Monday, January 16, 2012

सामान्य उपाय

सामान्य उपाय
1. आपका व्यवसाय यदि कम हो गया हो या किसी ने उसे बाँध दिया हो, तो दीपावली से पूर्व धनतेरस के दिन पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर 'धनदा यन्त्र' को स्थापित करें और धूप, दीप दिखाएं, नैवेघ अर्पित करें. यह क्रिया करते समय मन ही मन श्रीं श्रीं मंत्र का जप करते रहें. प्रतिदिन नहा धोकर यन्त्र का निष्ठापूर्वक दर्शन करें.

2. दीपावली पूजन के समय 501 ग्राम चुहारों का पूजन करें. उनका तिलक करें, धुप दीप से आरती उतारें, प्रसाद का भोग लगाएं और रात्री भर पूजा स्थान पर रखा रहने दें. अगले दिन उन्हें लाल चमकीले या मखमली कपडे में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें. 51 दिन तक प्रतिदिन एक रूपया किसी भी मंदिर में माता लक्ष्मी को अर्पित करें. इससे वर्ष भर लक्ष्मी स्थिर रहती है.

3. कोर्ट कचहरी में मुकदमा चल रहा हो तो पांच गोमती चक्रों को दीपावली के दिन पूजन पर रखें. जब तारीख पर कोर्ट जाना हो तो उन्हें जेब में रख कर जाएं, जाते समय मन ही मन इश्वर से विजय की प्रार्थना करते रहें, सफलता प्राप्त होगी.

4. यदि आपका उधार लिया हुआ पैसा कोई लम्बे अरसे से नहीं लौटा रहा हो तो, उस व्यक्ति का नाम लेकर ग्यारह गोमती चक्र पर तिलक लगा कर, इष्ट देव का स्मरण कर, उससे निवेदन करें, कि मेरा पैसा जल्द से जल्द लौटा दो. इसके बाद पूजित गोमती चक्रों को पीपल के वृक्ष के पास जमीन में दबा दें.

5. व्यापार में हानि, धन नाश, बढ़ते कर्ज, व्यापार में बाधा आदि से मुक्ति पाने के लिए. दीपावली के दिन श्वेतार्क गणपति को गंगाजल से स्नान कराकर लाल वस्त्र पर रखें. फिर उनके समीप लाल चन्दन का एक टुकड़ा, ग्यारह धनदायी कौडियाँ, ग्यारह गोमती चक्र एवं ताम्बे की पादुकाएं या ताम्बे का एक टुकड़ा रखें. शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सफ़ेद कागज़ पर लाल चन्दन से अपनी दुकान का नाम लिखकर इसी सामग्री के पास रखें. लाल चन्दन की माला से "ॐ गं गणपतये नमः" का एक माला जप करें. लाल चन्दन की माला न हो तो रूद्राक्ष की माला से भी जप कर सकते हैं. फिर सारी सामग्री को उसी लाल वस्त्र में लपेट कर पोटली बना लें और उसे लाल मौली या रिबन से बांधें, धूप दीप दिखाएं व व्यापार स्थल में उत्तर पूर्व दिशा में बाँध दें. नित्य प्रातः व्यापार शुरू करने से पहले, उसे धूप दीप दिखाएं. ऐसा करते समय मन ही मन गणपति के पूर्वोक्त मंत्र का जप करते रहे. ऋण मुक्ति का यह बहुत प्रभावी उपाय है.

6. गाय को प्रतिदिन दो रोटी तेल लगाकर गुड रखकर खिलाएं, पक्षियों को दाना व जल दें और अपनी आय में से दो गरीबों को भरपेट भोजन कराते रहें, लाभ होगा.

7. कार्यसिद्धि के लिए कार्यसिद्धि यन्त्र अत्यंत फलदायी है. अपनी मनोकामना को लाल चन्दन से भोजपत्र पर लिख लें. लाल या पीले वस्त्र पर कार्यसिद्धि यन्त्र स्थापित करें. अगरबत्तियां व घी का दीपक जलाएं और आरती उतारें. कार्य सिद्ध हो जाने पर प्रभु के नाम पर कोई सत्कार्य जैसे कार्य करने को कहें. उदहारणतया पांच गरीबों को भोजन कराने, या घर में भजन कीर्तन कराने या फिर कोई भी सेवा करने का प्राण करें, कार्य सिद्ध हो जाने पर उसे भूलें नहीं. अब भोजपत्र को तह करके कार्यसिद्धि यन्त्र के नीचे रख दें. नित्य प्रति पांच अगरबत्तियां जलाएं और प्रतिदिन इक्कीस बार यन्त्र के सामने अपनी भोजपत्र पर लिखी मनोकामना को दोहराएं, अगरबत्तियों को मुख्यद्वार पर लगाएं. कुछ ही दिनों में आपका कार्य सिद्ध हो जाएगा.

9. यदि कमाई का कोई जरिया न हो, तो एक गिलास कच्चे दूध में, चीनी डाल कर जामुन वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं. यह क्रिया धनतेरस से शुरू करें और चालीस दिन लगातार करें. कभी-कभी सफाई कर्मचारी को चाय की 250 ग्राम पत्ती या सिगरेट दान करें. सफ़ेद धागे में दीपावली पूजन के पश्चात धागे में दीपावली पूजन के पश्चात ताम्बे का सिक्का गले में पहनें. उस दिन रसोईघर में बैठकर भोजन करें. लाभ स्वयं दिखने लगेगा.
कार्य सिद्धि के लिए----
किसी भी कार्य विशेष की सिद्धि के लिए या इंटरव्यू में सफलता पाने के लए यह उपाय यदि श्रद्धापूर्वक किया जाए तो पक्ष में परनाम निश्चित है। काम के लिए बाहर जाते समय भगवान् का निर्माल्य का फूल हाथ में लें और 'गजानना गजानना' का मूंगे या रूद्राक्ष की माला से एक माला जप करें फिर फूल जेब में रख कर कार्य पर चले जाएं। किन्तु विदा होने के पूर्व गणपति की तस्वीर को प्रणाम कर लें। पीछे मुड कर न देखें, कार्य सिद्ध होकर रहेगा।

व्यापार वृद्धि के लिए---
शुक्ल पक्ष के बुधवार को बिल्ली की जेर चांदी के सिक्के के साथ लाल कपडे या थैली में रखकर श्रद्धापूर्वक तिजोरी में रखें। चांदी का सिक्का, चांदी का सिक्का न हो तो साधारण रूपये का सिक्का गंगाजल से शुद्ध करके साथ में रखें। ऐसा करने से निश्चित रूप से व्यापार में वृद्धि होगी।

शीघ्र विवाह के लिए---
आयु अधिक होने के बाद भी यदि कन्या का रिश्ता पक्का न हो रहा हो तो यह उपाय करें। शुक्रवार की रात आठ छुहारे लें। ये छुहारे शुक्रवार को ही खरीदें। इन्हें जल में उबाल लें और जल के साथ ही अपने सिरहाने रख कर सो जाएं। यह जल चांदी के गिलास में या कटोरे में रखें तो उत्तम होगा। अगले दिन शनिवार को प्रातः स्नान करने के बाद इस जल और छुहारों को किसी बहते जल में प्रवाहित कर दें।

घर के सदस्यों में आपसी स्नेह बढाने के लिए ---
स्फटिक माला से निम्न चौपाई का नित्य पाठ करें, परिवार के सदस्यों के साथ स्नेह बढेगा।
"जोही के जेहि पर सत्य सनेहु
सो तेहि मिलही न कछु संदेहु

मुकदमें में विजय प्राप्ति हेतु ----
हनुमान जी के पर्वत लिए चित्र के समक्ष शुक्ल पक्ष के मंगलवार से निम्नलिखित चौपाई का रूद्राक्ष की माला से नित्य दो माला पाठ करें। हनुमान जी की कृपा प्राप्त होगी और मुक़दमे में विजय मिलेगी। साथ ही हर प्रकार के क्लेश से मुक्ति मिलेगी। यह एक अचूक टोटका है। इसमें श्रद्धा जरूरी है।
'पवन तनय बल पवन समाना
बुद्धि विवेक विग्यान निधाना।
कवन सो काज कठिन जग माहि
जो नहि होई तात तुम पाहिं।

धन वृद्धि के लिए ----
हर बुधवार गाय को पीला पपीता खिलाएं, धन दिन दूना रात चौगुना बढेगा। यह टोटका शुक्ल पक्ष से शुरू करें।

मनोकामना की पूर्ती के लिए-----
शुभ मुहूर्त में श्री कार्य सिद्धि यन्त्र लें। भोजपत्र पर लाल चन्दन से अपनी मनोकामना लिख लें। गुलाब की ग्यारह अगरबत्तियों से आरती उतारें। कामना पूर्ती के बाद कोई शुभ काम करने का संकल्प लें। उदहारण के लिए कीर्तन भजन कराने, या किसी निश्चित संख्या में (सात, नौ आदि) गरीबों को भोजन कराना या भगवान् को वस्त्र अर्पित करना जिस भोज पत्र पर मनोकामना लिखी है उसकी चार तह बनाकर कार्यसिद्धि यन्त्र के नीचे रख दें और उसे नियमित रूप से गुलाब की पांच अगरबत्तियां दिखाएं व 21 बार अपनी मनोकामना कहें। फिर अगरबत्तियां मुख्य द्वार पर लगा दें। यह सारी क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, मनोकामना पूरी होगी।

घर में झगड़े, कलह शांति के लिए -----
घर में झगड़े, कलह आदि होते हों तो महीने में एक बार दस किलो आटा व पांच किलो सरसों का तेल अनाथ आश्रम, साधु आश्रम, वृद्धाश्रम, अंधालय को दान दें। वातावरण अनुकूल होगा और कलह का नामोनिशान नहीं होगा।

वास्तु अनुसार घर की उन्नति में प्रवेशद्वार(मेन गेट/मुख्य द्वार) का योगदान-----

वास्तु अनुसार घर की उन्नति में प्रवेशद्वार(मेन गेट/मुख्य द्वार) का योगदान-----

वास्तु के अनुसार प्रमुख द्वार सदियों तक सुखद व मंगलमय अस्तित्व को बनाए रखने में सक्षम होते हैं। प्रवेश द्वार चाहे घर का हो, फैक्ट्री, कारखाने, गोदाम, आफिस, मंदिर, अस्पताल, प्रशासनिक भवन, बैंक, दुकान आदि का हो लाभ-हानि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे जुड़े सिद्धांतों का सदियों से उपयोग कर मानव अरमानों के महल में मंगलमय जीव बिताता चला आ रहा हैं।मुख्य प्रवेश द्वार के जरिये शत्रुओं, हिंसक पशुओं व अनिष्टकारी शक्तियों से भी रक्षा होती है। इसे लगाते समय वास्तुपरक बातों जैसे, प्रवेश द्वार के लिए कितना स्थान छोड़ा जाए, किस दिशा में पट बंद हों एवं किस दिशा में खुलें तथा वे लकड़ी व लोहे किसी धातु के हों, उसमें किसी प्रकार की आवाज हो या नहीं। प्रवेश द्वार पर कैसे प्रतीक चिन्ह हों, मांगलिक कार्यों के समय किस प्रकार व किससे सजाना इत्यादि बातों पर ध्यान देना उत्तम, मंगलकारी व लाभदायक रहता है। घर के निर्माण में जिस तरह विभिन्न दिशाओं को महतवपूर्ण माना गया है, उसी तरह घर के प्रवेश द्वार की सही दिशा व स्थान भी बेहद आवश्यक है। प्राचीन ऋषियों ने भवन की बनावट, आकृति तथा मुख्य प्रवेश द्वार के माध्यम से प्रवेश होने वाली ऊर्जा के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव का गहरा अध्ययन किया है। आदिकाल से प्रमुख द्वार का बड़ा महत्व रहा है, जिसे हम फाटक, गेट, दरवाजा, प्रवेशद्वार आदि के नाम से संबोधित करते हैं, जो अत्यंत मजबूत व सुंदर होता हैं।


निम्नांकित बातों का ध्यान रखकर हम अपने एवं अपने पारिवारिक जीवन को सुखद व मंगलकारी बना सकते हैं ..

आए जानें क्या हैं ये सिद्धांतः-

------सूर्यास्त व सूर्योदय होने से पहले मुख्य प्रवेश द्वार की साफ-सफाई हो जानी चाहिए। सायंकाल होते ही यहां पर उचित रोशनी का प्रबंध होना भी जरूरी हैं।

------दरवाजा खोलते व बंद करते समय किसी प्रकार की आवाज नहीं आना चाहिए। बरामदे और बालकनी के ठीक सामने भी प्रवेश द्वार का होना अशुभ होता हैं।

------प्रवेश द्वार पर गणेश व गज लक्ष्मी के चित्र लगाने से सौभाग्य व सुख में निरंतर वृद्धि होती है।

-------पूरब व उत्तर दिशा में अधिक स्थान छोड़ना चाहिए।

--------मांगलिक कार्यो व शुभ अवसरों पर प्रवेश द्वार को आम के पत्ते व हल्दी तथा चंदन जैसे शुभ व कल्याणकारी वनस्पतियों से सजाना शुभ होता है।

-------प्रवेश द्वार को सदैव स्वच्छ रखना चाहिए। किसी प्रकार का कूड़ा या बेकार सामान प्रवेश द्वार के सामने कभी न रखे। प्रातः व सायंकाल कुछ समय के लिए दरवाजा खुला रखना चाहिए।

इनका भी विशेष घ्यान रखें:-

जिस घर में निम्नांकित नियमों का सावधानीपूर्वक पालन किया जाता है वहां सदैव लक्ष्मी, धन, यश, स्वास्थ्य लाभ व आरोग्य रहता है ...


-------किसी भी मकान का एक प्रवेश द्वार शुभ माना जाता है। अगर दो प्रवेश द्वार हों तो उत्तर दिशा वाले द्वार का प्रयोग करें।

--------पूरबमुखी भवन का प्रवेश द्वार या उत्तर की ओर होना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है तथा दीर्घ आयु व पुत्र धन आता हैं।

--------पश्चिम मुखी मकान का प्रवेश द्वार पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में किया जा सकता है, परंतु दक्षिण-पश्चिम में बिल्कुल नहीं होना चाहिए। भूखंड कोई भी मुखी हो, अगर प्रवेश द्वार पूरब की तरफ या उत्तर-पूरब की तरफ उत्तर की तरफ हो तो उत्तम फलों की प्राप्ति होती हैं।

------उत्तर मुखी भवन का प्रवेश उत्तर या पूरब-उत्तर में होना चाहिए। ऐसे प्रवेश द्वार से निरंतर धन, लाभ, वयापार और सम्मान में वृद्धि होती हैं।

-------दक्षिण मुखी भूखण्ड का द्वार दक्षिा या दक्षिण-पूरब में कतई नहीं बनाना चाहिए। पश्चिम या अन्य किसी दिशा में मुख्य द्वार लाभकारी होता हैं।

------उत्तर-पश्चिम का मुख्यद्वार लाभकारी है और व्यक्ति को सहनशील बनाता हैं।

------मेन गेट को ठीक मध्य (बीच) में नहीं लगाना चाहिए।

-------प्रवेश द्वार को घर के अन्य दरवाजों की अपेक्षा बड़ा रखें।

------प्रवेश द्वार ठोस लकड़ी या धातु से बना होना चाहिए। उसके ऊपर त्रिशूलनुमा छड़ी लगी नहीं होना चाहिए।

-------द्वार पर कोई परछाई व अवरोध अशुभ माने गए हैं।

--------ध्यान रखें, प्रवेश द्वार का निर्माण जल्दबाजी में नहीं करें।


इन कुछ बातों का ध्यान प्रवेश द्वार के निर्माण के समय रखते हुए आप सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य आरोग्य एवं दीर्घायु प्राप्त कर सकते हैं।वास्तु शास्त्र के मुताबिक घरों के द्वार की स्थिति के आधार पर सुख-संपत्ति, समृद्धि, स्वास्थ्य का अनुमान अलाया जा सकता हैं। प्राचीन समय में बड़े आवासों, हवेलियों और महलों के निर्माण में इन बातों का विशेष ध्यान रखा जाता था। दिशाओं की स्थिति, चैकोर वर्ग वृत्त आकार निर्माझा और वास्तु के अनुसार दरवाजों का निर्धाश्रण होता था।

------दिशा जिस काम के लिए सिद्ध हो, उसी दिशा में भवन संबंधित कक्ष का निर्माण हो और लाभांश वाली दिशा में द्वार का निर्माण करना उचित रहता हैं। प्लाटों के आकार और दिशा के अनुसार उनके उपयोग में वास्तु शास्त्र में उचित मार्गदर्शन दिया गया हैं।

-----दक्षिण भारत के वास्तुशास्त्र के मुताबिक भवन की दिशा कैसी भी हो, पर यदि वह चैकोर बना हुआ हो और मुख्य भवन के आगे यदि एक कमरा वाहन, मेहमानों के स्वागत और बैठक के मकसद से बनाया जाए तो उसके द्वारों से गृहपति मनोवांछित लाभ प्राप्त कर सकता हैं। इस प्रकार के कक्ष को पूर्व भवन कहा जाता है।

-----भवन में द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में बनाया जायें तो संपदा की प्राप्ति सुनिश्चित हैं। तथा बुद्धि की प्राप्ति होती है।

------दक्षिण दिशा वाले द्वार से स्थायी वैभव की प्राप्ति होती हैं।

------पश्चिम दिशा वाले द्वार से धन-धान्य में वृद्धि होती हैं।

ध्यान रखें कि भवन के मुख्य परिसर से लेकर भीतर के भवन के द्वार को परी तरह वास्तुशास्त्र के अनुसार रखें। इसके लिए वास्तु में बताया गया है कि प्लाट के आकार को आठ से विभाजित करें और दोनों ओर 2-2 भाग छोड़कर द्वार को रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

जानिए वास्तु और दिशाओ का सम्बन्ध( वास्तु में दिशा का महत्व)----

जानिए वास्तु और दिशाओ का सम्बन्ध( वास्तु में दिशा का महत्व)----


वास्तु में दिशाओं का सर्वाधिक महत्व होता है। तभी तो भवन निर्माण करते समय या भूखण्ड क्रय करते समय दिशाओं का विशेष खयाल रखा जाता है। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार घर में किस दिशा में कौन से कक्ष का निर्माण किया जाए -
वास्तु के अनुसार दिशाओं का भी भवन निर्माण मे उतना ही महत्व है, जितना कि पंच तत्वों का है। दिशाएं कौन-कौन सी हैं और उनके स्वामी कौन-कौन से हैं और वो किस तरह जीव को प्रभावित कर सकती हैं-ये समझना जरुरी है। वास्तु शास्त्र की अहमियत अब अंजानी नहीं रह गई है। अधिकांश लोग मान चुके हैं कि मकान की बनावट, उसमें रखी जाने वाली चीजें और उन्हें रखने का तरीका जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में, वास्तु शास्त्र की बारीकियों को समझना आवश्यक है। इन बारीकियों में सबसे अहम है-दिशाएं। वास्तु विज्ञान शास्त्रों के अनुसार चार दिशाओं के अतिरिक्त चार उपदिशाएं या विदिशाएं भी होती हैं। ये चार दिशाएं हैं- ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य। समरागण सूत्र में दिशाओं व विदिशाओं का उल्लेख इस प्रकार किया गया है।
------पूर्व दिशा---
वास्तुशास्त्र में इस दिशा बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यह सूर्य के उदय होने की दिशा है. इस दिशा के स्वामी देवता इन्द्र हैं. भवन बनाते समय इस दिशा को सबसे अधिक खुला रखना चाहिए.यह सुख और समृद्धिकारक होता है.इस दिशा में वास्तुदोष होने पर घर भवन में रहने वाले लोग बीमार रहते हैं.परेशानी और चिन्ता बनी रहती हैं.पूर्व दिशा का स्वामी इन्द्र हैं और इसे सूर्य का निवास स्थान भी माना जाता है। इस दिशा को पितृ स्थान माना जाता है अतः इस दिशा को खुला व स्वच्छ रखा जाना चाहिए। इस दिशा मे कोई रूकावट नहीं होनी चाहिए। यह दिशा वंश वृद्धि मे भी सहायक होती है। यह दिशा अगर दूषित होगी तो व्यक्ति के मान सम्मान को हानि मिलती है व पितृ दोष लगता है। प्रयास करें कि इस दिशा मे टॉयलेट न हो वरना धन व संतान की हानि का भय रहता है। पूर्व दिशा में बनी चारदीवारी पश्चिम दिशा की चार दीवारी से ऊंची नहीं होनी चाहिए। इससे भी संतान हानि का भय रहता है।
------पश्चिम दिशा---
जब सूर्य अस्तांचल की ओर होता है तो वह दिशा पश्चिम कहलाती है। इस दिशा का स्वामी श्वरूणश् है। यह दिशा वायु तत्व को प्रभावित करती है और वायु चंचल होती है। अतः यह दिशा चंचलता प्रदान करती है। यदि भवन का दरवाजा पश्चिम मुखी है तो वहां रहने वाले प्राणियों का मन चंचल होगा। पश्चिम दिशा सफलता यश, भव्यता और कीर्ति प्रदान करती है। पश्चिम दिशा का स्वामी वरूण है। इसका प्रतिनिधि ग्रह शनि है। ऐसे में गृह का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा वाला हो तो वो गलत है। इस कारण ग्रह स्वामी की आमदनी ठीक नहीं होगी और उसे गुप्तांग की बीमारी हो सकती है।
-----उत्तर दिशा---- 
 उत्तर दिशा का स्वामी कुबेर है और यह दिशा जल तत्व को प्रभावित करती है। भवन निर्माण करते समय इस दिशा को खुला छोड़ देना चाहिए। अगर इस दिशा में निर्माण करना जरूरी हो तो इस दिशा का निर्माण अन्य दिशाओं की अपेक्षा थोड़ा नीचा होना चाहिए। यह दिशा सुख सम्पति, धन धान्य एवं जीवन मे सभी सुखों को प्रदान करती है। उत्तर मुखी भवन इसकी दिशा का ग्रह बुध है। उत्तरी हिस्से में खाली जगह न हो। अहाते की सीमा के साथ सटकर और मकान हों और दक्षिण दिशा मे जगह खाली हो तो वह भवन दूसरों की सम्पति बन सकता है।
-----दक्षिण दिशा---
 इस दिशा के स्वामी यम देव हैं.यह दिशा वास्तुशास्त्र में सुख और समृद्धि का प्रतीक होता है.इस दिशा को खाली नहीं रखना चाहिए। दक्षिण दिशा में वास्तु दोष होने पर मान सम्मान में कमी एवं रोजी रोजगार में परेशानी का सामना करना होता है.गृहस्वामी के निवास के लिए यह दिशा सर्वाधिक उपयुक्त होता है.आम तौर पर दक्षिण दिशा को अच्छा नहीं मानते क्योंकि दक्षिण दिशा को यम का स्थान माना जाता है और यम मृत्यु के देवता है अतः आम लोग इसे मृत्यु तुल्य दिशा मानते है। परन्तु यह दिशा बहुत ही सौभाग्यशाली है। यह धैर्य व स्थिरता की प्रतीक है। यह दिशा हर प्रकार की बुराइयों को नष्ट करती है। भवन निर्माण करते समय पहले दक्षिण भाग को कवर करना चाहिए और इस दिशा को सर्वप्रथम पूरा बन्द रखना चाहिए। यहां पर भारी समान व भवन निर्माण साम्रगी को रखना चाहिए। यह दिशा अगर दूषित या खुली होगी तो शत्रु भय का रोग प्रदान करने वाले होगी।
-----नैऋत्य दिशा---
दक्षिण और पश्चिक के मध्य की दिशा को नैऋत्य दिशा कहते हैं.इस दिशा का वास्तुदोष दुर्घटना, रोग एवं मानसिक अशांति देता है.यह आचरण एवं व्यवहार को भी दूषित करता है.भवन निर्माण करते समय इस दिशा को भारी रखना चाहिए.इस दिशा का स्वामी राक्षस है.यह दिशा वास्तु दोष से मुक्त होने पर भवन में रहने वाला व्यक्ति सेहतमंद रहता है एवं उसके मान सम्मान में भी वृद्धि होती है.दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र यानि नैऋत्य कोण पृथ्वी तत्व का प्रतीक है। यह क्षेत्र अनंत देव या मेरूत देव के अधीन होता है। यहाँ शस्त्रागार तथा गोपनीय वस्तुओं के संग्रह के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
-------.ईशान दिशा-----
पूर्व दिशा व उत्तर दिशा के मध्य भाग को ईशान दिशा कहा जाता है। ईशान दिशा को देवताओं का स्थान भी कहा जाता है। इसीलिए हिन्दू मान्यता के अनुसार कोई शुभ कार्य किया जाता है तो घट स्थापना ईशान दिशा की ओर की जाती है। सूर्योदय की पहली किरणें भवन के जिस भाग पर पड़े, उसे ईशान दिशा कहा जाता है। यह दिशा विवेक, धैर्य, ज्ञान, बुद्धि आदि प्रदान करती है। भवन मे इस दिशा को पूरी तरह शुद्ध व पवित्र रखा जाना चाहिए। यदि यह दिशा दूषित होगी तो भवन मे प्रायः कलह व विभिन्न कष्टों के साथ व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट होती है। इस दिशा का स्वामी रूद्र यानि भगवान शिव है और प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है।उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र अर्थात्‌ ईशान कोण जल का प्रतीक है। इसके अधिपति यम देवता हैं। भवन का यह भाग ब्राह्मणों, बालकों तथा अतिथियों के लिए शुभ होता है। अत: इस दिशा में अतिथि कक्ष बनवाना शुभ होता है।
----दक्षिणी-पूर्वी दिशा यानि आग्नेय कोण अग्नि तत्व की प्रतीक है। इसका अधिपति अग्नि देव को माना गया है। यह दिशा रसोईघर, व्यायामशाला या ईंधन के संग्रह करने के स्थान के लिए अत्यंत शुभ होती है। पूर्व और दक्षिण के मध्य की दिशा को आग्नेश दिशा कहते हैं.अग्निदेव इस दिशा के स्वामी हैं.इस दिशा में वास्तुदोष होने पर घर का वातावरण अशांत और तनावपूर्ण रहता है.धन की हानि होती है.मानसिक परेशानी और चिन्ता बनी रहती है.यह दिशा शुभ होने पर भवन में रहने वाले उर्जावान और स्वास्थ रहते हैं.इस दिशा में रसोईघर का निर्माण वास्तु की दृष्टि से श्रेष्ठ होता है.अग्नि से सम्बन्धित सभी कार्य के लिए यह दिशा शुभ होता है. उर्जावान और स्वास्थ रहते हैं.इस दिशा में रसोईघर का निर्माण वास्तु की दृष्टि से श्रेष्ठ होता है.अग्नि से सम्बन्धित सभी कार्य के लिए यह दिशा शुभ होता है.पूर्व दिशा व दक्षिण दिशा को मिलाने वाले कोण को अग्नेय कोण संज्ञा दी जाती है। जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है इस कोण को अग्नि तत्व का प्रभुत्व माना गया है और इसका सीधा सम्बन्ध स्वास्थ्य के साथ है। यह दिशा दूषित रहेगी तो घर का कोई न कोई सदस्य बीमार रहेगा। इस दिशा के दोषपूर्ण रहने से व्यक्ति क्रोधित स्वभाव वाला व चिड़चिड़ा होगा। यदि भवन का यह कोण बढ़ा हुआ है तो संतान को कष्टप्रद होकर राजभय आदि देता है। इस दिशा के स्वामी गणेश हैं और प्रतिनिधि ग्रह शुक्र है। यदि आग्नेय ब्लॉक की पूर्वी दिशा मे सड़क सीधे उत्तर की ओर न बढ़कर घर के पास ही समाप्त हो जाए तो वह घर पराधीन हो सकता है।
केसे हो कम्पास के द्वारा दिशाओं का ज्ञान-----
वास्तु जानने के लिए दिशाओं का सही निर्धारण जरूरी है।
दिशा जानने के लिए कम्पास का प्रयोग करते हैं।
जिसमें एक चुम्बकीय सुई होती है जिसका तीर उत्तर दिशा में ही रूकता है।

दिशा में रूकती है वह उत्तर होता है।
उत्तर से 180 डिग्री पर दक्षिण, दाईं ओर 90 डिग्री पर पूर्व व बाईं ओर 90 डिग्री पर पश्चिम होता है।
कम्पास से देखने पर यदि दिशा मध्य में न होकर 22.5 डिग्री तक हटी हो तो
दिशा प्लॉट व इससे अधिक हटने पर विदिशा प्लॉट माना जाता है।

Sunday, January 1, 2012

ऐसे लोगों को दिखते हैं और महसूस भी होते हैं भूत-प्रेत...

क्या आप जानते है कि भूत-प्रेत अक्सर कैसे लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं? भूत-प्रेत अक्सर उन लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं जो ज्योतिषीय नजरिये से कमजोर ग्रहों वाले होते हैं। इन लोगों में मानसिक रोगीयों की संख्या ज्यादा होती है।

ज्योतिष के अनुसार वो लोग भूतों का शिकार बनते हैं जिनकी कुंडली में पिशाच योग बनता है।

ये योग जन्म कुंडली में चंद्रमा और राहु के कारण बनता है। अगर कुंडली में वृश्चिक राशि में राहु के साथ चंद्रमा होता है तब पिशाच योग बन जाता है। ये योग व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है। वैसे तो कुंडली में किसी भी राशि में राहु और चंद्र का साथ होना अशुभ और पिशाच योग के बराबर अशुभ फल देने वाला माना जाता है लेकिन वृश्चिक राशि में इन चंद्रमा निच स्थिति में हो जाता है यानि अशुभ फल देने वाला हो जाता है इसलिए इस स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है।

राहु और चंद्रमा मिलकर व्यक्ति को मानसिक रोगी भी बना देते हैं। पिशाच योग राहु द्वारा निर्मित योगों में नीच योग है। पिशाच योग जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में होता है वह प्रेत बाधा का शिकार आसानी से हो जाता है। इनमें इच्छा शक्ति की कमी रहती है। इनकी मानसिक स्थिति कमज़ोर रहती है, ये आसानी से दूसरों की बातों में आ जाते हैं। इनके मन में निराशात्मक विचारों का आगमन होता रहता है। कभी कभी स्वयं ही अपना नुकसान कर बैठते हैं।

वृष लग्न की कुंडली में राहु- केतु के फायदे और नुकसान...

वृष लग्न की कुंडली के प्रथम भाव में राहु हो तो...

जिन लोगों की कुंडली वृष लग्न की है और उसके प्रथम भाव में राहु स्थित है तो उन लोगों को स्वास्थ्य के संबंध में थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुंडली का प्रथम भाव शरीर से संबंधित होता है। इस स्थान वृष राशि का स्वामी शुक्र है और शुक्र की राशि में राहु हो तो व्यक्ति दिखने में सामान्य रहता है। ये लोग गुप्त चतुराइयों से कार्य करते हैं। साथ ही इन लोगों के जीवन में बहुत सी परेशानियों आती हैं और उसी के बाद इन्हें सफलता प्राप्त होती है।

वृष लग्न के द्वितीय भाव राहु हो तो...

इस लग्न की कुंडली में द्वितीय भाव धन एवं कुटुम्ब से संबंधित होता है। इस स्थान मिथुन राशि का स्वामी ग्रह बुध है। यहां राहु का उच्च का रहता है। अत: इस ग्रह स्थिति के प्रभाव से व्यक्ति को अनेक योजनाएं बनानी की शक्ति मिलती है। ये लोग बहुत चतुर रहते हैं। ये लोग धनी होते हैं और घर-परिवार से भी संपन्न रहते हैं। इनका धन बढ़ते रहता है। फिर भी कई बार घर-परिवार में कुछ तनाव बना ही रहता है।


 यदि वृष लग्न की कुंडली में राहु तृतीय भाव में हो तो...

वृष लग्न की कुंडली में राहु यदि तृतीय स्थान पर स्थित हो तो व्यक्ति को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तीसरा स्थान पराक्रम और भाई-बहन से संबंधित होता है। इस भाव कर्क राशि का स्वामी चंद्र है। चंद्र तथा राहु को एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है। शत्रु राशि में होने से राहु मानसिक तनाव बढ़ाता है। इन लोगों को घर-परिवार और व्यवसाय की चिंताएं सताती रहती हैं।

वृष लग्न की कुंडली के चतुर्थ भाव में राहु हो तो...

इस लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव सिंह राशि का है और इसका स्वामी सूर्य है। सूर्य और राहु को शत्रु माना जाता है। अत: सूर्य की राशि में होने पर राहु व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह भाव माता एवं भूमि से संबंधित होता है। इस ग्रह स्थिति के कारण व्यक्ति को माता की ओर से भी सुख में कमी रहती है। इन्हें भूमि और भवन से भी पर्याप्त लाभ प्राप्त नहीं हो पाता है।


वृष लग्न की कुंडली के पंचम भाव में राहु हो तो...

जिन लोगों की कुंडली वृष लग्न की है और उसके पंचम भाव में राहु हो तो व्यक्ति को संतान से कष्ट प्राप्त होने की संभावनाएं रहती हैं। इस कुंडली का पांचवा भाव कन्या राशि है और इसका स्वामी बुध ग्रह है। बुध की राशि में राहु होने पर व्यक्ति नशा करने वाला हो सकता है। ये लोग गुप्त विद्याओं में अधिक कार्य करते हैं। इन लोगों को जीवनसाथी से विशेष सहयोग प्राप्त होता है।

वृष लग्न की कुंडली के षष्ठम भाव में राहु हो तो...

वृष लग्न की कुंडली के षष्ठम भाव में राहु होने पर व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती रहती है। इस लग्न में षष्ठम भाव तुला राशि है और इसका स्वामी शुक्र ग्रह है। शुक्र की राशि में राहु हो तो व्यक्ति गुप्त शक्तियों की विद्या जानने वाला होता है। इन लोगों को मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है। परेशानियों में हिम्मत से काम लेते हैं और सफलता प्राप्त कर लेते हैं।


वृष लग्न की कुंडली के सप्तम भाव में राहु हो तो...

कुंडली का सातवां भाव स्त्री तथा व्यवसाय से संबंधित है। इस लग्न में सप्तम भाव वृश्चिक राशि का है और इसका स्वामी है मंगल। मंगल की राशि में राहु होने पर व्यक्ति को पत्नी की ओर से कई प्रकार के कष्ट झेलने पड़ते हैं। इन लोगों को आय के संबंध में कई परेशानियां रहती है।

वृष लग्न की कुंडली के अष्टम भाव में राहु हो तो...

ज्योतिष के अनुसार कुंडली का अष्टम भाव आयु एवं पुरातत्व से संबंधित होता है। इस भाव धनु राशि का स्वामी गुरु है। गुरु की राशि में राहु होने पर व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आयु के घर में राहु होने से आयु में भी कमी हो सकती है। धनु राशि में राहु होने से व्यक्ति व्यवहारिक तथा सज्जन होता है। जीवन में काफी मेहनत के बाद सफलता प्राप्त करते हैं।

वृष लग्न की कुंडली के नवम भाव में राहु हो तो...

इस लग्न की कुंडली का नवम भाव मकर राशि का स्थान होता है। इसका स्वामी शनि है। कुंडली का नवम भाव भाग्य एवं धर्म से संबंधित होता है। इस स्थान पर राहु होने से व्यक्ति का स्वभाव धार्मिक नहीं होता है लेकिन वह खुद धर्म के प्रति लगाव रखने वाला ही बताता है। इन लोगों के पास काफी पैसा रहता है। इस ग्रह स्थिति के कारण व्यक्ति कई गुप्त योजनाओं से ही स्वयं का भाग्य बनाता है।


वृष लग्न की कुंडली के दशम भाव में राहु हो तो...

जिन लोगों की कुंडली वृष लग्न की है और उसके दशम भाव में राहु स्थित है तो व्यक्ति को शासकीय कार्यों में थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दसवां भाव राज्य एवं पिता से संबंधित होता है। इस भाव कुंभ राशि का स्वामी शनि है और शनि की राशि में राहु होने पर पिता से अक्सर वाद-विवाद का सामना करना पड़ता है। राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में भी कठिनाइयां उपस्थित होती हैं।

वृष लग्न की कुंडली के एकादश भाव में राहु हो तो...

कुंडली का ग्याहरवां भाव लाभ का स्थान माना जाता है। इस लग्न की कुंडली में इस भाव मीन राशि का स्वामी गुरु है और गुरु की इस राशि में राहु होने पर आर्थिक क्षेत्र में व्यक्ति को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार इस स्थान पर यदि कोई क्रूर ग्रह हो तो व्यक्ति को कड़ी मेहनत के बाद बड़ी सफलता मिलने के योग होते हैं। राहु भी एक क्रूर ग्रह माना जाता है यह लाभ के स्थान पर राहु मेहनत अवश्य करवाता है लेकिन शुभ फल भी प्रदान करता है। इस ग्रह स्थिति के कारण व्यक्ति को गुप्त योजनाओं का सहारा लेना पड़ता है। तभी सफलता प्राप्त होती है।

वृष लग्न की कुंडली में राहु यदि द्वादश भाव में हो तो...

इस लग्न की कुंडली का 12वां भाव मेष राशि का है और इसका स्वामी मंगल है। मंगल की राशि में राहु व्यक्ति को अधिक खर्च करने वाला बनाता है। बाहरवां भाव व्यय एवं बाहरी स्थानों से संबंधित होता है। अत: इस स्थान पर राहु होने से व्यक्ति को आय से अधिक खर्च करने पड़ते हैं, कड़ी मेहनत करना होती है।


वृष लग्न की कुंडली के प्रथम भाव में केतु हो तो...

जिन लोगों की कुंडली वृष लग्न की है और उसके प्रथम भाव में केतु हो तो व्यक्ति को शारीरिक सौंदर्य में कुछ कमी रहती है। वृष लग्न की कुंडली का प्रथम भाव वृष राशि का होता है और उसका स्वामी शुक्र है। शुक्र की इस राशि में केतु होने पर व्यक्ति को चिंताओं का सामना करना पड़ता है। इन लोगों को शारीरिक परिश्रम अधिक करना पड़ता है। योग्यता के प्रभाव से अन्य लोगों को अच्छे से प्रभावित कर लेते हैं।

वृष लग्न की कुंडली के द्वितीय भाव में केतु हो तो...

कुंडली का दूसरा भाव धन एवं कुटुम्ब का स्थान माना जाता है। मिथुन राशि का यह स्थान है और इसका स्वामी बुध है। इन लोगों को कठिनाइयों एवं परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हें गुप्त योजनाओं के माध्यम से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। कठिन परिश्रम के बल पर ही कार्य पूर्ण होते हैं।



वृष लग्न की कुंडली के तृतीय भाव में केतु के प्रभाव...

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली वृष लग्न की है और उसके तृतीय भाव में केतु है तो व्यक्ति को शत्रु एवं पराक्रम के क्षेत्र में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तृतीय भाव कर्क राशि का स्वामी चंद्र है और चंद्र की राशि में केतु होने पर व्यक्ति को जीवन में कई बार बड़ी-बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ये लोग मन की कमजोरी और अभावों के चिंता न करते हुए हिम्मत से काम लेते हैं। धैर्य और परिश्रम से सभी कार्य पूर्ण कर लेते हैं। इन्हें जीवन में सफलता के लिए कड़ा संघर्ष करना होता है।

वृष लग्न की कुंडली के चतुर्थ भाव में केतु हो तो...

इस लग्न की कुंडली का चतुर्थ भाव सिंह राशि का है और इस भाव का स्वामी सूर्य है। सूर्य की राशि में केतु होने पर व्यक्ति को माता एवं भूमि के संबंध में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चौथा भाव माता, भूमि और सुख का स्थान होता है। केतु के प्रभाव से ये लोग गुप्त युक्तियों में माहिर होते हैं। सफलता के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है।
 
वृष लग्न की कुंडली के पंचम भाव में केतु हो तो...

जिन लोगों की कुंडली वृष लग्न की है और उसके पंचम भाव में केतु स्थित है तो उन लोगों को विद्या और बुद्धि के क्षेत्र में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस लग्न का पंचम भाव कन्या राशि का है और इसका स्वामी बुध है। बुध की राशि में केतु होने पर व्यक्ति को धैर्य और साहस प्राप्त होता है। ऐसे लोग गुप्त योजनाओं के माध्यम से भी अपने कार्यों में सफलता प्राप्त कर लेते हैं।

वृष लग्न की कुंडली के षष्ठम भाव में केतु के फल...

इस लग्न की कुंडली में षष्ठम भाव का केतु होने पर व्यक्ति को हिम्मत प्राप्त होती है। षष्ठम भाव तुला राशि का स्वामी शुक्र है और शुक्र की इस राशि में केतु के प्रभाव से व्यक्ति गुप्त युक्तियों से ही सफलताएं प्राप्त करते हैं। कुंडली का षष्ठम भाव रोग से संबंधित होता है। इन लोगों को केतु के कारण कई प्रकार शारीरिक बीमारियों का सामना भी करना पड़ता है। जीवन की सभी परेशानियों का सामना हिम्मत और धैर्य के साथ करते हैं।
वृष लग्न की कुंडली के सप्तम भाव में केतु हो तो...

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली वृष लग्न की है और उसके सप्तम भाव में केतु हो तो व्यक्ति को स्त्री या पत्नी के संबंध में काफी कष्ट सहना पड़ते हैं। कुंडली का सातवां भाव स्त्री एवं व्यवसाय से संबंधित होता है। सप्तम भाव वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। मंगल और केतु एक-दूसरे के शत्रु ग्रह माने जाते हैं। शत्रु की राशि में केतु होने पर व्यक्ति को मूत्राशय से संबंधित रोग तथा प्रमेह रोग होने की संभावनाएं रहती हैं। व्यवसाय के संबंध में लोगों को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। संकटों का सामना करते हुए ये लोग सफलता प्राप्त कर सकते हैं लेकिन इन्हें धैर्य रखना चाहिए।

वृष लग्न की कुंडली के अष्टम भाव में केतु हो तो...

कुंडली का आठवां भाव मृत्यु और पुरातत्व से संबंधित होता है। इस लग्न में इस स्थान धनु राशि का स्वामी गुरु है। गुरु और केतु को एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है। शत्रु की राशि में केतु होने पर व्यक्ति को जीवन निर्वाह के लिए कड़ी मेहनत करना होती है। इन लोगों को आयु तो लंबी मिलती है लेकिन अधिकांश समय इन्हें कठिनाइयों का सामना ही करना पड़ता है।
 

सावधान आपके घर का सारा पैसा उड़ सकता है, दरवाजे पर ध्यान दें वरना...

ये तो सच है कि अगर आपको अपना पैसा प्यारा है तो घर के दरवाजे पर ध्यान देना जरूरी है वरना धीरे-धीरे आपके घर से पैसा खत्म होने लगेगा। घर में बरकत नहीं होगी।

आपकी इनकम और फायदे पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है घर के मुख्य दरवाजे का। अगर आपके घर का मेन गेट सही दिशा में नहीं है तो जल्दी ही आपको गरीबी का मुंह देखना पड़ सकता है।


पूर्व दिशा में घर का दरवाजा है तो ऐसा व्यक्ति कर्ज में डुब जाता है। इसके लिए सोमवार को रुद्राक्ष घर के दरवाजे के मध्य लटका दें और पहले सोमवार को हवन करें। रुद्राक्ष व शिव की आराधना करने से आपके समस्त कार्य सफल होंगे।

पश्विम दिशा में दरवाजा हो

ने से घर की बरकत खत्म होती है। ऐसे दरवाजे से दोष उत्पन्न होने पर रविवार को सूर्योदय से पूर्व दरवाजे के सामने नारियल के साथ कुछ सिक्के रखकर दबा दें। किसी लाल कपड़े में बांध कर लटका दें। सूर्य के मंत्र से हवन करें। द्वार दोष दूर होगा।

वास्तु के अनुसार उत्तर का दरवाजा हमेशा लाभकारी होता है। यदि द्वार दोष उत्पन्न होता है, तो भगवान विष्णु की आराधना करें। पीले फूले की माला दरवाजे पर लगाएं। लाभ होगा।

दक्षिण दिशा में घर कर मेन गेट शुभ नहीं हैं तथा इसके कारण घर में लगातार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिउ बुधवार या गुरुवार को नींबु या सात कौडिय़ां धागे में बांधकर लटका देना चाहिए।

पैसों की हर समस्या दूर करते हैं ये उपाय

क्या आप पैसों की कमी के कारण परेशान हैं या फिर आपका रुका हुआ पैसा नहीं मिल रहा है? या पैसों से संबंधित कोई और समस्या है। अगर आप इन समस्याओं का समाधान चाहते हैं तो नीचे लिखे उपाय करें। शीघ्र ही आपकी हर परेशानी
दूर हो जाएगी।

उपाय 

- पैसों की समस्याएं हों तो 21 शुक्रवार तक नौ वर्ष से कम आयु की पांच कन्याओं को खीर और मिश्री का प्रसाद बांटें। आपकी समस्या दूर हो जाएगी।

- जब कोई किन्नर आपसे कुछ मांगें तो उसे आप अपनी इच्छा से दान दें तथा फिर उससे निवेदन कर एक सिक्का मांग लें। किन्नर द्वारा दिया गया यह सिक्का बहुत ही शुभ होता है। इसे पर्स में रखने से कभी पैसों की कमी नहीं रहती।

- नोटों को गिनते समय थूक न लगाएं। इससे लक्ष्मी नष्ट होती है।

- घर में जब दीपक लगाएं तो उसमें रुई की जगह कलावा (पूजा का धागा) का उपयोग करें। इससे धन आने की संभावना बढ़ेगी।

- यदि रुका हुआ पैसा नहीं आ रहा है तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से लगातार तीन गुरुवार तक गरीबों को मीठे चावल बांटें। धन लाभ होने लगेगा।

अगर चाहिए मनचाही नौकरी तो करें यह उपाय

वर्तमान समय में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। नौकरी न होने के कारण न तो समाज में मान-सम्मान मिलता है और न ही घर-परिवार में। यदि आप भी बेरोजगार हैं और बहुत प्रयत्न करने पर भी रोजगार नहीं मिल रहा है तो निराश होने की कोई जरुरत नहीं है। नीचे लिखा उपाय करने से भी आप रोजगार पा सकते हैं।
उपाय

बुधवार को गणेशजी के मंदिर में जाकर सवा किलो मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं और मंदिर में ही बैठकर 108 बार मन ही मन में नीचे लिखे मंत्र का जप करें-

मंत्र- कवन सो काज कठिन जग माही।

जो नहीं होय तात तुम पाहिं।।

इसके बाद 40 दिनों तक रोज अपने घर के मंदिर में इस मंत्र का जप 108 बार करें। ईश्वर की कृपा से 40 दिनों के अंदर ही आपको रोजगार मिल जाएगा।

लाड़ले की शादी तो करें यह उपाय

हिंदू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में सबसे प्रमुख माना गया है। हर माता-पिता की इच्छा होता है कि उनके बेटे का विवाह धूम-धाम से हो। लेकिन कभी-कभी कुछ कारणों के चलते उचित समय पर उसका विवाह नहीं हो पाता। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो नीचे लिखे टोटके से इस समस्या का निदान संभव है
 उपाय

कुम्हार अपने चाक को जिस डंडे से घुमाता है, उसे किसी तरह किसी को बिना बताए प्राप्त कर लें। इसके बाद घर के किसी कोने को रंग-रोगन कर साफ कर लें। इस स्थान पर उस डंडे को लंहगा-चुनरी व सुहाग का अन्य सामग्री से सजाकर दुल्हन का स्वरूप देकर एक कोने में खड़ करके गुड़ और चावलों से इसकी पूजा करें।

इस टोटके से लड़के का विवाह शीघ्र ही हो जाता है। यदि चालीस दिनों में इच्छा पूरी न हो तो फिर यही प्रक्रिया दोहराएं(डंडा प्राप्त करने से लेकर पूजा तक)। यह प्रक्रिया सात बार कर सकते हैं।

किराए के घर में भी कर सकते हैं वास्तु नियमों का पालन, जानिए कैसे

किराए के मकान में गृहस्वामी की स्वीकृति के बिना परिवर्तन नहीं किया जा सकता। अक्सर देखने में आता है कि वास्तु नियमों के अनुकूल बने भवन में किराएदार सुखी और संपन्न रहते हैं। कुछ बातों का ध्यान रख किराए के भवन में रहते हुए भी
वास्तु के नियमों का पालन किया जा सकता है जैसे-

1- भवन का उत्तर-पूर्व का भाग अधिक खाली रखें।

2- दक्षिण-पश्चिम दिशा के भाग में अधिक भार या सामान रखें।

3- पानी की सप्लाई उत्तर-पूर्व से लें।

4- शयनकक्ष में पलंग का सिरहाना दक्षिण दिशा में रखें और सोते समय सिर दक्षिण दिशा में व पैर उत्तर दिशा में रखें।

5- यदि ऐसा न हो तो पश्चिम दिशा में सिरहाना व सिर कर सकते हैं।

6- भोजन दक्षिण-पूर्व की ओर मुख करके ग्रहण करें।

7- पूजा स्थल उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें यदि अन्य दिशा में हो तो पानी ग्रहण करते समय मुख ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण की ओर रखें।

पूरे साल रहना है चुस्त व संकटमुक्त तो बोलें यह हनुमान मंत्र

जीवन में शक्ति और सिद्धि की कामना को पूरी करने के लिए श्री हनुमान उपासना अचूक मानी जाती है। दरअसल, श्री हनुमान व उनका चरित्र जीवन में संकल्प, बल, ऊर्जा, बुद्धि, चरित्र शुद्धि, समर्पण, शौर्य, पराक्रम, दृढ़ता के साथ जीवन
में हर चुनौतियों या कठिनाईयों का सामना करने व उनसे पार पाने की अद्भुत प्रेरणा है।

श्री हनुमान चिरंजीवी भी माने जाते हैं। ऐसी अद्भुत शक्तियों व गुणों के स्वामी होने से ही वे जाग्रत देवता के रूप में पूजनीय हैं। इसलिए किसी भी वक्त हनुमान की भक्ति संकटमोचन करने के साथ ही तन, मन व धन से संपन्न बनाने वाली मानी गई है।

वर्ष के पहले दिन और सालभर यहां बताए जा रहे विशेष हनुमान मंत्र का स्मरण चुस्त व संकटमुक्त रहने की ऐसी कामनासिद्धि कर बहुत ही मंगलकारी साबित होगा -

- स्नान के बाद श्री हनुमान की पंचोपचार पूजा यानी सिंदूर, गंध, अक्षत, फूल, नैवेद्य चढ़ाकर करें।

- गुग्गल धूप व दीप जलाकर नीचे लिखा हनुमान मंत्र लाल आसन पर बैठ साल और जीवन को सफल व पीड़ामुक्त बनाने की इच्छा से बोलें और अंत में श्री हनुमान की आरती करें -

ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय

प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।।

Wednesday, December 7, 2011

पति-पत्नी में रोमांस बढ़ेगा इन फेंगशुई टिप्स से

यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखमय है तो अन्य परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं। पति-पत्नी के बीच रोमांस बढ़ाने के लिए कुछ फेंगशुई सिद्धांतों का भी उपयोग किया जा सकता है। नीचे ऐसे ही कुछ फेंगशुई टिप्स दी गई है जिनसे दांपत्य जीवन में रोमांस बढ़ता है-

1- लवबर्ड, मैंडरेन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा अपने बेडरूम में रखें।

2- बेडरूम में दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिल की आकृति का रोज क्वाट्र्ज रखें।

3- पति-पत्नी के प्रतीक के रूप में बेडरूम में दो सुंदर सजावटी गमले रखें।

4- बेडरूम में पानी की तस्वीर वाली पेंटिंग न लगाएं इसके स्थान पर रोमांटिक कलाकृति, युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं।

5- यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह से दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है तो सुंदर से बाउल में पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के साथ मिलाकर रखें।

इन नुस्खों को आजमाने पर निश्चित ही कुछ ही समय में आपको सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगेंगे। आपका दांपत्य जीवन खुशियों भरा और सुखी होगा।

लकवा से पीडि़त व्यक्ति करके देखें

वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब कोई इंसान किस बीमारी की चपेट में आ जाए, कहना मुश्किल है। लकवा ऐसी ही एक बीमारी है जो अचानक ही किसी हंसते-खेलते व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेती है। मेडिकल साइंस के इस दौर में लकवा का ईलाज भी संभव है। यदि ईलाज करवाने के साथ-साथ नीचे लिखे कुछ उपाय  भी करें तो संभव है लकवा से पीडि़त व्यक्ति और भी जल्दी ठीक हो जाए।

उपाय



- एक काले कपड़े में पीपल की सूखी जड़ को बांधकर लकवा से पीडि़त व्यक्ति के सिर के नीचे रखें तो कुछ ही दिनों में इसका असर दिखने लगेगा।

- प्रत्येक शनिवार के दिन एक नुकीली कील द्वारा लकवा पीडि़त अंग को आठ बार उसारकर शनिदेव का स्मरण करते हुए पीपल के वृक्ष की मिट्टी में गाड़ दें। साथ ही यह निवेदन करें कि जिस दिन अमुक रोग दूर हो जाएगा, उस दिन कील निकाल लेंगे। जब लकवा ठीक हो जाए तब शनिदेव व पीपल को धन्यवाद देते हुए वह कील निकालकर नदी में प्रवाहित कर दें।

- लकवे से पीडि़त व्यक्ति को लोहे की अंगूठी में नीलम एवं तांबे की अंगूठी में लहसुनिया जड़वाकर क्रमश: मध्यमा और कनिष्ठा अंगुली में पहना दें। इससे भी लकवा रोग में काफी लाभ होगा।

चंद्रग्रहण पर करें यह प्रयोग, बिजनेस में मिलेगी सफलता


यदि आपका बिजनेस ठीक नहीं चल रहा है तो घबराईए बिल्कुल मत क्योंकि  10 दिसंबर, शनिवार को आने वाला चंद्र ग्रहण इस समस्या से छुटकारा पाने का श्रेष्ठ अवसर है। बिजनेस की सफलता के लिए चंद्रग्रहण के दिन यह प्रयोग करें-

प्रयोग

ग्रहण से पहले नहाकर लाल या सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन व रेशम से बने आसन को बिछाकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। जब ग्रहण काल प्रारंभ हो तब चमेली के तेल का दीपक जला लें। अब दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला लें तथा बाएं हाथ में 5 गोमती चक्र लेकर नीचे लिखे मंत्र का 54 बार जप करें-

ऊँ कीली कीली स्वाहा

अब इन गोमती चक्रों को एक डिब्बी में डाल दें और फिर क्रमश: 5 हकीक के दाने व 5 मूंगे के दाने लेकर पुन: इस मंत्र का 54 बार उच्चारण करें। अब इन्हें भी एक डिब्बी में डालकर उसके ऊपर सिंदूर भर दें। अब दीपक को बुझाकर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें।

इस डिब्बी को बंद करके अपने घर, दुकान या ऑफिस में रखें। आपका बिजनेस चल निकलेगा।

चंद्रग्रहण पर करें यह टोटका, अचानक होगा धन लाभ

10 दिसंबर, शनिवार को चंद्रग्रहण है। तंत्र शास्त्र के अनुसार ग्रहण के दौरान किया गया प्रयोग बहुत प्रभावशाली होता है और इसका फल भी जल्दी ही प्राप्त होता है। इस मौके का लाभ उठाकर यदि आप धनवान होना चाहते हैं तो नीचे लिखा उपाय  करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी और आपको अचानक धन लाभ होगा।

उपाय
ग्रहण के पूर्व नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें। ग्रहण काल शुरु होने पर  उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऊन या कुश के आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने पटिए(बाजोट या चौकी) पर एक थाली में केसर का स्वस्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें।

अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर दिव्य शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जप करें-

मंत्र

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि मुक्ति मुक्ति प्रदायिनी।

मंत्र पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।।

मंत्र जप के बाद इस पूरी पूजन सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में आपको अचानक धन लाभ होगा।

Friday, December 2, 2011

ये हें वास्तु दोष निवारक सरलतम प्रयोग----


ये हें वास्तु दोष निवारक सरलतम प्रयोग----

वर्तमान में आम जनता के मन में वास्तु को लेकर अनेक गलत बातें/भ्रांतियां घर कर गयी हें वे इसे एक फालतू का ढकोसला मानते हे..
यदि बौद्धिकता से मनन करें तो आप पाऐंगे कि जहां उत्तर और पूर्वमुखी घर हैं, वहां दक्षिण और पष्चिम मुखी घर भी हैं। जहां भवन में उत्तरी-पूर्वी भाग में शौचालय बनें हैं, वहां वैसे ही भवन के अन्यत्र कोणों में भी हैं । शुभत्व के जहां समस्त संसाधन गृह निर्माण आदि में लगाए गए हैं, वहां अनेक में इन सब से कोई भी शुभत्व का प्रयास नहीं किया गया है . .आदि.. आदि। यदि आप आंकड़े जमा करें तो पाऐंगे कि कहीं दक्षिण अथवा पष्चिम मुखी भवनों में निवास करने वाले तुलनात्मक रुप से अधिक फल-फूल रहे हैं। जिन भवनों में ईषान कोंण में शौचालाय बनें हैं वहां के लोग अन्यत्र कोंणो में बने शौचालयों की तुलना में अधिक स्वस्थ हैं अथवा अधिक संपन्न हैं। तो क्या हम उस वर्ग विषेष की बात मान कर स्वीकार कर लें कि वास्तुषास्त्र के अनुसार किए गए निर्माण आदि से सामान्यतया कोई अंतर नहीं पड़ता? आपके अपने व्यक्तिगत अनुभव में भी ऐसे प्रकरण अवष्य आए होंगे कि जहां भवन का निर्माण पूर्णतया शास्त्रोक्त उपायो से किया गया है फिर भी उसके स्वामी अथवा उसके परिजन कष्ट भरा जीवन जी रहे हैं। जब आप वास्तु पंडित, ज्योतिष मनीषी, तांत्रिक, मांत्रिक आदि के पास गए होंगे तो उसने तत्काल गणना कर दी होगी और कह दिया होगा कि भवन का वास्तु तो बिल्कुल ठीक है परन्तु जनम पत्री में गृह नक्षत्रों का योग विपरीत बन कर कष्ट कारी सिद्ध हो रहा है अथवा किसी ने कुछ कर दिया है अथवा देखने में तो सब ठीक है परन्तु आपके पितर रुष्ट हैं..आदि..आदि।
कहने का तात्पर्य यह है कि व्यक्ति का जीवन किसी एक घटक विषेष से प्रभावित नहीं हो रहा। अध्यात्म के मार्ग में जा कर, अंड-पिंड सिद्धांत को समझ कर, प्रारब्ध-पुरुषार्थ आदि की गूड़ता को मनन कर ही इस गूड़ रहस्य को समझा जा सकता है। प्रारब्ध के कर्मानुसार हम कष्ट भोग रहे हैं। लाख प्रयास, क्रम-उपक्रम करने पर भी हमे आषातीत फल नहीं मिल पा रहे। किस प्रयास आदि से हमें लाभ मिल जाए यह दृष्ट नहीं है। इसलिए एक को गले न लगा कर मानव कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को नियमित करते रहें, पता नहीं कौन सा उपक्रम आपको रास आ जाए।
यदि आपको कहीं आभास हो कि सब कुछ होते हुए भी वास्तु अथवा अन्य किन्हीं दोषों के कारण आप कष्ट भोग रहे हैं तो निम्न सरलतम प्रयोग भी कर के देख लें, पता नहीं कौन सा प्रयोग आपके लिए फिट बैठ जाए।
प्रयोग 1.
मकान, दुकान अथवा अन्य कोई भवन निर्माण के समय अलग-अलग पूजा-अर्चना करना प्रचलित है। पूजा-पाठ का आप जो भी विधान अपना लें, थोड़ा है। आस्था हो तो यह प्रयोग करके देखें, घर में कोई दोष नही आ पाएगा।
एक छोटा सा तांबे का ढक्कन वाला लोटा लें, उसे धोकर चमका लें। लोटे में तांबे के पांच छेद वाले सिक्के, छोटा सा चांदी का बना नाग और नागिन का जोड़ा, हनुमान जी के चरणों का थोड़ा सा सिन्दूर, लोहे का छोटा सा एक त्रिषूल तथा चांदी की एक जोड़ी पादुकाएं रख कर उसमें गंगा जल भर दें। लोटे का मुंह अच्छी तरह से बंद कर दें। जिससे जल छलक कर बाहर न गिरे। अब इसको घर, दुकान आदि की नींव में मुख्य द्वार के दांए भाग में दबा दें। यदि घर तैयार हो चुका हो और कोई सज्जन यह प्रयोग करना चाहें तो वह यह सामग्री मुख्य द्वार के दांयी ओर कहीं ऐसे पवित्र स्थान में दबा दें जहां से इसके दुबारा निकलने की संभावना न हो।
यदि भवन के आस-पास उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो तो वहां  अषोक, सिरस, केले, श्वेतार्क आदि के पेड़ लगा लें। पाठकों का भ्रम दूर कर दूॅ। जब तक वृक्ष की परछांई भवन पर नही पड़ती, वास्तु दोष नहीं लगता। घर के सामने घनी सी तुलसी की झाड़ लगा लें। यह सब उपक्रम घर में सकारात्मक ऊर्जा का समावेष करते हैं।
प्रयोग 2.
घर में सदैव श्री का वास रहे तथा वास्तु जनित किसी भी प्रकार के दोष के निदान के लिए घर की किसी लड़की, बहु, बेटी आदि से यह प्रयोग करवाएं।
गुरुवार के दिन मुख्य द्वार के दाएं अथवा बांए ओर गंगा जल से पवित्र करें। यहाॅ दाएं हाथ की अनामिका तथा तथा हल्दी-दही के घोल से एक स्वास्तिक बनाएं। इस पर थोड़ा सा गुड़ रखकर एक बूंद शहद टपका दें। प्रत्येक गुरुवार को यह क्रम दोहरा दिया करें। कुछ समय बाद आपको घर का वातावरण सुखद लगने लगेगा।
प्रयोग 3.
किसी भी धातु का एक कटोरा लें। उसमें चावल, नागकेसर भर लें। यदि इनको किसी शुभ मुहूर्त में अभिमंत्रित करके भरा जाता है तो अधिक प्रभावषाली सिद्ध होगा। इस कटोरे में रखे चावलों में एक सिक्का, पीली बड़ी कौड़ी, पीली बड़ी हरड़ तथा छोटे से नृत्य करते हुए एक गणपति स्थापित कर दें। गणपति किसी भी धातु, काॅच, काष्ठ आदि के आप ले सकते हैं। सामग्री भरे हुए इस कटोरे को घर के किसी ईषान कोण में धरती से कुछ ऊॅचाई पर रख दें। भवन के वास्तु दोष निवारण में यह एक अचूक प्रयोग सिद्ध होगा। बहु-मंजिला भवन है अथवा भवन में अनेक कमरे हैं तो आप प्रत्येक तल तथा प्रत्येक कमरे के उत्तर-पूर्वी कोण में भी यह सामग्री रख सकते हैं। इसके लिए आपको उतनी संख्या में सामग्री भरे कटोरे तैयार करने होंगे जितने आप प्रयोग करने जा रहे हैं।
प्रयोग 4.
घर में सौभाग्य जगाने, प्रसन्न वातावरण बनाने अथवा भांति-भांति की सुगन्ध कर देवी-देवताओं को रिझाने के उपक्रम किए जाते हैं। अपनी-अपनी सामथ्र्य , श्रद्धानुसार लोग धूप, अगरबत्ती आदि का प्रयोग करते हैं। एक सलाह आपको अवष्य दूॅगा कि घटिया धूप, अगरबत्ती का प्रयोग अपने विवेक से ही करें। यह सड़े हुए मोबिल आॅयल से तैयार की जाती है। इससे वास्तु दोष दूर हो या न हो, देवी-देवता प्रसन्न हो अपनी कृपा दृष्टि आप पर तथा आपके भवन पर डालें या न डालें परन्तु यह निष्चित है कि आपके फैफड़े अवष्य खराब हो जाऐंगे।
गाय के गोबर के दहकते हुए कण्डे पर शुद्ध घी में डुबोई लौंग, कपूर, गोला गिरि तथा बताषा अथवा चीनी डालकर धूनी करें। इस भीनी-भीनी मदमस्त महक से आपका चित्त प्रसन्न हो उठेगा। भवन के वातावरण में धीरे-धीरे सकारात्मक ऊर्जा भरने लगेगी।
प्रयोग 5.
किसी शुभ मुहूर्त में हल्दी से रंगे एक पीले कपड़े में थोड़ी सी नागकेसर, एक तांबे का सिक्का, हल्दी की एक अखण्डित गांठ, एक मुट्ठी नमक, एक पीली बड़ी हरड़, एक मुट्ठी गेंहू और चांदी अथवा तांबे की एक जोड़ा पादुकाएं बांधकर पोटली बना लें। इस पोटली को घर की रसोई में कहीं ऐसे स्थान पर लटका दें जहां आते-जाते किसी की दृष्टि उस पर न पड़े। जब लगे कि पोटली गन्दी होने लगी है तो किसी शुभ मुहूर्त में उपरोक्त सामग्री पीले कपड़े में बांधकर पुनः लटका दिया करें तथा पुरानी पोटली केा जल में कहीं विसर्जित कर दिया करें, आपके घर में सौभाग्य का आगमन होने लगेगा।
प्रयोग 6.
अपने दायें हाथ की आठ अंगुल प्रमाण में चार लोहे की कील ले लें। इतने ही बड़े चार टुकड़े बढ़ अथवा पीपल की जड़ के काट लें। इन्हें चारों कीलों के साथ अलग-अलग बांध लें। अपने भूखण्ड के चारों कोनों में इन्हे दबा दें। घर को चारों तरफ से लोहे, तांबे तथा सामथ्र्य हो तो चांदी के तारों से इस प्रकार दबा दें, कि तार चारों ओर दबी हुई कीलों से स्पर्ष करते हुए रहें। भूखण्ड के जिस स्थान में ईषान कोंण आ रहा हो, वहा तारों को अलग रखें। यहा पीपल अथवा बढ़ के नौ पत्तों से, एक पत्ता बीच में रखकर अष्टदल कमल बनाएं। इस अष्टदल कमल की अपनी श्रद्धानुसार पूजा-अर्चना करें, इस पर कोई विग्रह, यंत्र अथवा अन्य कोई प्रतिष्ठित मूर्ती, चित्रादि रखकर चारों तरफ से ढक दें। जैसा भी निर्माण कार्य हो रहा हो, वह इसके बाद प्रारम्भ करवाएं। वास्तु निवारण का यह एक अचूक प्रयोग सिद्ध होगा।
प्रयोग 7.
पुष्य नक्षत्र में जड़ सहित चिरचिटे का एक पौधा उखाड़ लाएं। भवन में कहीं भी गड्ढा खोदकर इस पौधे को इस प्रकार से दबा दें कि पत्तिया नीचे रहें और जड़ वाला भाग ऊपर। बद्नजर, किसी के कुछ करे-धरे का दुष्प्रभाव आदि में यह प्रयोग रामबांण सा सिद्ध होगा।

Monday, November 21, 2011

समझो तब मौत आ गई जब माथे पर चंदन जल्दी ना सूखे, क्योंकि...

समझो तब मौत आ गई जब माथे पर चंदन जल्दी ना सूखे, क्योंकि...


शास्त्रों में जीवन का अंतिम और अटल सत्य मृत्यु को ही बताया गया है। किसी भी व्यक्ति के लिए मृत्यु ही अंतिम चरण है। इसके बाद व्यक्ति की आत्मा देह त्याग देती है, आजाद हो जाती है। सभी ये बात जानते है लेकिन फिर भी मौत का डर सदैव बना ही रहता है।

मृत्यु कब और कैसे होगी? यह बता पाना किसी भी इंसान के अधिकार में नहीं है। ज्योतिष के माध्यम से भी केवल संभावनाएं व्यक्त की जा सकती हैं। कई विद्वानों ने ऐसी बातें बताई गई हैं जो मृत्यु के आने सूचना दे देती हैं। इन्हीं बातों में से एक है यदि कोई व्यक्ति मरणासन में है तो उसके माथे पर यदि चंदन लगाया जाए तो वह जल्दी नहीं सूखेगा।

चंदन को बहुत ही पवित्र माना जाता है इसी वजह से सभी प्रकार के पूजन में इसका विशेष स्थान है। जब भी भगवान की आराधना की जाती है तो श्रद्धालु के मस्तक पर इसका तिलक लगाया जाता है। प्राय: चंदन का तिलक लगाने के बाद तुरंत ही सूख जाता है।

कई बार लोगों के साथ ऐसा होता है कि डॉक्टर्स द्वारा किसी व्यक्ति के लिए बोल दिया जाता है कि अब उसका जीवन कुछ ही समय का शेष है। ऐसे में कुछ विद्वानों के अनुसार जब किसी व्यक्ति का मृत्यु का समय निकट आ जाता है तो उसके माथे पर चंदन का तिलक लगाना चाहिए। यदि यह तिलक जल्दी सूख जाता है तब तो समझना चाहिए कि उस व्यक्ति का जीवन अभी शेष है। इसके विपरित यदि वह तिलक जल्दी नहीं सूखता है तो दुर्भाग्यवश विपरित परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। यानि व्यक्ति की मृत्यु की संभावनाएं प्रबल हो जाती हैं क्योंकि मृत्यु के समय व्यक्ति के माथे की गर्मी सबसे पहले समाप्त हो जाती है, मस्तक एकदम ठंडा हो जाता है। इस वजह से चंदन जल्दी नहीं सूख पाता। यदि ऐसा होता है तो संबंधित व्यक्ति के स्वास्थ्य के संबंध में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टर्स आदि की सलाह लेकर बीमार व्यक्ति का उचित ध्यान रखें। इसके पश्चात अनहोनी टल सकती है।

पैर पर पैर रखकर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि...

पैर पर पैर रखकर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि...
हमारे स्वभाव, हाव-भाव और व्यवहार में क्या-क्या होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए? इस संबंध में शास्त्रों में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। इन परंपराओं का निर्वहन आज भी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा किया जाता है।

जब भी कोई व्यक्ति घर में पैर पर पैर रखकर बैठते हैं तो अक्सर जानकार वृद्धजनों द्वारा ऐसा नहीं करने की सलाह दी जाती है। पुराने समय से ही कई ऐसी बातें चली आ रही हैं जिनका संबंध हमारे जीवन में प्राप्त होने वाले सुख और दुख से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि पैर पर पैर रखकर बैठने से स्वास्थ्य को नुकसान होता है साथ ही इसे धर्म की दृष्टि से भी अशुभ समझा जाता है।

यदि किसी पूजन कार्य में या शाम के समय पैर पर पैर रखकर बैठते हैं तो महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं होती है। धन संबंधी कार्यों में विलंब होता है। पैसों की तंगी बढ़ती है। शास्त्रों के अनुसार शाम के समय धन की देवी महालक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण पर रहती हैं ऐसे में यदि कोई व्यक्ति पैर पर पैर रखकर बैठा रहता है तो देवी उससे नाराज हो जाती हैं। लक्ष्मी की नाराजगी के बाद धन से जुड़ी परेशानियां झेलना पड़ती हैं। अत: बैठते समय ये बात ध्यान रखें। पैर पर पैर रखकर न बैठें।

मुट्ठीभर चावल से दूर हो जाएगी पैसों की समस्या, जानिए कैसे...

चावल को अक्षत भी कहा जाता है और अक्षत का अर्थ है अखंडित। जो टूटा हुआ न हो वही अक्षत यानि चावल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार यह पूर्णता का प्रतीक है। इसी वजह से सभी प्रकार के पूजन कर्म में भगवान को चावल अर्पित कर
ना अनिवार्य माना गया है। इसके बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है। चावल चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त को देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई सटीक उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से सभी प्रकार के ग्रह दोष दूर होते हैं और आय बढऩे में आ रही समस्त रुकावटें दूर हो जाती हैं। यदि किसी ग्रह दोष के कारण आपकी आय बढऩे में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं तो संबंधित ग्रह का उपचार करें। इसके साथ ही यह उपाय अपनाएं-

प्रति सोमवार शिवलिंग का विधिवत पूजन करें। पूजन में बैठने से पूर्व अपने पास करीब आधा किलो या एक किलो चावल का ढेर लेकर बैठें। पूजा पूर्ण होने के बाद अक्षत के ढेर से एक मुठ्ठी चावल लेकर शिवजी को अर्पित करें। तत्पश्चात शेष बचे चावल को मंदिर में दान कर दें या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें। ऐसा हर सोमवार को करें। इस उपाय को अपनाने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे। ध्यान रहे इस दौरान किसी भी प्रकार का अधार्मिक या अनैतिक कर्म न करें। अन्यथा उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा।

Sunday, November 20, 2011

संभावित विवाह काल कब और कैसे

संभावित विवाह काल   कब और कैसे
प्राचीनकाल में विवाह बहुत छोटी आयु पैर ही हो जाते थे और साधारण विवाह आयु २० से २२ वर्ष मानी जाती थी था विलम्ब से विवाह आयु ३०-३२ मानी  जाती थी . अब यह मापदंड परिवर्तित हो चुके हैं . सही विवाह समय जानने दे लिए योग्य ज्योतिषियों से उत्तर काल निकलवाना चाहिए .

जल्दी विवाह और देर से विवाह के ज्योतिष सूत्र 
१. यदि लग्नेश व सप्तमेश का कोई स्थान या दृष्टि सबंध शुभ ग्रहों से हो विशेष रूप से गुरु ग्रह से तो जातक का विवाह छोटी उम्र (१८ से २० वेढ के अन्दर ) हो जाता है.
२. यदि सप्तमेश और लग्नेश क्रमानुसार निकटवर्ती स्थानों में हो यानि स्थानों के बीच ४५ डिग्री से जायदा का फासला न हो तो ऐसे जातक का विवाह बचपन में १२ से १५ के अन्दर हो जाता है .
३. यदि लग्नेश बलशाली हो और दुसरे भाव में स्थिति हो तो ऐसे जातको का विवाह उनके ज्ञान बोध होने से पहले हो जाता था .
४. यदि किसी महिला जातक के चंद्रमा यदि उच्च का अंश का हो तो उसकी और  पति की आयु में बड़ा फ़र्क रहता है.
५. यदि सप्तमेश वक्री हो तथा मंगल षष्ठ भाव में हो तो ऐसे जातक का विवाह ३६ वर्ष  के उपरांत ही होता है.

Wednesday, November 16, 2011

हर सुबह बोलें यह हनुमान मंत्र.. मन को न सताएगा कोई भय-संशय

सांसारिक जीवन की आपाधापी में हर इंसान जीवन से जुड़े हर काम में अच्छे नतीजे ही चाहता है। लेकिन जीवन ही कैसे अच्छा बना लें? इस बारे में बिरले लोग ही विचार कर पाते हैं। अगर जीवन को ही अच्छे आचरण, अनुशासन और संकल्पों से जोड़ लिया जाए तो फिर किसी भी कार्य की सफलता में भय, संशय पैदा नहीं होता।

हनुमान भक्ति जीवन में अच्छे आचरण को अपनाने के लिये सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। शास्त्रों में हनुमान का स्मरण किसी भी वक्त अच्छे कामों व सोच की प्रेरणा ही देता है। इसलिए शास्त्रों में बताए गए एक मंत्र से हर रोज सुबह श्री हनुमान का स्मरण किया जाए तो लक्ष्य की सफलता को लेकर पैदा होने वाले भय-संशय व बाधाएं खत्म हो जाती हैं। जानते हैं यह मंत्र -

- स्नान के बाद श्री हनुमान प्रतिमा को पवित्र जल से स्नान कराने अष्टगंध, लाल चंदन, तिल का तेल और सिंदूर, सुपारी, नारियल, लाल फूलों की माला व गुड़ अर्पित करे।

- यथासंभव लाल वस्त्र पहन उत्तर दिशा की ओर मुख कर लाल आसन पर बैठ सामने श्री हनुमान की तस्वीर रख नीचे लिखे मंत्र हनुमान स्वरूप का ध्यान कर सुखी, समृद्ध व संकटमुक्त जीवन की कामना से करें -

उद्यन्मार्तण्ड कोटि प्रकटरूचियुक्तंचारूवीरासनस्थं।

मौंजीयज्ञोपवीतारूण रूचिर शिखा शोभितं कुंडलांकम्।

भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनाद प्रमोदं।

ध्यायेद्नित्यं विधेयं प्लवगकुलपतिगोष्पदी भूतवारिम्।।

- मंत्र स्मरण के बाद मिठाई का भोग लगा धूप, दीप व कर्पूर आरती करें व क्षमा प्रार्थना करे।

गुरुवार को बृहस्पति पूजा में बोलें यह विष्णु मंत्र..हर मनौती होगी पूरी

गुरु की शरण सभी कमियों और दु:खों से मुक्त कर देती है। मोटे तौर पर अज्ञानता ही शारीरिक, मानसिक या भौतिक जीवन के सारे कष्टों का कारण है। गुरु, ज्ञान द्वारा ही विद्या के अभाव को दूर कर मन व जीवन को समृद्ध बना देते हैं।

शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप बताया गया है। गुरु बल ही ईश कृपा को संभव बना देता है। गुरुवार गुरु भक्ति से ही उन कमियों और दोषों को दूर करने का दिन जो जीवन में अशांति और कलह का कारण होते हैं। ज्ञान के देवता गुरु बृहस्पति माने गए हैं।

शास्त्रों के मुताबिक बृहस्पति पूजा न केवल वैवाहिक दोष, बल्कि हर तरह से दक्षता, समृद्धि व शांति देने वाली मानी गई है। गुरु की प्रसन्नता के लिए इस दिन खासतौर पर विशेष रूप से केले के वृक्ष की पूजा का महत्व है। केले का वृक्ष विष्णु का रूप भी माना गया है।

यही कारण है कि गुरुवार को अगर विशेष पीली सामग्रियां अर्पित करने के साथ विशेष विष्णु मंत्र का ध्यान कर गुरु बृहस्पति की पूजा की जाए तो यह भरपूर सुख पाने की कामनासिद्धि का अचूक उपाय माना गया है।

- गुरुवार को केले के वृक्ष के नीचे या देवालय में केल के पत्तों के बीच एक चौकी पर पीले वस्त्र बिछाकर बृहस्पति व विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। पीली गाय के दूध से बृहस्पति व विष्णु को स्नान कराएं। पीले फूल, पीला चंदन, गुड़, चने की दाल, पीले वस्त्र  दोनों देवताओं को अर्पित करें। भोग में पीले पकवान या पीले फल अर्पित करें।

- पूजा के बाद गुरु मंत्रो के स्मरण के साथ नीचे लिखें विष्णु मंत्र स्त्रोत का विशेष ध्यान कर विवाह, धन, सुख की कामना करें व अंत में बृहस्पति-विष्णु की आरती घी के दीप से ही करें -

श्रीनिवासाय देवाय नम: श्रीपयते नम:।

श्रीधराय सशाङ्र्गाय श्रीप्रदाय नमो नम:।।

श्रीवल्लभाय शान्ताय श्रीमते च नमो नम:।

श्रीपर्वतनिवासाय नम: श्रेयस्कराय च।

श्रेयसां पतये चैव ह्याश्रयाय नमो नम:।

नम: श्रेय:स्वरूपाय श्रीकराय नमो नम:।।

शरण्याय वरेण्याय नमो भूयो नमो नम:।

स्त्रोत्रं कृत्वा नमस्मृत्य देवदेवं विसर्जयेत्।।

इति रुद्र समाख्याता पूजा विष्णोर्महात्मन:।

य: करोति महाभक्त्या स याति परमं पदम्।।

आज से शुरु करें ये टोटके, तभी बचेंगे शनि की टेढ़ी नजर से

आज से शुरु करें ये टोटके, तभी बचेंगे शनि की टेढ़ी नजर से
15 नवंबर, मंगलवार को शनि का राशि परिवर्तन शुभ फल देने वाला माना जा रहा है लेकिन जिन लोगों पर शनि की साढ़े-साती का प्रारंभ हो रहा है वे अगले साढ़े सात साल तक शनि से प्रभावित होंगे। इस दौरान उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कुछ साधारण टोटके नीचे लिखे गए हैं। इन्हें करने से शनि का कुप्रभाव कम होता है-

टोटके

1- कांसें की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान करें।

2- शनिवार को सरसों के तेल में लोहे की कील डालकर दान करें और पीपल की जड़ में तेल चढ़ाएं।

3- पीपल के वृक्ष पर सफेद ध्वजा (झंड़ा) लहराएं।

4- चांदी का चौकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें।

5- शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय जो भोजन बने उसे पत्तल में लेकर उस पर काले तिल डालकर पीपल की पूजा करें तथा नैवेद्य लगाएं और यह भोजन काली गाय या काले कुत्ते को खिलाएं।

6- नारियल तथा साबूत बादाम नदी में बहाएं।

7- पुराने लोहे का छल्ला अथवा कड़ा बनवाकर धारण करें।

8- तेल का पराठा बनाकर उस पर कोई मीठा पदार्थ रखकर गाय के बछड़े को खिलाएं।

Sunday, October 23, 2011

अगर आपको दिखने लगे ये तो समझें आ गया "गोल्डन पीरियड"


अगर आपकी किस्मत बदलने वाली है और पैसों का छप्पर फटने वाला है तो उससे पहले आपको कुछ इशारे मिलेंगे जिनसे आप पहले ही समझ जाएंगे कि आपका गोल्डन पिरियड आने वाला है जानिए वो कैसे इशारे हैं।

- अगर आप सपने में में इन्द्र धनुष देखते हैं तो समझें आपके जीवन का बहुत सुखमय और खुशियों भरा समय शुरु होने वाला है।

- अगर सपने में कलश, शंख और सोने के गहने दिखे तो आपको जीवन में हर सुख मिलने वाला है।

- ये भी एक इशारा है अच्छे समय का, अगर सपने में खुद को चाय या चाय की चुस्की लेते देखें तो समझें आपके जीवन में हर्ष उल्लास और समृद्धि आने वाली है।

- जब कोई अपनी खोई हुई वस्तु प्राप्त करता है तो उसे आगामी जीवन में सुख मिलता है।

- अगर कोई व्यक्ति सपने में तिल, चावल सरसों, जौ, अन्न, का ढेर देखता है तो उस व्यक्ति को जीवन में सभी सुख मिलते हैं।

जानिए, शनि अस्त होने से आपकी राशि के लिए कैसी रहेगी दीपावली?

इस बार दीपावली चित्रा नक्षत्र जिसका स्वामी मंगल है, में आ रही हैं। दीपावली बुधवार को आएगी। शनि 30 अक्टूबर तक अस्त है। यानि अस्त शनि की दशा में ही दीपावली का पूजन होगा। इस दौरान मेष राशि में स्थित गुरु भी वक्री होगा। शुक्र स्वयं की स्वामित्व की राशि तुला मे स्थित होगा। उसके साथ सूर्य नीच का एवं बुध एवं चंद्रमा भी होगा। चंद्र, बुध शत्रु है सूर्य शुक्र सम हैं तथा सूर्य नीच का होगा। मंगल भी नीच का होगा एवं मंगल की ही महादशा होगी। तुला राशि में चार ग्रहों की युति होगी। इसी दिन अमावस्या का योग भी होगा।

इतने सारे योग इस दीपावली को बहुत खास बना रहे हैं। यह स्थिति व्यापार के लिए ठीक नहीं होगी। निवेश कहां, कैसे करें, यह समझ नहीं आएगा। कीमती धातुओं के भाव लगातार ऊपर नीचे होते रहेंगे। मंहगाई का ग्राफ बढ़ेगा। कई देशों की आर्थिक हालत कमजोर होगी। बीमारी एवं रोगों के फैलने का भय होगा। शत्रु राशि गत अष्टम राहु भी उत्पात मचाकर आतंक में कई लोगों के हताहत होने का संकेत दे रहा है। प्राकृतिक प्रकोप संक्रामक रोग के रूप में हो सकता हैं। जनता में उत्साह की कमी रहेगी। स्थापित सरकार से जनता नाखुश ही रहेगी।

पं. शर्मा के अनुसार नीच का मंगल, मंगल की महादशा एवं मंगल के स्वामित्व वाले नक्षत्र होने के कारण जमीन में कंपन हो सकता है। यह दिन शनिवार होने से जो मंगल का परम शत्रु है अत: यह स्थिति शुभ नहीं कही जा सकती। हालांकि शनि के अस्त होने के कारण प्रभाव कुछ कम हो सकता है फिर भी सावधान रहने की आवश्यकता हैं।

दीपावली पर किस राशि पर कैसा प्रभाव रहेगा?

मेष-व्यापार में लाभ होगा।

वृषभ-चर्म रोग हो सकता हैं।

मिथुन-भाइयों से सहयोग एवं श्रेष्ठ पराक्रम।

कर्क-जमीन से लाभ होगा वर्चस्व बढ़ेगा।

सिंह-नौकरी मे लाभ प्रमोशन।

कन्या-व्यापार मे हानि चोट का भय।

तुला-अत्यधिक लाभ शारिरीक कष्ट।

वृश्चिक-वाहन से हानि, धन का नुकसान।

धनु-भाग्य का साथ, पदौन्नति।

मकर-कार्य की अधिकता, लाभ।

कुंभ-प्रमोशन एवं लाभ।

मीन-व्यय की अधिकता, रोग।

धनतेरस-सोम प्रदोष का अति दुर्लभ योग, मालामाल बना देगी इस मंत्र से शिव पूजा

धनतेरस-सोम प्रदोष का अति दुर्लभ योग, मालामाल बना देगी इस मंत्र से शिव पूजा
जीवन में सुख, शांति और सौंदर्य की कामना है तो मन, वचन व कर्म में सत्य की मौजूदगी भी जरूरी है। शिव हो या शंकर हर स्वरूप व शब्द में भी शमन यानी सुख व शांति का भाव ही छुपा है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान शंकर ने समुद्र मंथन से निकले घातक विष को पीकर जगत के दु:खों का शमन किया और इसी मंथन से ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी प्रकट हुई।

क ल सोमवार के साथ प्रदोष तिथि शिव भक्ति की घड़ी है। जिसके साथ ही धनतेरस का मंगलकारी योग है। जहां सोम प्रदोष पर शिव पूजा हर मनोथरसिद्धि कर सुख-संपन्नता पाने की मंगलकारी घड़ी मानी जाती है। वहीं धनतेरस देवी लक्ष्मी उपासना के पांच दिवसीय महापर्व का पहला दिन।

शास्त्रों में सोम प्रदोष व धनतेरस की शुभ तिथि पर भौतिक सुख खासतौर पर धन की कामना पूरी करने के लिए शिव पूजा के कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। इनमें मंत्र विशेष से शिव का ध्यान व अनाज का चढ़ावा लक्ष्मी की अपार कृपा करने वाला माना गया है।

धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा के साथ ही प्रदोष काल यानी, दिन-रात की मिलन की घड़ी या शाम के वक्त शिव पूजा के यहां बताए इस उपाय को अपनाकर समृद्ध और खुशहाल जीवन की कामना पूर्ति करें -

- शाम के वक्त लक्ष्मी पूजा के साथ ही शिवलिंग या मूर्ति को जल या पंचामृत स्नान कराकर सफेद चंदन, सफेद फूल, बिल्वपत्र, सफेद वस्त्र व मिठाई चढ़ाकर नीचे लिखे मंत्र से शिव का स्मरण करें -

कैलासशिखरस्थं च पार्वतीपतिमुत्तमम् ।

यथोक्तरुपिणं शम्भुं निर्गुणं गुणरुपिणम् ।

पंचवक्त्रं दशभुजं त्रिनेत्रं वृषभध्वजम् ।

कर्पूरगौरं दिव्यांगगं चन्द्रमौलिं कपर्दिनम् ।

व्याघ्रचर्मोत्तरीयं च गजचर्माम्बरं शुभम् ।

वासुक्यादिपरीतांगं पिनाकाद्यायुधान्वितम् ।

सिद्धयोऽष्टौ च यस्याग्रे नृत्यन्तीह निरन्तरम् ।

जयजयेति शब्दैश्च सेवितं भक्तपुंजकैः ।

तेजसा दुस्सहेनैव दुर्लक्ष्यं देवसेवितम् ।

शरण्यं सर्वसत्त्वानां प्रसन्नमुखपंकजम् ।

वेदैः शास्त्रैर्यथागीतं विष्णुब्रह्मनुतं सदा ।

भक्तवत्सलमानन्दं शिवमावाहयाम्यहम् |

- इसके बाद महादेव या शिवलिंग के ऊपर अक्षत यानी, चावल जो टूटे न हो लक्ष्मी कृपा की कामना से चढ़ाएं। यह उपाय धन कामना सिद्धि के लिए बहुत शुभ माना गया है।

- अंत में शिव की धूप, दीप व कर्पूर आरती कर दरिद्रता से मुक्त जीवन की कामना करें।

Friday, October 21, 2011

दीपावली पर धनलक्ष्मी कर देगी मालामाल अगर घर के बाहर हो ये निशान

आपको यकिन नहीं होगा कि र्सिफ एक पवित्र निशान घर के बाहर लगा कर आप इस दीपावली पर मालामाल बन सकते हैं। जानिए क्यों और कैसे

दीपावली रौशनी और खुशहाली का पर्व है। इस दिन श्री गणेश जी एवं लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गणेश एवं लक्ष्मी जी उस घर मे रहने के लिये आते हैं जिस घर मे उनका पूजा सत्कार किया जाता है। गणेश पूजा के बिना कोई भी पूजन अधूरा होता है इसलिए लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन भी किया जाता है। घर को साफ-सुथरा कर रंगोली और स्वस्तिक बनाने की भी परंपरा है। दरअसल स्वस्तिक को गणेशजी का प्रतीक माना जाता है।

सभी मांगलिक चिन्हों में से स्वस्तिक सबसे कल्याणकारी चिन्ह है। इस चिन्ह को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। शुभ कार्यो में आम की पत्तियों को  घर के दरवाजे पर बांधा जाता है।  क्योंकि आम की पत्ती, इसकी लकड़ी और फल को ज्योतिष की दृष्टी से भी बहुत शुभ माना जाता है। मंगल प्रसंगों के अवसर पर पूजा स्थान तथा दरवाजे की चौखट और प्रमुख दरवाजे के आसपास स्वस्तिक चिन्ह बनाने की परंपरा है। वे स्वस्तिक कतई परिणाम नहीं देते, जिनका संबंध प्लास्टिक, लोहा या स्टील से हो।

सोना, चांदी, तांबा, पंचधातु या आम की लकड़ी से बने स्वस्तिक प्राण प्रतिष्ठित करवाकर चौखट पर लगवाने से सुखद परिणाम देते हैं, जबकि रोली-हल्दी-सिंदूर से बनाए गए स्वस्तिक संतुष्टि ही देते हैं। अगर आप मालामाल बनना चाहते हैं और पारिवारिक प्रगति चाहते हैं तो ऐसे स्वस्तिक यंत्र गुरु-पुष्य तथा दीपावली के अवसर पर लक्ष्मी श्रीयंत्र के साथ लगाना लाभदायक है।

Tuesday, September 13, 2011

नीच राशि का मंगल: बुरे असर से बचने के लिए राशि अनुसार ये उपाय करें

9 सितंबर को मंगल मिथुन राशि से निकल कर अपनी निच राशि में प्रवेश कर चूका है। 30 अक्टुबर तक इसका असर रहेगा। मंगल का राशि बदलना सभी राशि वालों को प्रभावित करेगा। चाहे वो शुभ या अशुभ प्रभाव हो।  निच राशि में आ कर मंगल जो बुरा असर आप पर डालेगा उससे बचने के लिए आप राशि अनुसार उपाय करें इनसे आप मंगल के
बुरे असर से अवश्य ही बच जाऐंगे।

मंगल के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए आप अपनी राशि के अनुसार उपाय ये करें।

मेष- हनुमान मन्दिर में बूंदी के लड्डू का प्रसाद चढ़ाएं।

वृष- तांबे का सिक्का या कलश का दान दें।

मिथुन- बहते पानी में रेवड़ी या बताशे प्रवाहित करें।

कर्क- भोजन करने से पहले अपने भोजन में से कुछ हिस्सा गाय के लिए निकालें।

सिंह- गुड़ की रोटी बनाकर कुत्तों को दें।

कन्या- 10 वर्ष से कम उम्र की 9 कन्याओं की पूजा कर के उनको दक्षिणा दें।

तुला- हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाए और हनुमान जी की दाहिनी भुजा से सिंदूर लेकर स्वयं लगाएं। 

वृश्चिक- आप लाल हकिक धारण करें।

धनु- रात को तांबे के कलश में पानी भर कर सिरहाने रख कर सोएं और सुबह कांटेदार पौधे में वो जल डाल दें।

मकर- आप शहद का दान दें तो आप पर मंगल के अशुभ प्रभाव नही होंगे।

कुंभ- किसी गरीब को तांबे का सिक्का दान दें।

मीन- आप लाल वस्तुओं से परहेज रखें और किसी भी कार्य के लिए घर से मीठा खाकर निकलें।

ये तीन सस्ती चीजें काले कपड़े में बांधे और शनि को मनाएं...

शनिवार, ये दिन है शनि देव का... इस दिन शनि को मनाने के लिए विशेष पूजन कर्म करने का महत्व है। ज्योतिष के अनुसार कुंडली में शनि की स्थिति काफी अधिक खास होती है। शनि की शुभ या अशुभ स्थिति के चलते व्यक्ति का जीवन सुखी या दुखों से पीडि़त हो सकता है। शनि का सर्वाधिक प्रभाव साढ़ेसाती और ढैय्या में ही झेलना पड़ता है। हर व्यक्ति को शनि की साढ़ेसाती अवश्य झेलना पड़ती है, इससे कोई बच नहीं सकता।

यदि शनि के कारण किसी व्यक्ति को अत्यधिक दुखों और असफलताओं का सामना करना पड़ रहा है तो शनिवार के दिन कुछ विशेष पूजन कार्य किए जाने चाहिए। शनि को मनाने के लिए यह सटीक उपाय बताया गया है, इसे प्रति शनिवार अपनाने से बहुत जल्द शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं।

शनि के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए शनिवार के दिन एक काले कपड़े में काले उड़द, काले तिल और लोहे की वस्तु बांध लें। शनिदेव को अर्पित करें और पूजा करें। इसके बाद किसी ब्राह्मण, किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले कपड़े में बंधी तीनों चीजें दान कर दें। ऐसा हर शनिवार को किया जाना चाहिए। कुछ ही दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे।

नीच राशि का शुक्र: प्यार, पैसा और दांम्पत्य सुख के उपाय

शुक्र के नीच राशि में आ जाने से सभी राशि वालों के जीवन में प्यार, पैसा और दांम्पत्य सुख संबंधित परेशानियां आने लगती है। 9 सितंबर से  शुक्र सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में आया है । शुक्र अपनी नीच राशि में यानी कन्या राशि में 4 अक्टूबर तक रहेगा। अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब भी शुक्र अपनी नीच राशि में आता है सभी राशि वालों के प्यार, पैसा और दांपत्य पर शुभ-अशुभ असर पड़ता है। वैसे तो शुक्र हमेशा शुभ फल देने वाला होता है। लेकिन अपनी नीच राशि में आ कर कुछ राशि वालों के लिए अशुभ फल देता है। अगर आप राशि अनुसार शुक्र के उपाय करें तो आपके सुखी दांपत्य जीवन में प्यार और पैसा दोनों रहेगा।

शुक्र देव को प्रसन्न करने के उपाय-

मेष- किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।

वृष- पिता से सोना लेकर पहनें या धन स्थान पर रख कर पूजा करें तो जल्दी ही धन लाभ होगा।

मिथुन- भाई या बहन को शुक्र देव के लिए सफेद वस्त्र के साथ चांदी का सिक्का दें।

कर्क- शुक्रवार के दिन गाय के दुध से स्नान करना चाहिए।

सिंह- 10 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को गाय के दूध की खीर खिलाएं तो आपको जल्दी ही इसके शुभ परिणाम मिलेंगे।

कन्या- सोने या चांदी की लक्ष्मी प्रतिमा का पूजन कर के धन स्थान पर रखें।

तुला- माता से सफेद कपड़े में चावल और चांदी का सिक्का लेकर धन स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी प्रस्रन्न होगी।

वृश्चिक- लक्ष्मी जी को कमल पुष्प और कमल गट्टे अर्पित करें।

धनु- भोजपत्र पर लाल चंदन से श्रीं: लिख कर उसकी पूजा करें।

मकर- किसी मन्दिर में गाय का घी दान दें।

कुंभ- मां लक्ष्मी को शुद्ध गाय के घी का दीपक लगाएं।

मीन- मछलियों को आटे की गोलियां (दाना) डालें।

नीच राशि का शुक्र: प्यार, पैसा और दांम्पत्य सुख के उपाय

शुक्र के नीच राशि में आ जाने से सभी राशि वालों के जीवन में प्यार, पैसा और दांम्पत्य सुख संबंधित परेशानियां आने लगती है। 9 सितंबर से  शुक्र सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में आया है । शुक्र अपनी नीच राशि में यानी कन्या राशि में 4 अक्टूबर तक रहेगा। अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब भी शुक्र अपनी नीच राशि में आता है सभी राशि वालों के प्यार, पैसा और दांपत्य पर शुभ-अशुभ असर पड़ता है। वैसे तो शुक्र हमेशा शुभ फल देने वाला होता है। लेकिन अपनी नीच राशि में आ कर कुछ राशि वालों के लिए अशुभ फल देता है। अगर आप राशि अनुसार शुक्र के उपाय करें तो आपके सुखी दांपत्य जीवन में प्यार और पैसा दोनों रहेगा।

शुक्र देव को प्रसन्न करने के उपाय-

मेष- किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।

वृष- पिता से सोना लेकर पहनें या धन स्थान पर रख कर पूजा करें तो जल्दी ही धन लाभ होगा।

मिथुन- भाई या बहन को शुक्र देव के लिए सफेद वस्त्र के साथ चांदी का सिक्का दें।

कर्क- शुक्रवार के दिन गाय के दुध से स्नान करना चाहिए।

सिंह- 10 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को गाय के दूध की खीर खिलाएं तो आपको जल्दी ही इसके शुभ परिणाम मिलेंगे।

कन्या- सोने या चांदी की लक्ष्मी प्रतिमा का पूजन कर के धन स्थान पर रखें।

तुला- माता से सफेद कपड़े में चावल और चांदी का सिक्का लेकर धन स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी प्रस्रन्न होगी।

वृश्चिक- लक्ष्मी जी को कमल पुष्प और कमल गट्टे अर्पित करें।

धनु- भोजपत्र पर लाल चंदन से श्रीं: लिख कर उसकी पूजा करें।

मकर- किसी मन्दिर में गाय का घी दान दें।

कुंभ- मां लक्ष्मी को शुद्ध गाय के घी का दीपक लगाएं।

मीन- मछलियों को आटे की गोलियां (दाना) डालें।

Friday, September 9, 2011

घर में शांति /सुकून के लिए वास्तु सिद्धांत


घर में शांति /सुकून के लिए वास्तु सिद्धांत ----


वास्तु के अनुसार घर की सजावट करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें :-
1) घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अथवा 'ॐ' की आकृति लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
2) जिस भूखंड या मकान पर मंदिर की पीठ पड़ती है, वहाँ रहने वाले दिन-ब-दिन आर्थिक व शारीरिक परेशानियों में घिरते रहते है।
3) समृद्धि की प्राप्ति के लिए नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश अवश्य रखना चाहिए।
4) घर में ऊर्जात्मक वातावरण बनाने में सूर्य की रोशनी का विशेष महत्व होता है इसलिए घर की आंतरिक साज-सज्जा ऐसी होनी चाहिए कि सूर्य की रोशनी घर में पर्याप्त रूप में प्रवेश करे।
5) घर में कलह अथवा अशांति का वातावरण हो तो ड्राइंग रूम में फूलों का गुलदस्ता रखना श्रेष्ठ होता है।
6) अशुद्ध वस्त्रों को घर के प्रवेश द्वार के मध्य में नहीं रखना चाहिए।
7) वास्तु के अनुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए।
8) गृहस्थ के बेडरूम में भगवान के चित्र अथवा धार्मिक महत्व की वस्तुएँ नहीं लगी होना चाहिए।
9) घर में देवस्थान की दीवार से शौचालय की दीवार का संपर्क नहीं होना चाहिए।

गृह कलह/क्लेश निवारण हेतु सरल और आसन उपाय----

वर्तमान समय में सभी परिवार चाहे वह संयुक्त हो या एकल परिवार हो गृह कलह से पीड़ित नजर आते है। गृह कलह के कारण परिवार के सभी सदस्यों में हृदय रोग, मधुमेह, उन्माद जैसी भयानक बीमारियां उत्पन्न हो सकती है एवं कभी-कभी यह गृह कलह प्राण-घातक (आत्मघातक) भी जो जाते है। गृह कलह मुख्य रूप से सास-बहु, पिता-पुत्र, भाई-बहिन-भाई, देवरानी-जेठानी, ननद-भाभी, पति-पत्नि के बीच दिखाई देता है।


आइये हम और आप ज्योतिषीय दृष्टि से गृह कलह के कारणों एवं उनके उपाय के बारे में जानें----

ज्योतिष् के अनुसार जन्म कुण्डली में सप्तम भाव सप्तमेश, सप्तम् भाव में स्थित ग्रह सप्तम् भाव पर दृष्टि डालने वाले गृह तथा सप्तम् भाव के कारक ग्रह से व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन के बारे में विचार किया जाता है। यदि जातक का सप्तम् बलहीन हो सप्तम् भाव पर शनि, मंगल, सूर्य या राहु-केतु पापी कूरुर ग्रह का प्रभाव हो गुरु एवं शुक्र अस्त हो या पापक्रांत (पापकरतारी) हों तो दाम्पत्य सुख में बाधा आती है।
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सूर्य-ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय----

जातक की कुण्डली में यदि सूर्य प्रथम, द्वितीय और सप्तम् भावों पर प्रभाव होने पर और बलहीन व नीच राशि के सूर्य के सप्तम् भाव में होने पर जातक अहंकारी, स्वाभिमानी, अड़ियल एवं जिद्दी स्वाभाव का होता है। पत्नी या परिवार के अन्य लोगों से स्वाभिमान का टकराव उत्पन्न होता है और जो गृह कलह का कारण बनता है।
उपाय -
1. सूर्योदय से पूर्व स्नानादि कर भगवान् सूर्य को ताँबे के लोटे में पवित्र शुद्ध जल भरकर उसमें लाल पुष्प, रोरी, अक्षत, मसूर दाल या मलका, गुड़ डालकर सूर्योदय काल में निम्न मंत्र पढ़ते हुए अध्र्य दें। एहि सूर्य! सहस्त्रांशो ! तेजोराशे! जगत्पते! अनुकम्प मां भक्त्या गृहाणाघ्र्यं दिवाकर!
2. ताँबे की अगुँठी या कड़ा दाहिने हाथ में घारण करें।
3. रविवार को दोपहर के समय लाल गाय को हाथों में भरकर गेहूँ खिलाए। कृपया जीमन में न डालें।
4. सूर्य भगवान के हृदय स्त्रोत का पाठ करें।
5. किसी विद्वान पण्डित से सूर्य की शान्ति जप सहित करवाए।
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मंगल ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय----
मंगल एक उग्र एवं पापी ग्रह माना जाता है। जब जन्म कुण्डली में मंगल प्रथम, चैथे, सातवें, आठवें, या बारहवें भाव में स्थित हों तो जातक मंगली कहलाता है। मंगल जातक स्वभाव में विशेष प्रभाव करता है। मंगल के प्रभाव से जातक क्रोधी, उग्रता पूर्ण, एवं चड़चिडाहट पूर्ण व्यवहार करता है। यदि लग्न अथवा सप्तम भाव पर मंगल स्थित हो या सप्तम् भाव पर मंगल का प्रभाव (नीच दृष्टि, शत्रु) हो तथा किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो जातक क्रोधी, अहंकारी, अभिमानी होता है और ये स्वभाव पति-पत्नी एवं परिवार के अन्य जनों के मध्य विवाद, गृह कलह का कारण उत्पन्न होता है।
उपाय-----
1. मंगलवार के दिन लाल गाय को गुड रोटी खिलाए
2. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
3. शुक्ल पक्ष के मंगलवार का स्नानादि कर हनुमान मंदिर (दक्षिणमुखी) में चमेली का तेल सिन्दूर, गुड़, चना, एवं जनेऊ चढ़ाए और हनुमान संकट मोचन का पाठ करें। ऐसा लगातार सात मंगलवार करें।
4. मसूर दाल, गेंहूँ, गुड़, लाल पुष्प, ताँम्र-पात्र कुछ द्रव्य(दक्षिणा) सहित मंगलवार को ब्राह्मण या भिक्षुक को दान करें।
5. बन्दरों को चना-गुड़ खिलाए।
6. घर के सभी लोग संयुक्त रूप से भोजन करें। (दिन में एक बार भी कर सकते है।)
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शनि ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय-----
यदि शनि की दृष्टि प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ अथव सप्तम् भाव में प्रभाव डालती है और साथ ही शनि अन्य पापी ग्रहों से सम्बन्ध बनता हों तो ऐसे शनि दाम्पत्य जीवन को उत्साह उमंग से क्षीण, परस्पर अकर्षक से विहीन बनता है। पति-पत्नी एवं परिवार के सदस्य साथ में रहते हुए पृथक रहने के समान जीवन व्यतीत करते हैं। आपस में चिड़चिडापर युक्त, कडवाहट युक्त एवं रूखा व्यवहार करते है। जिसके फलस्वरूप गृह कलह उत्पन्न होती है।
उपाय------
1. हनुमान चालीसा का पाठ नित्य करें।
2. सोलह सोमवार व्रत करें।
3. स्फाटिक या पारद शिवलिंग पर नित्य गाय का कच्चा दुध चढ़ाए फिर शुद्ध जल चढ़ाऐं और ओम् नमः शिवाय मन्त्र का जाप करें।
4. प्रदोष व्रत रखें।
5. प्रत्येक शनिवार को सूर्योदय के समय पीपल में तिल युक्त जल चढ़ाऐं और शाम को (सूर्यअस्त के बाद) तेल का दीपक जलाऐं।
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राहु ग्रह के कारण गृह कलह एवं उपाय------------------
जातक की कुण्डली में प्रथम, द्वितीय , चतुर्थ, सप्तम् भाव में राहु के दुष्प्रभाव के कारण दाम्पत्य जीवन एवं परिवार में विवाद, झगडे़ इत्यादि विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ सकता है। राहु आकस्मिक क्रोध, वाणी कटुता, लोभ उत्पन्न करता है। जो गृह कलह का कारण होता है।
उपाय---------------
1. उड़द, तिल, तेल, काला कपड़ा छाता, सूपा, लोहे की चाकू, बुधवार के दिन सफाई कर्मचारी वर्ग के लोगों को दान करें।
2. शनिवार के दिन नीले वस्त्र में चार नारियल बांध कर नदी (बहते जलाशय) में लगातार सात शनिवार प्रवाहित करें।
3. केसर का तिलक माथे पर लागाऐं ।
4. मछली एवं पंक्षी को दाना खिलाऐं।
5. रुद्राभिषेक पूजन प्रत्येक प्रदोष में करें।
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पति-पत्नी के मध्य गृह कलह दूर करने हेतु उपाय-------
1. यदि पति-पत्नी के माध्य वाक् युद्ध होता रहता है तो दोनों पति-पत्नी को बुधवार के दिन दो घण्टे का मौन व्रत धारण करें।
2. पति को चाहिए की शुक्रवार को अपनी पत्नी को सुन्दर सुगन्ध युक्त पुष्प एवं इत्र भेंट करें एवं चाँदी की कटोरी चम्मच से दही शक्कर पत्नी को खिलाऐं।
3. पति को चाहिए की पत्नी की माँग में सिन्दूर भरें एवं पत्नी पति के मस्तक पर पीला तिलक लगाऐं।
4. स्त्री को चाहिए की अपने शयन कक्ष में 100 ग्राम सौंफ प्रातःकाल स्नान के बाद लाल कपडे में बांधकर रखें।
5. पति-पत्नी दोनों को फिरोज रत्न चाँदी में अनामिका आगुँली में धारण करें।
6. प्रतिदिन पति-पत्नी लक्ष्मी-नारायण या गौरी-शंकर के मन्दिर में जाऐं, सुगन्धित पुष्प चढ़ाऐं और दाम्पत्य सुख हेतु प्रार्थना करें।
7. पति-पत्नी सोमवार को दो-मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
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सास-बहु के बीच कलेश दूर करने के उपाय---------
1. घर के बर्तन के गिरने टकराने की आवाज न आने दें।
2. घर सजाकर सुन्दर रखें।
3. बहू को चाहिए की सूर्योदय से पहले घर में झाडू लगाकर कचड़े को घर के बाहर फेंके।
4. पितरों का पूजन करें।
5. प्रतिदिन पहली रोटी गाय को एवं आखरी रोटी कुत्ते को खिलाऐं।
6. ओम् शांति मन्त्र का जाप सास-बहू दोनों 21 दिन तक लगातर 11-11 माला करें।
7. रोटी बनाते समय तवा गर्म होने पर पहले उस पर ठंडे पानी के छींटे डाले और फिर रोटी बनाएं।
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भाई-भाई के बीच गृह कलह दूर करने के उपाय--------
1. गणेश जी एवं स्वामी कार्तिक जी का पूजन प्रतिदिन करें।
2. शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाऐं।
3. विष्णु जी को तुलसी पत्र चढ़ाऐं।
4. माता-पिता एवं पूजनीय व्यक्तियों के चरण स्पर्श करें।
5. ओम् रामाय नमः मन्त्र का जप करें।
6. रामायण या रामचरित्र मानस का यथा शक्ति पाठ करें।
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देवरानी-जेठानी एवं ननद-भाभी में गृह कलह को दूर करने के उपाय-------
1. गाय के गोबर का दीपक बनाकर तेल रुई सहित उसे जलाऐं एवं मुख्य दरवाजे में रख कर उसमें थोड़ा गुड़ डालें।
2. ओम् नमः शिवशक्तिस्वरूपाय मम गृहे शांति कुरु-कुरु स्वाहा इस मन्त का जप 41 दिन तक नित्य 11 माला (रुद्राक्षमाला से) करें।
3. शिवलिंग में दूध एवं गंगाजल चढ़ाऐं और फिर बिल्व पत्र और पुष्प घर के सभी लोग चढ़ाऐं।
4. घर को सुन्दर, सजावट युक्त रखें एवं घर के चारों कोनो में शंख ध्वनि करें।
5. गीता का पाठ करें।
6. शिव जी का पूजन अपने पूरे परिवार सहित करें।
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गृह कलह शान्ति हेतु अन्य उपाय-------------
1. प्रतिदिन आटा गूथते समय एक चुटकी नकम एवं एक चुटकी बेसन उसमें मिला लें।
2. गेंहूँ चक्की पर पिसने जाने से पहले उसमें थोड़े से चने मिला दें तथा केवल सोमवार एवं शनिवार को ही गेंहूँ पिसवाऐं।
3. दुर्गा सप्तशती का पाठ नवरात्री में विद्वान पण्डित से कराऐं।
4. चीटियों का शक्कर खिलाऐं ।
5. घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में शौंच का स्थान न रखें एवं उस स्थान को साफ, और भार युक्त वास्तु से दूर रखें।
6. जो ग्रह कलह कारक हों उनकी वस्तुओं का दान करें।
7. कुण्डली के बली ग्रहों के मंत्रों का जप विद्वान पण्डित जी से या स्वयं किसी गुरु के सानिध्य में करें।
8. तेज स्वर (ऊंची आवाज) में बात न करें।

Sunday, September 4, 2011

गालों का रंग बता देता है हाव-भाव और आदत


क्या आप जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति के गालों के रंग को देखकर उसका स्वभाव मालूम किया जा सकता है? जी हां, यह संभव है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शरीर के अंगों की बनावट को देखते हुए किसी भी व्यक्ति के स्वभाव, हाव-भाव और आदतों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जिन ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव हमारे ऊपर सर्वाधिक होता है उसी के अनुसार हमारे गुण और अवगुण होते हैं।

जिन लोगों के गालों का सफेद रंग होता है वे अक्सर अस्वस्थ रहते हैं। वे अधिकांशत: किसी न किसी बीमारी से त्रस्त रहते हैं। ऐसे लोगों में निराशा रहती है और वे आलसी भी हो सकते हैं। इन लोगों में अनिश्चितता की भावना अधिक होती है। हर कार्य को अपने ही ढंग से करते हैं। इसके अलावा जिन लोगों के गालों का रंग लाल है वे लोग थोड़े गुस्से वाले होते हैं। छोटी-छोटी बातों में ही इन्हें क्रोध आ जाता है।

ये लोग साहसी, युद्धप्रिय व उत्तेजित व्यक्तित्व के होते हैं। ये लोग किसी भी कार्य को बहुत अच्छे ढंग से पूर्ण करते हैं। जिन लोगों के गालों का रंग गुलाबी दिखाई देता है वे लोग संतुलित मानसिकता के होते हैं।

किसी भी परिस्थिति में खुद को बहुत अच्छे से सेट कर लेते हैं। हर कार्य को करने की इनकी एक विशेष शैली होती है। इन लोगों को जीवन में कई उपलब्धियां हासिल होती हैं। किसी भी व्यक्ति के संबंध में सटीक भविष्यवाणी करने के लिए उसके विषय में गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता होती है। तभी सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

तिल्ली के तेल का दीपक जलाएं और गरीबी से पीछा छुड़ाएं...

धर्म-ज्योतिष को मानने वाले लोग शनिदेव और शनि के प्रभावों को अच्छे से जानते हैं। ऐसा माना जाता है कि शनि बुरे फल ही प्रदान करता है। ज्योतिष के अनुसार शनि को न्यायाधिश का पद प्राप्त है। इसी वजह से इन्हें क्रूर देवता माना जाता है। हमारे द्वारा किए गए कर्मों का फल शनिदेव साढ़ेसाती और ढैय्या के समय में प्रदान करते हैं।

यदि किसी व्यक्ति से जाने-अनजाने कोई पाप या गलत कार्य हो गया है तो शनिदेव ऐसे लोगों को निश्चित समय पर इन कर्मों का फल प्रदान करते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अत्यधिक कष्ट भोगना पड़ रहे हैं तो इन अशुभ फलों के प्रभावों को कम करने के लिए कुछ ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं।

कुछ लोगों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो उसे जीवनभर कई प्रकार के कष्ट उठाने पड़ते हैं। ऐसे में प्रति शनिवार यह उपाय अपनाएं-

शनिवार को प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि करके पवित्र हो जाएं। इसके बाद जल, दूध, तिल्ली के तेल का दीपक लेकर किसी पीपल के वृक्ष के समीप जाएं। अब पीपल पर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष के नीचे तिल्ली के तेल के दीपक को प्रज्जवलित करें। शनिदेव प्रार्थना करें कि आपकी सभी समस्याएं दूर हो और बुरे समय से पीछा छुट जाए। इसके बाद पीपल की सात परिक्रमा करें।

घर लौट कर एक कटोरी में तेल लें और उसमें अपना चेहरा देखकर इस तेल का दान करें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में आपको सकारात्मक फल प्राप्त होने लगेंगे। इसके प्रभाव से आपके घर की पैसों से जुड़ी समस्त समस्याएं दूर होने लगेंगी और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलेगी।

पैसों की किल्लत दूर करे यह लक्ष्मी-गणेश मंत्र

पैसों की किल्लत दूर करे यह लक्ष्मी-गणेश मंत्र
ज़िंदगी और गृहस्थ धर्म के सही संतुलन के लिए जरूरी है- आजीविका। जिससे मिलने वाला अर्थ या धन सभी सुख और सुविधाओं को आसान बना देता है। यही कारण है कि हर व्यक्ति छोटा-बड़ा व्यवसाय या फिर नौकरी करता है। किंतु अनेक अवसरों पर ऐसी स्थिति बनती है कि तमाम कोशिशों के बाद भी व्यक्ति व्यापार में घाटे या मंदी के दौर से गुजरने लगता है। ऐसी हालात किसी को भी बेहद परेशान कर देती है।
शास्त्रों में ऐसी ही हालात से बचने या बाहर आने के लिए देव उपासना का महत्व बताया गया है। जिसे किसी भी व्यक्ति को थोड़ा समय देकर जरूर करना चाहिए।
हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश विघ्रहर्ता और माता लक्ष्मी धन और ऐश्वर्य की देवी के रूप में पूजी जाती है। इसलिए यहां जानते हैं भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी के स्मरण का एक ऐसा ही आसान मंत्र, जो व्यवसाय में हो रहे घाटे से बचाता है और पैसों की किल्लत दूर कर धनलाभ देता है -
- बुधवार या चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की मूर्ति एक पात्र या चौकी पर विराजित कर उनके सामने घी का दीप जलाएं।
- श्री गणेश की गंध, अक्षत, दूर्वा, पुष्प से पूजा कर कम से कम 108 बार इस गणेश-महालक्ष्मी मंत्र का जप करें।
ऊँ गणेश महलक्ष्यै नम:।
या
ऊँ गं लक्ष्म्यै आगच्छ आगच्छ फट्।।
- मंत्र जप पूरे होने पर लड्डू का भोग लगाकर श्री गणेश और महालक्ष्मी से घाटे से उबारने और आर्थिक कृपा की प्रार्थना करें। ऐसा मंत्र जप और गणेश लक्ष्मी का ध्यान कुछ ही दिनों में शुभ नतीजा देगा।

कुंवारे लोगों के कमरे में ये रंग होगा तो शादी में आएंगी परेशानियां

हमें प्राप्त होने वाले सुख-दुख काफी हद तक हमारे घर के वास्तु पर भी निर्भर करते हैं। यदि जहां हम रहते हैं उस स्थान  या घर पर वास्तु दोष हों तो लाख कोशिशों के बाद भी सफलता मुश्किल से ही प्राप्त होती है।

जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है और पारिवारिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इन अशुभ प्रभावों के चलते ध्यान रखना चाहिए कि घर में कोई वास्तु दोष न हो।

मनुष्य जीवन के 16 संस्कार मुख्य रूप से बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है विवाह। विवाह के संबंध में ऐसा माना जाता है कि जोडिय़ां भगवान ही बनाते हैं और शादी का समय भी भगवान द्वारा ही तय किया जाता है।

कई युवाओं की शादी बहुत विलंब से होती हैं। इसके पीछे भी वास्तु दोष एक कारण हो सकता है। इसी वजह से विवाह योग्य लड़के और लड़कियों का कमरा वास्तु के अनुसार ही बनाया और सजाया जाना चाहिए।

कुंवारे लड़के और लड़कियों के कमरे में मुख्य रूप से काला रंग नहीं होना चाहिए। इनके कमरे में काले रंग के परदे, काले रंग के दरवाजे, काली अलमारियां, काली खिड़कियां, टेबल, बेड या पलंग आदि सभी आवश्यक वस्तुएं काले रंग की नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर विवाह योग्य लड़के और लड़किया की शादी में कई बाधाएं आती हैं।

विवाह प्रस्ताव नहीं आते हैं और यदि आते भी हैं तो बात पक्की नहीं हो पाती है। काला रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इससे नेगेटिव एनर्जी अधिक एक्टिव हो जाती है और बुरा प्रभाव देती है। इस वजह से विवाह योग्य युवाओं को कमरे में काले रंग से परहेज करना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगलदोष है तो उसे कमरे में अधिक से अधिक लाल या गुलाबी रंग की वस्तुएं रखनी चाहिए। इससे विवाह में आ रही रुकावटें स्वत: दूर हो जाएंगी। इसके अलावा कुंडली में यदि अन्य किसी ग्रह बाधा की वजह से विवाह में विलंब हो रहा हो तो उसका उचित उपचार किया जाना चाहिए।

जन्म तारीख से जानें कब होगी आपकी सेहत खराब..!

जी हां अगर आप बीमार होने से पहले ही सावधान होना चाहते हैं या जानना चाहते है तो अपनी जन्म तारीख को जोडऩा शुरू कर दें। न्यूमरोलॉजी के अनुसार अंक बीमार होने से पहले ही बता देते हैं कि कौन सा महीना आपकी सेहत के लिए खराब रहेगा? किस महीने में आपको अपनी सेहत के लिए सावधान रहना चाहिए? जानें क्या कहती है न्यूमरोलॉजी...



मूलांक-1: जिन लोगों की जन्म तारीख 1,10,19 या 28 है।

सावधानी: अंक 1 वालों को जनवरी, अक्तूबर और दिसंबर के महीनों में अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना चाहिए।

मूलांक-2: जन्म दिनांक 2,11,20,29

सावधानी: अगर आपकी जन्म तारीख उपर बताए गए नंबरों में से है तो जनवरी, फरवरी और जुलाई के महीनों में स्वास्थ्य व खान-पान आदि में सावधानी बरतना चाहिए।

मूलांक-3: जन्म दिनांक 3,12,21,30

सावधानी: अंक तीन वालों को  फरवरी, जून, सिंतबर और दिसंबर में अपनी सेहत का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।

मूलांक-4: जन्म दिनांक 4,13,22,31

सावधानी: अपने अंक के  स्वामी अनुसार अंंक 4 वाले लोगों को जनवरी, फरवरी, जुलाई, अगस्त व सितंबर इन पांच महीनों में अपने स्वास्थ्य पर विशेष गौर करना चाहिए।

मूलांक-5:जन्म दिनांक 5,14,23

सावधानी: आपको जून, सिंतबर और दिसंबर के महीनों में अपने स्वास्थ्य के बारे में सावधानी बरतना चाहिए।

मूलांक-6:जन्म दिनांक 6,15,24

सावधानी: आपको अंक का स्वामी शुक्र है इसलिए अंक 6 वालों को मई, अक्तूबर एवं नवंबर के महीने में उन्हें सावधानी रखनी चाहिए।

मूलांक-7: जन्म दिनांक 7,16,25

सावधानी: केतु के अंक वाले होने के कारण आपको जनवरी-फरवरी और जुलाई-अगस्त के चार महीनों में अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सावधानी रखनी चाहिए।

मूलांक-8: जन्म दिनांक 8,17,26

सावधानी: आपके अंक का स्वामी शनि होने के कारण अंक आठ वालों को जनवरी, फरवरी, जुलाई और दिसंबर के महीनों में पूर्ण रूप से सावधान रहना चाहिए।

मूलांक-9:जन्म दिनांक 9,18,27

सावधानी: उपर बताइ गई तारीखों में जन्में लोगों का अंक स्वामी मंगल होता है ऐसे लोगों को  पूरे वर्ष अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए।

Thursday, September 1, 2011

टेढ़े गुरु के बुरे असर से बचाएंगे राशि अनुसार ये उपाय..


टेढ़े गुरु के बुरे असर से बचाएंगे राशि अनुसार ये उपाय...
30 अगस्त को दोपहर से गुरु अपनी सीधी चाल बदल कर टेढ़ी चाल पर आ गया है। अब गुरु टेढ़ा हो गया है, टेढ़े गुरु के उल्टे असर से बचने के लिए और सामान्य फल को शुभ बनाने के लिए राशि अनुसार उपाय करें। राशि अनुसार उपाय करने से आप पर गुरु का अशुभ असर कम हो जाएगा साथ ही अगर आपके लिए गुरु अच्छा फल देने वाला है तो आपके सभी काम पूरे होने लगेंगे।

गुरु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ये उपाय करें-


मेष- 43 दिनों तक प्रतिदिन एक तांबे का सिक्का नदी में प्रवाहित करें। चमत्कारिक परिणाम प्राप्त होंगे।

वृष- पीला रूमाल सदैव अपने पास रखें।

मिथुन- प्रतिदिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।

कर्क- घर में पीले रंग के फूल का पौधा लगाएं।

सिंह- प्रतिदिन विष्णु मंदिर जाएं और ब्राह्मण या अन्य किसी जरूरत मंद को धन का दान करें।

कन्या- गुरुवार का व्रत रखें।

तुला- भगवान विष्णु को गुड़-चने की दाल का प्रसाद अर्पित करें।

वृश्चिक- घी, दही, आलू और कपूर का दान करें।

धनु - किसी मन्दिर के पूजारी को भोजन कराएं।

मकर - पीली गाय को घास खिलाएं।

कुंभ - हल्दी एवं पीले चंदन से भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें।

मीन- केसर का तिलक लगाएं।