क्योंकि शास्त्रों के अनुसार देह त्यागने के बाद भी संत-महात्माओं को मृत नहीं माना जाता है। कुछ लोग पर्स में ही चाबियां भी रखते हैं, चाबियां रखना भी अशुभ ही माना जाता है। इन्हें भी रुपए-पैसों से अलग ही रखना शुभ रहता है। पर्स में नोट या सिक्कों के साथ खाने की चीजें भी नहीं रखना चाहिए।

वास्तु के अनुसार पर्स में ऐसे वस्तुएं हरगिज न रखें जो नकारात्मक ऊर्जा को संचारित करती हैं। पर्स में किसी भी प्रकार के बिल या भुगतान से संबंधित कागज नहीं रखने चाहिए। इसके लिए पर्स में किसी भी प्रकार की अपवित्र वस्तु भी न रखें।

जो वस्तुएं फिजूल हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है उन वस्तुएं तुरंत ही पर्स से बाहर कर दें। इनके अतिरिक्त पर्स में धार्मिक और पवित्र वस्तुएं रखें, जिनसे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जिन्हें देखकर हमारा मन प्रसन्न होता है।

ज्योतिष: क्या आपके घर में बार-बार तेल का नुकसान होता है?

ज्योतिष के अनुसार खाने में उपयोग किया जाने वाला खाद्य तेल शनि देव से संबंधित है। इसी वजह से हर शनिवार को शनि देव के निमित्त तेल अर्पित किया जाता है। शनि महाराज को तेल क्यों अर्पित किया जाता है इस संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं।

एक कथा के अनुसार हनुमानजी और शनिदेव में युद्ध हुआ। इस युद्ध में बजरंग बली ने शनि को हरा दिया। इस दौरान हनुमानजी द्वारा किए गए प्रहार से शनि के शरीर में पीड़ा होने लगी। तब हनुमानजी ने इस दर्द से मुक्ति के लिए उन्हें तेल दिया। तभी से शनि हनुमानजी के भक्तों को कष्ट नहीं पहुंचाता है और उन्हें तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

ज्योतिष के अनुसार नौ ग्रह बताए गए हैं जो हमारे सुख और दुख को निर्धारित करते हैं। सभी ग्रहों का संबंध अलग-अलग वस्तुओं से हैं। शनि का गहरा संबंध तेल से है। यदि किसी व्यक्ति के घर में बार-बार तेल ढुल जाता है या अन्य किसी प्रकार से तेल का नुकसान हो तो समझना चाहिए कि उसकी कुंडली में शनि संबंधी कोई दोष है।


यदि कोई व्यक्ति तेल से संबंधी रोजगार से धर्नाजन करता है और उसे इस कार्य से लगातार हानि उठाना पड़ रही हो तो संभव है कि उसकी कुंडली में कोई शनि दोष हो। ऐसे में शनि के दोषों को दूर करने का ज्योतिषीय उपचार करना चाहिए। प्रति शनिवार एक कटोरी में तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर इस तेल का दान करें। यह शनि के बुरे प्रभाव से बचने का सटीक उपाय है।

यदि आपके घर में कोई हो बहुत जिद्दी, तो करें ये चमत्कारी उपाय...

छोटे बच्चों की जिद माता-पिता का मन मोह लेती है लेकिन कई बार बच्चों की यही आदत बड़े होने तक बनी रहती है। ऐसे में माता-पिता को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि बच्चे कई बार ऐसी जिद कर बैठते हैं जिनका पूरा हो पाना लगभग असंभव सा ही होता है। यदि बच्चा ज्यादा ही जिद्दी हो गया है तो ज्योतिष के अनुसार उसे सुधारने के लिए उपाय बताया गया है-

यदि बच्चे ज्यादा ही जिद करें तो उनके साथ जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। बस केवल उनको रोज सीधे हाथ की सूंड वाले गणेशजी का दर्शन कराएं। इस दर्शन से उनकी बुद्धि में सुधार होने लगेगा तथा धीरे-धीरे उनकी जिद करने की आदत दूर हो जाएगी।

गणेशजी को बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इनकी आराधना से व्यक्ति को सदबुद्धि प्राप्त होती है और स्वभाव विनम्र हो जाता है। इनके दर्शन मात्र से दर्शनार्थी की जिद करने आदत छुट जाती है और वह सभ्य इंसान बन जाता है।

दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदला जा सकता है...यह रहे अचूक उपाय

दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदला जा सकता है...यह रहे अचूक उपाय


आमतौर पर यह मान्यता है कि शनिदेव बड़े ही निर्दयी स्वभाव के देवता हैं। लेकिन ऐसी मान्यता बड़ी ही सतही और भ्रामक है। अगर ज्योतिष की ही माने तो शनिदेव निर्दयी नहीं बल्कि बेहद न्यायप्रिय और जैसे के साथ तैसा करने वाले हैं। यह किसी भी व्यक्ति की उसके कर्मफलों और स्वभाव के अनुसार फल देने वाले न्यायप्रिय देवता हैं। यदि कोई इंसान मेहनती ईंमानदार और सच्चाई के रास्ते पर चलने वाला है तो शनिदेव उसको आश्चर्यजनक सफलता दिलाने में भरपूर मदद भी करते हैं, या यूं कहें कि योग्य व्यक्ति को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में शनिदेव का भरपूर सहयोग मिलता है। लेकिन पिछले कुछ अज्ञात गलत कर्मों के कारण यदि शनिदेव का प्रभाव हमारे जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हो तो उसे भी नीचे दिये गए अचूक उपायों से समाप्त किया जा सकता है...

- पिछले कर्मों के अच्छे-बुरे परिणामों की फ्रिक छोड़कर निष्काम भाव से सच्चे और न्यायप्रिय कर्म करें।

- प्रतिदिन सूर्योदय के समय गायत्री जप और ध्यान करें, लेकिन मन में किसी फल की आशा न रखें सिर्फ सद्बुद्धि की ही कामना रखें।

- माता-पिता यथा संभव प्रशन्न रखें इससे आपका बुरा प्रारब्ध भी समाप्त होने लगेगा।

- किसी का दिल न दुखाएं बद्दुआओं से सदा बच कर रहें।

- हर मंगलवान और शनिवार को शुन्दरकांड का पाठ करें और प्रतिदिन स्नान करने के बाद हनुमान चालीसा और गायत्री चालीसा का पाठ करें।

- प्रतिदिन 1-माला गायत्री मंत्र का जप और उगते हुए सूर्यदेव का ध्यान करें।

Sunday, July 17, 2011

घर के बाहर कोयले से बनाए स्वस्तिक, आपके परिवार को होगा फायदा

किसी भी व्यक्ति के जीवन में बुरा समय कब शुरू हो जाए, इसका पहले से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कोई भी नहीं चाहता कि उनके जीवन में कभी भी बुरा समय आए, इसी वजह से कई प्रकार के प्रयत्न किए जाते हैं। कई बार हमारे सुख, हमारी खुशियों, हमारे परिवार, हमारे घर को किसी की बुरी नजर लग जाती है। जिससे कुछ न कुछ बुरा अवश्य ही होता है।

लोगों की बुरी नजर से बचने के लिए ज्योतिष में कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। इन्हें अपनाने से कुदृष्टि के बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है। अपने घर, परिवार के सदस्यों और व्यापार को अन्य लोगों की बुरी नजर से बचाने के लिए घर के बाहर कोयले से स्वस्तिक बनाए। इस काले स्वस्तिक के प्रभाव से हमारे घर को किसी की बुरी नजर प्रभावित नहीं कर सकेगी। स्वस्तिक की पवित्रता और प्रभाव से सभी भलीभांति परिचित हैं। यह श्रीगणेश का प्रतीक चिन्ह हैं। सामान्यत: घरों के बाहर लाल रंग के स्वस्तिक बनाए जाते हैं जिनसे घर में सुख, शांति, समृद्धि बनी रहती है। काला स्वस्तिक बनाने से बुरी नजर से आने वाले बुरे समय को भी रोका जा सकता है।

सूखा नारियल और बादाम नदी में बहाएं, पैसों के साथ मिलेगी खुशियां

देवी-देवताओं के पूजन में नारियल का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है भगवान की पूजा में नारियल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। इसी वजह से नारियल के बिना किसी भी प्रकार का विधि-विधान से किया जाने वाला पूजन कर्म पूर्ण नहीं माना जा सकता। नारियल के महत्व को देखते हुए ज्योतिष में इससे संबंधित कई उपाय बताए गए हैं।

यदि कोई व्यक्ति जीवन में अत्यधिक कष्ट भोग रहा है और कार्यों में सफलता नहीं मिल रही है तो ज्योतिष कुछ उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से कई प्रकार के ग्रह दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं और सुख की प्राप्ति होती है।

वैसे तो सभी नौ ग्रहों का अपना अलग महत्व और अलग प्रभाव होता है लेकिन इन सभी शनि को अत्यधिक क्रूर ग्रह माना गया है। शनिदेव को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। अत: ये हमारे कर्मों के अनुसार हमें शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। सामान्यत: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को परेशानियां देने वाला ही माना जाता है। इस समय में शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए प्रति शनिवार किसी पवित्र बहती नदी में सूखा नारियल और बादाम प्रवाहित करें। इस उपाय को अपनाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में भी लाभ प्राप्त होता है। धन संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। घर-परिवार में खुशियोंभरा माहौल बना रहता है। इस उपाय के साथ शनिवार को तेल का दान करना भी अच्छा रहता है।