Thursday, February 24, 2011

गुगल का धुआं करें, घर का वातावरण होगा शुद्ध


वातावरण में हमेशा ही कई प्रकार के कीटाणु रहते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। घर में अच्छी तरह सफाई करने के बाद भी कई ऐसे कीटाणु जो आंखों से दिखाई नहीं देते, मौजूद रहते हैं। इनसे हमारे स्वास्थ्य को नुकसान तो है साथ ही घर का वातावरण भी अपवित्र रहता है।

घर के माहौल को शुद्ध और पवित्र बनाने के लिए प्रतिदिन सुबह के समय कंडे पर थोड़ी सी गुग्गल डालकर रखें। अब गुग्गल से जो धुआं निकले उसे घर के हर कमरे में पहुंचाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होगी और वास्तुदोषों का नाश होगा।

इस धुएं से वातावरण में मौजूद कई हानिकारक कीटाणु स्वत: ही नष्ट हो जाते हैं और घर का वातावरण एकदम शुद्ध और पवित्र हो जाता है। गुगल के धुएं से और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए  इस मंत्र का जप करें- ऊं नारायणाय नम:

यह मंत्र भगवान विष्णु का मंत्र है। चूंकि धन की देवी महालक्ष्मी भगवान श्रीहरि की पत्नी है अत: भगवान का मंत्र जप करने वाले व्यक्ति से देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न रहती हैं। देवी महालक्ष्मी की कृपा आपके घर पर होगी तथा धन संबंधी परेशानियां दूर होंगी।

Saturday, February 19, 2011

जानें और कब तक रहेंगे आपके बुरे दिन?

राशियां और ग्रह हमारे जीवन को पूरी तरह से प्रभावित करते है। यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह अशुभ फल देने वाला है तो वह अपनी वर्तमान स्थिति के अनुसार जब तक उस राशि में रहेगा तब तक आपको परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उसी तरह शुभ ग्रह अच्छा फल प्रदान करते हैं।

जानिए... कौन सा ग्रह, एक राशि में कितने समय तक रहता है और कब तक आपके जीवन को प्रभावित करता है।



जो ग्रह आपकी राशि में रहता है उसी के अनुसार आपको फल प्राप्त होते हैं। अत: ग्रह स्थिति के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए।



सूर्य- अगर आपकी कुंडली में सूर्य अशुभ है तो आपको सूर्य की वर्तमान स्थिति के अनुसार एक माह तक उसका फल मिलेगा।

चंद्र- किसी राशि वाले के लिए यह ग्रह अशुभ होने पर कुछ समय के लिए ही बुरा फल देता है। यानी सवा दो दिन ।

मंगल- एक राशि पर डेढ़ माह तक रहता है इसलिए इसका बुरा फल 45 दिन तक ही रहता है।

बुध- यह ग्रह एक राशि पर 30 तक ही अपना अच्छा या बुरा फल देता है।

गुरु- एक राशि पर गुरु का प्रभाव 12 महीने तक रहता है।

शुक्र- यह ग्रह एक राशि पर 27 दिन तक रहता है। इसलिए इसका शुभ अशुभ प्रभाव 27 दिन तक ही रहता है।

शनि- एक राशि पर शनि का शुभ-अशुभ प्रभाव ढाई साल तक रहता है।

राहु और केतु एक राशि पर डेढ़ साल तक अपना प्रभाव देते हैं। ये दोनो छाया ग्रह है इसलिए इनका शुभ अशुभ प्रभाव बदलता रहता है।

यदि कुंडली का केंद्र स्थान खाली हो...

कुंडली में चार केंद्र स्थान होते हैं। यह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम भाव होते हैं जो कि तन, सुख, दांपत्य एवं कर्म के कारक होते हैं।

यदि केंद्र में शुभ ग्रह हो तो जातक लक्ष्मीपति होता है। वहीं केंद्र में उच्च के पाप ग्रह बैठे हो तो जातक राजा तो होता ही है पर वह धन से हीन होता है।

सूर्य यदि उच्च को हो तथा गुरु केंद्र में चतुर्थ स्थान पर बैठा हो तो जातक आधुनिक केंद्र या राज्य में मंत्री पद को प्राप्त करता है। सूर्य के केंद्र में होने से जातक राजा का सेवक, चंद्रमा केंद्र में हो तो व्यापारी, मंगल केंद्र में हो तो व्यक्ति सेना में कार्य करता है।

बुध के केंद्र में होने से अध्यापक तथा गुरु के केंद्र में होने से विज्ञानी, शुक्र के केंद्र में होने पर धनवान तथा विद्यावान होता है। शनि के केंद्र में होने से नीच जनों की सेवा करने वाला होता है।

यदि केंद्र में कोई भी ग्रह नहीं हो तो जातक समस्या ग्रस्त परेशान रहता है। कोई भी ग्रह केंद्र में न हो तथा आप, ऋण, रोग, दरिद्रता से परेशान हो तो निम्न उपाय करें।

- शिवजी की उपासना करें।

- सोमवार का व्रत करें।

- भगवान शिव पर चांदी का नाग अर्पण करें।

- बिल्व पत्रों से 108 आहूतियां दें।

अलग-अलग रिश्तों के लिए अलग है ग्रह पूजा

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली से व्यक्ति के सभी पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर विचार किया जाता है। कुंडली के ग्रहों की स्थिति से मालूम किया जा सकता है कि उस व्यक्ति के अपने परिवार के लोगों से कैसे रिश्ते हैं और भविष्य में कैसे रहेंगे? मित्र कैसे हैं? इसी तरह अन्य सभी रिश्तों पर विचार किया जा सकता है।

हर रिश्ते को अलग-अलग ग्रह प्रभावित करते हैं-

रिश्ता- रिश्ते को प्रभावित करने वाला ग्रह

राज्य- सूर्य

भाई, मित्र- मंगल

गुरु, पिता, दादा- गुरु

चाचा, ताऊ- शनि

पुत्र- केतु

माता, दादी- चंद्र

पुत्री, बहन, बुआ- बुध

पत्नी या पति- शुक्र

ससुराल, ननिहाल- राहु

हर रिश्ता कैसा रहेगा यह कुंडली में स्थित ग्रहों के शुभ-अशुभ होने पर निर्भर करता है।

- यदि आपको राज्य या समाज में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आप सूर्य की आराधना करें। प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाएं, इससे समाज में यश, मान-सम्मान मिलेगा।

- भाई या मित्र से संबंध ठीक नहीं रहते तो मंगलदेव की आराधना करें। प्रति मंगलवार शिवलिंग पर लाल फूल चढ़ाएं।

- यदि पिता, दादा या गुरु से रिश्ता ठीक नहीं है तो गुरु अथवा ब्रहस्पति की पूजा कराएं। प्रतिदिन शिवजी को पीले फूल अर्पित करें।

- यदि चाचा या ताऊजी से संबंधों खटास है तो शनिवार को शनिदेव के निमित्त तेल का दान करें।

- यदि पुत्र आपकी नहीं सुनता, तो केतु का उपचार करें। केतु संबंधी वस्तुओं का दान दें।

- चंद्र की आराधना से माता और दादी से रिश्तों में सुधार आएगा।

- पुत्री, बहन या बुआ से रिश्तों में कड़वाहट आ गई है तो बुध ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें। बुधवार को श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करें।

- यदि पति-पत्नी के रिश्तों में किसी तरह की परेशानियां आ रही हैं तो शुक्रदेव को मनाएं। शुक्रवार को शुक्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।

- ससुराल या ननिहाल वालों को मनाने के लिए राहु जप कराएं।

जल्दी शादी के लिए गुरुवार का व्रत ही क्यों?

कहते हैं जिन लोगों की कुंडली में दोष होता है उनकी शादी में विघ्र आते हैं या तो उनकी शादी या तो बहुत जल्दी होती है या बहुत देर से होती है। लोगों के विवाह में देरी का एक कारण मंगली लड़की या लड़के का ना मिलना भी होता है। समय पर योग्य वर या वधु नहीं मिल पाते हैं। जो मिलते हैं वहां कोई दूसरी समस्या सामने आ जाती है। ऐसे में शीघ्र विवाह के लिए गुरु के उपाय करने को कहा जाता है।



ज्योतिष के अनुसार गृहस्थ जीवन को गुरु प्रभावित करता है। पारिवारिक शांति और सुखमय गृहस्थ जीवन के लिए बृहस्पति यानी गुरु से संबंधित उपाय किए जाते है तो निश्चित ही घर में सुख शांति बनी रहती है। दरअसल गुरु को विवाह का कारक गृह माना जाता है। जब किसी की कुंडली में गुरु अशुभ होता है तो उसकी कुंडली में विवाह विलंब योग बनता है।गुरु को जन्मकुंडली के सप्तम भाव का कारक माना जाता है।





कुंडली का यह भाव पति या पत्नी का माना गया है। इसलिए मंगल होने पर भी मंगल के उपाय के साथ ही ज्योतिषों द्वारा गुरुवार का व्रत रखने की ओर गुरु से जुड़े उपाय करने की सलाह दी जाती है ताकि जन्मकुंडली के दोष का निवारण हो और विवाह योग्य लड़के या लड़की का शीघ्र विवाह हो जाए।

Monday, February 7, 2011

हमारे द्वारा कार्य करने की प्रक्रिया



हमारे द्वारा कार्य करने की प्रक्रिया :-
हमारी इन्द्रियां जो कुछ देखती है ,सुनती है ,स्पर्श करती है ,सूंघती है ,चखती या स्वाद लेती है वो सुचना हमारे मन के पास पहुचती है ! मन फिर वो सूचना बुद्धि को देता है फिर बुद्धि उसके बारे में सोच विचार करती है ! सोच विचार करके बुद्धि मन को जवाब देती है फिर मन इन्द्रियों को जवाब देता है फिर इन्द्रियां जवाब के अनुसार अपना काम करती है ! 

मति में अगर तप है,मति अगर सुमति है ,बुद्धि सात्विक है तो वह उस सुचना का विवेक करती है ।
मति में अगर तप नहीं है , बुद्धि तामसी ,राजसी है तो वह मन इन्द्रियों को जो अच्छा लगे वही निर्णय देती है।

और ऐसा करते करते इन्सान की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है,जब देखने, सुनने, चखने, भोगने की वासना मति ने स्वीकार कर ली तो मति का स्वभाव हो जाता है कि अभी वह चखना है, यह खाना है, यह भोगना है। ऐसा करते-करते जीवन पूरा हो जाता है फिर भी कुछ न कुछ करना-भोगना, खाना-पीना बाकी रह जाता है। 

मनुष्य जन्म में ऐसी मति मिली है कि इससे वह भूत का, भविष्य का चिन्तन-विचार कर सकता है। पशु तो कुछ समय के बाद अपने माँ-बाप को भी भूल जाते हैं, भाई-बहन को भी भूल जाते है और संसार व्यवहार कर लेते हैं। मनुष्य की मति में स्मृति (याददास्त ) रहती है। इसलिए जो भी करो सोच समझकर करो,और फिर जैसा आप करोगे उसका परिणाम भी आपको ही भुगतना पड़ेगा !
हम अपनी बुद्धि को सात्विक बना सकते हैं, अपनी मति को सुमति बना सकते हैं ओर ये जप, तप ,ध्यान और सत्संग से संभव है
♥ हरी ॐ

सत्य धर्म

 
संतों ने ठीक ही कहा हैः

" साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।  
 जाके हिरदे साँच है, ताके हिरदे आप।”

'सत्य के समान कोई तप नहीं है एवं झूठ के समान कोई पाप नहीं है। जिसके हृदय में सच्चाई है, उसके  
हृदय में स्वयं परमात्मा निवास करते हैं।'

गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा हैः --"धरम न दूसरा सत्य समाना।"

सत्य के समान दूसरा कोई धर्म नहीं है।

मोहनदास कर्मचन्द गांधी ने अपने विद्यार्थी काल में सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र नामक नाटक देखा। उनके जीवन पर इसका इतना प्रभाव पड़ा कि उन्होंने दृढ़ निर्णय कर लियाः 'कुछ भी हो जाय, मैं सदैव सत्य ही बोलूँगा।

उन्होंने सत्य को ही अपना जीवनमंत्र बना लिया।

१.►एक बार पाठशाला में खेलकूद का कार्यक्रम चल रहा था। खेलकूद में रूचि न होने के कारण गांधीजी देर से आये ! देर से आया देखकर शिक्षक ने पूछाः "इतनी देर से क्यों आये ?"

मोहनलालः "खेलकूद में मेरी रूचि नहीं है और घर पर थोड़ा काम भी था, इसलिए देर से आया।"

शिक्षकः "तुम्हें एक आने का अर्थदण्ड(जुर्माना ) देना पड़ेगा।"

दण्ड सुनकर मोहनलाल रोने लगे। शिक्षक ने उन्हें रोते देखकर कहाः

"तुम्हारे पिता करमचंद गाँधी तो धनवान आदमी हैं। एक आना दण्ड के लिए क्यों रोते हो ?"

मोहनलालः "में एक आने के लिए नहीं रो रहा , मेने सच बता दिया ,कोई बहाना नहीं बनाया है, फिर भी आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं होता इसीलिए मुझे रोना आ गया।"

मोहनलाल की सच्चाई देखकर शिक्षक ने उन्हें माफ कर दिया। ये ही विद्यार्थी मोहन लाल आगे चलकर महात्मा गाँधी के रूप में करोड़ों-करोड़ों लोगों के दिलों-दिमाग पर छा गये।

२.►एक बार परीक्षा के समय स्कूल में शिक्षा विभाग के कुछ इन्सपैक्टर आये हुए थे। उन्होंने कक्षा के समस्त विद्यार्थियों को एक-एक कर पाँच शब्द लिखवाये। अचानक कक्षा - अध्यापक ने एक बालक की कापी देखी जिसमें एक शब्द गल्त लिखा था। अध्यापक ने उस बालक को पैर से इशारा किया कि पडोसी की कॉपी से गलत शब्द ठीक कर ले। ऐसे ही उन्होंने दूसरे बालकों को भी इशारा करके समझा दिया और सबने अपने शब्द ठीक कर लिये, पर उस बालक ने कुछ न किया।

इन्सपैक्टरों के चले जाने पर अध्यापक ने भरी कक्षा में उसे डाँटा और झिड़कते हुए कहा कि इशारा करने पर भी अपना शब्द ठीक नहीं किया ? कितना मूर्ख है !

इस पर बालक ने कहाः "अपने अज्ञान पर पर्दा डालकर दूसरे की नकल करना सच्चाई नहीं है।"

अध्यापकः "तुमने सत्य का व्रत कब लिया और कैसे लिया ?"

बालक ने उत्तर दियाः "राजा हरिश्चन्द्र के नाटक को देखकर, जिन्होंने सत्य की रक्षा के लिए अपनी पत्नी, पुत्र और स्वयं को बेचकर अपार कष्ट सहते हुए भी सत्य की रक्षा की थी।"

यह बालक कोई ओर नहीं बल्कि मोहनलाल करमचन्द गाँधी ही थे।


► सत्य का आचरण करने वाला निर्भय रहता है। उसका आत्मबल बढ़ता है। असत्य से ,सत्य अनंतगुना बलनान है। 
जो बात - बात में झूठ बोल देते है, उनका विश्वास कोई नहीं करता है। फिर एक झूठ को छिपाने के लिए सौ बार झूठ भी बोलना पड़ता है। अतः इन सब बातों से बचने के लिए पहले से ही सत्य का आचरण करना चाहिए। सत्य का आचरण करने वाला सदैव सबका प्रिय हो जाता है। 
शास्त्रों में भी आता हैः (सत्यं वद। धर्में चर।)

"सत्य बोलो। धर्म का आचरण करो। जीवन की वास्तिवक उन्नति सत्य में ही निहित है।"


जीवन काल की समाप्ति पर, जब हमारे शव को अर्थी पर ले जायेंगे तब भी लोग ये ही कहेंगे कि "राम नाम सत्य है "
उस दिन हमे पता चलता है की ये संसार तो झूठा था !

इसलिए आज से अभी से अपने आप को सत्य की ओर लगा दो , राम की ओर लगा दो !

"जय श्री राम " 

7 का महत्व

 





















* सात फेरे : ►
वैदिक रीति के अनुसार आदर्श विवाह में परिजनों के सामने अग्नि को अपना साक्षी मानते हुए सात फेरे लिए जाते हैं। प्रारंभ में कन्या आगे और वर पीछे चलता है। भले ही माता-पिता कन्या दान कर दें, भाई लाजा होम कर दे किंतु विवाह की पूर्णता सप्तपदी के पश्चात तभी मानी जाती है जब वर के साथ सात कदम चलकर कन्या अपनी स्वीकृति दे देती है। शास्त्रों ने अंतिम अधिकार कन्या को ही दिया है।

*सात वचन :►
वामा बनने से पूर्व कन्या वर से यज्ञ, दान में उसकी सहमति, आजीवन भरण-पोषण, धन की सुरक्षा, संपत्ति ख़रीदने में सम्मति, समयानुकूल व्यवस्था तथा सखी-सहेलियों में अपमानित न करने के सात वचन कन्या द्वारा वर से भराए जाते हैं। इसी प्रकार कन्या भी पत्नी के रूप में अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए सात वचन भरती है। सप्तपदी में पहला पग भोजन व्यवस्था के लिए, दूसरा शक्ति संचय, आहार तथा संयम के लिए, तीसरा धन की प्रबंध व्यवस्था हेतु, चौथा आत्मिक सुख के लिए, पाँचवाँ पशुधन संपदा हेतु, छटा सभी ऋतुओं में उचित रहन-सहन के लिए तथा अंतिम सातवें पग में कन्या अपने पति का अनुगमन करते हुए सदैव साथ चलने का वचन लेती है तथा सहर्ष जीवन पर्यंत पति के प्रत्येक कार्य में सहयोग देने की प्रतिज्ञा करती है।

*सात दिन :►
वर्ष एवं महीनों के काल खंडों को सात दिनों के सप्ताह में विभाजित किया गया है। 


*सात घोड़े :►
सूर्य के रथ में सात घोड़े होते हैं जो सूर्य के प्रकाश से मिलनेवाले सात रंगों में प्रकट होते हैं।


*सात रंग :►
आकाश में इंद्र धनुष के समय वे सातों रंग स्पष्ट दिखाई देते हैं। दांपत्य जीवन में इंद्रधनुषी रंगों की सतरंगी छटा बिखरती रहे इस कामना से 'सप्तपदी' की प्रक्रिया पूरी की जाती है।


*सात स्वर :►
सर्वविदित है कि भारतीय संगीत में सा, रे, गा, मा, पा, धा, नि अर्थात - षड़ज, ऋषभ, गांधोर, मध्यम, पंचम, धैवत तथा निषाद ये सात स्वर होते हैं।


*सात तल :►
इसी प्रकार अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल ये सात तल कहे गए हैं।


*सात ऋषि :►
मन, वचन और कर्म के प्रत्येक तल पर पति-पत्नी के रूप में हमारा हर कदम एक साथ उठे इसलिए आज अग्निदेव के समक्ष हम साथ-साथ सात कदम रखते हैं। हमारे जीवन में कदम-कदम पर मरीचि, अंगिरा, अत्रि, पुलह, केतु, पौलस्त्य और वैशिष्ठ ये सात ऋषि हम दोनों को अपना आशीर्वाद प्रदान करें तथा सदैव हमारी रक्षा करें।


*सात लोक :►
भू, भुवः स्वः, महः, जन, तप और सत्य नाम के सातों लोकों में हमारी कीर्ति हो। हम अपने गृहस्थ धर्म का जीवन पर्यंत पालन करते हुए एक-दूसरे के प्रति सदैव एकनिष्ठ रहें और पति-पत्नी के रूप में जीवन पर्यंत हमारा यह बंधन सात समंदर पार तक अटूट बना रहे तथा हमारा प्यार सात समुद्रों की भांति विशाल और गहरा हो। हमारे प्राचीन मनीषियों ने बहुत सोच-समझकर विवाह में इन परंपराओं की नींव रखी थी। विवाह संस्कार की संपूर्ण प्रक्रिया के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं। दांपत्य के भावी जीवन रूपी भवन का भविष्य 'विवाह संस्कार' निर्भर करता है।


*सात शुभ पदार्थ :►
प्रातःकाल मंगल दर्शन के लिए सात पदार्थ शुभ माने गए हैं। गोरोचन, चंदन, स्वर्ण, शंख, मृदंग, दर्पण और मणि इन सातों या इनमें से किसी एक का दर्शन अवश्य करना चाहिए।


*सात क्रियाएँ : ►
शौच, दंतधावन, स्नान, ध्यान, भोजन, भजन और शयन सात क्रियाएँ मानव जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अतः नित्य कर्म के रूप में इन्हें अवश्य करना चाहिए।

*सात स्नान :►
वेद स्मृति में स्नान भी सात प्रकार के बताए गए हैं। मंत्र स्नान, भौम स्नान, अग्नि स्नान, वायव्य स्नान, दिव्य स्नान, करुण स्नान तथा मानसिक स्नान जो क्रमशः मंत्र, मिट्टी, भस्म, गौखुर की धूल, सूर्य किरणों में, वर्षाजल, गंगाजल तथा आत्मचिंतन द्वारा किए जाते हैं। 


*सात अभिवादन योग्य :►
शास्त्रों में माता, पिता, गुरु, ईश्वर, सूर्य, अग्नि और अतिथि इन सातों को अभिवादन करना अनिवार्य बताया गया है

*सात आंतरिक अशुद्धियाँ :►
ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, लोभ, मोह, घृणा और कुविचार ये सात आंतरिक अशुद्धियाँ बताई गई हैं। अतः इनसे बचने के लिए सदैव सचेष्ट रहना चाहिए,

*सात सदाचार :►
बाह्यशुद्धि, पूजा-पाठ, मंत्र-जप, दान-पुण्य, तीर्थयात्रा, ध्यान-योग तथा विद्या और ज्ञान !


*सात विशिष्ट लाभ :►
जीवन में सुख, शांति, भय का नाश, विष से रक्षा, ज्ञान, बल और विवेक की वृद्धि 

*सात दांत साफ़ करने के वृक्ष :►
आयुर्वेद के अनुसार दाँतों की सफ़ाई करने के लिए आम, नीम, बेल, बबूल, गूलर, करंज तथा खैर - इन सात हरे वृक्षों की टहनी से बनी दातौन अच्छी मानी जाती है। लसौढ़ा, पलाश, कपास, नील, धव, कुश और काश - इन सातों से बनी दातौन से दाँत साफ़ करना वर्जित कहा गया है। 

*आयु में सात माह / सात दिन की कटोती :►
शनिवार के दिन बाल या नाखून काटने से उस दिन के अभिमानी देवता सात माह की आयु क्षीण कर देते हैं तथा सोमवार को बाल या नाखून काटने से सात माह की आयु वृद्धि होती हैं।

Tuesday, December 7, 2010

samany upay

Q.1 नौकरी बार बार छूट जाती है ?

Ans :- 10 साधुओं को हर साल खाना खिलाए पर उनको पैसे ना दें, 43 दिन तक गेंहू और गुड़ मिला कर उनके लड्डू बनाए और स्कूल के बच्चो को बाँटे, हर रोज केसर का तिलक माथे ज़ुबान और नाभि मे लगाए, 43 दिन तक तीन केले मंदिर मे दान दें

Q.2 बहुत इंटरव्यू दिए पर पास नही हो पाता, कोई ना कोई बात रह जाती है ?

Ans:- 43 दिन दो मुट्ठी सौंफ सरकारी संस्थान मे दान दें, 43 दिन पतीसा पिता को खिलाएँ, पिता को 7 रत्ती का मूँगा सोने मे डाल कर पहनाए

Q.3 सरकार के द्वारा परेशानी रहती है ?

Ans:- राहु की वस्तु से परहेज करें जैसे काले नीले रंग से, आदित्या हारदीए सूत्रा का पाठ करें, बंदरो को गुड़ खिलाते रहे, मंदिर से पैसा उठा कर लाल कपड़े मे बाँध कर जेब मे रखे (तांबे का पैसा हो तो सही), हर सूर्या ग्रहण मे 4 नारियल 400 ग्राम साबुत बादाम जल प्रवाह करें, इन लोगो की पिता से नही बनती या इनके पिता किसी काबिल नही होते है, सूर्या मध्यम राही मार्तंड यंत्रा गले मे पहेने |

Q.4 सरकारी कामो मे हाथ डालता हूँ, पर काम नही बनता ?

Ans :- राहु की वस्तुओं से परहेज करें, जैसे काले नीले रंग से, आदित्या हरदीए सूत्रा का पाठ करें, बंदरो को गुड़ खिलाते रहे, मंदिर से पैसा उठा कर लाल कपड़े मे बाँध कर जेब मे रखे (तांबे का पैसा हो तो सही), हर सूर्या ग्रहण मे 4 नारियल 400 ग्राम साबुत बादाम जल प्रवाह करें, जिन लोगो की पिता से नही बनती या जिनके पिता किसी काबिल नही होते है, वह सूर्या रही मध्यम राही मार्तंड यंत्रा गले मे पहने |

Q. 5 घर मे रोज झगड़ा होता रहता है ?

Ans:- 43 दिन सिरहाने पानी रख कर कीकर के पेड़ मे डाले, 43 दिन 3 केले मंदिर मे दें, चाँदी के बर्तन मे गंगा जल और चाँदी का चकोर टुकड़ा डाल कर रखे, विद्वान या माता के पावं मे हाथ लगाकर आशीर्वाद ले, घर के उत्तर पूर्व कोने से संदूक, ट्रंक या किसी भी प्रकार की गंदगी हो तो हटा दे, (चंद्र केतु मध्यम मार्तंड यंत्रा गले मे धारण करे)

Q. 6 जो काम करता हूँ, पूरा नही होता ?

Ans:- 43 दिन गाय के घी का दीपक मंदिर मे जलाएँ, ज़मीन मे पैदा हुई सब्जी धार्मिक स्थान मे दे, सूर्या मध्यम मार्तंड यंत्रा गले मे धारण करें

Q.7 मुझे रात को नींद नही आती है ?

Ans :- 2 किलो सौंफ सूती लाल कपड़े मे बाँध कर सोने वाले कमरे मे रखे, 2 किलो देसी खंड, लाल कपड़े मे बाँध रखें, हर रोज सिरहाने पानी रख कर सोए, और रोज किसी बड़े पेड़ मे डाल दे पिए नही, पूरब और उत्तर की तरफ सर रख कर ना सोए, 48 दिन 3केले मंदिर मे दे, कुत्तो की सेवा करें, और केतु मध्यम मार्तंड यंत्र गले मे पहनें, कमर पावं मे दर्द हो तो उल्टे हाथ मे सोना शुरू करें.

Q. 8 उदास रहता हूँ ?

Ans :- हरे और नीले रंग से परहेज रखे, बुध और राहु की वस्तुएँ घर से निकालें, बुध राहु मार्तंड यंत्र गले मे डाले, 6 दिन के लिए नाक छेदन करवाएँ, सोना या चाँदी की तार या सफेद धागा नाक मे पहने, 6 दिन 6 कन्याओं को 6-6 साबुत बादाम दें.

Q.9 हमेशा डर लगा रहता है ?

Ans:- सोने वाले तकिये मे लाल रंग की फिटकरी रखे, 43 दिन नारियल बादाम मंदिर मे रखे या जल प्रवाह करे, जल्दी से कान छेदन करवा कर सोना धारण करें, गुस्सा बहुत आता हो तो सूर्य शनि मार्तंड यंत्रा गले मे धारण करें, और यदि गुस्सा ना आता हो तो चंद्र राहु मार्तंड यंत्रा धारण करें,

Q10 . मरने का डर लगता है ?

Ans :- 96 दिन के लिए नाक छेदन करवा कर चाँदी धारण करे, 43 दिन खाली मटका जल प्रवाह करें, लोहे का छल्ला बीच वाली उंगली मे धारण करे, (बुध गुरु सर्वा मार्तंड यंत्रा गले मे धारण करे, और तांबे के छेड़ वाला पैसा गले मे पहने)

Q.11 पढ़ाई मे मन नही लगता है ?

Ans :- 43 दिन 500 ग्राम दूध मंदिर मे दें, सूर्या अस्त के बाद दूध और चावल का इस्तेमाल ना करे, चाँदी के बर्तन मे गंगा जल रखे, हर रोज केसर का तिलक माथे ज़ुबान और नाभि मे करे, 43 दिन बड़ के पेड़ पर दूध चड़ा कर गीली मिट्टी का तिलक करे, हर गुरुवार और सोमवार को सफेद घोड़े या पीले घोड़े को चने की दाल खिलाएँ, चंद गुरु मध्यम मार्तंड यंत्रा गले मे धारण करे

Q.12 किसी काम मे मन नही लगता है ?

Ans :- 43 दिन 500 ग्राम दूध मंदिर मे दें, सूर्य अस्त के बाद दूध और चावल का इस्तेमाल ना करे, चाँदी के बर्तन मे गंगा जल करें, हर रोज केसर का तिलक माथे ज़ुबान और नाभि मे करे, 43 दिन बड़ के पेड़ पर दूध चड़ा कर गीली मिट्टी का तिलक करे, हर गुरुवार और सोमवार को सफेद घोड़े या पीले घोड़े को चने की दाल खिलाएँ, चंद गुरु मध्यम मार्तंड यंत्र गले मे धारण करे

Q.13 सब से अधिक अपने आपको ग़रीब बेसहारा समझता हूँ ?

Ans :- हर सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण पर 4 नारियल और 400 ग्राम साबुत बादाम जल प्रवाह करें, घर के उत्तर पूर्व मे पानी का कुंभ लगाएँ, चाँदी तन मे धारण करें, हर शुक्रवार अपने वजन के बराबर हरा चारा गाए को खिलाए, हर रोज इत्र का इस्तेमाल करें, हर रोज नहा कर साफ़ कपड़े प्रेस किए हुए पहने, हर रोज उगते हुए सूरज के सामने खड़े हों.

Q.14 कुछ ऑपर्चुनिटी मिलती है, पर डर के कारण उसको ले नही पाता?

Ans :- अंडर गारमेंट मे पीले रंग के कपड़ो का इस्तेमाल करें, पीले कपड़ो मे 9 लाल मिर्च बांद कर घर में कील पर टाँगे, 43 दिन फिटकरी से दाँत सॉफ करन, राहु मध्यम मार्तंड यंत्रा गले मे धारण करें.

Monday, October 11, 2010

भूमि का चयन

 भूमि का चयन 
वास्तु के प्राचीन शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि निर्माण के लिए भूमि का चयन करते समय मिट्टी के स्वरूप की परख अवश्य की जाए। अन्य पहलुओं के साथ-साथ वह भी महत्वपूर्ण कारक है। वास्तु में मिट्टी को उसके रंग, स्वाद और महक के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है- ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य व शूद्र। जो मिट्टी श्वेत, थोड़ी लाल, भीनी-भीनी महक वाली और उपजाऊ होती है वह आवास तथा व्यावसायिक कार्यों के लिए बहुत शुभ होती है। काले वर्ण की दुर्गंधित और तीखे स्वाद वाली मिट्टी को अशुभ माना जाता है।

मिट्टी का विश्लेषण मिट्टी में निहित पंचतत्वों के गुणों के आधार पर किया जाता है। वास्तु संबंधी शास्त्रों में मिट्टी की विशेषताओं की व्याख्या रूप, रस , गंध , रंग , आकार , स्पर्श व ढलान के आधार पर की गई है और उसे ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य तथा शूद्र श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
मिट्टी की विशेषताओं का रहने वाले लोगों पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार अलग-अलग श्रेणी की मिट्टी विभिन्न वर्ग और श्रेणी के निवासियों के लिए उपयुक्त होती है। उदाहरण के लिए ब्राह्मणी भूमि बुद्धिजीवियों , वैज्ञानिकों व धार्मिक नेताओं के लिए अच्छी मानी जाती है। इसका रंग श्वेत होता है , महक अच्छी होती है और स्वाद मीठा होता है। प्राचीन समय में देखा गया था कि अलग-अलग प्रकार की मिट्टी की जैविक संरचना और विशेषताएं अलग-अलग तरह के लोगों के लिए अनुकूल सिद्ध होती है और प्रभामंडल को और प्रभावी बनाती है।

मिट्टी की विशेषताओं और वहां रहने वाले लोगों के गुणों में परस्पर संबंध होता है। इनके सही मेल से वांछित लाभ अर्जित किया जा सकता है। ध्यान रखें कि यह वर्गीकरण जाति के आधार पर नहीं किया गया है, बल्कि व्यवसाय , कार्य के स्वरूप व मूल प्रवृत्ति के आधार पर किया गया है।

मिट्टी की जांच
प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूचाल , चक्रवात आदि की विनाशक शक्ति को झेलने में कोई भवन कितना सक्षम है , यह इस बात पर निर्भर करता है कि भवन का मूल आधार अर्थात् मिट्टी कितनी उपयुक्त व सुदृढ़ है। हमारे मनीषियों ने भवन की सुदृढ़ता और स्थायित्व के लिए भूखंड की मिट्टी की
गुणवत्ता , शुभता और अनुकूलताएं नींव स्थापना और भूखंड के सही आकार की महत्ता पर बल दिया था।
वास्तुशास्त्र के अनुसार निर्माण उसी भूमि पर करना चाहिए, जिस भूमि की मिट्टी में घनत्व अधिक हो। आधुनिक समय में भी मिट्टी के अधिक घनत्व वाली भूमि को अच्छा माना जाता है और मिट्टी की सुदृढ़ता व उपयुक्तता की परख करने के लिए जांच की जाती है। यकीनन , हमारे पूर्वजों को भवन निर्माण संबंधी सभी पहलुओं का ज्ञान था। उन्हें न केवल वास्तुकला के सिद्धांतों का ज्ञान था, बल्कि मनुष्य में और उसके चारों ओर व्याप्त सूक्ष्म ब्रह्मांडीय ऊर्जा का भी पता था।
वास्तु में मिट्टी की शक्ति को परखने के लिए उसकी जांच करने की बात कही गई है, क्योंकि मिट्टी को ही भवन का पूरा भार वहन करना पड़ता है और प्राकृतिक शक्तियों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। हमारे प्राचीन वास्तु ग्रंथों में मिट्टी के घनत्व की जांच के लिए बहुत साधारण और सरल विधियां बताई गईं हैं।
भूखंड के बीच में एक हाथ लंबा, एक हाथ चौड़ा और एक हाथ गहरा गड्ढा खोदकर उसे उसमें से निकाली गई मिट्टी से ही भर देना चाहिए। यदि गड्ढे को अच्छी तरह भरने के बाद भी मिट्टी बच जाए तो वह भूमि घर बनाने के लिए उत्तम होती है। यदि उस मिट्टी से गड्ढा भर दिया जाए और मिट्टी न बचे तो भूमि मध्यम होती है और यदि गड्ढा भरने में मिट्टी कम पड़ जाए तो उस भूमि पर भवन निर्माण नहीं करना चाहिए।
मिट्टी को परखने के लिए खाली गड्ढे को शाम के समय पानी से भरकर छोड़ देना चाहिए। सुबह तक यदि इस गड्ढे में कुछ पानी बचे तो वह भूमि मकान बनाने के लिए शुभ होती है। यदि गड्ढे में गीली-गीली मिट्टी हो तो भूमि मध्यम होती है , यदि गड्ढे में पानी न हो और दरारें हो तो उस भूमि पर मकान नहीं बनाना चाहिए।

भूमि जांच का एक अन्य तरीका भूमि पर हल चलाकर भी किया जाता है। हल चलाने से ऊपरी सतह के हट जाने के बाद मिट्टी की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है। यदि पशुओं की हड्डियां , बाल आदि मिले तो उस भूमि को निर्माण के लिए अशुभ माना जाता है। भूमि का मुख्य गुण उसका चिकनापन और ठोस होना माना गया है। रेतीली मिट्टी एक स्थिर भवन के निर्माण के लिए सही नहीं समझी जाती। दरारों वाली , चींटियों और दीमकों के बिल वाली , दलदली और ऊंची-नीची भूमि पर भवन निर्माण नहीं करना चाहिए।
अगर ऐसी भूमि पर भवन बनाना जरूरी हो तो उसकी ( 5.5-6 फुट तक) खुदाई कर उसमें अशुभ चीजों का शोधन करके बडे़ गोल पत्थरों और चिकनी मिट्टी से भरकर समतल कर लेना चाहिए। उसके बाद पानी से पूरे भूखंड को संचित कर फिर भवन निर्माण करवाना चाहिए।

Friday, October 1, 2010

अनमोल ज्योतिष सूत्र

अनमोल ज्योतिष सूत्र

  • यदि आपको आर्थिक समस्या रहती है तो आप प्रात: उठने के साथ ही अपनी जनम तिथि  का २१ बार उच्चारण करें |  जैसे, यदि आपका जन्म शुक्लपक्ष की पंचमी को हुआ है तो आप "शुक्लपक्ष पंचमी"-"शुक्लपक्ष  पंचमी" का नियमित रूप से २१ बार उच्चारण  करें | इसी प्रकार सोने के लिए बिस्तर पर जाने पर करें अर्थात दिन में दो बार करें | कुछ ही समय में आपको चमत्कार महसूस होगा| यह कार्य आप जितने अधिक विश्वाश से करेंगे, उतना ही शीघ्र लाभ द्रष्टि गोचर होगा |
  •  इसी प्रकार जन्म वार के दिन उच्चारण से आयु में वृर्द्धि होती है | 
  • जन्म नक्षत्र के दिन में दो बार उच्चारण से अनजाने में होने वाली गलतियों से मुक्ति मिलती है | 
  • दिन में दो बार जन्म योग के उच्चारण से रोग से मुक्ति मिलकर शरीर स्वस्थ रहता है | यह प्रयोग उन लोगो को करना चाहिए जिन पर कोई भी दवा का असर नहीं कर रही हो | या जो काफी समय से अस्वस्थ हैं या स्वस्थ नहीं हो पा रहे थे | 



Thursday, September 23, 2010

Timing of marriage

Timing of marriage

a. Saturn, during transit, should create a relation with 7th house or 7th lord from Lagna, Moon or 'kalatra' significator Venus (for men) and Jupiter (for women).

b. Examine whether Jupiter also creates a relation by way of conjunction or aspect. Check also, if Jupiter during transit creates relation with 7th house or 7th lord from Moon or significator Venus (and Jupiter) or lords of their stars

2. Delay in marriage

a. When Sun, Rahu and Saturn aspect the 7th lord or occupy the 7th house from Ascendant/Moon it indicates considerable delay.
b. When Venus, Moon and Saturn are in 7th house marriage can be delayed upto the age of 30 to 35 years

3. Spouse

a. Marriage to a person in far off place is indicated when Moon is in 7th house and malefics occupy 5th and 9th houses from Moon marriage.
b. Early marriage to a partner living nearby can be predicted when Venus occupies 7th house and aspects its own dispositor.
c. If the Sun and Venus are in 5th, 7th or 9th house, there can be weakness to the limbs of the spouse.

4. Matching of horoscopes

a. Matching of Guna/Kuta can be done considering the birth star of boy and girl.
i. If the maximum number of gunas is 36 and a minimum 18, the match is approved as Guna/Kuta compatible.
b. A happy married life is indicated if
i. The Sun of the girl's chart and the Moon of the boy's chart are 120 deg apart
ii. The Sun of the girl and Moon of the boy interchange their houses and
iii. The Sun of the girl and Moon of the male aspect each other.
c. The match is approved if Samasaptama is present
i. Ascendant/Moon/Navamsa of the girl is 7th to the Ascendant of the boy.
d. The running Dasa of the boy and the girl should be mutually friendly
e. There should be no Dasa Sandhi at the time of marriage.

5. Love Marriage

a. Successful,
i. If the 5th house and 5th lord, 7th lord, Venus and Jupiter in both the charts are strong.
ii. If 7th lord, 5th lord and Venus are strong with benefic aspects and related to each other.
b. Unsuccessful
i. If Venus is in 7th in the natal chart and Navamsa.
ii. If Venus, Mars and Saturn in 7th or Saturn in 2nd house.

6. Marital Separation/Discord/Divorce

1. Separation is indicated if Mars and Saturn relate to the 7th lord or Venus.
2. Discord is indicated
i. if Mars, Saturn and Venus are together in 8th house.
ii. If Mars and Saturn are in ascendant
3. If Venus is in an angle opposite Mars and Jupiter, divorce is indicated
7. Second Marriage if. Moon and Venus join together and are strong.
a. 7th lord's Navamsa is debilitated, combust or in enemy's house.
b. Venus in 2, 5, 8, 11 sign with Ketu or aspect of Ketu
c. Moon and Saturn in 7th house.
No Marriage if. Ascendant lord and 7th lord are in 2/12 position.
a. Ascendant lord and 7th lord in 6/8 position.
b. 7th lord and Sun in 1, 4, 7 and 10 signs.

Marriage is a sacred institution that imposes equal moral, social and spiritual responsibility to husband and wife. The institution of a hindu marriage includes the Saptapadi or the taking of seven steps by the bridegroom and the bride jointly before the sacred fire. The marriage becomes complete and binding when the seventh step is taken. The bride and the groom vow that they would be true and loyal to each other and would remain companions and friends for a lifetime.

Tuesday, September 14, 2010

लाल किताब के सिद्ध टोटके

1.       आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए :
यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें !
2.       घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए :
इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें ! या
एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें !
3.       परेशानी से मुक्ति के लिए :
आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें ! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय ! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें ! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी !
4.      कुंवारी कन्या के विवाह हेतु :
१.       यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !
२.      प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी 
5.       व्यापार बढाने के लिए :
१.       शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें ! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही !
२.      पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें !
३.      शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें ! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें ! उसके तीन हिस्से कर लें ! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें ! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें ! यह प्रयोग 40 दिन तक करें ! कारोबार में लाभ होगा !
6.       लगातार बुखार आने पर :   
१.       यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा !
२.      इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें ! 
३.      यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा !
7.       नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिए :
पांच ग्राम डली वाला सुरमा लें ! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें ! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें ! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो ! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए !
8.        कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो :
यदि उपरोक्त स्थिति का सामना हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें ! अवश्य लाभ होगा !
9.       मुकदमें में विजय पाने के लिए :
यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट/कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें ! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है ! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा ! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा !
10.       धन के ठहराव के लिए :
आप जो भी धन मेहनत से कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो रहा हो अर्थात घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें को आपके घर में कोई नल लीक न करता हो ! अर्थात पानी टप–टप टपकता न हो ! और आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिये ! वरना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की सम्भावना रह्ती है !
11.       मानसिक परेशानी दूर करने के लिए :
रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें !
12.       बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए :
१.       एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !
२.      प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा !
 13.       किसी रोग से ग्रसित होने पर :
सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें ! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें ! सेहत ठीक रहेगी !
14.       प्रेम विवाह में सफल होने के लिए :
यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो :
शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !
15.       नौकर न टिके या परेशान करे तो :
हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें ! ऐसा आप चार मंगलवार करें !     
16.       बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो :
हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें !
17.       यदि आपको सही नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही हो तो :
१.       कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए !
२.      काला कम्बल किसी गरीब को दान दें !
३.      6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों !
18.       अगर आपका प्रमोशन नहीं हो रहा तो :
१.       गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें !
२.      हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें !
19.       पति को वश में करने के लिए :
यह प्रयोग शुक्ल में पक्ष करना चाहिए ! एक पान का पत्ता लें ! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें ! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें ! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय ! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय ! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो ! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें ! 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें ! शीघ्र समस्या का समाधान होगा !
     नोट :

1. लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए ! अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले !
2. सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए !
3. किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है !
 
  4. सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा !
5. एक दिन में एक ही उपाय करना चाहिए ! यदि एक से ज्यादा उपाय करने हों तो छोटा उपाय पहले करें !    एक उपाय के दौरान दूसरे उपाय का कोई सामान भी घर में न रखें !
6. जो भी उपाय शुरू करें तो उसे पूरा अवश्य करें ! अधूरा न छोडें !

लाल किताब के सिद्ध टोटके

लाल किताब के सिद्ध टोटके
नानक दुखिया सब संसार ! आज संसार में हर आदमी दुखी है ! चाहे अमीर हो या गरीब, बडा हो या छोटा ! हर इंसान को कोई न कोई परेशानी लगी रहती है ! ज्योतिष में इसके लिए कई उपाय सुझाए गए हैं ! जिनको विधि पूर्वक करके हम लाभ उठा सकते हैं !
लाल किताब उत्तर भारत में खास कर पंजाब में बहुत प्रसिद्ध है ! अब इसका प्रचार धीरे-धीरे पूरे भारत में हो रहा है ! इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण इसके आसान, सस्ते और सटीक उपाय हैं ! इसमें कई उपाय ग्रहों की बजाय लक्षणों से बताये जाते हैं ! आपके लाभ के लिए कुछ सिद्ध उपाय निम्न प्रकार से हैं –
1. यदि आपको धन की परेशानी है, नौकरी मे दिक्कत आ रही है, प्रमोशन नहीं हो रहा है या आप अच्छे करियर की तलाश में है तो यह उपाय कीजिए :
किसी दुकान में जाकर किसी भी शुक्रवार को कोई भी एक स्टील का ताला खरीद लीजिए ! लेकिन ताला खरीदते वक्त न तो उस ताले को आप खुद खोलें और न ही दुकानदार को खोलने दें ताले को जांचने के लिए भी न खोलें ! उसी तरह से डिब्बी में बन्द का बन्द ताला दुकान से खरीद लें ! इस ताले को आप शुक्रवार की रात अपने सोने के कमरे में रख दें ! शनिवार सुबह उठकर नहा-धो कर ताले को बिना खोले किसी मन्दिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थान पर रख दें ! जब भी कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला खुल जायगा !
2. यदि आप अपना मकान, दुकान या कोई अन्य प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और वो बिक न रही हो तो यह उपाय करें :
बाजार से 86 (छियासी) साबुत बादाम (छिलके सहित) ले आईए ! सुबह नहा-धो कर, बिना कुछ खाये, दो बादाम लेकर मन्दिर जाईए ! दोनो बादाम मन्दिर में शिव-लिंग या शिव जी के आगे रख दीजिए ! हाथ जोड कर भगवान से प्रापर्टी को बेचने की प्रार्थना कीजिए और उन दो बादामों में से एक बादाम वापिस ले आईए ! उस बादाम को लाकर घर में कहीं अलग रख दीजिए ! ऐसा आपको 43 दिन तक लगातार करना है ! रोज़ दो बादाम लेजाकर एक वापिस लाना है ! 43 दिन के बाद जो बादाम आपने घर में इकट्ठा किए हैं उन्हें जल-प्रवाह (बहते जल, नदी आदि में) कर दें ! आपका मनोरथ अवश्य पूरा होगा ! यदि 43 दिन से पहले ही आपका सौदा हो जाय तो भी उपाय को अधूरा नही छोडना चाहिए ! पूरा उपाय करके 43 बादाम जल-प्रवाह करने चाहिए ! अन्यथा कार्य में रूकावट आ सकती है !
3. यदि आप ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन से परेशान हैं तो :
 इतवार की रात को सोते समय अपने सिरहाने की तरफ 325 ग्राम दूध रख कर सोंए ! सोमवार को सुबह उठ कर सबसे पहले इस दूध को किसी कीकर या पीपल के पेड को अर्पित कर दें ! यह उपाय 5 इतवार तक लगातार करें ! लाभ होगा !
4. माईग्रेन या आधा सीसी का दर्द का उपाय :
सुबह सूरज उगने के समय एक गुड का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खडे हो जांय ! गुड को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दीजिए ! गुड के दोनो हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापिस आ जांय ! यह उपाय किसी भी मंगलवार से शुरू करें तथा 5 मंगलवार लगातार करें ! लेकिन….लेकिन ध्यान रहे यह उपाय करते समय आप किसी से भी बात न करें और न ही कोई आपको पुकारे न ही आप से कोई बात करे ! अवश्य लाभ होगा !
5. फंसा हुआ धन वापिस लेने के लिए :
यदि आपकी रकम कहीं फंस गई है और पैसे वापिस नहीं मिल रहे तो आप रोज़ सुबह नहाने के पश्चात सूरज को जल अर्पण करें ! उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें तथा सूर्य भगवान से पैसे वापिसी की प्रार्थना करें ! इसके साथ ही “ओम आदित्याय नमः “ का जाप करें !
नोट :
1. लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए ! अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले !
2. सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए !
3. किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है !
4. सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा !

दूकान की बिक्री

दूकान की बिक्री

दूकान की बिक्री अधिक हो-
१॰ “श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दल निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नमः। लक्ष्मी माई, सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करो भलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई।”
विधि- घर से नहा-धोकर दुकान पर जाकर अगर-बत्ती जलाकर उसी से लक्ष्मी जी के चित्र की आरती करके, गद्दी पर बैठकर, १ माला उक्त मन्त्र की जपकर दुकान का लेन-देन प्रारम्भ करें। आशातीत लाभ होगा।
२॰ “भँवरवीर, तू चेला मेरा। खोल दुकान कहा कर मेरा।
उठे जो डण्डी बिके जो माल, भँवरवीर सोखे नहिं जाए।।”
विधि- १॰ किसीशुभ रविवार से उक्त मन्त्र की १० माला प्रतिदिन के नियम से दस दिनों में १०० माला जप कर लें। केवल रविवार के ही दिन इस मन्त्र का प्रयोग किया जाता है। प्रातः स्नान करके दुकान पर जाएँ। एक हाथ में थोड़े-से काले उड़द ले लें। फिर ११ बार मन्त्र पढ़कर, उन पर फूँक मारकर दुकान में चारों ओर बिखेर दें। सोमवार को प्रातः उन उड़दों को समेट कर किसी चौराहे पर, बिना किसी के टोके, डाल आएँ। इस प्रकार चार रविवार तक लगातार, बिना नागा किए, यह प्रयोग करें।

२॰ इसके साथ यन्त्र का भी निर्माण किया जाता है। इसे लाल स्याही अथवा लाल चन्दन से लिखना है। बीच में सम्बन्धित व्यक्ति का नाम लिखें। तिल्ली के तेल में बत्ती बनाकर दीपक जलाए। १०८ बार मन्त्र जपने तक यह दीपक जलता रहे। रविवार के दिन काले उड़द के दानों पर सिन्दूर लगाकर उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित करे। फिर उन्हें दूकान में बिखेर दें।

नजर उतारने के उपाय

नजर उतारने के उपाय
१॰ बच्चे ने दूध पीना या खाना छोड़ दिया हो, तो रोटी या दूध को बच्चे पर से ‘आठ’ बार उतार के कुत्ते या गाय को खिला दें।
२॰ नमक, राई के दाने, पीली सरसों, मिर्च, पुरानी झाडू का एक टुकड़ा लेकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर से ‘आठ’ बार उतार कर अग्नि में जला दें। ‘नजर’ लगी होगी, तो मिर्चों की धांस नहीँ आयेगी।
३॰ जिस व्यक्ति पर शंका हो, उसे बुलाकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर उससे हाथ फिरवाने से लाभ होता है।
४॰ पश्चिमी देशों में नजर लगने की आशंका के चलते ‘टच वुड’ कहकर लकड़ी के फर्नीचर को छू लेता है। ऐसी मान्यता है कि उसे नजर नहीं लगेगी।
५॰ गिरजाघर से पवित्र-जल लाकर पिलाने का भी चलन है।
६॰ इस्लाम धर्म के अनुसार ‘नजर’ वाले पर से ‘अण्डा’ या ‘जानवर की कलेजी’ उतार के ‘बीच चौराहे’ पर रख दें। दरगाह या कब्र से फूल और अगर-बत्ती की राख लाकर ‘नजर’ वाले के सिरहाने रख दें या खिला दें।
७॰ एक लोटे में पानी लेकर उसमें नमक, खड़ी लाल मिर्च डालकर आठ बार उतारे। फिर थाली में दो आकृतियाँ- एक काजल से, दूसरी कुमकुम से बनाए। लोटे का पानी थाली में डाल दें। एक लम्बी काली या लाल रङ्ग की बिन्दी लेकर उसे तेल में भिगोकर ‘नजर’ वाले पर उतार कर उसका एक कोना चिमटे या सँडसी से पकड़ कर नीचे से जला दें। उसे थाली के बीचो-बीच ऊपर रखें। गरम-गरम काला तेल पानी वाली थाली में गिरेगा। यदि नजर लगी होगी तो, छन-छन आवाज आएगी, अन्यथा नहीं।
८॰ एक नींबू लेकर आठ बार उतार कर काट कर फेंक दें।
९॰ चाकू से जमीन पे एक आकृति बनाए। फिर चाकू से ‘नजर’ वाले व्यक्ति पर से एक-एक कर आठ बार उतारता जाए और आठों बार जमीन पर बनी आकृति को काटता जाए।
१०॰ गो-मूत्र पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पिलाए और उसके आस-पास पानी में मिलाकर छिड़क दें। यदि स्नान करना हो तो थोड़ा स्नान के पानी में भी डाल दें।
११॰ थोड़ी सी राई, नमक, आटा या चोकर और ३, ५ या ७ लाल सूखी मिर्च लेकर, जिसे ‘नजर’ लगी हो, उसके सिर पर सात बार घुमाकर आग में डाल दें। ‘नजर’-दोष होने पर मिर्च जलने की गन्ध नहीं आती।
१२॰ पुराने कपड़े की सात चिन्दियाँ लेकर, सिर पर सात बार घुमाकर आग में जलाने से ‘नजर’ उतर जाती है।
१३॰ झाडू को चूल्हे / गैस की आग में जला कर, चूल्हे / गैस की तरफ पीठ कर के, बच्चे की माता इस जलती झाडू को 7 बार इस तरह स्पर्श कराए कि आग की तपन बच्चे को न लगे। तत्पश्चात् झाडू को अपनी टागों के बीच से निकाल कर बगैर देखे ही, चूल्हे की तरफ फेंक दें। कुछ समय तक झाडू को वहीं पड़ी रहने दें। बच्चे को लगी नजर दूर हो जायेगी।
१४॰ नमक की डली, काला कोयला, डंडी वाली 7 लाल मिर्च, राई के दाने तथा फिटकरी की डली को बच्चे या बड़े पर से 7 बार उबार कर, आग में डालने से सबकी नजर दूर हो जाती है।
१५॰ फिटकरी की डली को, 7 बार बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर आग में डालने से नजर तो दूर होती ही है, नजर लगाने वाले की धुंधली-सी शक्ल भी फिटकरी की डली पर आ जाती है।
१६॰ तेल की बत्ती जला कर, बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर दोहाई बोलते हुए दीवार पर चिपका दें। यदि नजर लगी होगी तो तेल की बत्ती भभक-भभक कर जलेगी। नजर न लगी होने पर शांत हो कर जलेगी।
१७॰ “नमो सत्य आदेश। गुरु का ओम नमो नजर, जहाँ पर-पीर न जानी। बोले छल सो अमृत-बानी। कहे नजर कहाँ से आई ? यहाँ की ठोर ताहि कौन बताई ? कौन जाति तेरी ? कहाँ ठाम ? किसकी बेटी ? कहा तेरा नाम ? कहां से उड़ी, कहां को जाई ? अब ही बस कर ले, तेरी माया तेरी जाए। सुना चित लाए, जैसी होय सुनाऊँ आय। तेलिन-तमोलिन, चूड़ी-चमारी, कायस्थनी, खत-रानी, कुम्हारी, महतरानी, राजा की रानी। जाको दोष, ताही के सिर पड़े। जाहर पीर नजर की रक्षा करे। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति। फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा।”
विधि- मन्त्र पढ़ते हुए मोर-पंख से व्यक्ति को सिर से पैर तक झाड़ दें।
१८॰ “वन गुरु इद्यास करु। सात समुद्र सुखे जाती। चाक बाँधूँ, चाकोली बाँधूँ, दृष्ट बाँधूँ। नाम बाँधूँ तर बाल बिरामनाची आनिङ्गा।”
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विधि- पहले मन्त्र को सूर्य-ग्रहण या चन्द्र-ग्रहण में सिद्ध करें। फिर प्रयोग हेतु उक्त मन्त्र के यन्त्र को पीपल के पत्ते पर किसी कलम से लिखें। “देवदत्त” के स्थान पर नजर लगे हुए व्यक्ति का नाम लिखें। यन्त्र को हाथ में लेकर उक्त मन्त्र ११ बार जपे। अगर-बत्ती का धुवाँ करे। यन्त्र को काले डोरे से बाँधकर रोगी को दे। रोगी मंगलवार या शुक्रवार को पूर्वाभिमुख होकर ताबीज को गले में धारण करें।
१९॰ “ॐ नमो आदेश। तू ज्या नावे, भूत पले, प्रेत पले, खबीस पले, अरिष्ट पले- सब पले। न पले, तर गुरु की, गोरखनाथ की, बीद याहीं चले। गुरु संगत, मेरी भगत, चले मन्त्र, ईश्वरी वाचा।”
विधि- उक्त मन्त्र से सात बार ‘राख’ को अभिमन्त्रित कर उससे रोगी के कपाल पर टिका लगा दें। नजर उतर जायेगी।
२०॰ “ॐ नमो भगवते श्री पार्श्वनाथाय, ह्रीं धरणेन्द्र-पद्मावती सहिताय। आत्म-चक्षु, प्रेत-चक्षु, पिशाच-चक्षु-सर्व नाशाय, सर्व-ज्वर-नाशाय, त्रायस त्रायस, ह्रीं नाथाय स्वाहा।”
विधि- उक्त जैन मन्त्र को सात बार पढ़कर व्यक्ति को जल पिला दें।
२१॰ “टोना-टोना कहाँ चले? चले बड़ जंगल। बड़े जंगल का करने ? बड़े रुख का पेड़ काटे। बड़े रुख का पेड़ काट के का करबो ? छप्पन छुरी बनाइब। छप्पन छुरी बना के का करबो ? अगवार काटब, पिछवार काटब, नौहर काटब, सासूर काटब, काट-कूट के पंग बहाइबै, तब राजा बली कहाईब।”
विधि- ‘दीपावली’ या ‘ग्रहण’-काल में एक दीपक के सम्मुख उक्त मन्त्र का २१ बार जप करे। फिर आवश्यकता पड़ने पर भभूत से झाड़े, तो नजर-टोना दूर होता है।
२२॰ डाइन या नजर झाड़ने का मन्त्र
“उदना देवी, सुदना गेल। सुदना देवी कहाँ गेल ? केकरे गेल ? सवा सौ लाख विधिया गुन, सिखे गेल। से गुन सिख के का कैले ? भूत के पेट पान कतल कर दैले। मारु लाती, फाटे छाती और फाटे डाइन के छाती। डाइन के गुन हमसे खुले। हमसे न खुले, तो हमरे गुरु से खुले। दुहाई ईश्वर-महादेव, गौरा-पार्वती, नैना-जोगिनी, कामरु-कामाख्या की।”
विधि- किसी को नजर लग गई हो या किसी डाइन ने कुछ कर दिया हो, उस समय वह किसी को पहचानता नहीं है। उस समय उसकी हालत पागल-जैसी हो जाती है। ऐसे समय उक्त मन्त्र को नौ बार हाथ में ‘जल’ लेकर पढ़े। फिर उस जल से छिंटा मारे तथा रोगी को पिलाए। रोगी ठीक हो जाएगा। यह स्वयं-सिद्ध मन्त्र है, केवल माँ पर विश्वास की आवश्यकता है।
 
२३॰ नजर झारने के मन्त्र
१॰ “हनुमान चलै, अवधेसरिका वृज-वण्डल धूम मचाई। टोना-टमर, डीठि-मूठि सबको खैचि बलाय। दोहाई छत्तीस कोटि देवता की, दोहाई लोना चमारिन की।”
२॰ “वजर-बन्द वजर-बन्द टोना-टमार, डीठि-नजर। दोहाई पीर करीम, दोहाई पीर असरफ की, दोहाई पीर अताफ की, दोहाई पीर पनारु की नीयक मैद।”
विधि- उक्त मन्त्र से ११ बार झारे, तो बालकों को लगी नजर या टोना का दोष दूर होता है।
२४॰ नजर-टोना झारने का मन्त्र
“आकाश बाँधो, पाताल बाँधो, बाँधो आपन काया। तीन डेग की पृथ्वी बाँधो, गुरु जी की दाया। जितना गुनिया गुन भेजे, उतना गुनिया गुन बांधे। टोना टोनमत जादू। दोहाई कौरु कमच्छा के, नोनाऊ चमाइन की। दोहाई ईश्वर गौरा-पार्वती की, ॐ ह्रीं फट् स्वाहा।”
विधि- नमक अभिमन्त्रित कर खिला दे। पशुओं के लिए विशेष फल-दायक है।

२५॰ नजर उतारने का मन्त्र
“ओम नमो आदेश गुरु का। गिरह-बाज नटनी का जाया, चलती बेर कबूतर खाया, पीवे दारु, खाय जो मांस, रोग-दोष को लावे फाँस। कहाँ-कहाँ से लावेगा? गुदगुद में सुद्रावेगा, बोटी-बोटी में से लावेगा, चाम-चाम में से लावेगा, नौ नाड़ी बहत्तर कोठा में से लावेगा, मार-मार बन्दी कर लावेगा। न लावेगा, तो अपनी माता की सेज पर पग रखेगा। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।”
विधिः- छोटे बच्चों और सुन्दर स्त्रियों को नजर लग जाती है। उक्त मन्त्र पढ़कर मोर-पंख से झाड़ दें, तो नजर दोष दूर हो जाता है।

२६॰ नजर-टोना झारने का मन्त्र
“कालि देवि, कालि देवि, सेहो देवि, कहाँ गेलि, विजूवन खण्ड गेलि, कि करे गेलि, कोइल काठ काटे गेलि। कोइल काठ काटि कि करति। फलाना का धैल धराएल, कैल कराएल, भेजल भेजायल। डिठ मुठ गुण-वान काटि कटी पानि मस्त करै। दोहाई गौरा पार्वति क, ईश्वर महादेव क, कामरु कमख्या माई इति सीता-राम-लक्ष्मण-नरसिंघनाथ क।”
विधिः- किसी को नजर, टोना आदि संकट होने पर उक्त मन्त्र को पढ़कर कुश से झारे।
नोट :- नजर उतारते समय, सभी प्रयोगों में ऐसा बोलना आवश्यक है कि “इसको बच्चे की, बूढ़े की, स्त्री की, पुरूष की, पशु-पक्षी की, हिन्दू या मुसलमान की, घर वाले की या बाहर वाले की, जिसकी नजर लगी हो, वह इस बत्ती, नमक, राई, कोयले आदि सामान में आ जाए तथा नजर का सताया बच्चा-बूढ़ा ठीक हो जाए। सामग्री आग या बत्ती जला दूंगी या जला दूंगा।´´

इच्छित कार्य में सफलता-दायक मन्त्र

इच्छित कार्य में सफलता-दायक मन्त्र

इच्छित कार्य में सफलता-दायक  मन्त्र
“ॐ कामरू, कामाक्षा देवी, जहाँ बसे लक्ष्मी महारानी। आवे, घर में जमकर बैठे। सिद्ध होय, मेरा काज सुधारे। जो चाहूँ, सो होय। ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं फट्।”
विधि- उक्त मन्त्र का जप रात्रि-काल में करें। ग्यारह दिनों के जप के पश्चात् ११ नारियलों का हवन करे। इच्छित कार्य में सफलता मिलती है।

सुख-शान्ति

सुख-शान्ति

सुख-शान्ति
१॰ कामाक्षा-मन्त्र
“ॐ नमः कामाक्षायै ह्रीं क्रीं श्रीं फट् स्वाहा।”
विधि- उक्त मन्त्र का किसी दिन १०८ बार जप कर, ११ बार हवन करें। फिर नित्य एक बार जप करें। इससे सभी प्रकार की सुख-शान्ति होगी।

वशीकरण, सम्मोहन व आकर्षण हेतु “उर्वशी-यन्त्र” साधना

वशीकरण, सम्मोहन व आकर्षण हेतु “उर्वशी-यन्त्र” साधना

वशीकरण, सम्मोहन व आकर्षण हेतु “उर्वशी-यन्त्र” साधना

इस यन्त्र को चमेली की लकड़ी की कलम से, भोजपत्र पर कुंकुम या कस्तुरी की स्याही से निर्माण करे।इस यन्त्र की साधना पूर्णिमा की रात्री से करें। रात्री में स्नानादि से पवित्र होकर एकान्त कमरे में आम की लकड़ी के पट्टे पर सफेद वस्त्र बिछावें, स्वयं भी सफेद वस्त्र धारण करें, सफेद आसन पर ही यन्त्र निर्माण व पूजन करने हेतु बैठें। पट्टे पर यन्त्र रखकर धूप-दीपादि से पूजन करें। सफेद पुष्प चढ़ाये। फिर पाँच माला “ॐ सं सौन्दर्योत्तमायै नमः।” नित्य पाँच रात्रि करें। पांचवे दिन रात्री में एक माला देशी घी व सफेद चन्दन के चूरे से हवन करें। हवन में आम की लकड़ी व चमेली की लकड़ी का प्रयोग करें।

देवाकर्षण मन्त्र

देवाकर्षण मन्त्र

देवाकर्षण मन्त्र
“ॐ नमो रुद्राय नमः। अनाथाय बल-वीर्य-पराक्रम प्रभव कपट-कपाट-कीट मार-मार हन-हन पथ स्वाहा।”
विधिः- कभी-कभी ऐसा होता है कि पूजा-पाठ, भक्ति-योग से देवी-देवता साधक से सन्तुष्ट नहीं होते अथवा साधक बहुत कुछ करने पर भी अपेक्षित सुख-शान्ति नहीं पाता। इसके लिए यह ‘प्रयोग’ सिद्धि-दायक है।
उक्त मन्त्र का ४१ दिनों में एक या सवा लाख जप ‘विधिवत’ करें। मन्त्र को भोज-पत्र या कागज पर लिख कर पूजन-स्थान में स्थापित करें। सुगन्धित धूप, शुद्ध घृत के दीप और नैवेद्य से देवता को प्रसन्न करने का संकल्प करे। यम-नियम से रहे। ४१ दिन में मन्त्र चैतन्य हो जायेगा। बाद में मन्त्र का स्मरण कर कार्य करें। प्रारब्ध की हताशा को छोड़कर, पुरुषार्थ करें और देवता उचित सहायता करेगें ही, ऐसा संकल्प बनाए रखें।