देवी-देवताओं के पूजन में नारियल का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है भगवान की पूजा में नारियल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। इसी वजह से नारियल के बिना किसी भी प्रकार का विधि-विधान से किया जाने वाला पूजन कर्म पूर्ण नहीं माना जा सकता। नारियल के महत्व को देखते हुए ज्योतिष में इससे संबंधित कई उपाय बताए गए हैं।
यदि कोई व्यक्ति जीवन में अत्यधिक कष्ट भोग रहा है और कार्यों में सफलता नहीं मिल रही है तो ज्योतिष कुछ उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से कई प्रकार के ग्रह दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं और सुख की प्राप्ति होती है।
वैसे तो सभी नौ ग्रहों का अपना अलग महत्व और अलग प्रभाव होता है लेकिन इन सभी शनि को अत्यधिक क्रूर ग्रह माना गया है। शनिदेव को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। अत: ये हमारे कर्मों के अनुसार हमें शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। सामान्यत: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को परेशानियां देने वाला ही माना जाता है। इस समय में शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए प्रति शनिवार किसी पवित्र बहती नदी में सूखा नारियल और बादाम प्रवाहित करें। इस उपाय को अपनाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में भी लाभ प्राप्त होता है। धन संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। घर-परिवार में खुशियोंभरा माहौल बना रहता है। इस उपाय के साथ शनिवार को तेल का दान करना भी अच्छा रहता है।
Sunday, July 17, 2011
कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह
जब भी हम किसी मंदिर या देवस्थान पर जाते हैं वहां जूते-चप्पल बाहर ही उतारते हैं, ऐसे में कई बार कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह में दबाकर भागने लगता है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो समझ लें कि उसे निकट भविष्य में कोई धन हानि होने की संभावना होती है।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
होटल प्रबन्धन में सफलता के लिये ज्योतिष योग
होटल प्रबन्धन एक आकर्षक कैरियर है. यदि आप होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो देखिये कि कौन से ज्योतिष योग आपको इस व्यवसाय अथवा इस क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं.
1. आवश्यक भाव: - दूसरा, चौथा, छठा, सातवां व दशवां घर.
कुण्डली का दूसरा घर भोजन का घर है. होटल व्यवसाय के लिये चौथा घर इसलिये महत्व रखता है. क्योकि चौथे भाव से घर का सुख देखा जाता है. और व्यक्ति होटलों में भी घर के समान सुख होने की कामना करता है. प्रत्येक होटल जाने वाला प्राणी वहां घर की सुविधाएं खोजता है.
होटल में व्यक्ति तब ही रहने के लिये जाता है जब वह घर से दूर हो. छठे घर को सेवा का घर कहते है. सातवां घर चौथे घर से चौथा है. इसलिये इसका महत्व इस क्षेत्र में है. होटल व्यवसाय में अत्यधिक धन व श्रम की आवश्यकता होती है.
व्यक्ति अगर इस काम को स्वतंत्र रुप से अपनाता है तो सर्व प्रथम उसकी कुडण्ली में धन भाव अर्थात दूसरा, नवम व एकादश भावों पर शुभ प्रभाव हो तो व्यक्ति के अत्यधिक धन प्राप्ति की संभावनाएं बनती है.
2. आवश्यक ग्रह: शुक्र, राहु, चन्द्र
भावों के अतिरिक्त व्यवसाय को जानने के लिये ग्रहों को भी अवश्य देखा जाता है. शुक्र होटल व्यवसाय से जुडे सभी व्यक्तियों की कुण्डली में विशेष महत्व रखता है. राहु का प्रभाव इसलिये देखा जाता है कि व्यक्ति में अन्य से हटकर विशिष्टताएं है या नहीं. चन्द्र की भूमिका भी सेवा के कामों में अहम होती है. इन तीनों ग्रहों का संबन्ध छठे/बारहवे, लग्न/सप्तम, दूसरे/आठवें घर से या इनके स्वामियों से होने पर व्यक्ति को अपने व्यवसाय में सफलता मिलती है.
3. अमात्यकारक की महत्वपूर्ण भूमिका
व्यक्ति के व्यवसाय निर्धारण में अमात्यकारक का अपना स्थान है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह पर राहु या शुक्र का प्रभाव हो वह होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में सफल होता है. अमात्यकारक पराशरी ज्योतिष का हिस्सा न होकर जैमिनी ज्योतिष का भाग है. इसके प्रयोग से व्यक्ति का पेशा आसानी के जाना जा सकता है.
4. नवांश व दशमांश कुण्डली का योगदान
ज्योतिष में मात्र जन्म कुण्डली के विश्लेषण से कुछ कहना हमेशा सही नहीं होता है. इसमें बनने वाले योगों की पुष्टि के लिये नवांश कुण्डली को देखा जाता है. तथा दशमांश कुण्डली को व्यवसाय के सूक्ष्म विश्लेषण के लिये देखा जाता है. इन तीनों कुण्डलियों से एक समान योग निकल के आने पर निकाले गये निर्णयों के विषय में कोई संदेह नहीं रह जाता है. तीनों में से दो का झुकाव जिस क्षेत्र की ओर अधिक हो उसी क्षेत्र में व्यक्ति को सफलता मिलती है.
नवांश व दशमांश कुण्डली में राहु/शुक्र का अन्य ग्रहों से संबन्ध व्यक्ति को होटल व्यवसाय की ओर लेकर जाता है. प्रबन्धन से संबन्धित ग्रह गुरु है. दशमेश से गुरु का संबन्ध व्यक्ति को प्रबन्धन गुरु बनाता है. मंगल का प्रभाव होटल नर्माण से जुडे काम करने की योग्यता देता है. बुध स्वागत करने की विशिष्टता देता है. साथ ही हिसाब किताब रखने मे भी रुचि दर्शाता है. शनि का प्रभाव व्यक्ति को सफाई, रख रखाव (हाउस किपिंग) के काम में दक्षता देता है.
5. उचित दशाएं:
राहु/ शुक्र की दशा / अन्तर्दशा में व्यक्ति की आयु आजीविका से कमाने की हो तथा ग्रह योग भी हो तो इस व्यवसाय में आय प्राप्ति की संभावना बनती है. मिलने वाली दशाओं का सीधा सम्बन्ध दशम/दशमेश से होने के साथ- साथ सम्बन्धित ग्रह व भावों से हो जाये तो व्यक्ति को होटल के क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलती है.
6. कुण्डली के अन्य योग
1. आवश्यक भाव: - दूसरा, चौथा, छठा, सातवां व दशवां घर.
कुण्डली का दूसरा घर भोजन का घर है. होटल व्यवसाय के लिये चौथा घर इसलिये महत्व रखता है. क्योकि चौथे भाव से घर का सुख देखा जाता है. और व्यक्ति होटलों में भी घर के समान सुख होने की कामना करता है. प्रत्येक होटल जाने वाला प्राणी वहां घर की सुविधाएं खोजता है.
होटल में व्यक्ति तब ही रहने के लिये जाता है जब वह घर से दूर हो. छठे घर को सेवा का घर कहते है. सातवां घर चौथे घर से चौथा है. इसलिये इसका महत्व इस क्षेत्र में है. होटल व्यवसाय में अत्यधिक धन व श्रम की आवश्यकता होती है.
व्यक्ति अगर इस काम को स्वतंत्र रुप से अपनाता है तो सर्व प्रथम उसकी कुडण्ली में धन भाव अर्थात दूसरा, नवम व एकादश भावों पर शुभ प्रभाव हो तो व्यक्ति के अत्यधिक धन प्राप्ति की संभावनाएं बनती है.
2. आवश्यक ग्रह: शुक्र, राहु, चन्द्र
भावों के अतिरिक्त व्यवसाय को जानने के लिये ग्रहों को भी अवश्य देखा जाता है. शुक्र होटल व्यवसाय से जुडे सभी व्यक्तियों की कुण्डली में विशेष महत्व रखता है. राहु का प्रभाव इसलिये देखा जाता है कि व्यक्ति में अन्य से हटकर विशिष्टताएं है या नहीं. चन्द्र की भूमिका भी सेवा के कामों में अहम होती है. इन तीनों ग्रहों का संबन्ध छठे/बारहवे, लग्न/सप्तम, दूसरे/आठवें घर से या इनके स्वामियों से होने पर व्यक्ति को अपने व्यवसाय में सफलता मिलती है.
3. अमात्यकारक की महत्वपूर्ण भूमिका
व्यक्ति के व्यवसाय निर्धारण में अमात्यकारक का अपना स्थान है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह पर राहु या शुक्र का प्रभाव हो वह होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में सफल होता है. अमात्यकारक पराशरी ज्योतिष का हिस्सा न होकर जैमिनी ज्योतिष का भाग है. इसके प्रयोग से व्यक्ति का पेशा आसानी के जाना जा सकता है.
4. नवांश व दशमांश कुण्डली का योगदान
ज्योतिष में मात्र जन्म कुण्डली के विश्लेषण से कुछ कहना हमेशा सही नहीं होता है. इसमें बनने वाले योगों की पुष्टि के लिये नवांश कुण्डली को देखा जाता है. तथा दशमांश कुण्डली को व्यवसाय के सूक्ष्म विश्लेषण के लिये देखा जाता है. इन तीनों कुण्डलियों से एक समान योग निकल के आने पर निकाले गये निर्णयों के विषय में कोई संदेह नहीं रह जाता है. तीनों में से दो का झुकाव जिस क्षेत्र की ओर अधिक हो उसी क्षेत्र में व्यक्ति को सफलता मिलती है.
नवांश व दशमांश कुण्डली में राहु/शुक्र का अन्य ग्रहों से संबन्ध व्यक्ति को होटल व्यवसाय की ओर लेकर जाता है. प्रबन्धन से संबन्धित ग्रह गुरु है. दशमेश से गुरु का संबन्ध व्यक्ति को प्रबन्धन गुरु बनाता है. मंगल का प्रभाव होटल नर्माण से जुडे काम करने की योग्यता देता है. बुध स्वागत करने की विशिष्टता देता है. साथ ही हिसाब किताब रखने मे भी रुचि दर्शाता है. शनि का प्रभाव व्यक्ति को सफाई, रख रखाव (हाउस किपिंग) के काम में दक्षता देता है.
5. उचित दशाएं:
राहु/ शुक्र की दशा / अन्तर्दशा में व्यक्ति की आयु आजीविका से कमाने की हो तथा ग्रह योग भी हो तो इस व्यवसाय में आय प्राप्ति की संभावना बनती है. मिलने वाली दशाओं का सीधा सम्बन्ध दशम/दशमेश से होने के साथ- साथ सम्बन्धित ग्रह व भावों से हो जाये तो व्यक्ति को होटल के क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलती है.
6. कुण्डली के अन्य योग
- (क) कुण्डली में इस उद्दोग के कारक ग्रह मंगल, शुक्र, राहु, शनि आदि में से जितने ग्रहों का आपस में संबन्ध बनेगा. यह उतना ही शुभ रहेगा. ये ग्रह व्यक्ति के धन भाव में स्थित होकर धन प्राप्ति में सहायक होते है. अथवा कुण्डली में भाव नवम, दशम, व एकादश के स्वामी शुभ स्थानों में होकर मंगल व शुक्र आदि से संबध बनाये तो व्यक्ति को इस क्षेत्र में विशेष सफलता मिलती है.
- (ख) कुण्डली में तीसरे घर का स्वामी स्वग्रही होकर नवम घर में स्थित हो जहां से वह लग्नेश व दशमेश को देखे तथा लग्न में मंगल व शुक्र एक साथ स्थित हो अथवा राहु या शनि से दृ्ष्टि संबध रखे तो व्यक्ति को होटल के व्यवसाय में सफलता मिलती है.
- (ग) लग्न में बुध, मंगल, शुक्र अथवा शनि की राशि में हो तथा दूसरे व एकादश घर पर पाप प्रभाव न हों, चतुर्थ घर के स्वामी का दशमेश व एकादशमेश या लग्न भाव से संबध हो तो व्यक्ति को होटल के पेशे में यश व सफलता मिलती है.
सोये ग्रह के लिये उपाय
लाल किताब के अनुसार जिस घर में कोई ग्रह न हो तथा जिस घर पर किसी ग्रह की नज़र नहीं पड़ती हो उसे सोया हुआ घर माना जाता है.
लाल किताब का मानना है जो घर सोया होता है उस घ्रर से सम्बन्धित फल तब तक प्राप्त नहीं होता है जबतक कि वह घर जागता नहीं है. लाल किताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं.
जिन लोगों की कुण्डली में प्रथम भाव सोया हुआ हो उन्हें इस घर को जगाने के लिए मंगल का उपाय करना चाहिए. मंगल का उपाय करने के लिए मंगलवार का व्रत करना चाहिए. मंगलवार के दिन हनुमान जी को लडुडुओं का प्रसाद चढ़ाकर बांटना चाहिए. मूंगा धारण करने से भी प्रथम भाव जागता है.
अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा का उपाय शुभ फल प्रदान करता है. चन्द्र के उपाय के लिए चांदी धारण करना चाहिए. माता की सेवा करनी चाहिए एवं उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. मोती धारण करने से भी लाभ मिलता है.
तीसरे घर को जगाने के लिए बुध का उपाय करना लाभ देता है. बुध के उपाय हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. बुधवार के दिन गाय को चारा देना चाहिए.
लाल किताब के अनुसार किसी व्यक्ति की कुण्डली में अगर चौथा घर सोया हुआ है तो चन्द्र का उपाय करना लाभदायी होता है.
पांचवें घर को जागृत करने के लिए सूर्य का उपाय करना फायदेमंद होता है. नियमित आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ एवं रविवार के दिन लाल भूरी चीटियों को आटा, गुड़ देने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है.
छठे घर को जगाने के लिए राहु का उपाय करना चाहिए. जन्मदिन से आठवां महीना शुरू होने पर पांच महीनों तक बादाम मन्दिर में चढ़ाना चाहिए, जितना बादाम मन्दिर में चढाएं उतना वापस घर में लाकर सुरक्षित रख दें. घर के दरवाजा दक्षिण में नहीं रखना चाहिए. इन उपायों से छठा घर जागता है क्योंकि यह राहु का उपाय है.
सोये हुए सातवें घर के लिए शुक्र को जगाना होता है. शुक्र को जगाने के लिए आचरण की शुद्धि सबसे आवश्यक है.
सोये हुए आठवें घर के लिए चन्द्रमा का उपाय शुभ फलदायी होता है.
जिनकी कुण्डली में नवम भाव सोया हो उनहें गुरूवार के दिन पीलावस्त्र धारण करना चाहिए. सोना धारण करना चाहिए व माथे पर हल्दी अथवा केशर का तिलक करना चाहिए. इन उपाय से गुरू प्रबल होता है और नवम भाव जागता है.
दशम भाव को जागृत करने हेतु शनिदेव का उपाय करना चाहिए.
एकादश भाव के लिए भी गुरू का उपाय लाभकारी होता है.
अगर बारहवां घ्रर सोया हुआ हो तो घर मे कुत्ता पालना चाहिए. पत्नी के भाई की सहायता करनी चाहिए. मूली रात को सिरहाने रखकर सोना चाहिए और सुबह मंदिर मे दान करना चाहिए..
लाल किताब का मानना है जो घर सोया होता है उस घ्रर से सम्बन्धित फल तब तक प्राप्त नहीं होता है जबतक कि वह घर जागता नहीं है. लाल किताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं.
जिन लोगों की कुण्डली में प्रथम भाव सोया हुआ हो उन्हें इस घर को जगाने के लिए मंगल का उपाय करना चाहिए. मंगल का उपाय करने के लिए मंगलवार का व्रत करना चाहिए. मंगलवार के दिन हनुमान जी को लडुडुओं का प्रसाद चढ़ाकर बांटना चाहिए. मूंगा धारण करने से भी प्रथम भाव जागता है.
अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा का उपाय शुभ फल प्रदान करता है. चन्द्र के उपाय के लिए चांदी धारण करना चाहिए. माता की सेवा करनी चाहिए एवं उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. मोती धारण करने से भी लाभ मिलता है.
तीसरे घर को जगाने के लिए बुध का उपाय करना लाभ देता है. बुध के उपाय हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. बुधवार के दिन गाय को चारा देना चाहिए.
लाल किताब के अनुसार किसी व्यक्ति की कुण्डली में अगर चौथा घर सोया हुआ है तो चन्द्र का उपाय करना लाभदायी होता है.
पांचवें घर को जागृत करने के लिए सूर्य का उपाय करना फायदेमंद होता है. नियमित आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ एवं रविवार के दिन लाल भूरी चीटियों को आटा, गुड़ देने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है.
छठे घर को जगाने के लिए राहु का उपाय करना चाहिए. जन्मदिन से आठवां महीना शुरू होने पर पांच महीनों तक बादाम मन्दिर में चढ़ाना चाहिए, जितना बादाम मन्दिर में चढाएं उतना वापस घर में लाकर सुरक्षित रख दें. घर के दरवाजा दक्षिण में नहीं रखना चाहिए. इन उपायों से छठा घर जागता है क्योंकि यह राहु का उपाय है.
सोये हुए सातवें घर के लिए शुक्र को जगाना होता है. शुक्र को जगाने के लिए आचरण की शुद्धि सबसे आवश्यक है.
सोये हुए आठवें घर के लिए चन्द्रमा का उपाय शुभ फलदायी होता है.
जिनकी कुण्डली में नवम भाव सोया हो उनहें गुरूवार के दिन पीलावस्त्र धारण करना चाहिए. सोना धारण करना चाहिए व माथे पर हल्दी अथवा केशर का तिलक करना चाहिए. इन उपाय से गुरू प्रबल होता है और नवम भाव जागता है.
दशम भाव को जागृत करने हेतु शनिदेव का उपाय करना चाहिए.
एकादश भाव के लिए भी गुरू का उपाय लाभकारी होता है.
अगर बारहवां घ्रर सोया हुआ हो तो घर मे कुत्ता पालना चाहिए. पत्नी के भाई की सहायता करनी चाहिए. मूली रात को सिरहाने रखकर सोना चाहिए और सुबह मंदिर मे दान करना चाहिए..
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