देवी-देवताओं के पूजन में नारियल का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है भगवान की पूजा में नारियल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। इसी वजह से नारियल के बिना किसी भी प्रकार का विधि-विधान से किया जाने वाला पूजन कर्म पूर्ण नहीं माना जा सकता। नारियल के महत्व को देखते हुए ज्योतिष में इससे संबंधित कई उपाय बताए गए हैं।
यदि कोई व्यक्ति जीवन में अत्यधिक कष्ट भोग रहा है और कार्यों में सफलता नहीं मिल रही है तो ज्योतिष कुछ उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से कई प्रकार के ग्रह दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं और सुख की प्राप्ति होती है।
वैसे तो सभी नौ ग्रहों का अपना अलग महत्व और अलग प्रभाव होता है लेकिन इन सभी शनि को अत्यधिक क्रूर ग्रह माना गया है। शनिदेव को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। अत: ये हमारे कर्मों के अनुसार हमें शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। सामान्यत: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को परेशानियां देने वाला ही माना जाता है। इस समय में शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए प्रति शनिवार किसी पवित्र बहती नदी में सूखा नारियल और बादाम प्रवाहित करें। इस उपाय को अपनाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में भी लाभ प्राप्त होता है। धन संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। घर-परिवार में खुशियोंभरा माहौल बना रहता है। इस उपाय के साथ शनिवार को तेल का दान करना भी अच्छा रहता है।
Sunday, July 17, 2011
कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह
जब भी हम किसी मंदिर या देवस्थान पर जाते हैं वहां जूते-चप्पल बाहर ही उतारते हैं, ऐसे में कई बार कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह में दबाकर भागने लगता है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो समझ लें कि उसे निकट भविष्य में कोई धन हानि होने की संभावना होती है।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
होटल प्रबन्धन में सफलता के लिये ज्योतिष योग
होटल प्रबन्धन एक आकर्षक कैरियर है. यदि आप होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो देखिये कि कौन से ज्योतिष योग आपको इस व्यवसाय अथवा इस क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं.
1. आवश्यक भाव: - दूसरा, चौथा, छठा, सातवां व दशवां घर.
कुण्डली का दूसरा घर भोजन का घर है. होटल व्यवसाय के लिये चौथा घर इसलिये महत्व रखता है. क्योकि चौथे भाव से घर का सुख देखा जाता है. और व्यक्ति होटलों में भी घर के समान सुख होने की कामना करता है. प्रत्येक होटल जाने वाला प्राणी वहां घर की सुविधाएं खोजता है.
होटल में व्यक्ति तब ही रहने के लिये जाता है जब वह घर से दूर हो. छठे घर को सेवा का घर कहते है. सातवां घर चौथे घर से चौथा है. इसलिये इसका महत्व इस क्षेत्र में है. होटल व्यवसाय में अत्यधिक धन व श्रम की आवश्यकता होती है.
व्यक्ति अगर इस काम को स्वतंत्र रुप से अपनाता है तो सर्व प्रथम उसकी कुडण्ली में धन भाव अर्थात दूसरा, नवम व एकादश भावों पर शुभ प्रभाव हो तो व्यक्ति के अत्यधिक धन प्राप्ति की संभावनाएं बनती है.
2. आवश्यक ग्रह: शुक्र, राहु, चन्द्र
भावों के अतिरिक्त व्यवसाय को जानने के लिये ग्रहों को भी अवश्य देखा जाता है. शुक्र होटल व्यवसाय से जुडे सभी व्यक्तियों की कुण्डली में विशेष महत्व रखता है. राहु का प्रभाव इसलिये देखा जाता है कि व्यक्ति में अन्य से हटकर विशिष्टताएं है या नहीं. चन्द्र की भूमिका भी सेवा के कामों में अहम होती है. इन तीनों ग्रहों का संबन्ध छठे/बारहवे, लग्न/सप्तम, दूसरे/आठवें घर से या इनके स्वामियों से होने पर व्यक्ति को अपने व्यवसाय में सफलता मिलती है.
3. अमात्यकारक की महत्वपूर्ण भूमिका
व्यक्ति के व्यवसाय निर्धारण में अमात्यकारक का अपना स्थान है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह पर राहु या शुक्र का प्रभाव हो वह होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में सफल होता है. अमात्यकारक पराशरी ज्योतिष का हिस्सा न होकर जैमिनी ज्योतिष का भाग है. इसके प्रयोग से व्यक्ति का पेशा आसानी के जाना जा सकता है.
4. नवांश व दशमांश कुण्डली का योगदान
ज्योतिष में मात्र जन्म कुण्डली के विश्लेषण से कुछ कहना हमेशा सही नहीं होता है. इसमें बनने वाले योगों की पुष्टि के लिये नवांश कुण्डली को देखा जाता है. तथा दशमांश कुण्डली को व्यवसाय के सूक्ष्म विश्लेषण के लिये देखा जाता है. इन तीनों कुण्डलियों से एक समान योग निकल के आने पर निकाले गये निर्णयों के विषय में कोई संदेह नहीं रह जाता है. तीनों में से दो का झुकाव जिस क्षेत्र की ओर अधिक हो उसी क्षेत्र में व्यक्ति को सफलता मिलती है.
नवांश व दशमांश कुण्डली में राहु/शुक्र का अन्य ग्रहों से संबन्ध व्यक्ति को होटल व्यवसाय की ओर लेकर जाता है. प्रबन्धन से संबन्धित ग्रह गुरु है. दशमेश से गुरु का संबन्ध व्यक्ति को प्रबन्धन गुरु बनाता है. मंगल का प्रभाव होटल नर्माण से जुडे काम करने की योग्यता देता है. बुध स्वागत करने की विशिष्टता देता है. साथ ही हिसाब किताब रखने मे भी रुचि दर्शाता है. शनि का प्रभाव व्यक्ति को सफाई, रख रखाव (हाउस किपिंग) के काम में दक्षता देता है.
5. उचित दशाएं:
राहु/ शुक्र की दशा / अन्तर्दशा में व्यक्ति की आयु आजीविका से कमाने की हो तथा ग्रह योग भी हो तो इस व्यवसाय में आय प्राप्ति की संभावना बनती है. मिलने वाली दशाओं का सीधा सम्बन्ध दशम/दशमेश से होने के साथ- साथ सम्बन्धित ग्रह व भावों से हो जाये तो व्यक्ति को होटल के क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलती है.
6. कुण्डली के अन्य योग
1. आवश्यक भाव: - दूसरा, चौथा, छठा, सातवां व दशवां घर.
कुण्डली का दूसरा घर भोजन का घर है. होटल व्यवसाय के लिये चौथा घर इसलिये महत्व रखता है. क्योकि चौथे भाव से घर का सुख देखा जाता है. और व्यक्ति होटलों में भी घर के समान सुख होने की कामना करता है. प्रत्येक होटल जाने वाला प्राणी वहां घर की सुविधाएं खोजता है.
होटल में व्यक्ति तब ही रहने के लिये जाता है जब वह घर से दूर हो. छठे घर को सेवा का घर कहते है. सातवां घर चौथे घर से चौथा है. इसलिये इसका महत्व इस क्षेत्र में है. होटल व्यवसाय में अत्यधिक धन व श्रम की आवश्यकता होती है.
व्यक्ति अगर इस काम को स्वतंत्र रुप से अपनाता है तो सर्व प्रथम उसकी कुडण्ली में धन भाव अर्थात दूसरा, नवम व एकादश भावों पर शुभ प्रभाव हो तो व्यक्ति के अत्यधिक धन प्राप्ति की संभावनाएं बनती है.
2. आवश्यक ग्रह: शुक्र, राहु, चन्द्र
भावों के अतिरिक्त व्यवसाय को जानने के लिये ग्रहों को भी अवश्य देखा जाता है. शुक्र होटल व्यवसाय से जुडे सभी व्यक्तियों की कुण्डली में विशेष महत्व रखता है. राहु का प्रभाव इसलिये देखा जाता है कि व्यक्ति में अन्य से हटकर विशिष्टताएं है या नहीं. चन्द्र की भूमिका भी सेवा के कामों में अहम होती है. इन तीनों ग्रहों का संबन्ध छठे/बारहवे, लग्न/सप्तम, दूसरे/आठवें घर से या इनके स्वामियों से होने पर व्यक्ति को अपने व्यवसाय में सफलता मिलती है.
3. अमात्यकारक की महत्वपूर्ण भूमिका
व्यक्ति के व्यवसाय निर्धारण में अमात्यकारक का अपना स्थान है. जिस व्यक्ति की कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह पर राहु या शुक्र का प्रभाव हो वह होटल प्रबन्धन के क्षेत्र में सफल होता है. अमात्यकारक पराशरी ज्योतिष का हिस्सा न होकर जैमिनी ज्योतिष का भाग है. इसके प्रयोग से व्यक्ति का पेशा आसानी के जाना जा सकता है.
4. नवांश व दशमांश कुण्डली का योगदान
ज्योतिष में मात्र जन्म कुण्डली के विश्लेषण से कुछ कहना हमेशा सही नहीं होता है. इसमें बनने वाले योगों की पुष्टि के लिये नवांश कुण्डली को देखा जाता है. तथा दशमांश कुण्डली को व्यवसाय के सूक्ष्म विश्लेषण के लिये देखा जाता है. इन तीनों कुण्डलियों से एक समान योग निकल के आने पर निकाले गये निर्णयों के विषय में कोई संदेह नहीं रह जाता है. तीनों में से दो का झुकाव जिस क्षेत्र की ओर अधिक हो उसी क्षेत्र में व्यक्ति को सफलता मिलती है.
नवांश व दशमांश कुण्डली में राहु/शुक्र का अन्य ग्रहों से संबन्ध व्यक्ति को होटल व्यवसाय की ओर लेकर जाता है. प्रबन्धन से संबन्धित ग्रह गुरु है. दशमेश से गुरु का संबन्ध व्यक्ति को प्रबन्धन गुरु बनाता है. मंगल का प्रभाव होटल नर्माण से जुडे काम करने की योग्यता देता है. बुध स्वागत करने की विशिष्टता देता है. साथ ही हिसाब किताब रखने मे भी रुचि दर्शाता है. शनि का प्रभाव व्यक्ति को सफाई, रख रखाव (हाउस किपिंग) के काम में दक्षता देता है.
5. उचित दशाएं:
राहु/ शुक्र की दशा / अन्तर्दशा में व्यक्ति की आयु आजीविका से कमाने की हो तथा ग्रह योग भी हो तो इस व्यवसाय में आय प्राप्ति की संभावना बनती है. मिलने वाली दशाओं का सीधा सम्बन्ध दशम/दशमेश से होने के साथ- साथ सम्बन्धित ग्रह व भावों से हो जाये तो व्यक्ति को होटल के क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलती है.
6. कुण्डली के अन्य योग
- (क) कुण्डली में इस उद्दोग के कारक ग्रह मंगल, शुक्र, राहु, शनि आदि में से जितने ग्रहों का आपस में संबन्ध बनेगा. यह उतना ही शुभ रहेगा. ये ग्रह व्यक्ति के धन भाव में स्थित होकर धन प्राप्ति में सहायक होते है. अथवा कुण्डली में भाव नवम, दशम, व एकादश के स्वामी शुभ स्थानों में होकर मंगल व शुक्र आदि से संबध बनाये तो व्यक्ति को इस क्षेत्र में विशेष सफलता मिलती है.
- (ख) कुण्डली में तीसरे घर का स्वामी स्वग्रही होकर नवम घर में स्थित हो जहां से वह लग्नेश व दशमेश को देखे तथा लग्न में मंगल व शुक्र एक साथ स्थित हो अथवा राहु या शनि से दृ्ष्टि संबध रखे तो व्यक्ति को होटल के व्यवसाय में सफलता मिलती है.
- (ग) लग्न में बुध, मंगल, शुक्र अथवा शनि की राशि में हो तथा दूसरे व एकादश घर पर पाप प्रभाव न हों, चतुर्थ घर के स्वामी का दशमेश व एकादशमेश या लग्न भाव से संबध हो तो व्यक्ति को होटल के पेशे में यश व सफलता मिलती है.
सोये ग्रह के लिये उपाय
लाल किताब के अनुसार जिस घर में कोई ग्रह न हो तथा जिस घर पर किसी ग्रह की नज़र नहीं पड़ती हो उसे सोया हुआ घर माना जाता है.
लाल किताब का मानना है जो घर सोया होता है उस घ्रर से सम्बन्धित फल तब तक प्राप्त नहीं होता है जबतक कि वह घर जागता नहीं है. लाल किताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं.
जिन लोगों की कुण्डली में प्रथम भाव सोया हुआ हो उन्हें इस घर को जगाने के लिए मंगल का उपाय करना चाहिए. मंगल का उपाय करने के लिए मंगलवार का व्रत करना चाहिए. मंगलवार के दिन हनुमान जी को लडुडुओं का प्रसाद चढ़ाकर बांटना चाहिए. मूंगा धारण करने से भी प्रथम भाव जागता है.
अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा का उपाय शुभ फल प्रदान करता है. चन्द्र के उपाय के लिए चांदी धारण करना चाहिए. माता की सेवा करनी चाहिए एवं उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. मोती धारण करने से भी लाभ मिलता है.
तीसरे घर को जगाने के लिए बुध का उपाय करना लाभ देता है. बुध के उपाय हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. बुधवार के दिन गाय को चारा देना चाहिए.
लाल किताब के अनुसार किसी व्यक्ति की कुण्डली में अगर चौथा घर सोया हुआ है तो चन्द्र का उपाय करना लाभदायी होता है.
पांचवें घर को जागृत करने के लिए सूर्य का उपाय करना फायदेमंद होता है. नियमित आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ एवं रविवार के दिन लाल भूरी चीटियों को आटा, गुड़ देने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है.
छठे घर को जगाने के लिए राहु का उपाय करना चाहिए. जन्मदिन से आठवां महीना शुरू होने पर पांच महीनों तक बादाम मन्दिर में चढ़ाना चाहिए, जितना बादाम मन्दिर में चढाएं उतना वापस घर में लाकर सुरक्षित रख दें. घर के दरवाजा दक्षिण में नहीं रखना चाहिए. इन उपायों से छठा घर जागता है क्योंकि यह राहु का उपाय है.
सोये हुए सातवें घर के लिए शुक्र को जगाना होता है. शुक्र को जगाने के लिए आचरण की शुद्धि सबसे आवश्यक है.
सोये हुए आठवें घर के लिए चन्द्रमा का उपाय शुभ फलदायी होता है.
जिनकी कुण्डली में नवम भाव सोया हो उनहें गुरूवार के दिन पीलावस्त्र धारण करना चाहिए. सोना धारण करना चाहिए व माथे पर हल्दी अथवा केशर का तिलक करना चाहिए. इन उपाय से गुरू प्रबल होता है और नवम भाव जागता है.
दशम भाव को जागृत करने हेतु शनिदेव का उपाय करना चाहिए.
एकादश भाव के लिए भी गुरू का उपाय लाभकारी होता है.
अगर बारहवां घ्रर सोया हुआ हो तो घर मे कुत्ता पालना चाहिए. पत्नी के भाई की सहायता करनी चाहिए. मूली रात को सिरहाने रखकर सोना चाहिए और सुबह मंदिर मे दान करना चाहिए..
लाल किताब का मानना है जो घर सोया होता है उस घ्रर से सम्बन्धित फल तब तक प्राप्त नहीं होता है जबतक कि वह घर जागता नहीं है. लाल किताब में सोये हुए घरों को जगाने के लिए कई उपाय बताए गये हैं.
जिन लोगों की कुण्डली में प्रथम भाव सोया हुआ हो उन्हें इस घर को जगाने के लिए मंगल का उपाय करना चाहिए. मंगल का उपाय करने के लिए मंगलवार का व्रत करना चाहिए. मंगलवार के दिन हनुमान जी को लडुडुओं का प्रसाद चढ़ाकर बांटना चाहिए. मूंगा धारण करने से भी प्रथम भाव जागता है.
अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा का उपाय शुभ फल प्रदान करता है. चन्द्र के उपाय के लिए चांदी धारण करना चाहिए. माता की सेवा करनी चाहिए एवं उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. मोती धारण करने से भी लाभ मिलता है.
तीसरे घर को जगाने के लिए बुध का उपाय करना लाभ देता है. बुध के उपाय हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए. बुधवार के दिन गाय को चारा देना चाहिए.
लाल किताब के अनुसार किसी व्यक्ति की कुण्डली में अगर चौथा घर सोया हुआ है तो चन्द्र का उपाय करना लाभदायी होता है.
पांचवें घर को जागृत करने के लिए सूर्य का उपाय करना फायदेमंद होता है. नियमित आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ एवं रविवार के दिन लाल भूरी चीटियों को आटा, गुड़ देने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती है.
छठे घर को जगाने के लिए राहु का उपाय करना चाहिए. जन्मदिन से आठवां महीना शुरू होने पर पांच महीनों तक बादाम मन्दिर में चढ़ाना चाहिए, जितना बादाम मन्दिर में चढाएं उतना वापस घर में लाकर सुरक्षित रख दें. घर के दरवाजा दक्षिण में नहीं रखना चाहिए. इन उपायों से छठा घर जागता है क्योंकि यह राहु का उपाय है.
सोये हुए सातवें घर के लिए शुक्र को जगाना होता है. शुक्र को जगाने के लिए आचरण की शुद्धि सबसे आवश्यक है.
सोये हुए आठवें घर के लिए चन्द्रमा का उपाय शुभ फलदायी होता है.
जिनकी कुण्डली में नवम भाव सोया हो उनहें गुरूवार के दिन पीलावस्त्र धारण करना चाहिए. सोना धारण करना चाहिए व माथे पर हल्दी अथवा केशर का तिलक करना चाहिए. इन उपाय से गुरू प्रबल होता है और नवम भाव जागता है.
दशम भाव को जागृत करने हेतु शनिदेव का उपाय करना चाहिए.
एकादश भाव के लिए भी गुरू का उपाय लाभकारी होता है.
अगर बारहवां घ्रर सोया हुआ हो तो घर मे कुत्ता पालना चाहिए. पत्नी के भाई की सहायता करनी चाहिए. मूली रात को सिरहाने रखकर सोना चाहिए और सुबह मंदिर मे दान करना चाहिए..
Saturday, July 16, 2011
यदि आपका सिर, आंखें, होंठ या गाल फड़फड़ाए तो समझ लें कि...
कई बार हमारे शरीर के अंग फड़कते हैं तो इस संबंध में भी ज्योतिष में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। शकुन-अपशकुन की मान्यताओं के आधार ही ज्योतिष में अंगों के फड़कने के संकेत दिए गए हैं। पुरुषों के दाएं अंग फड़कना शुभ माना जाता है जबकि स्त्रियों के बाएं अंग फड़के तो शुभ रहता है।
ज्योतिष के अनुसार सिर के अलग-अलग हिस्सों के फड़कने का अर्थ अलग होता है जैसे- मस्तक या सिर फड़कने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। कनपटी फड़के तो इच्छाएं पूर्ण होती हैं। दाहिनी आंख व भौंह फड़के तो कोई खास मनोकामना पूर्ण होती है। दोनों गाल यदि फड़के तो धन की प्राप्ति होती है। यदि होंठ फड़के तो किसी मित्र का आगमन होता है। मुंह का फड़कना पुत्र की ओर से शुभ समाचार का सूचक होता है। यदि लगातार बांई पलक फडफ़ड़ाए तो शारीरिक कष्ट होता है।
भविष्य में होने वाली घटनाओं के संबंध में अंदाजा लगाने के लिए ज्योतिष में कई छोटी-बड़ी घटनाएं बताई गई हैं जिनसे हमें इशारा मिल जाता है कि आने वाले कल में क्या होगा। इन्हें ही शकुन या अपशकुन कहा जाता है।
ज्योतिष के अनुसार सिर के अलग-अलग हिस्सों के फड़कने का अर्थ अलग होता है जैसे- मस्तक या सिर फड़कने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। कनपटी फड़के तो इच्छाएं पूर्ण होती हैं। दाहिनी आंख व भौंह फड़के तो कोई खास मनोकामना पूर्ण होती है। दोनों गाल यदि फड़के तो धन की प्राप्ति होती है। यदि होंठ फड़के तो किसी मित्र का आगमन होता है। मुंह का फड़कना पुत्र की ओर से शुभ समाचार का सूचक होता है। यदि लगातार बांई पलक फडफ़ड़ाए तो शारीरिक कष्ट होता है।
भविष्य में होने वाली घटनाओं के संबंध में अंदाजा लगाने के लिए ज्योतिष में कई छोटी-बड़ी घटनाएं बताई गई हैं जिनसे हमें इशारा मिल जाता है कि आने वाले कल में क्या होगा। इन्हें ही शकुन या अपशकुन कहा जाता है।
यदि कोई कुत्ता आपके जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो समझ लें कि...
जब भी हम किसी मंदिर या देवस्थान पर जाते हैं वहां जूते-चप्पल बाहर ही उतारते हैं, ऐसे में कई बार कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल मुंह में दबाकर भागने लगता है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसा होता है तो समझ लें कि उसे निकट भविष्य में कोई धन हानि होने की संभावना होती है।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
सभी के घरों के आसपास या रोड पर कुत्ते अक्सर दिखाई देते हैं। ज्योतिष में कुत्तों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। कुत्ते से कई प्रकार के शकुन-अपशकुन जुड़े हुए हैं। यदि हमारे घर से या किसी मंदिर आदि स्थानों से कोई कुत्ता हमारे जूते-चप्पल लेकर भाग जाए तो इसे अशुभ माना जाता है। इस घटना में भी भविष्य के संबंध में कई इशारे छिपे होते हैं। ऐसा होने पर हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। अन्यथा धन हानि हो सकती है। इस संभावित हानि से बचने के लिए कुत्ते को कुछ खाने की चीजें जैसे रोटी, बिस्कुट, दूध आदि दें। इसके अलावा पूरा दिन धन संबंधी कार्य पूरी सावधानी के साथ करें और किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति पर भरोसा न करें।
क्या इशारा करता है बार-बार घड़ी का खराब होना..
क्या आपके ऑफिस, घर या हाथ की घड़ी बार बार खराब हो जाती है? तो इसे अनदेखा न करें। ये शनि के बुरे असर का भी परिणाम हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार मशीनें और चुंबक शनि की वस्तुएं मानी गई हैं इसलिए शनि को घड़ी का भी कारक ग्रह माना गया है। जब जब शनि अशुभ फल देन वाला होता है घड़ी खराब होने लगती है।
अगर ज्योतिषीय नजरिये से देखा जाए तो जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होता है उनके ऑफिस, घर या हाथ की घड़ी अक्सर खराब ही रहती है।
अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो समझिए शनि के कारण आपके महत्वपूर्ण काम बीच में भी अटकने के योग बनेंगे। अगर हाथ घड़ी अक्सर खराब होती है तो शनि के प्रभाव से हर काम में रुकावटें आ सकती है और महत्वपूर्ण काम धीरे-धीरे होने लगते हैं।
शनि के प्रभाव से आसनी से मिलता हुआ पैसा भी रुक जाता है। पैसा मिलने में रुकावटें आती है। कोर्ट कचहरी के कामों में ही पैसा व्यय होने लगता है। अगर आपकी हाथ घड़ी, कमरे या ऑफिस की घड़ी बार-बार बंद हो जाती है या खराब हो जाती है तो समझिए आपको बिजनेस, कार्यक्षेत्र या परिवार में अपमानित होना पड़ सकता है। घड़ी का बार-बार खराब होना ऋण लेने की स्थिति बनाता है।
अगर आपकी घड़ी अक्सर खराब ही रहती है तो आपको अपने कार्यक्षेत्र या बिजनेस संबंधित यात्राओं में हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
क्या करें शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए?
- कांसे के बर्तन में तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और वो तेल बर्तन के साथ दान दें।
- सूखे नारियल नदी में प्रवाहित करें।
- तिल के तेल का दान करना चाहिए।
- शनि देव की शांति के लिए ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
- काले कपड़े का दान करें और पानी में कोयला बहाएं।
- उड़द और तेल का दान देना चाहिए।
- मीठे तेल का दान दें और मसुर की दाल पानी में बहाएं।
- काजल और काले कपड़े में उड़द रख कर दान दें।
- किसी साधु को तवा या अंगिठी दान दें।
- शिव मंदिर में दूध-दही का दान दें।
अगर ज्योतिषीय नजरिये से देखा जाए तो जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होता है उनके ऑफिस, घर या हाथ की घड़ी अक्सर खराब ही रहती है।
अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो समझिए शनि के कारण आपके महत्वपूर्ण काम बीच में भी अटकने के योग बनेंगे। अगर हाथ घड़ी अक्सर खराब होती है तो शनि के प्रभाव से हर काम में रुकावटें आ सकती है और महत्वपूर्ण काम धीरे-धीरे होने लगते हैं।
शनि के प्रभाव से आसनी से मिलता हुआ पैसा भी रुक जाता है। पैसा मिलने में रुकावटें आती है। कोर्ट कचहरी के कामों में ही पैसा व्यय होने लगता है। अगर आपकी हाथ घड़ी, कमरे या ऑफिस की घड़ी बार-बार बंद हो जाती है या खराब हो जाती है तो समझिए आपको बिजनेस, कार्यक्षेत्र या परिवार में अपमानित होना पड़ सकता है। घड़ी का बार-बार खराब होना ऋण लेने की स्थिति बनाता है।
अगर आपकी घड़ी अक्सर खराब ही रहती है तो आपको अपने कार्यक्षेत्र या बिजनेस संबंधित यात्राओं में हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
क्या करें शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए?
- कांसे के बर्तन में तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और वो तेल बर्तन के साथ दान दें।
- सूखे नारियल नदी में प्रवाहित करें।
- तिल के तेल का दान करना चाहिए।
- शनि देव की शांति के लिए ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
- काले कपड़े का दान करें और पानी में कोयला बहाएं।
- उड़द और तेल का दान देना चाहिए।
- मीठे तेल का दान दें और मसुर की दाल पानी में बहाएं।
- काजल और काले कपड़े में उड़द रख कर दान दें।
- किसी साधु को तवा या अंगिठी दान दें।
- शिव मंदिर में दूध-दही का दान दें।
Sunday, July 10, 2011
वैवाहिक जीवन में बाधा डालने वाले ग्रह योग
पति पत्नी समझ भी नही पाते हैं कि उनके बीच कलह का कारण क्या है और ख्वाब टूट कर बिखरने लगते हैं.
वैवाहिक जीवन में मिलने वाले सुख पर गहों का काफी प्रभाव होता है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सप्तम यानी केन्द्र स्थान विवाह और जीवनसाथी का घर होता है. इस घर पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर या तो विवाह विलम्ब से होता है या फिर विवाह के पश्चात वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य की कमी रहती है. इसके अलावे भी ग्रहों के कुछ ऐसे योग हैं जो गृहस्थ जीवन में बाधा डालते हैं.
ज्योतिषशास्त्र कहता है जिस स्त्री या पुरूष की कुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी पांचवें में अथवा नवम भाव में होता है उनका वैवाहिक जीवन सुखद नहीं रहता है. इस तरह की स्थिति जिनकी कुण्डली में होती है उनमें आपस में मतभेद बना रहता है जिससे वे एक दूसरे से दूर जा सकते हैं. जीवनसाथी को वियोग सहना पड़ सकता है. हो सकता है कि जीवनसाथी को तलाक देकर दूसरी शादी भी करले. इसी प्रकार सप्तम भाव का स्वामी अगर शत्रु नक्षत्र के साथ हो तो वैवाहिक जीवन में बाधक होता है.
जिनकी कुण्डली में ग्रह स्थिति कमज़ोर हो और मंगल एवं शुक्र एक साथ बैठे हों उनके वैवाहिक जीवन में अशांति और परेशानी बनी रहती है. ग्रहों के इस योग के कारण पति पत्नी में अनबन रहती है. ज्योतिषशास्त्र के नियमानुसार कमज़ोर ग्रह स्थिति होने पर शुक्र की महादशा के दौरान पति पत्नी के बीच सामंजस्य का अभाव रहता है. केन्द्रभाव में मंगल, केतु अथवा उच्च का शुक्र बेमेल जोड़ी बनाता है. इस भाव में स्वराशि एवं उच्च के ग्रह होने पर भी मनोनुकल जीवनसाथी का मिलना कठिन होता है. शनि और राहु का सप्तम भाव होना भी वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि दोनों ही पाप ग्रह दूसरे विवाह की संभावना पैदा करते हैं.
सप्तमेश अगर अष्टम या षष्टम भाव में हो तो यह पति पत्नी के मध्य मतभेद पैदा करता है. इस योग में पति पत्नी के बीच इस प्रकार की स्थिति बन सकती है कि वे एक दूसरे से अलग भी हो सकते हैं. यह योग विवाहेत्तर सम्बन्ध भी कायम कर सकता है अत: जिनकी कुण्डली में इस तरह का योग है उन्हें एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और समर्पण की भावना रखनी चाहिए। सप्तम भाव अथवा लग्न स्थान में एक से अधिक शुभ ग्रह हों या फिर इन भावों पर दो से अधिक शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो यह जीवनसाथी को पीड़ा देता है जिसके कारण वैवाहिक जीवन कष्टमय हो जाता है.
सप्तम भाव का स्वामी अगर कई ग्रहों के साथ किसी भाव में युति बनाता है अथवा इसके दूसरे और बारहवें भाव में अशुभ ग्रह हों और सप्तम भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो गृहस्थ जीवन सुखमय नहीं रहता है. चतुर्थ भाव में जिनके शुक्र होता है उनके वैवाहिक जीवन में भी सुख की कमी रहती है. कुण्डली में सप्तमेश अगर सप्तम भाव में या अस्त हो तो यह वैवाहिक जीवन के सुख में कमी लाता है.
Saturday, July 9, 2011
जन्म के महीने से जानिए स्त्री का स्वभाव और भविष्य...
ज्योतिष के माध्यम से किसी भी व्यक्ति का स्वभाव और भविष्य मालुम किया जा सकता है। किसी के भी जन्म का समय, दिन, वार, महीना आदि हर बात का गहरा महत्व होता है। हिंदी कैलेंडर के पंचांग के अलग-अलग मास में जन्म लेने वाले इंसान का स्वभाव भी अलग ही होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार स्त्रियों का स्वभाव उनके जन्म के मास से भी जाना जा सकता है।
चैत्र मास: चैत्र मास में जन्म लेने वाली स्त्री वक्ता, होशियार, क्रोधी स्वभाव वाली, सुंदर आंखों वाली, सुंदर रूप- गोरे रंग वाली, धनवान, पुत्रवती और सभी सुखों को पाने वाली होती है।
वैशाख मास:वैशाख मास में जन्म लेने वाली स्त्री श्रेष्ठ पतिव्रता, कोमल स्वभाव वाली, सुंदर हृदय, बड़े नेत्रों वाली, धनवान, क्रोध करने वाली तथा मितव्ययी होती है।
ज्येष्ठ मास: ज्येष्ठ मास में पैदा होने वाली स्त्री बुद्धिमान और धनवान, तीर्थ स्थानों को जाने वाली, कार्यों में कुशल और अपने पति की प्यारी होती है।
आषाढ़ मास:आषाढ़ मास में उत्पन्न स्त्री संतानवान, धन से हीन, सुख भोगने वाली, सरल और पति की दुलारी होती है।
श्रावण मास: श्रावण मास में जन्म लेने वाली पवित्र , मोटे शरीर वाली, क्षमा करने वाली, सुंदर तथा धर्मयुक्त और सुखों को पाने वाली होती है।
भाद्र मास: भाद्र मास में जन्म लेने वाली कोमल, धन पुत्रवाली, सुखी घर की वस्तुओं की देखभाल करने वाली, हमेशा प्रसन्न रहने वाली, सुशीला और मीठा बोलने वाली होती है।
आश्विन मास:आश्विन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सुखी, धनी, शुद्ध हृदय गुण और रूपवती होती है, कार्यों में कुशल तथा अधिक कार्य करने वाली होती है।
कार्तिक मास:कार्तिक मास में जन्म लेने वाली स्त्री कुटिल स्वभाव की, चतुर, झूठ बोलने वाली, क्रूर और धन सुख वाली होती है।
मागशीर्ष मास:मागशीर्ष में जन्म लेने वाली पवित्र , मीठे वचनों वाली, दया, दान, धन, धर्म करने वाली, कार्य में कुशल और रक्षा करने वाली होती है।
पौष मास: पौष मास में जन्म लेने वाली स्त्री पुरुष के समान स्वभाव वाली, पति से विमुख, समाज में गर्व तथा क्रोध रखने वाली होती है।
माघ मास:माघ मास में जन्म लेने वाली स्त्री धनी, सौभाग्यवान, बुद्धिमान संतान से युक्त तथा कटु पर सत्य वचन बोलने वाली होती है।
फाल्गुन मास:फाल्गुन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सर्वगुणसंपन्न, ऐश्वर्यशाली, सुखी और संताति वाली तीर्थ यात्रा पर जाने वाली तथा कल्याण करने वाली होती है।
चैत्र मास: चैत्र मास में जन्म लेने वाली स्त्री वक्ता, होशियार, क्रोधी स्वभाव वाली, सुंदर आंखों वाली, सुंदर रूप- गोरे रंग वाली, धनवान, पुत्रवती और सभी सुखों को पाने वाली होती है।
वैशाख मास:वैशाख मास में जन्म लेने वाली स्त्री श्रेष्ठ पतिव्रता, कोमल स्वभाव वाली, सुंदर हृदय, बड़े नेत्रों वाली, धनवान, क्रोध करने वाली तथा मितव्ययी होती है।
ज्येष्ठ मास: ज्येष्ठ मास में पैदा होने वाली स्त्री बुद्धिमान और धनवान, तीर्थ स्थानों को जाने वाली, कार्यों में कुशल और अपने पति की प्यारी होती है।
आषाढ़ मास:आषाढ़ मास में उत्पन्न स्त्री संतानवान, धन से हीन, सुख भोगने वाली, सरल और पति की दुलारी होती है।
श्रावण मास: श्रावण मास में जन्म लेने वाली पवित्र , मोटे शरीर वाली, क्षमा करने वाली, सुंदर तथा धर्मयुक्त और सुखों को पाने वाली होती है।
भाद्र मास: भाद्र मास में जन्म लेने वाली कोमल, धन पुत्रवाली, सुखी घर की वस्तुओं की देखभाल करने वाली, हमेशा प्रसन्न रहने वाली, सुशीला और मीठा बोलने वाली होती है।
आश्विन मास:आश्विन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सुखी, धनी, शुद्ध हृदय गुण और रूपवती होती है, कार्यों में कुशल तथा अधिक कार्य करने वाली होती है।
कार्तिक मास:कार्तिक मास में जन्म लेने वाली स्त्री कुटिल स्वभाव की, चतुर, झूठ बोलने वाली, क्रूर और धन सुख वाली होती है।
मागशीर्ष मास:मागशीर्ष में जन्म लेने वाली पवित्र , मीठे वचनों वाली, दया, दान, धन, धर्म करने वाली, कार्य में कुशल और रक्षा करने वाली होती है।
पौष मास: पौष मास में जन्म लेने वाली स्त्री पुरुष के समान स्वभाव वाली, पति से विमुख, समाज में गर्व तथा क्रोध रखने वाली होती है।
माघ मास:माघ मास में जन्म लेने वाली स्त्री धनी, सौभाग्यवान, बुद्धिमान संतान से युक्त तथा कटु पर सत्य वचन बोलने वाली होती है।
फाल्गुन मास:फाल्गुन मास में जन्म लेने वाली स्त्री सर्वगुणसंपन्न, ऐश्वर्यशाली, सुखी और संताति वाली तीर्थ यात्रा पर जाने वाली तथा कल्याण करने वाली होती है।
ज्योतिष की सलाह: क्या-क्या करना चाहिए रविवार को...
यदि आप अपने कार्य क्षेत्र में, परिवार में, समाज में यश और मान-सम्मान बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सूर्य की आराधना करनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य मान-सम्मान और यश प्रदान करने वाला ग्रह है। यदि आपके मान-सम्मान में कोई कमी आ रही है, आपको बहुत मेहनत करने के बाद भी यश प्राप्त नहीं हो रहा है तो इसका मतलब यही है कि सूर्य आपके पक्ष में नहीं है। यदि सूर्य अशुभ फल देने वाला है तो आपको बहुत परिश्रम और लगन से कार्य करने के बाद भी अपयश ही प्राप्त होगा। लोग आपकी हमेशा निंदा करेंगे। इनसे बचने के लिए और यदि सूर्य आपके के लिए अशुभ है तो सूर्य के दिन रविवार को विशेष उपाय करें:
- प्रतिदिन सबसे पहले नित्य क्रियाएं से निवृत्त होकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।
- सूर्य को जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्र (ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ दिवाकराय नम: आदि) का जप करें।
- सूर्य के निमित्त रविवार का व्रत रखें।
- रविवार को नमक से परहेज करें।
- कम से कम 11 रविवार केवल दही और चावल का सेवन करें।
- रविवार को बहते जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
- सूर्य के अशुभ होने पर व्यक्ति को अपने साथ तांबे का सिक्का रखना चाहिए।
- रविवार गाय को गुड़ खिलाना चाहिए।
- 21 रविवार श्री गणेश को रक्त पुष्प चढ़ाएं।
- सूर्य से संबंधित वस्तुएं दान या उपहार में ना लें।
- ज्योतिष परामर्शदाता से अपनी जन्म कुंडली दिखाकर भी सलाह-मशविरा अवश्य करें।
- प्रतिदिन सबसे पहले नित्य क्रियाएं से निवृत्त होकर नहाने के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।
- सूर्य को जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्र (ऊँ भास्कराय नम:, ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ दिवाकराय नम: आदि) का जप करें।
- सूर्य के निमित्त रविवार का व्रत रखें।
- रविवार को नमक से परहेज करें।
- कम से कम 11 रविवार केवल दही और चावल का सेवन करें।
- रविवार को बहते जल में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।
- सूर्य के अशुभ होने पर व्यक्ति को अपने साथ तांबे का सिक्का रखना चाहिए।
- रविवार गाय को गुड़ खिलाना चाहिए।
- 21 रविवार श्री गणेश को रक्त पुष्प चढ़ाएं।
- सूर्य से संबंधित वस्तुएं दान या उपहार में ना लें।
- ज्योतिष परामर्शदाता से अपनी जन्म कुंडली दिखाकर भी सलाह-मशविरा अवश्य करें।
Wednesday, July 6, 2011
घर में यदि ऐसा हो तो महिलाएं अक्सर रहती हैं बीमार
जैसे-जैसे सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी हो रही है उसी तरह बीमारियों में भी बढ़ोतरी हो रही है। आज की लड़कियां या महिलाएं पुराने समय की महिलाओं की तुलना में अधिक अस्वस्थ रहती हैं। सही खान-पान और असंयमित दिनचर्या के चलते आज की महिलाएं अधिक बीमार रहती हैं। इन कारणों के अतिरिक्त वास्तु दोषों की वजह से भी स्त्रियों को इस प्रकार की कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वास्तु के अनुसार जिस घर का आगे का भाग टूटा हुआ हो या घर के सामने गंदगी रहती है तो उस की महिलाओं को कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां रहती हैं। घर के अंदर की दीवारों में दरार, टूट-फूट या अन्य कोई खराबी हो तो वहां भी इसी प्रकार की समस्याएं रहती हैं। इसके अलावा घर में फैली गंदगी, धूल या मकड़ी के जाले भी इसी तरह के वास्तु दोष पैदा करते हैं। इनसे बचने के लिए घर को पूरी तरह साफ-स्वच्छ बनाए रखना जरूरी है। अन्यथा वहां रहने वाली स्त्रियों को बीमारियों के अतिरिक्त अशांति और मानसिक तनाव झेलना पड़ सकता है।
वास्तु के अनुसार जिस घर का आगे का भाग टूटा हुआ हो या घर के सामने गंदगी रहती है तो उस की महिलाओं को कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां रहती हैं। घर के अंदर की दीवारों में दरार, टूट-फूट या अन्य कोई खराबी हो तो वहां भी इसी प्रकार की समस्याएं रहती हैं। इसके अलावा घर में फैली गंदगी, धूल या मकड़ी के जाले भी इसी तरह के वास्तु दोष पैदा करते हैं। इनसे बचने के लिए घर को पूरी तरह साफ-स्वच्छ बनाए रखना जरूरी है। अन्यथा वहां रहने वाली स्त्रियों को बीमारियों के अतिरिक्त अशांति और मानसिक तनाव झेलना पड़ सकता है।
कोर्ट केस में सफलता दिलाता है यह हनुमान मंत्र
मंत्रों में अद्भुत शक्तियां होती है। यह बात हम सभी जानते हैं। ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान मंत्र के माध्यम से संभव नहीं। समस्या कैसी भी हो यदि मंत्रों का विधि-विधान से जप किया जाए तो हर परेशानी का हल संभव है यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है और आप कोर्ट के चक्कर लगा-लगा कर थक चुके हैं तो नीचे लिखे मंत्र का विधि-विधान से जप करने से न सिर्फ आपके केस का निराकरण जल्दी होगा बल्कि फैसला भी आपके पक्ष में आएगा।
मंत्र
ऊँ पवन तनय बल पवन समाना।
बुद्धि विवेक बिग्यान निधाना।।
जप विधि
- सुबह जल्दी उठकर नहाकर साफ वस्त्र पहन कर भगवान हनुमान की पूजा करें। उन्हें सिंदूर चढ़ाएं।
- कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र की 5 माला जप करें। इसके बाद प्रतिदिन 1 माला जप करें।
- समय, आसन व माला एक होने से सफलता शीघ्र ही मिलती है।
- इस मंत्र के प्रभाव से आपकी समस्या का निराकरण कुछ ही समय में हो जाएगा।
मंत्र
ऊँ पवन तनय बल पवन समाना।
बुद्धि विवेक बिग्यान निधाना।।
जप विधि
- सुबह जल्दी उठकर नहाकर साफ वस्त्र पहन कर भगवान हनुमान की पूजा करें। उन्हें सिंदूर चढ़ाएं।
- कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र की 5 माला जप करें। इसके बाद प्रतिदिन 1 माला जप करें।
- समय, आसन व माला एक होने से सफलता शीघ्र ही मिलती है।
- इस मंत्र के प्रभाव से आपकी समस्या का निराकरण कुछ ही समय में हो जाएगा।
परिवार में प्यार बढ़ाने के अचूक उपाय
परिवार में प्यार बढ़ाने के अचूक उपाय
वर्तमान समय में जब लोग पारिवारिक सुख को भुलते जा रहे हैं आए दिन परिवार में क्लेश होता है। यह विवाद परिवार के किसी भी सदस्यों के बीच में हो सकता है। सास-बहू के बीच, पति-पत्नी के, भाई-भाई के बीच आदि। जब परिवार में रोज विवाद की स्थिति बनती है तो इंसान दूसरों काम भी ठीक से नहीं कर पाता। परिवार में प्रेम व सामंजस्य बढ़ाने के कुछ साधारण उपाय नीचे दिए गए हैं। इन्हें करने से परिवार के सदस्यों में प्रेम बढ़ता है।
उपाय
- किसी महिला का उसकी सास के साथ झगड़ा होता रहता हो तो वह स्त्री पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखे और फिर वह खीर अपनी सास को खिला दे। सास-बहू में बनने लगेगी।
- गृह क्लेश दूर करने के लिए गेहूं सदैव शनिवार को पीसवाएं तथा उसमें थोड़े चने अवश्य डालें।
- यदि किसी महिला का ससुर उससे नाराज रहता हो तो वह महिला प्रतिदिन जल में गुड़ मिलाकर सूर्यदेव को अध्र्य दे तो उसकी यह समस्या दूर हो जाती है।
- यदि किसी महिला का पति अधिक क्रोध करता हो तो उसे नीचे लिखे मंत्र का जप करना चाहिए। इससे पति का क्रोध शांत हो जाता है।
मंत्र- शान्तम् पापम्।
- जब भी घर में कोई मिठाई या अन्य कोई खाद्य पदार्थ आए तो सबसे पहले भगवान को उसका भोग लगाएं। इससे परिवार में प्रेम बढ़ता है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रहे इसके लिए विवाहिता स्त्री को प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए।
वर्तमान समय में जब लोग पारिवारिक सुख को भुलते जा रहे हैं आए दिन परिवार में क्लेश होता है। यह विवाद परिवार के किसी भी सदस्यों के बीच में हो सकता है। सास-बहू के बीच, पति-पत्नी के, भाई-भाई के बीच आदि। जब परिवार में रोज विवाद की स्थिति बनती है तो इंसान दूसरों काम भी ठीक से नहीं कर पाता। परिवार में प्रेम व सामंजस्य बढ़ाने के कुछ साधारण उपाय नीचे दिए गए हैं। इन्हें करने से परिवार के सदस्यों में प्रेम बढ़ता है।
उपाय
- किसी महिला का उसकी सास के साथ झगड़ा होता रहता हो तो वह स्त्री पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखे और फिर वह खीर अपनी सास को खिला दे। सास-बहू में बनने लगेगी।
- गृह क्लेश दूर करने के लिए गेहूं सदैव शनिवार को पीसवाएं तथा उसमें थोड़े चने अवश्य डालें।
- यदि किसी महिला का ससुर उससे नाराज रहता हो तो वह महिला प्रतिदिन जल में गुड़ मिलाकर सूर्यदेव को अध्र्य दे तो उसकी यह समस्या दूर हो जाती है।
- यदि किसी महिला का पति अधिक क्रोध करता हो तो उसे नीचे लिखे मंत्र का जप करना चाहिए। इससे पति का क्रोध शांत हो जाता है।
मंत्र- शान्तम् पापम्।
- जब भी घर में कोई मिठाई या अन्य कोई खाद्य पदार्थ आए तो सबसे पहले भगवान को उसका भोग लगाएं। इससे परिवार में प्रेम बढ़ता है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रहे इसके लिए विवाहिता स्त्री को प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए।
गुप्त नवरात्रिः इन उपायों से हर मनोकामना होगी पूरी
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (इस बार 2 जुलाई, शनिवार) से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है, जिसका समापन आषाढ़ शुक्ल दशमी (10 जुलाई, रविवार) को होगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में प्रमुख रूप से भगवान शंकर व देवी शक्ति की आराधना की जाती है। इनकी आराधना करने से गुप्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इन दिनों किए जाने वाले उपाय भी बहुत प्रभावशाली होते हैं, जिनके माध्यम से कोई भी मनोकामना पूर्ति कर सकता है। गुप्त नवरात्रि में किए जाने वाले कुछ उपाय इस प्रकार हैं-
1- यदि लड़की के विवाह में बाधा आ रही है तो गुप्त नवरात्रि में पडऩे वाले गुरुवार (इस बार 7 जुलाई) के दिन केले की जड़ थोड़ी काटकर ले आएँ और इसे पीले कपड़े में बांधकर लड़की के गले में बांध दें। शीघ्र ही विवाह हो जाएगा।
2- यदि आपके बच्चे को अक्सर नजर लगती है तो नवरात्रि में हनुमानजी के मंदिर में जाकर हनुमानचालीसा का पाठ करें और दाहिने पैर का सिंदूर बच्चे के मस्तक पर लगाएं। बच्चे को नजर नहीं लगेगी।
3- यदि नौकरी नहीं मिल रही है तो भैरवजी के मंदिर जाकर प्रार्थना करें व नैवेद्य चढ़ाएं। इससे नौकरी से संबंधित आपकी सभी समस्याएं हल हो जाएंगी।
4- शत्रुओं की संख्या बढ़ गई है और उनसे भय लगने लगा है तो नवरात्रि में प्रतिदिन भगवान नृसिंह के मंदिर में जाकर उनका दर्शन करें व पूजन करें।
5- धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी-नारायण के मंदिर में जाकर खीर व मिश्री का प्रसाद चढ़ाएं व शुक्रवार के दिन 9 वर्ष तक की कन्याओं को उनकी पसंद का भोजन कराएं। हो सके तो उन्हें कुछ उपहार भी दें।
6- पीपल के पत्ते पर राम लिखकर तथा कुछ मीठा रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। इससे भी धन लाभ होने लगेगा।
7- भगवान शंकर आरोग्य के देवता है। नवरात्रि में उन्हें प्रतिदिन सुबह एक लोटा जल चढ़ाएं और रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें। शीघ्र ही आपके स्वास्थ्य में लाभ होगा।
1- यदि लड़की के विवाह में बाधा आ रही है तो गुप्त नवरात्रि में पडऩे वाले गुरुवार (इस बार 7 जुलाई) के दिन केले की जड़ थोड़ी काटकर ले आएँ और इसे पीले कपड़े में बांधकर लड़की के गले में बांध दें। शीघ्र ही विवाह हो जाएगा।
2- यदि आपके बच्चे को अक्सर नजर लगती है तो नवरात्रि में हनुमानजी के मंदिर में जाकर हनुमानचालीसा का पाठ करें और दाहिने पैर का सिंदूर बच्चे के मस्तक पर लगाएं। बच्चे को नजर नहीं लगेगी।
3- यदि नौकरी नहीं मिल रही है तो भैरवजी के मंदिर जाकर प्रार्थना करें व नैवेद्य चढ़ाएं। इससे नौकरी से संबंधित आपकी सभी समस्याएं हल हो जाएंगी।
4- शत्रुओं की संख्या बढ़ गई है और उनसे भय लगने लगा है तो नवरात्रि में प्रतिदिन भगवान नृसिंह के मंदिर में जाकर उनका दर्शन करें व पूजन करें।
5- धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी-नारायण के मंदिर में जाकर खीर व मिश्री का प्रसाद चढ़ाएं व शुक्रवार के दिन 9 वर्ष तक की कन्याओं को उनकी पसंद का भोजन कराएं। हो सके तो उन्हें कुछ उपहार भी दें।
6- पीपल के पत्ते पर राम लिखकर तथा कुछ मीठा रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। इससे भी धन लाभ होने लगेगा।
7- भगवान शंकर आरोग्य के देवता है। नवरात्रि में उन्हें प्रतिदिन सुबह एक लोटा जल चढ़ाएं और रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें। शीघ्र ही आपके स्वास्थ्य में लाभ होगा।
इस मंत्र से जानें कब आएगी मौत!!
हिंदू धर्म में मंत्रों की अद्भुत महिमा बताई गई है। निश्चित क्रम में संगृहीत विशेष वर्ण जिनका विशेष प्रकार से उच्चारण करने पर एक निश्चित अर्थ निकलता है, मंत्र कहलाते हैं। मंत्र जप से उत्पन्न शब्द शक्ति संकल्प बल तथा श्रद्धा बल से और अधिक शक्तिशाली होकर अंतरिक्ष में व्याप्त ईश्वरीय चेतना के संपर्क में आती है जिसके फलस्वरूप मंत्र का चमत्कारिक प्रभाव साधक को सिद्धियों के रूप में मिलता है। मंत्र शास्त्र में कुछ ऐसे मंत्रों का भी वर्णन है जिनका जप करने से व्यक्ति यह जान सकता है कि उसके जीवन के कितने दिन शेष हैं।
मंत्र
ऊँ ऋतं सत्यं परब्रह्म पुरुषं कृष्णपिंगलम्।
उध्र्वलिंगं विरूपाक्षं विश्वरूपाय नमो नम:।।
जप विधि
इस मंत्र की 108 माला सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान करें। इसके बाद तीन दिन तक सोत समय तीन माला जप करें। जब इस मंत्र का ऋतं शब्द मुख से न निकले तो समझें छ: मास की आयु शेष है। जब सत्यं न निकले तो पांच मास, परब्रह्म न निकले तो चार मास, पुरुषं न निकले तो तीन मास, कृष्णपिंगलम् न निकले तो दो मास व उध्र्वलिंगं न निकल तो जातक की एक मास की आयु शेष रह जाती है।
इसके बाद विरूपाक्षम् शब्द न निकले तो पंद्रह दिन, विश्वरूपाय न निकले तो तीन दिन और नमोनम: शब्द का मुख से निकलना बंद हो जाए तो प्राणी की एक दिन के भीतर ही मृत्यु हो जाती है।
गुप्त नवरात्रि: सुखी दाम्पत्य जीवन के अचूक उपाय
पति-पत्नी एक गाड़ी के दो पहिए होते हैं। यानी एक-दूसरे के बिना वे अधूरे हैं। इसके बाद भी पति-पत्नी में विवाद होते रहते हैं। कई बार विवाद काफी बड़ भी जाते हैं। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि (2 से 9 जुलाई तक) में कुछ साधारण उपाय करने से दाम्पत्य जीवन में आ रही परेशानियों को दूर किया जा सकता है। ये उपाय इस प्रकार हैं-उपाय
1- यदि जीवनसाथी से अनबन होती रहती है तो गुप्त नवरात्रि में नीचे लिखे मंत्र को पढ़ते हुए 108 बार अग्नि में घी से आहुतियां दें। इससे यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा। अब नित्य सुबह उठकर पूजा के समय इस मंत्र को 21 बार पढ़ें। यदि संभव हो तो अपने जीवनसाथी से भी इस मंत्र का जप करने के लिए कहें-
सब नर करहिं परस्पर प्रीति।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।।
2- नवरात्रि में रोज शाम को भगवान लक्ष्मीनारायण के मंदिर में दर्शन के लिए जाएँ और वहां उन्हें बेसन के लड्डुओं को प्रसाद चढ़ाएं। इससे शीघ्र ही आप दोनों के मध्य वैचारिक सामंजस्य अच्छा रहने लगेगा।
3- रोज सुबह-शाम यदि घर में शंख बजाया जाए जाए अथवा गायत्री मंत्र का जप करें गृहक्लेश समाप्त हो जाता है।
4- कुंडली में स्थित राहु के कारण यदि दाम्पत्य जीवन में मतभेद हो रहे हो तो मां सरस्वती की पूजा करें। उन्हें नीले रंग का पुष्प अर्पित करें और सरस्वती चालीसा का पाठ करें।
5- यदि परिजनों के मध्य अशांति हो रही हो तो नवरात्रि में प्रतिदिन इस मंत्र को स्फटिक की माला से भगवान राम और माता सीता के सम्मुख 324(तीन माला) बार जपें। इसके बाद अंतिम नवरात्र को इस मंत्र का उच्चारण करते हुए 11 बार घी से अग्नि में आहुति प्रदान करें। भगवान को खीर का भोग लगाएं
मंत्र- जब ते राम ब्याहि घर आए।
नित नव मंगल मोद बधाए।।
Monday, June 27, 2011
सपने में सांई बाबा दर्शन दे तो समझ लें कि...
ज्योतिष के अनुसार सपनों में हमारे भविष्य से जुड़े कई रहस्य छुपे रहते हैं जिन्हें समझने की आवश्यकता होती है। सपने एक पहेली ही हैं जिनके उत्तर मिलने पर हम आने वाले कल में होने वाली घटनाओं की सही-सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पुराने समय से ही ऐसा माना जाता है कि देवी-देवता या कोई संत-महात्मा के दर्शनों से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान या सच्चे संत-महात्मा के दर्शन प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के पुण्य कर्म करना होते हैं। जो इंसान पूरी तरह से निष्पाप होता है उसे देवी-देवताओं के दर्शन अवश्य ही प्राप्त होते हैं। सांई बाबा भी उनके भक्तों के लिए सभी देवी-देवताओं के समान ही हैं।
किसी व्यक्ति के सपने में यदि सांई बाबा प्रसन्न मुद्रा में दिखाई दे तो समझना चाहिए कि आपके सभी रुके हुए कार्य पूर्ण हो जाएंगे और खुशियां प्राप्त होंगी। बुरा समय दूर हो जाएगा। वहीं यदि बाबा क्रोध में दिखाई दे तो इसका मतलब यह है कि आपके साथ कुछ बुरा होने वाला या आपसे कोई पाप हो गया है और इसकी वजह से आपको कोई संकट झेलना पड़ सकता है।
कपड़े सुखाने का भी है खास तरीका, जिससे प्रसन्न होती हैं महालक्ष्मी
कपड़े सुखाने का भी है खास तरीका, जिससे प्रसन्न होती हैं महालक्ष्मी
ज्योतिष में कपड़े सुखाने के संबंध में कई खास बातें बताई गई हैं जिन्हें अपनाने से हमारे घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। शास्त्रों के अनुसार नहाने के बाद गिले वस्त्र को ऊपर से उतारना चाहिए जब किसी नदी पर स्नान करने के बाद कपड़ों को ऊपर से नीचे की ओर उतारना चाहिए। भीगे हुए कपड़ों को चार परत करके निचोडऩा चाहिए। इसके बाद कपड़े सुखाते समय पूर्व से या उत्तर से दक्षिण की ओर सुखने के लिए फैलाना चाहिए। निचोड़े कपड़ों को कंधे पर नहीं रखना चाहिए। बिना कपड़ों के कभी स्नान न करें। इन उपायों को अपनाने से करने से धन की देवी महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और परिवार की आर्थिक समस्याओं को दूर करती हैं।
एक गिलास पानी से जगाएं अपना भाग्य
भाग्य या किस्मत ऐसे शब्द हैं जिन्हें हम सभी दिन में कई बार बोलते या सुनते हैं। काफी लोग अपनी असफलता का श्रेय भाग्य को देते हैं। यदि कर्म में मेहनत या ईमानदारी का अभाव हो तो निश्चित ही सफलता आपसे दूर ही रहती है लेकिन यदि कड़ी मेहनत और पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करने के बाद भी निराशा हाथ लगती है तो कुछ अन्य उपाय करना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति के कारण ही हमें परेशानियों और असफलताओं का सामना करना पड़ता है।
अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रहों का उचित उपचार करने पर उनके बुरे फलों में कमी आती है। जिससे काफी हद तक मेहनत के बल पर हम उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपको भी जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो ज्योतिष शास्त्र में बताया गया यह उपाय अपनाएं-
प्रतिदिन रात को सोते समय एक बर्तन में पानी भरकर अपने सिर के पास रखें। ब्रह्म मुहूर्त में उठें और वह पानी घर के बाहर फेंक दें। इसके साथ ही प्रतिदिन शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाएं। किसी के प्रति मन में ईष्र्या भाव न रखें और ना ही किसी को दुख पहुंचाएं। कार्य पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ करें। ऐसा करने पर कुछ ही समय में भाग्य आपका साथ देने लगेगा और आपका जीवन सुखी तथा समृद्धिशाली हो जाएगा।
हाथों में कड़ा पहनें, हमेशा बीमारियों से रहेंगे दूर
ज्योतिष में बीमारियों से बचने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति बार-बार बीमार होता है तो यह उपाय करें-
जो व्यक्ति बार-बार बीमार होता है उसके सीधे हाथ के नाप का कड़ा बनवाना है। कड़ा अष्टधातु का रहेगा। इसके लिए किसी भी मंगलवार को अष्टधातु का कड़ा बनवाएं। इसके बाद शनिवार को वह कड़ा लेकर आएं। शनिवार को ही किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर कड़े को बजरंग बली के चरणों में रख दें। अब हनुमान चालिसा का पाठ करें। इसके बार कड़े में हनुमानजी का थोड़ा सिंदूर लगाकर बीमार व्यक्ति स्वयं सीधे हाथ में पहन लें।
ध्यान रहे यह कड़ा हनुमानजी का आशीर्वाद स्वरूप है अत: अपनी पवित्रता पूरी तरह बनाए रखें। कोई भी अपवित्र कार्य कड़ा पहनकर न करें। अन्यथा कड़ा प्रभावहीन हो जाएगा।
कैसे बर्तन में खाना खाने से नहीं आती है गरीबी...
जीने के लिए सबसे जरूरी है खाना। भोजन के संबंध में ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। जिससे खाना शरीर को ऊर्जा तो प्रदान करता है साथ ही सभी देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त कराता है।
वास्तु के अनुसार खाना कैसे बर्तनों में खाना चाहिए? इस संबंध में खास बातें बताई गई हैं। भोजन हमेशा एकदम साफ बर्तनों में ही खाना चाहिए। बर्तन पर किसी भी प्रकार की धूल या गंदगी नहीं होना चाहिए। बर्तन कहीं से टूटे-फूटे न हो। यदि किसी बर्तन में कोई स्क्रेच जैसा निशान हो तो उसे भी खाने के उपयोग में नहीं लेना चाहिए। तांबे के बर्तन से पानी पीना बहुत फायदेमंद होता है। इस पानी से पेट संबंधी कई छोटी-छोटी मौसमी बीमारियां हमेशा दूर ही रहती हैं।
ऐसे बर्तन भी भोजन के उपयोग में नहीं लेना चाहिए जिन पर नकारात्मक दृश्य वाली डिजाइन हो। वास्तु के अनुसार ऐसे बर्तनों में खाना खाने से हमारे विचार नेगेटिव बनते हैं। जिसका हमारे कार्य पर बुरा असर पड़ता है। वहीं ज्योतिष के अनुसार इस प्रकार के बर्तनों में खाना खाने से दरिद्रता बढ़ती है और धन संबंधी परेशानियां झेलनी पड़ सकती है। इसी वजह से एकदम साफ और अच्छे बर्तनों में ही खाना चाहिए।
वास्तु के अनुसार खाना कैसे बर्तनों में खाना चाहिए? इस संबंध में खास बातें बताई गई हैं। भोजन हमेशा एकदम साफ बर्तनों में ही खाना चाहिए। बर्तन पर किसी भी प्रकार की धूल या गंदगी नहीं होना चाहिए। बर्तन कहीं से टूटे-फूटे न हो। यदि किसी बर्तन में कोई स्क्रेच जैसा निशान हो तो उसे भी खाने के उपयोग में नहीं लेना चाहिए। तांबे के बर्तन से पानी पीना बहुत फायदेमंद होता है। इस पानी से पेट संबंधी कई छोटी-छोटी मौसमी बीमारियां हमेशा दूर ही रहती हैं।
ऐसे बर्तन भी भोजन के उपयोग में नहीं लेना चाहिए जिन पर नकारात्मक दृश्य वाली डिजाइन हो। वास्तु के अनुसार ऐसे बर्तनों में खाना खाने से हमारे विचार नेगेटिव बनते हैं। जिसका हमारे कार्य पर बुरा असर पड़ता है। वहीं ज्योतिष के अनुसार इस प्रकार के बर्तनों में खाना खाने से दरिद्रता बढ़ती है और धन संबंधी परेशानियां झेलनी पड़ सकती है। इसी वजह से एकदम साफ और अच्छे बर्तनों में ही खाना चाहिए।
Friday, June 17, 2011
कुंडली में चंद्र और शनि एक साथ हो तो...
ज्योतिष एक ऐसा माध्यम है जिससे व्यक्ति के हर जन्म के कर्म और स्वभाव को जाना जा सकता है। ज्योतिष विज्ञान को आज लगभग सभी मानने लगे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र और शनि के योग के क्या फल हैं? जानिए...
- जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्र और शनि प्रथम भाव में हो वह व्यक्ति नौकरी करने वाला, क्रूर, लोभी, नीच, आलसी और पापी हो सकता है। ऐसा व्यक्ति विश्वासपात्र नहीं होता।
- किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र और शनि चतुर्थ भाव में हो तो वह व्यक्ति जल से संबंधित कार्य करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति खनिज पदार्थ का व्यवसाय करते हैं।
- कुंडली में चंद्र और शनि सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति किसी मंत्री का प्रिय होता है परंतु स्त्रियों से कष्ट प्राप्त करने वाला होता है।
- चंद्र और शनि किसी व्यक्ति की कुंडली में दशम भाव में हो तो व्यक्ति शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला, सुविख्यात और राजा के समान सुख प्राप्त करने वाला होता है।
ध्यान रहें अन्य सभी ग्रहों की स्थिति भी विचारणीय है।
बुरे प्रभाव से बचने के उपाय
- चंद्र से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
- शनि की वस्तुएं दान करें और दान या उपहार में चंद्र या शनि से संबंधित वस्तुएं कभी ना लें।
- हनुमान जी का पूजन करें। प्रति मंगलवार और शनिवार को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
- प्रतिदिन हनुमान चालिसा का पाठ करें।
- जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्र और शनि प्रथम भाव में हो वह व्यक्ति नौकरी करने वाला, क्रूर, लोभी, नीच, आलसी और पापी हो सकता है। ऐसा व्यक्ति विश्वासपात्र नहीं होता।
- किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र और शनि चतुर्थ भाव में हो तो वह व्यक्ति जल से संबंधित कार्य करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति खनिज पदार्थ का व्यवसाय करते हैं।
- कुंडली में चंद्र और शनि सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति किसी मंत्री का प्रिय होता है परंतु स्त्रियों से कष्ट प्राप्त करने वाला होता है।
- चंद्र और शनि किसी व्यक्ति की कुंडली में दशम भाव में हो तो व्यक्ति शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला, सुविख्यात और राजा के समान सुख प्राप्त करने वाला होता है।
ध्यान रहें अन्य सभी ग्रहों की स्थिति भी विचारणीय है।
बुरे प्रभाव से बचने के उपाय
- चंद्र से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
- शनि की वस्तुएं दान करें और दान या उपहार में चंद्र या शनि से संबंधित वस्तुएं कभी ना लें।
- हनुमान जी का पूजन करें। प्रति मंगलवार और शनिवार को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
- प्रतिदिन हनुमान चालिसा का पाठ करें।
शिवलिंग पर चढ़ाएं कच्चा दूध, जो चाहोगे वही मिलेगा
शिव महापुराण के अनुसार सृष्टि निर्माण से पहले केवल शिवजी का ही अस्तित्व बताया गया है। भगवान शंकर ही वह शक्ति है जिसका न आदि है न अंत। इसका मतलब यही है कि शिवजी सृष्टि के निर्माण से पहले से हैं और प्रलय के बाद भी केवल महादेव का ही अस्तित्व रहेगा। अत: इनकी भक्ति मात्र से ही मनुष्य को सभी सुख, धन, मान-सम्मान आदि प्राप्त हो जाता है।शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर को भोलेनाथ कहा गया है अर्थात् शिवजी अपने भक्तों की आस्था और श्रद्धा से बहुत ही जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। शिवजी के प्रसन्न होने के अर्थ यही है कि भक्त को सभी मनोवांछित फलों की प्राप्ति हो जाती है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के कई उपाय बताए गए हैं। इनकी पूजा, अर्चना, आरती करना श्रेष्ठ मार्ग हैं। प्रतिदिन विधिविधान से शिवलिंग का पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
शिवजी को जल्द ही प्रसन्न के लिए शिवलिंग पर प्रतिदिन कच्चा गाय का दूध अर्पित करें। गाय को माता माना गया है अत: गौमाता का दूध पवित्र और पूजनीय है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से महादेव श्रद्धालु की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
दूध की प्रकृति शीतलता प्रदान करने वाली होती है और शिवजी को ऐसी वस्तुएं अतिप्रिय हैं जो उन्हें शीतलता प्रदान करती हैं। इसके अलावा ज्योतिष में दूध चंद्र ग्रह से संबंधित माना गया है। चंद्र से संबंधित सभी दोषों को दूर करने के लिए प्रति सोमवार को शिवजी को दूध अर्पित करना चाहिए। मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए यह भी जरूरी है कि आपका आचरण पूरी तरह धार्मिक हो। ऐसा होने पर आपकी सभी मनोकामनाएं बहुत ही जल्द पूर्ण हो जाएंगी।
घर में जूते-चप्पल कहां और कैसे रखें?
परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि घर में पूरी तरह साफ-सफाई रहे, गंदगी न हो, धुल-मिट्टी न हो। गंदगी के कारण हमारे स्वास्थ्य को तो नुकसान है साथ ही इससे हमारी आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में गंदगी रहती है वहां कई प्रकार की आर्थिक हानि होती हैं और हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है। जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं तब हमारे जूते-चप्पलों में गंदगी लग जाती है जिसे लेकर हम घर आ जाते हैं। काफी लोग घर में जूते-चप्पल पहनते हैं जबकि शास्त्रों के अनुसार घर में नंगे पैर ही रहना चाहिए क्योंकि घर में कई स्थान देवी-देवताओं से संबंधित होते हैं उनके आसपास जूते-चप्पल लेकर जाना शुभ नहीं माना जाता है।
जूते-चप्पल घर के बाहर या घर के अंदर ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां से गंदगी पूरे घर में न फैले। घर के बाहर भी जूते-चप्पलों को व्यवस्थित ढंग से ही रखा जाना चाहिए। बेतरतीब रखे गए जूते-चप्पल वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं। अत: इससे बचना चाहिए। यदि घर में चप्पल पहनना ही पड़े तो घर के अंदर की चप्पल दूसरी रखें, जिसे बाहर पहनकर न जाएं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में गंदगी रहती है वहां कई प्रकार की आर्थिक हानि होती हैं और हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है। जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं तब हमारे जूते-चप्पलों में गंदगी लग जाती है जिसे लेकर हम घर आ जाते हैं। काफी लोग घर में जूते-चप्पल पहनते हैं जबकि शास्त्रों के अनुसार घर में नंगे पैर ही रहना चाहिए क्योंकि घर में कई स्थान देवी-देवताओं से संबंधित होते हैं उनके आसपास जूते-चप्पल लेकर जाना शुभ नहीं माना जाता है।
जूते-चप्पल घर के बाहर या घर के अंदर ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां से गंदगी पूरे घर में न फैले। घर के बाहर भी जूते-चप्पलों को व्यवस्थित ढंग से ही रखा जाना चाहिए। बेतरतीब रखे गए जूते-चप्पल वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं। अत: इससे बचना चाहिए। यदि घर में चप्पल पहनना ही पड़े तो घर के अंदर की चप्पल दूसरी रखें, जिसे बाहर पहनकर न जाएं।
घर के मंदिर कितनी बड़ी भगवान की मूर्तियां रखें?
प्रतिदिन सुबह-सुबह भगवान की प्रतिमा या चित्र के दर्शन से हमारा पूरा दिन खुशियोंभरा और सुख के साथ बीतता है। इसके साथ ही भगवान की पूजा से हमारे कई जन्मों के पाप स्वत: नष्ट हो जाते हैं और पुण्यों की वृद्धि होती है। सभी के घरों में भगवान के लिए अलग स्थान बनाया जाता है। कहीं-कहीं छोटे-छोटे मंदिर बने होते हैं। घर के मंदिरों के संबंध वास्तु कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं।पूजा घर घर का सबसे पवित्र स्थान होता है। वास्तु के अनुसार यदि पूजा घर का वास्तु ठीक हो तो घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। पूजा घर में कुछ बातों का ध्यान रखकर आप घर की परेशानियों को दूर सकते हैं। आजकल भिन्न-भिन्न प्रकार की धातुओं से मंदिर बनाए जाते हैं लेकिन घर में शुभता की दृष्टि से मंदिर लकड़ी, पत्थर और संगमरमर का होना चाहिए।
वास्तु के अनुसार, घर में पूजा के लिए अंगूठे के आकार की प्रतिमाएं श्रेष्ठ मानी गई हैं। इससे बड़ी मूर्तियों की पूजा घर में नहीं की जानी चाहिए। ज्यादा बड़ी मूर्तियों की पूजा केवल मंदिरों में ही श्रेष्ठ मानी जाती है। घर में पीतल, अष्ठधातु की भी बड़े आकार की मूर्ति नहीं होनी चाहिए।
Monday, June 13, 2011
नौकरी से सम्बंधित उपाय
नौकरी से सम्बंधित उपाय
नौकरी प्राप्त करने एंव तबदीली हेतु उपाय
यदि किसी की नौकरी नहीं लगती तो ४३ दिन लगातार १२ बजे चीनी व लाल फूल डालकर सूर्य को जल दें।
जिस व्यक्ति की बार-बार तबदीली होती है तो उसे १० पीले नींबू बिना दाग वाले साफ चलते पानी में प्रवाहित करें।
तबदीली को रूकवाने के लिए जातक को सवा चार रत्ती का लहसुनिया चांदी की चैन में धारण करने बार-बार होने वाली तबदीली रूक जाती है।(बृहस्पतिवार के दिन सूर्योदय होने के पश्चात् उपाय करें)
पलाश (ढ़ाक) के पत्तों का डोना लाकर उसमें लाल गुलाब के फूल की पत्तियां डालकर शाम के समय जल प्रवाह करें।
यदि आप नौकरी के लिए इन्टरव्यु पर जाते हैं या कारोबार के सिलसिले में यात्रा पर जाते हैं तो घर से निकालने से पहले थोड़ा सा मीठा खाकर निकलें और साथ में आधा लीटर दूध मन्दिर में रखकर जाने से किसी भी कार्य में विध्न-बाधाएं नहीं आयेंगी।
नौकरी प्राप्त करने एंव तबदीली हेतु उपाय
यदि किसी की नौकरी नहीं लगती तो ४३ दिन लगातार १२ बजे चीनी व लाल फूल डालकर सूर्य को जल दें।
जिस व्यक्ति की बार-बार तबदीली होती है तो उसे १० पीले नींबू बिना दाग वाले साफ चलते पानी में प्रवाहित करें।
तबदीली को रूकवाने के लिए जातक को सवा चार रत्ती का लहसुनिया चांदी की चैन में धारण करने बार-बार होने वाली तबदीली रूक जाती है।(बृहस्पतिवार के दिन सूर्योदय होने के पश्चात् उपाय करें)
पलाश (ढ़ाक) के पत्तों का डोना लाकर उसमें लाल गुलाब के फूल की पत्तियां डालकर शाम के समय जल प्रवाह करें।
यदि आप नौकरी के लिए इन्टरव्यु पर जाते हैं या कारोबार के सिलसिले में यात्रा पर जाते हैं तो घर से निकालने से पहले थोड़ा सा मीठा खाकर निकलें और साथ में आधा लीटर दूध मन्दिर में रखकर जाने से किसी भी कार्य में विध्न-बाधाएं नहीं आयेंगी।
Friday, June 10, 2011
कर्ज से छुटकारा पाना है तो यह करें
ऋणहर्ता गणेश मंत्र
ऊँ श्री गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नम: फट्
जप विधि
- सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करके भगवान गणेश का पूजन करें। उन्हें दुर्वा चढ़ाएं, धूप, दीप व नैवेद्य अर्पण करें।
- इसके बाद एकांत स्थान पर बैठकर पूर्व दिशा में मुखकर कुश के आसन पर बैठ जाएं।
- रुद्राक्ष अथवा पन्ना की माला से इस मंत्र का कम से कम 5 माला जप करें।
- एक ही समय, स्थान, आसन व माला हो तो ठीक रहता है।
कुछ ही दिनों में आपकी कर्ज संबंधी समस्याएं दूर हो जाएंगी और आपका जीवन फिर पहले जैसा सुखमय हो जाएगा।
रतिक्रिया: रात्रि का प्रथम प्रहर ही श्रेष्ठ क्यों?
सनातन धर्म में रतिक्रिया के संबंध में भी कई आवश्यक निर्देश दिए हैं। विवाह उपरांत रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना गया है। रतिक्रिया के माध्यम से ही संतान की उत्पत्ति होती है।
आपकी संतान कैसी होगी? यह रतिक्रिया का समय निर्धारित करता है। इस संबंध में धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि रात्रि का प्रथम प्रहर रतिक्रिया के लिए सर्वश्रेष्ठ है। ऐसा माना जाता है कि रात्रि के प्रथम पहर में कि गई रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली संतान को शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह संतान पूर्णत: धार्मिक, माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाली, भाग्यवान, दीर्घायु होती है।
मान्यता है कि प्रथम प्रहर के पश्चात राक्षस गण पृथ्वी भ्रमण पर निकलते हैं और उस दौरान की गई रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली संतान राक्षसों के समान ही गुण वाली होती है। वे संतान अति कामी, बुरे
गुणों वाली, माता-पिता का अनादर करने वाली, भाग्यहीन और बुरे व्यसनों में फंसने वाली होती हैं।
रात्रि का प्रथम प्रहर रात 12 बजे तक माना जाता है। वैदिक धर्म के अनुसार इसी समय को रतिक्रिया के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त किसी अन्य समय में रतिक्रिया करने वाले युगल कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक दुख भोगते हैं। रात्रि 12 बजे के बाद रतिक्रिया करने से कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं। जैसे अनिंद्रा, मानसिक तनाव, थकान अन्य शारीरिक बीमारियां आदि। साथ ही उन्हें देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त नहीं होती।
आपकी संतान कैसी होगी? यह रतिक्रिया का समय निर्धारित करता है। इस संबंध में धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि रात्रि का प्रथम प्रहर रतिक्रिया के लिए सर्वश्रेष्ठ है। ऐसा माना जाता है कि रात्रि के प्रथम पहर में कि गई रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली संतान को शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह संतान पूर्णत: धार्मिक, माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वाली, भाग्यवान, दीर्घायु होती है।
मान्यता है कि प्रथम प्रहर के पश्चात राक्षस गण पृथ्वी भ्रमण पर निकलते हैं और उस दौरान की गई रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली संतान राक्षसों के समान ही गुण वाली होती है। वे संतान अति कामी, बुरे
रात्रि का प्रथम प्रहर रात 12 बजे तक माना जाता है। वैदिक धर्म के अनुसार इसी समय को रतिक्रिया के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त किसी अन्य समय में रतिक्रिया करने वाले युगल कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आर्थिक दुख भोगते हैं। रात्रि 12 बजे के बाद रतिक्रिया करने से कई प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं। जैसे अनिंद्रा, मानसिक तनाव, थकान अन्य शारीरिक बीमारियां आदि। साथ ही उन्हें देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त नहीं होती।
घर पर झंडा लगाने से बढ़ता है सुख क्योंकि...
तु के अनुसार भी झंडे को शुभता का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि घर पर ध्वजा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश तो होता ही है साथ ही घर को बुरी नजर भी नहीं लगती है। लेकिन घर के उत्तर-पश्चिम कोने में यदि ध्वजा लगाई जाती है तो उसे वास्तु के दृष्टिकोण से बहुत अधिक शुभ माना जाता है।
वायव्य कोण यानी उत्तर पश्चिम में झंडा या ध्वजा वास्तु के अनुसार जरूर लगाना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उत्तर-पश्चिम कोण यानी वायव्य कोण में राहु का निवास माना गया है। ज्योतिष के अनुसार राहु को रोग, शोक व दोष का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि घर के इस कोने में किसी भी तरह का वास्तुदोष हो या ना भी हो तब भी ध्वजा या झंडा लगाने से घर में रहने वाले सदस्यों के रोग, शोक व दोष का नाश होता है और घर की सुख व समृद्धि बढ़ती है।
चंद्र ग्रहण 15 को : व्यवसाय और नौकरी को नुकसान से बचाने के उपाय
- अगर आप चांदी का बिजनेस करने वाले, मनोचिकित्सक, पानी से संबंधित व्यवसायी या उद्योग वाले, ट्रेवल एजेंट, प्लास्टिक व्यापारी, फूड प्रोडक्टस वाले, स्त्री रोग विशेषज्ञ, चावल, धान के व्यापारी है तो आपको इस ग्रहण पर शिवलिंग का गाय के कच्चे दूध से अभिषेक करना चाहिए।
- प्रॅापर्टीज ब्रोकर, जेन्टस और लेडिस ब्यूटी पार्लर, वकील, कूक, ब्लड बैंक में काम करने वाले, सर्जन, धारदार वस्तुएं और हथियार बनाने वाले ग्रहण पर्व पर हनुमान मंदिर में तेल दीपक लगाएं।
- बीमा ऐजेन्ट, एकाउंटेंट, दलाल, कमीशन ऐजेन्ट, लेखक, प्रकाशक, अध्यापक, इंजीनियर, कोरियर सर्विस, बैंक कर्मचारीयों को इस ग्रहण पर गाय को हरी घास खिलाएं।
- बैंक, शिक्षा से जुड़ें लोग, जज, ज्योतिषी, धर्म शिक्षक, कंसल्टेंट्स, मैनेजमेंट का काम करने वाले लोग किसी मंदिर में पीले कपड़े में चने की दाल का दान दें।
- इलेक्ट्रॉनिक्स का काम करने वाले, फिल्म, टी.वी., नाटक और मनोरंजन के क्षेत्र से जुड़े लोग, फोटोग्राफर, विज्ञापन एजेन्सीज, ब्यूटी पार्लर, माडलिंग, फैशन व्यापार, फूलों के व्यापारी, आर्किटेक्ट, इत्र एवं सुगन्धित द्रव्य, सौंदर्य प्रसाधन के व्यवसायी या उद्योगपति आदि लोगों को मंदिर में सफेद कपड़े में चावल के साथ रूई और घी का दान देना चाहिए।
- रबर उद्योग, डेंटिस्ट, सफाई से सम्बंधित कार्य करने वाले, खेती के उपकरण बेचने वाले, पेट्रोलियम पदार्थों के व्यापारी, खनिज इंजीनियर, लेबर के ठेकेदार, धातु, खाद्य तेल आदि वस्तुओं के व्यवसायियों को हनुमान मंदिर, शनि देव या भैरव मंदिर में तेल का दीपक लगाना चाहिए।
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