देवी-देवताओं के पूजन में नारियल का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है भगवान की पूजा में नारियल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। इसी वजह से नारियल के बिना किसी भी प्रकार का विधि-विधान से किया जाने वाला पूजन कर्म पूर्ण नहीं माना जा सकता। नारियल के महत्व को देखते हुए ज्योतिष में इससे संबंधित कई उपाय बताए गए हैं।
यदि कोई व्यक्ति जीवन में अत्यधिक कष्ट भोग रहा है और कार्यों में सफलता नहीं मिल रही है तो ज्योतिष कुछ उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से कई प्रकार के ग्रह दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं और सुख की प्राप्ति होती है।
वैसे तो सभी नौ ग्रहों का अपना अलग महत्व और अलग प्रभाव होता है लेकिन इन सभी शनि को अत्यधिक क्रूर ग्रह माना गया है। शनिदेव को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। अत: ये हमारे कर्मों के अनुसार हमें शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। सामान्यत: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को परेशानियां देने वाला ही माना जाता है। इस समय में शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए प्रति शनिवार किसी पवित्र बहती नदी में सूखा नारियल और बादाम प्रवाहित करें। इस उपाय को अपनाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में भी लाभ प्राप्त होता है। धन संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। घर-परिवार में खुशियोंभरा माहौल बना रहता है। इस उपाय के साथ शनिवार को तेल का दान करना भी अच्छा रहता है।
Sunday, July 17, 2011
कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह
जब भी हम किसी मंदिर या देवस्थान पर जाते हैं वहां जूते-चप्पल बाहर ही उतारते हैं, ऐसे में कई बार कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह में दबाकर भागने लगता है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो समझ लें कि उसे निकट भविष्य में कोई धन हानि होने की संभावना होती है।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
होटल प्रबन्धन में सफलता के लिये ज्योतिष योग
होटल प्रबन्धन एक आकर्षक कैरियर है. यदि आप होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो देखिये कि कौन से ज्योतिष योग आपको इस व्यवसाय अथवा इस क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं.
1. आवश्यक भाव: - दूसरा, चौथा, छठा, सातवां व दशवां घर.
कुण्डली का दूसरा घर भोजन का घर है. होटल व्यवसाय के लिये चौथा घर इसलिये महत्व रखता है. क्योकि चौथे भाव से घर का सुख देखा जाता है. और व्यक्ति होटलों में भी घर के समान सुख होने की कामना करता है. प्रत्येक होटल जाने वाला प्राणी वहां घर की सुविधाएं खोजता है.
होटल में व्यक्ति तब ही रहने के लिये जाता है जब वह घर से दूर हो. छठे घर को सेवा का घर कहते है. सातवां घर चौथे घर से चौथा है. इसलिये इसका महत्व इस क्षेत्र में है. होटल व्यवसाय में अत्यधिक धन व श्रम की आवश्यकता होती है.
व्यक्ति अगर इस काम को स्वतंत्र रुप से अपनाता है तो सर्व प्रथम उसकी कुडण्ली में धन भाव अर्थात दूसरा, नवम व एकादश भावों पर शुभ प्रभाव हो तो व्यक्ति के अत्यधिक धन प्राप्ति की संभावनाएं बनती है.
2. आवश्यक ग्रह: शुक्र, राहु, चन्द्र
भावों के अतिरिक्त व्यवसाय को जानने के लिये ग्रहों को भी अवश्य देखा जाता है. शुक्र होटल व्यवसाय से जुडे सभी व्यक्तियों की कुण्डली में विशेष महत्व रखता है. राहु का प्रभाव इसलिये देखा जाता है कि व्यक्ति में अन्य से हटकर विशिष्टताएं है या नहीं. चन्द्र की भूमिका भी सेवा के कामों में अहम होती है. इन तीनों ग्रहों का संबन्ध छठे/बारहवे, लग्न/सप्तम, दूसरे/आठवें घर से या इनके स्वामियों से होने पर व्यक्ति को अपने व्यवसाय में सफलता मिलती है.
3. अमात्यकारक की महत्वपूर्ण भूमिका
व्यक्ति के व्यवसाय निर्धारण में अमात्यकारक का अपना स्थान है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह पर राहु या शुक्र का प्रभाव हो वह होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में सफल होता है. अमात्यकारक पराशरी ज्योतिष का हिस्सा न होकर जैमिनी ज्योतिष का भाग है. इसके प्रयोग से व्यक्ति का पेशा आसानी के जाना जा सकता है.
4. नवांश व दशमांश कुण्डली का योगदान
ज्योतिष में मात्र जन्म कुण्डली के विश्लेषण से कुछ कहना हमेशा सही नहीं होता है. इसमें बनने वाले योगों की पुष्टि के लिये नवांश कुण्डली को देखा जाता है. तथा दशमांश कुण्डली को व्यवसाय के सूक्ष्म विश्लेषण के लिये देखा जाता है. इन तीनों कुण्डलियों से एक समान योग निकल के आने पर निकाले गये निर्णयों के विषय में कोई संदेह नहीं रह जाता है. तीनों में से दो का झुकाव जिस क्षेत्र की ओर अधिक हो उसी क्षेत्र में व्यक्ति को सफलता मिलती है.
नवांश व दशमांश कुण्डली में राहु/शुक्र का अन्य ग्रहों से संबन्ध व्यक्ति को होटल व्यवसाय की ओर लेकर जाता है. प्रबन्धन से संबन्धित ग्रह गुरु है. दशमेश से गुरु का संबन्ध व्यक्ति को प्रबन्धन गुरु बनाता है. मंगल का प्रभाव होटल नर्माण से जुडे काम करने की योग्यता देता है. बुध स्वागत करने की विशिष्टता देता है. साथ ही हिसाब किताब रखने मे भी रुचि दर्शाता है. शनि का प्रभाव व्यक्ति को सफाई, रख रखाव (हाउस किपिंग) के काम में दक्षता देता है.
5. उचित दशाएं:
राहु/ शुक्र की दशा / अन्तर्दशा में व्यक्ति की आयु आजीविका से कमाने की हो तथा ग्रह योग भी हो तो इस व्यवसाय में आय प्राप्ति की संभावना बनती है. मिलने वाली दशाओं का सीधा सम्बन्ध दशम/दशमेश से होने के साथ- साथ सम्बन्धित ग्रह व भावों से हो जाये तो व्यक्ति को होटल के क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलती है.
6. कुण्डली के अन्य योग
1. आवश्यक भाव: - दूसरा, चौथा, छठा, सातवां व दशवां घर.
कुण्डली का दूसरा घर भोजन का घर है. होटल व्यवसाय के लिये चौथा घर इसलिये महत्व रखता है. क्योकि चौथे भाव से घर का सुख देखा जाता है. और व्यक्ति होटलों में भी घर के समान सुख होने की कामना करता है. प्रत्येक होटल जाने वाला प्राणी वहां घर की सुविधाएं खोजता है.
होटल में व्यक्ति तब ही रहने के लिये जाता है जब वह घर से दूर हो. छठे घर को सेवा का घर कहते है. सातवां घर चौथे घर से चौथा है. इसलिये इसका महत्व इस क्षेत्र में है. होटल व्यवसाय में अत्यधिक धन व श्रम की आवश्यकता होती है.
व्यक्ति अगर इस काम को स्वतंत्र रुप से अपनाता है तो सर्व प्रथम उसकी कुडण्ली में धन भाव अर्थात दूसरा, नवम व एकादश भावों पर शुभ प्रभाव हो तो व्यक्ति के अत्यधिक धन प्राप्ति की संभावनाएं बनती है.
2. आवश्यक ग्रह: शुक्र, राहु, चन्द्र
भावों के अतिरिक्त व्यवसाय को जानने के लिये ग्रहों को भी अवश्य देखा जाता है. शुक्र होटल व्यवसाय से जुडे सभी व्यक्तियों की कुण्डली में विशेष महत्व रखता है. राहु का प्रभाव इसलिये देखा जाता है कि व्यक्ति में अन्य से हटकर विशिष्टताएं है या नहीं. चन्द्र की भूमिका भी सेवा के कामों में अहम होती है. इन तीनों ग्रहों का संबन्ध छठे/बारहवे, लग्न/सप्तम, दूसरे/आठवें घर से या इनके स्वामियों से होने पर व्यक्ति को अपने व्यवसाय में सफलता मिलती है.
3. अमात्यकारक की महत्वपूर्ण भूमिका
व्यक्ति के व्यवसाय निर्धारण में अमात्यकारक का अपना स्थान है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह पर राहु या शुक्र का प्रभाव हो वह होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में सफल होता है. अमात्यकारक पराशरी ज्योतिष का हिस्सा न होकर जैमिनी ज्योतिष का भाग है. इसके प्रयोग से व्यक्ति का पेशा आसानी के जाना जा सकता है.
4. नवांश व दशमांश कुण्डली का योगदान
ज्योतिष में मात्र जन्म कुण्डली के विश्लेषण से कुछ कहना हमेशा सही नहीं होता है. इसमें बनने वाले योगों की पुष्टि के लिये नवांश कुण्डली को देखा जाता है. तथा दशमांश कुण्डली को व्यवसाय के सूक्ष्म विश्लेषण के लिये देखा जाता है. इन तीनों कुण्डलियों से एक समान योग निकल के आने पर निकाले गये निर्णयों के विषय में कोई संदेह नहीं रह जाता है. तीनों में से दो का झुकाव जिस क्षेत्र की ओर अधिक हो उसी क्षेत्र में व्यक्ति को सफलता मिलती है.
नवांश व दशमांश कुण्डली में राहु/शुक्र का अन्य ग्रहों से संबन्ध व्यक्ति को होटल व्यवसाय की ओर लेकर जाता है. प्रबन्धन से संबन्धित ग्रह गुरु है. दशमेश से गुरु का संबन्ध व्यक्ति को प्रबन्धन गुरु बनाता है. मंगल का प्रभाव होटल नर्माण से जुडे काम करने की योग्यता देता है. बुध स्वागत करने की विशिष्टता देता है. साथ ही हिसाब किताब रखने मे भी रुचि दर्शाता है. शनि का प्रभाव व्यक्ति को सफाई, रख रखाव (हाउस किपिंग) के काम में दक्षता देता है.
5. उचित दशाएं:
राहु/ शुक्र की दशा / अन्तर्दशा में व्यक्ति की आयु आजीविका से कमाने की हो तथा ग्रह योग भी हो तो इस व्यवसाय में आय प्राप्ति की संभावना बनती है. मिलने वाली दशाओं का सीधा सम्बन्ध दशम/दशमेश से होने के साथ- साथ सम्बन्धित ग्रह व भावों से हो जाये तो व्यक्ति को होटल के क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलती है.
6. कुण्डली के अन्य योग
- (क) कुण्डली में इस उद्दोग के कारक ग्रह मंगल, शुक्र, राहु, शनि आदि में से जितने ग्रहों का आपस में संबन्ध बनेगा. यह उतना ही शुभ रहेगा. ये ग्रह व्यक्ति के धन भाव में स्थित होकर धन प्राप्ति में सहायक होते है. अथवा कुण्डली में भाव नवम, दशम, व एकादश के स्वामी शुभ स्थानों में होकर मंगल व शुक्र आदि से संबध बनाये तो व्यक्ति को इस क्षेत्र में विशेष सफलता मिलती है.
- (ख) कुण्डली में तीसरे घर का स्वामी स्वग्रही होकर नवम घर में स्थित हो जहां से वह लग्नेश व दशमेश को देखे तथा लग्न में मंगल व शुक्र एक साथ स्थित हो अथवा राहु या शनि से दृ्ष्टि संबध रखे तो व्यक्ति को होटल के व्यवसाय में सफलता मिलती है.
- (ग) लग्न में बुध, मंगल, शुक्र अथवा शनि की राशि में हो तथा दूसरे व एकादश घर पर पाप प्रभाव न हों, चतुर्थ घर के स्वामी का दशमेश व एकादशमेश या लग्न भाव से संबध हो तो व्यक्ति को होटल के पेशे में यश व सफलता मिलती है.
सोये ग्रह के लिये उपाय
लाल किताब के अनुसार जिस घर में कोई ग्रह न हो तथा जिस घर पर किसी ग्रह की नज़र नहीं पड़ती हो उसे सोया हुआ घर माना जाता है.
लाल किताब का मानना है जो घर सोया होता है उस घ्रर से सम्बन्धित फल तब तक प्राप्त नहीं होता है जबतक कि वह घर जागता नहीं है. लाल किताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं.
जिन लोगों की कुण्डली में प्रथम भाव सोया हुआ हो उन्हें इस घर को जगाने के लिए मंगल का उपाय करना चाहिए. मंगल का उपाय करने के लिए मंगलवार का व्रत करना चाहिए. मंगलवार के दिन हनुमान जी को लडुडुओं का प्रसाद चढ़ाकर बांटना चाहिए. मूंगा धारण करने से भी प्रथम भाव जागता है.
अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा का उपाय शुभ फल प्रदान करता है. चन्द्र के उपाय के लिए चांदी धारण करना चाहिए. माता की सेवा करनी चाहिए एवं उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. मोती धारण करने से भी लाभ मिलता है.
तीसरे घर को जगाने के लिए बुध का उपाय करना लाभ देता है. बुध के उपाय हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. बुधवार के दिन गाय को चारा देना चाहिए.
लाल किताब के अनुसार किसी व्यक्ति की कुण्डली में अगर चौथा घर सोया हुआ है तो चन्द्र का उपाय करना लाभदायी होता है.
पांचवें घर को जागृत करने के लिए सूर्य का उपाय करना फायदेमंद होता है. नियमित आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ एवं रविवार के दिन लाल भूरी चीटियों को आटा, गुड़ देने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है.
छठे घर को जगाने के लिए राहु का उपाय करना चाहिए. जन्मदिन से आठवां महीना शुरू होने पर पांच महीनों तक बादाम मन्दिर में चढ़ाना चाहिए, जितना बादाम मन्दिर में चढाएं उतना वापस घर में लाकर सुरक्षित रख दें. घर के दरवाजा दक्षिण में नहीं रखना चाहिए. इन उपायों से छठा घर जागता है क्योंकि यह राहु का उपाय है.
सोये हुए सातवें घर के लिए शुक्र को जगाना होता है. शुक्र को जगाने के लिए आचरण की शुद्धि सबसे आवश्यक है.
सोये हुए आठवें घर के लिए चन्द्रमा का उपाय शुभ फलदायी होता है.
जिनकी कुण्डली में नवम भाव सोया हो उनहें गुरूवार के दिन पीलावस्त्र धारण करना चाहिए. सोना धारण करना चाहिए व माथे पर हल्दी अथवा केशर का तिलक करना चाहिए. इन उपाय से गुरू प्रबल होता है और नवम भाव जागता है.
दशम भाव को जागृत करने हेतु शनिदेव का उपाय करना चाहिए.
एकादश भाव के लिए भी गुरू का उपाय लाभकारी होता है.
अगर बारहवां घ्रर सोया हुआ हो तो घर मे कुत्ता पालना चाहिए. पत्नी के भाई की सहायता करनी चाहिए. मूली रात को सिरहाने रखकर सोना चाहिए और सुबह मंदिर मे दान करना चाहिए..
लाल किताब का मानना है जो घर सोया होता है उस घ्रर से सम्बन्धित फल तब तक प्राप्त नहीं होता है जबतक कि वह घर जागता नहीं है. लाल किताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं.
जिन लोगों की कुण्डली में प्रथम भाव सोया हुआ हो उन्हें इस घर को जगाने के लिए मंगल का उपाय करना चाहिए. मंगल का उपाय करने के लिए मंगलवार का व्रत करना चाहिए. मंगलवार के दिन हनुमान जी को लडुडुओं का प्रसाद चढ़ाकर बांटना चाहिए. मूंगा धारण करने से भी प्रथम भाव जागता है.
अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा का उपाय शुभ फल प्रदान करता है. चन्द्र के उपाय के लिए चांदी धारण करना चाहिए. माता की सेवा करनी चाहिए एवं उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. मोती धारण करने से भी लाभ मिलता है.
तीसरे घर को जगाने के लिए बुध का उपाय करना लाभ देता है. बुध के उपाय हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. बुधवार के दिन गाय को चारा देना चाहिए.
लाल किताब के अनुसार किसी व्यक्ति की कुण्डली में अगर चौथा घर सोया हुआ है तो चन्द्र का उपाय करना लाभदायी होता है.
पांचवें घर को जागृत करने के लिए सूर्य का उपाय करना फायदेमंद होता है. नियमित आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ एवं रविवार के दिन लाल भूरी चीटियों को आटा, गुड़ देने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है.
छठे घर को जगाने के लिए राहु का उपाय करना चाहिए. जन्मदिन से आठवां महीना शुरू होने पर पांच महीनों तक बादाम मन्दिर में चढ़ाना चाहिए, जितना बादाम मन्दिर में चढाएं उतना वापस घर में लाकर सुरक्षित रख दें. घर के दरवाजा दक्षिण में नहीं रखना चाहिए. इन उपायों से छठा घर जागता है क्योंकि यह राहु का उपाय है.
सोये हुए सातवें घर के लिए शुक्र को जगाना होता है. शुक्र को जगाने के लिए आचरण की शुद्धि सबसे आवश्यक है.
सोये हुए आठवें घर के लिए चन्द्रमा का उपाय शुभ फलदायी होता है.
जिनकी कुण्डली में नवम भाव सोया हो उनहें गुरूवार के दिन पीलावस्त्र धारण करना चाहिए. सोना धारण करना चाहिए व माथे पर हल्दी अथवा केशर का तिलक करना चाहिए. इन उपाय से गुरू प्रबल होता है और नवम भाव जागता है.
दशम भाव को जागृत करने हेतु शनिदेव का उपाय करना चाहिए.
एकादश भाव के लिए भी गुरू का उपाय लाभकारी होता है.
अगर बारहवां घ्रर सोया हुआ हो तो घर मे कुत्ता पालना चाहिए. पत्नी के भाई की सहायता करनी चाहिए. मूली रात को सिरहाने रखकर सोना चाहिए और सुबह मंदिर मे दान करना चाहिए..
Saturday, July 16, 2011
यदि आपका सिर, आंखें, होंठ या गाल फड़फड़ाए तो समझ लें कि...
कई बार हमारे शरीर के अंग फड़कते हैं तो इस संबंध में भी ज्योतिष में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। शकुन-अपशकुन की मान्यताओं के आधार ही ज्योतिष में अंगों के फड़कने के संकेत दिए गए हैं। पुरुषों के दाएं अंग फड़कना शुभ माना जाता है जबकि स्त्रियों के बाएं अंग फड़के तो शुभ रहता है।
ज्योतिष के अनुसार सिर के अलग-अलग हिस्सों के फड़कने का अर्थ अलग होता है जैसे- मस्तक या सिर फड़कने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। कनपटी फड़के तो इच्छाएं पूर्ण होती हैं। दाहिनी आंख व भौंह फड़के तो कोई खास मनोकामना पूर्ण होती है। दोनों गाल यदि फड़के तो धन की प्राप्ति होती है। यदि होंठ फड़के तो किसी मित्र का आगमन होता है। मुंह का फड़कना पुत्र की ओर से शुभ समाचार का सूचक होता है। यदि लगातार बांई पलक फडफ़ड़ाए तो शारीरिक कष्ट होता है।
भविष्य में होने वाली घटनाओं के संबंध में अंदाजा लगाने के लिए ज्योतिष में कई छोटी-बड़ी घटनाएं बताई गई हैं जिनसे हमें इशारा मिल जाता है कि आने वाले कल में क्या होगा। इन्हें ही शकुन या अपशकुन कहा जाता है।
ज्योतिष के अनुसार सिर के अलग-अलग हिस्सों के फड़कने का अर्थ अलग होता है जैसे- मस्तक या सिर फड़कने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। कनपटी फड़के तो इच्छाएं पूर्ण होती हैं। दाहिनी आंख व भौंह फड़के तो कोई खास मनोकामना पूर्ण होती है। दोनों गाल यदि फड़के तो धन की प्राप्ति होती है। यदि होंठ फड़के तो किसी मित्र का आगमन होता है। मुंह का फड़कना पुत्र की ओर से शुभ समाचार का सूचक होता है। यदि लगातार बांई पलक फडफ़ड़ाए तो शारीरिक कष्ट होता है।
भविष्य में होने वाली घटनाओं के संबंध में अंदाजा लगाने के लिए ज्योतिष में कई छोटी-बड़ी घटनाएं बताई गई हैं जिनसे हमें इशारा मिल जाता है कि आने वाले कल में क्या होगा। इन्हें ही शकुन या अपशकुन कहा जाता है।
यदि कोई कुत्ता आपके जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो समझ लें कि...
जब भी हम किसी मंदिर या देवस्थान पर जाते हैं वहां जूते-चप्पल बाहर ही उतारते हैं, ऐसे में कई बार कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह में दबाकर भागने लगता है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो समझ लें कि उसे निकट भविष्य में कोई धन हानि होने की संभावना होती है।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
क्या इशारा करता है बार-बार घड़ी का खराब होना..
क्या आपके ऑफिस, घर या हाथ की घड़ी बार बार खराब हो जाती है? तो इसे अनदेखा न करें। ये शनि के बुरे असर का भी परिणाम हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार मशीनें और चुंबक शनि की वस्तुएं मानी गई हैं इसलिए शनि को घड़ी का भी कारक ग्रह माना गया है। जब जब शनि अशुभ फल देन वाला होता है घड़ी खराब होने लगती है।
अगर ज्योतिषीय नजरिये से देखा जाए तो जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होता है उनके ऑफिस, घर या हाथ की घड़ी अक्सर खराब ही रहती है।
अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो समझिए शनि के कारण आपके महत्वपूर्ण काम बीच में भी अटकने के योग बनेंगे। अगर हाथ घड़ी अक्सर खराब होती है तो शनि के प्रभाव से हर काम में रुकावटें आ सकती है और महत्वपूर्ण काम धीरे-धीरे होने लगते हैं।
शनि के प्रभाव से आसनी से मिलता हुआ पैसा भी रुक जाता है। पैसा मिलने में रुकावटें आती है। कोर्ट कचहरी के कामों में ही पैसा व्यय होने लगता है। अगर आपकी हाथ घड़ी, कमरे या ऑफिस की घड़ी बार-बार बंद हो जाती है या खराब हो जाती है तो समझिए आपको बिजनेस, कार्यक्षेत्र या परिवार में अपमानित होना पड़ सकता है। घड़ी का बार-बार खराब होना ऋण लेने की स्थिति बनाता है।
अगर आपकी घड़ी अक्सर खराब ही रहती है तो आपको अपने कार्यक्षेत्र या बिजनेस संबंधित यात्राओं में हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
क्या करें शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए?
- कांसे के बर्तन में तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और वो तेल बर्तन के साथ दान दें।
- सूखे नारियल नदी में प्रवाहित करें।
- तिल के तेल का दान करना चाहिए।
- शनि देव की शांति के लिए ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
- काले कपड़े का दान करें और पानी में कोयला बहाएं।
- उड़द और तेल का दान देना चाहिए।
- मीठे तेल का दान दें और मसुर की दाल पानी में बहाएं।
- काजल और काले कपड़े में उड़द रख कर दान दें।
- किसी साधु को तवा या अंगिठी दान दें।
- शिव मंदिर में दूध-दही का दान दें।
अगर ज्योतिषीय नजरिये से देखा जाए तो जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होता है उनके ऑफिस, घर या हाथ की घड़ी अक्सर खराब ही रहती है।
अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो समझिए शनि के कारण आपके महत्वपूर्ण काम बीच में भी अटकने के योग बनेंगे। अगर हाथ घड़ी अक्सर खराब होती है तो शनि के प्रभाव से हर काम में रुकावटें आ सकती है और महत्वपूर्ण काम धीरे-धीरे होने लगते हैं।
शनि के प्रभाव से आसनी से मिलता हुआ पैसा भी रुक जाता है। पैसा मिलने में रुकावटें आती है। कोर्ट कचहरी के कामों में ही पैसा व्यय होने लगता है। अगर आपकी हाथ घड़ी, कमरे या ऑफिस की घड़ी बार-बार बंद हो जाती है या खराब हो जाती है तो समझिए आपको बिजनेस, कार्यक्षेत्र या परिवार में अपमानित होना पड़ सकता है। घड़ी का बार-बार खराब होना ऋण लेने की स्थिति बनाता है।
अगर आपकी घड़ी अक्सर खराब ही रहती है तो आपको अपने कार्यक्षेत्र या बिजनेस संबंधित यात्राओं में हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
क्या करें शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए?
- कांसे के बर्तन में तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और वो तेल बर्तन के साथ दान दें।
- सूखे नारियल नदी में प्रवाहित करें।
- तिल के तेल का दान करना चाहिए।
- शनि देव की शांति के लिए ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
- काले कपड़े का दान करें और पानी में कोयला बहाएं।
- उड़द और तेल का दान देना चाहिए।
- मीठे तेल का दान दें और मसुर की दाल पानी में बहाएं।
- काजल और काले कपड़े में उड़द रख कर दान दें।
- किसी साधु को तवा या अंगिठी दान दें।
- शिव मंदिर में दूध-दही का दान दें।
Sunday, July 10, 2011
वैवाहिक जीवन में बाधा डालने वाले ग्रह योग
पति पत्नी समझ भी नही पाते हैं कि उनके बीच कलह का कारण क्या है और ख्वाब टूट कर बिखरने लगते हैं.
वैवाहिक जीवन में मिलने वाले सुख पर गहों का काफी प्रभाव होता है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सप्तम यानी केन्द्र स्थान विवाह और जीवनसाथी का घर होता है. इस घर पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर या तो विवाह विलम्ब से होता है या फिर विवाह के पश्चात वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य की कमी रहती है. इसके अलावे भी ग्रहों के कुछ ऐसे योग हैं जो गृहस्थ जीवन में बाधा डालते हैं.
ज्योतिषशास्त्र कहता है जिस स्त्री या पुरूष की कुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी पांचवें में अथवा नवम भाव में होता है उनका वैवाहिक जीवन सुखद नहीं रहता है. इस तरह की स्थिति जिनकी कुण्डली में होती है उनमें आपस में मतभेद बना रहता है जिससे वे एक दूसरे से दूर जा सकते हैं. जीवनसाथी को वियोग सहना पड़ सकता है. हो सकता है कि जीवनसाथी को तलाक देकर दूसरी शादी भी करले. इसी प्रकार सप्तम भाव का स्वामी अगर शत्रु नक्षत्र के साथ हो तो वैवाहिक जीवन में बाधक होता है.
जिनकी कुण्डली में ग्रह स्थिति कमज़ोर हो और मंगल एवं शुक्र एक साथ बैठे हों उनके वैवाहिक जीवन में अशांति और परेशानी बनी रहती है. ग्रहों के इस योग के कारण पति पत्नी में अनबन रहती है. ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार कमज़ोर ग्रह स्थिति होने पर शुक्र की महादशा के दौरान पति पत्नी के बीच सामंजस्य का अभाव रहता है. केन्द्रभाव में मंगल, केतु अथवा उच्च का शुक्र बेमेल जोड़ी बनाता है. इस भाव में स्वराशि एवं उच्च के ग्रह होने पर भी मनोनुकल जीवनसाथी का मिलना कठिन होता है. शनि और राहु का सप्तम भाव होना भी वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि दोनों ही पाप ग्रह दूसरे विवाह की संभावना पैदा करते हैं.
सप्तमेश अगर अष्टम या षष्टम भाव में हो तो यह पति पत्नी के मध्य मतभेद पैदा करता है. इस योग में पति पत्नी के बीच इस प्रकार की स्थिति बन सकती है कि वे एक दूसरे से अलग भी हो सकते हैं. यह योग विवाहेत्तर सम्बन्ध भी कायम कर सकता है अत: जिनकी कुण्डली में इस तरह का योग है उन्हें एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और समर्पण की भावना रखनी चाहिए। सप्तम भाव अथवा लग्न स्थान में एक से अधिक शुभ ग्रह हों या फिर इन भावों पर दो से अधिक शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो यह जीवनसाथी को पीड़ा देता है जिसके कारण वैवाहिक जीवन कष्टमय हो जाता है.
सप्तम भाव का स्वामी अगर कई ग्रहों के साथ किसी भाव में युति बनाता है अथवा इसके दूसरे और बारहवें भाव में अशुभ ग्रह हों और सप्तम भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो गृहस्थ जीवन सुखमय नहीं रहता है. चतुर्थ भाव में जिनके शुक्र होता है उनके वैवाहिक जीवन में भी सुख की कमी रहती है. कुण्डली में सप्तमेश अगर सप्तम भाव में या अस्त हो तो यह वैवाहिक जीवन के सुख में कमी लाता है.
Saturday, July 9, 2011
जन्म के महीने से जानिए स्त्री का स्वभाव और भविष्य...
ज्योतिष के माध्यम से किसी भी व्यक्ति का स्वभाव और भविष्य मालुम किया जा सकता है। किसी के भी जन्म का समय, दिन, वार, महीना आदि हर बात का गहरा महत्व होता है। हिंदी कैलेंडर के पंचांग के अलग-अलग मास में जन्म लेने वाले इंसान का स्वभाव भी अलग ही होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्त्रियों का स्वभाव उनके जन्म के मास से भी जाना जा सकता है।
चैत्र मास: चैत्र मास में जन्म लेने वाली स्त्री वक्ता, होशियार, क्रोधी स्वभाव वाली, सुंदर आंखों वाली, सुंदर रूप- गोरे रंग वाली, धनवान, पुत्रवती और सभी सुखों को पाने वाली होती है।
वैशाख मास:वैशाख मास में जन्म लेने वाली स्त्री श्रेष्ठ पतिव्रता, कोमल स्वभाव वाली, सुंदर हृदय, बड़े नेत्रों वाली, धनवान, क्रोध करने वाली तथा मितव्ययी होती है।
ज्येष्ठ मास: ज्येष्ठ मास में पैदा होने वाली स्त्री बुद्धिमान और धनवान, तीर्थ स्थानों को जाने वाली, कार्यों में कुशल और अपने पति की प्यारी होती है।
आषाढ़ मास:आषाढ़ मास में उत्पन्न स्त्री संतानवान, धन से हीन, सुख भोगने वाली, सरल और पति की दुलारी होती है।
श्रावण मास: श्रावण मास में जन्म लेने वाली पवित्र , मोटे शरीर वाली, क्षमा करने वाली, सुंदर तथा धर्मयुक्त और सुखों को पाने वाली होती है।
भाद्र मास: भाद्र मास में जन्म लेने वाली कोमल, धन पुत्रवाली, सुखी घर की वस्तुओं की देखभाल करने वाली, हमेशा प्रसन्न रहने वाली, सुशीला और मीठा बोलने वाली होती है।
आश्विन मास:आश्विन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सुखी, धनी, शुद्ध हृदय गुण और रूपवती होती है, कार्यों में कुशल तथा अधिक कार्य करने वाली होती है।
कार्तिक मास:कार्तिक मास में जन्म लेने वाली स्त्री कुटिल स्वभाव की, चतुर, झूठ बोलने वाली, क्रूर और धन सुख वाली होती है।
मागशीर्ष मास:मागशीर्ष में जन्म लेने वाली पवित्र , मीठे वचनों वाली, दया, दान, धन, धर्म करने वाली, कार्य में कुशल और रक्षा करने वाली होती है।
पौष मास: पौष मास में जन्म लेने वाली स्त्री पुरुष के समान स्वभाव वाली, पति से विमुख, समाज में गर्व तथा क्रोध रखने वाली होती है।
माघ मास:माघ मास में जन्म लेने वाली स्त्री धनी, सौभाग्यवान, बुद्धिमान संतान से युक्त तथा कटु पर सत्य वचन बोलने वाली होती है।
फाल्गुन मास:फाल्गुन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सर्वगुणसंपन्न, ऐश्वर्यशाली, सुखी और संताति वाली तीर्थ यात्रा पर जाने वाली तथा कल्याण करने वाली होती है।
चैत्र मास: चैत्र मास में जन्म लेने वाली स्त्री वक्ता, होशियार, क्रोधी स्वभाव वाली, सुंदर आंखों वाली, सुंदर रूप- गोरे रंग वाली, धनवान, पुत्रवती और सभी सुखों को पाने वाली होती है।
वैशाख मास:वैशाख मास में जन्म लेने वाली स्त्री श्रेष्ठ पतिव्रता, कोमल स्वभाव वाली, सुंदर हृदय, बड़े नेत्रों वाली, धनवान, क्रोध करने वाली तथा मितव्ययी होती है।
ज्येष्ठ मास: ज्येष्ठ मास में पैदा होने वाली स्त्री बुद्धिमान और धनवान, तीर्थ स्थानों को जाने वाली, कार्यों में कुशल और अपने पति की प्यारी होती है।
आषाढ़ मास:आषाढ़ मास में उत्पन्न स्त्री संतानवान, धन से हीन, सुख भोगने वाली, सरल और पति की दुलारी होती है।
श्रावण मास: श्रावण मास में जन्म लेने वाली पवित्र , मोटे शरीर वाली, क्षमा करने वाली, सुंदर तथा धर्मयुक्त और सुखों को पाने वाली होती है।
भाद्र मास: भाद्र मास में जन्म लेने वाली कोमल, धन पुत्रवाली, सुखी घर की वस्तुओं की देखभाल करने वाली, हमेशा प्रसन्न रहने वाली, सुशीला और मीठा बोलने वाली होती है।
आश्विन मास:आश्विन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सुखी, धनी, शुद्ध हृदय गुण और रूपवती होती है, कार्यों में कुशल तथा अधिक कार्य करने वाली होती है।
कार्तिक मास:कार्तिक मास में जन्म लेने वाली स्त्री कुटिल स्वभाव की, चतुर, झूठ बोलने वाली, क्रूर और धन सुख वाली होती है।
मागशीर्ष मास:मागशीर्ष में जन्म लेने वाली पवित्र , मीठे वचनों वाली, दया, दान, धन, धर्म करने वाली, कार्य में कुशल और रक्षा करने वाली होती है।
पौष मास: पौष मास में जन्म लेने वाली स्त्री पुरुष के समान स्वभाव वाली, पति से विमुख, समाज में गर्व तथा क्रोध रखने वाली होती है।
माघ मास:माघ मास में जन्म लेने वाली स्त्री धनी, सौभाग्यवान, बुद्धिमान संतान से युक्त तथा कटु पर सत्य वचन बोलने वाली होती है।
फाल्गुन मास:फाल्गुन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सर्वगुणसंपन्न, ऐश्वर्यशाली, सुखी और संताति वाली तीर्थ यात्रा पर जाने वाली तथा कल्याण करने वाली होती है।
ज्योतिष की सलाह: क्या-क्या करना चाहिए रविवार को...
यदि आप अपने कार्य क्षेत्र में, परिवार में, समाज में यश और मान-सम्मान बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सूर्य की आराधना करनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य मान-सम्मान और यश प्रदान करने वाला ग्रह है। यदि आपके मान-सम्मान में कोई कमी आ रही है, आपको बहुत मेहनत करने के बाद भी यश प्राप्त नहीं हो रहा है तो इसका मतलब यही है कि सूर्य आपके पक्ष में नहीं है। यदि सूर्य अशुभ फल देने वाला है तो आपको बहुत परिश्रम और लगन से कार्य करने के बाद भी अपयश ही प्राप्त होगा। लोग आपकी हमेशा निंदा करेंगे। इनसे बचने के लिए और यदि सूर्य आपके के लिए अशुभ है तो सूर्य के दिन रविवार को विशेष उपाय करें:
- प्रतिदिन सबसे पहले नित्य क्रियाएं से निवृत्त होकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।
- सूर्य को जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्र (ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ दिवाकराय नम: आदि) का जप करें।
- सूर्य के निमित्त रविवार का व्रत रखें।
- रविवार को नमक से परहेज करें।
- कम से कम 11 रविवार केवल दही और चावल का सेवन करें।
- रविवार को बहते जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
- सूर्य के अशुभ होने पर व्यक्ति को अपने साथ तांबे का सिक्का रखना चाहिए।
- रविवार गाय को गुड़ खिलाना चाहिए।
- 21 रविवार श्री गणेश को रक्त पुष्प चढ़ाएं।
- सूर्य से संबंधित वस्तुएं दान या उपहार में ना लें।
- ज्योतिष परामर्शदाता से अपनी जन्म कुंडली दिखाकर भी सलाह-मशविरा अवश्य करें।
- प्रतिदिन सबसे पहले नित्य क्रियाएं से निवृत्त होकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।
- सूर्य को जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्र (ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ दिवाकराय नम: आदि) का जप करें।
- सूर्य के निमित्त रविवार का व्रत रखें।
- रविवार को नमक से परहेज करें।
- कम से कम 11 रविवार केवल दही और चावल का सेवन करें।
- रविवार को बहते जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
- सूर्य के अशुभ होने पर व्यक्ति को अपने साथ तांबे का सिक्का रखना चाहिए।
- रविवार गाय को गुड़ खिलाना चाहिए।
- 21 रविवार श्री गणेश को रक्त पुष्प चढ़ाएं।
- सूर्य से संबंधित वस्तुएं दान या उपहार में ना लें।
- ज्योतिष परामर्शदाता से अपनी जन्म कुंडली दिखाकर भी सलाह-मशविरा अवश्य करें।
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